Wednesday 4 December 2019

नव योगेंद्र स्वामी ने दिया धर्म और संस्कृति पर व्याख्यान


नहीं भूलनी चाहिए  अपनी संस्कृति


विश्वविद्यालय के प्रो राजेंद्र सिंह रज्जू भइया  भौतिकीय  विज्ञान अध्ययन एवं शोध संस्थान के आर्यभट्ट सभागार में मंगलवार की देर शाम इस्कॉन के वर्तमान आचार्य ऊधमपुर, जम्मू कश्मीर के परम पूज्य नव योगेंद्र स्वामी जी महाराज ने विश्वविद्यालय के शिक्षक , विद्यार्थियों और कर्मचारियों के बीच धर्म और संस्कृति पर अपना विशेष व्याख्यान दिया ।उन्होंने कहा कि भारत धर्म सापेक्ष था मगर राजनीतिज्ञों ने इसे धर्मनिरपेक्ष बना दिया। उन्होंने कहा कि धर्म से ही देश और वहां की  संस्कृति का विकास होता है। धर्म (नियमों) का पालन करने वाला मानव सच में भगवान का असली भक्त होता है। उन्होंने कहा जीवन में चार चीज सभी जीव करते हैं आहार, निद्रा, भय, मैथुन। मनुष्य  धर्म  नियमों का पालन करता है और पशु नहीं। उन्होंने विश्व के कई देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां धर्म और संस्कृति ना होने के कारण मानव पशु जैसा जीवन व्यतीत कर रहा है।स्वामी जी ने कहा कि मानव को कभी अपनी संस्कृति को नहीं भूलना चाहिए । हमारे देश पर सैकड़ों वर्षों तक मुगलों और अंग्रेजों ने शासन किया। उन्होंने  हमारे सभी मूल्यों पर आघात किया लेकिन हमारी संस्कृति ने इस देश को टूटने नहीं दिया और उनको वापस जाना पड़ा। उन्होंने अमेरिका, इंग्लैंड ,अफ्रीका और वेस्टइंडीज का उदाहरण देते हुए कहा कि यहां के लोग भी अब भगवान को मानने लगे हैं और वह शराब, मांस , मछली तो दूर लहसुन, प्याज जैसी तामसिक चीजों को छोड़कर वैष्णव हो रहे हैं। यही धर्म मानव को नर्क से बचाएगा उन्होंने कहा कि मनुष्य का जीवन इंद्रियों के तर्पण के लिए नहीं मिला है। व्यक्ति का कर्म उसके साथ आता है और उसी के साथ जाता है। स्वामी जी ने कहा शरीर का सुख भोगने वाले के लिए बार-बार मृत्यु और जन्म का कोई मतलब नहीं है। जो भोग में लग जाते हैं वही रोग की चपेट में आ जाते हैं। इस दौरान वहां उपस्थित लोगों ने धर्म, ईश्वर और संस्कृति से जुड़े कई सवालों को पूछकर अपनी जिज्ञासा शांत की।
स्वामी जी ने वहां उपस्थित शिक्षकों को श्रीमद्भागवत गीता  भेंट की और प्रतिदिन सभी से एक श्लोक पढ़ने को कहा। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ राजाराम यादव ने कहा कि  स्वामी जी का लगाव विश्वविद्यालय , विद्यार्थी और शिक्षकों के साथ हमेशा रहा है। मुझे काफी लंबे समय की प्रतीक्षा के बाद ऐसे आध्यात्मिक शिखर पुरुष को इस विश्वविद्यालय में बुलाने का अवसर मिला। मैं विश्वविद्यालय परिवार के बीच नैतिक और अध्यात्मिक संचार को  मुखरित होते देखना चाहता हूँ। । उन्होंने कहा कि स्वामी जी सिद्ध संत हैं उनके मुंह से निकला शब्द कुछ दिन बाद ही जीवन में चरितार्थ होने लगता है। उन्होंने सभागार में उपस्थित शिक्षकों से सीधा संवाद किया एवं उनकी जिज्ञासाओं को शांत किया। समारोह का संचालन डॉ मनोज मिश्र और धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर बीबी तिवारी ने किया। इस अवसर कुलसचिव सुजीत कुमार जायसवाल, वित्त अधिकारी एमके सिंह, प्रो विलासराव तभाने, प्रो. अशोक  श्रीवास्तव, प्रो,अजय प्रताप सिंह, प्रो.वंदना राय, प्रो अविनाश पाथर्डीकर, प्रो.रामनारायण, डॉ.राजकुमार, डॉ.संतोष कुमार, डॉ.दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ. सुनील कुमार, डॉक्टर सचिन अग्रवाल, डॉ.अवध बिहारी सिंह, डॉ मनीष गुप्ता, डॉ. गिरधर मिश्र, डॉ. पुनीत धवन , डॉ. जान्हवी श्रीवास्तव, अनु त्यागी, डॉ मनोज पांडेय आदि उपस्थित थे।


Tuesday 3 December 2019

नये भारत की नई तस्वीर बनाने में युवा आगे आएं- राज्यपाल

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर के महंत अवैद्यनाथ संगोष्ठी भवन में मंगलवार को विश्वविद्यालय के 23वें दीक्षान्त में 65 मेधावियों को स्वर्ण पदक मिला स्नातक में 16 और परास्नातक के 49 मेधावियों को राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल के हाथों स्वर्ण पदक दिया गया।
समारोह में मुुुख्य अतिथि  इस्कॉन मंदिर, श्रील प्रभुपाद आश्रम  जम्मू- कश्मीर  के परम पूज्य श्री नव योगेन्द्र स्वामी जी महाराज ने कहा कि विश्वविद्यालय के मंत्र वाक्य तेजस्विनावधीतमस्तु वेद से लिया गया है। इसके अर्थ में पूरे शिक्षा का सार छिपा है, इसमें कहा गया है कि हमारा ज्ञान तेजस्वी है परमेश्वर शिष्य, आचार्य दोनों की साथ-साथ रक्षा करें। हम दोनों को साथ-साथ विद्या के फल का भोग करायें, हम दोनों एक साथ मिलकर विद्या प्राप्ति का सामथ्र्य प्राप्त करें। हम सभी परस्पर द्वेष न करें। उन्होंने श्रीमद्भगवतगीता को मानव जीवन से जोड़ते हुए उनकी चार मुख्य समस्याएं जन्म, मृत्यु, जरा, व्याधि में दुख दोषों के दर्शन कराते हुए कहा कि इन्ही चार समस्याओं के समाधान के लिए मानव जीवन मिला है। उन्हांेने कहा कि भौतिक समस्याओं का समाधान भौतिक हो ही नहीं सकता,  इसका समाधान आध्यात्मिक है। विश्व के बड़े-बड़े वैज्ञानिक पिछले 100  वर्षों से  मानव चेतना की उत्पत्ति को समझने में असफल रहे। हमारे एक शिष्य अमेरिका के येल विश्वविद्यालय में पिछले 13 वर्षों से इस विषय पर शोध कर रहे हैं,  वे बताते हैं कि अब दुनिया के अग्रणी वैज्ञानिक चेतना की उत्पति का आध्यात्मिक सिद्धांत देने के बारे में सोच रहे हैं जो कि भौतिक नहीं आध्यात्मिक है। यह अध्यात्मिक सिद्धांत भगवान कृष्ण द्वारा भगवदगीता में दिए गए आत्मा (जीव की चेतना) का सिद्धांत ही हैं।
उन्हांेने कहा कि हमारी शिक्षा पद्धति  मानव जीवन के चार पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के बारे में बताती है, परंतु आज का व्यक्ति धर्म, अर्थ  तथा काम  में ही फंस कर रह गया है। चैतन्य महाप्रभु,  जो स्वयं भगवान श्रीकृष्ण हैं, ने  पंचम पुरुषार्थ के बारे में हमें बताया जो कि भगवत प्रेम है और यही  कृष्ण प्रेम  मानव जीवन का उद्देश्य है। हमें किसी भी प्रकार से अपने मन को भगवान के चरणों में लगाना है तभी हम भगवान कृष्ण का प्रेम प्राप्त कर सकते हैं और अपने अस्थाई घर भगवत धाम को जा सकते हैं। इस प्रकार हम जन्म-मृत्यु के बंधन से छुटकारा प्राप्त कर  हम अपने मानव जीवन को सफल कर सकते हैं।
 दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए  कुलाधिपति एवं राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने कहा कि  शिक्षा ऐसी हो जो हमें आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ राष्ट्रीय भावना भी पैदा करें । देश, समाज के प्रति चुनौतियों का सामना युवाओं को ही करना होगा, तभी हम नए भारत की नई तस्वीर बनाने में सक्षम होंगे।
उन्होंने कहा कि देश को टीबी जैसी गंभीर बीमारी से मुक्त कराने की चिंता हर नागरिक की है । पूरा विश्व 2030 तक टीवी मुक्त होने का संकल्प ले रहा है , लेकिन हमारे देश ने इसे 2025 तक खत्म करने का बीड़ा उठाया है। उन्होंने कहा कि  टीबी मरीजों और कुपोषित बच्चों को गोद लेकर हम इससे मुक्ति पा सकते हैं। बाल- विवाह और दहेज उन्मूलन के लिए  छात्र-छात्राओं  से आगे आने को कहा। उन्होंने कहा जब घर में दहेज की मांग शुरू हो तभी लड़कियों को बगावत करनी चाहिए, ताकि उन्हें पूरी जिंदगी इस समस्या से जूझना न पड़े।
बेरोजगारी पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कौशल विकास के जरिए हम देश का सामाजिक और आर्थिक विकास कर सकते हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय में पढ़ने वाली छात्राओं के हीमोग्लोबिन का टेस्ट कराने को कहा है, जिस बच्चे में इसकी कमी हो उसे पूरा करने के लिए उनके माता-पिता को बुलाकर सलाह देनी चाहिए ताकि देश कुपोषण से मुक्त हो सके।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0डाॅ0 राजाराम यादव ने अपने संबोधन में विश्वविद्यालय की उपलब्धिया गिनायीं। उन्हांेने कहा कि उपाधि अर्जित करने वाले विद्यार्थियों ने अपने गुरूजनों, अभिभावकों एवं विश्वविद्यालय का सम्मान बढ़ाया है। उन्हांेेने विद्यार्थियों के लिए कहा कि राष्ट्र के उन्नयन हेतु भविष्य में सब उत्तरदायित्व अपने कन्धों पर लें। और यह सदैव याद रखे की वे भाग्य निर्माता है। अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि माननीय कुलाधिपति जी के प्रेरणादायी, भौतिक एवं व्यवहारिक निर्देशन ने प्रदेश के विश्वविद्यालयीय उच्च शिक्षा में सकारात्मक परिवर्तन की संभावनाओं के साथ नई सोच, नई दिशा तथा नवचेतना को पुनः जागृत किया है। आपकी जनचेतना से जुड़ी हुई संवेदनशीलता एवं पूरे प्रदेश की उच्च शिक्षा को राष्ट्रीय एवं अन्तराष्ट्रीय धारा में लाने की कटिबद्धता से शिक्षा जगत आश्वस्त हुआ है। उन्होंने अध्यात्मिक शिखर पुरूष परम पूज्य श्री नव योगेन्द्र स्वामी जी महाराज का स्वागत करते हुए कहा कि आपका विश्वविद्यालय छात्रों एवं गुरूजनों से आत्मीय विशेष लगाव है, आपका आशीर्वाद ही हमारे प्रिय छात्रों कांे ऊचाइयों तक सहज में पहंुचा देगा। समारोह का संचालन पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष डा0 मनोज मिश्र ने किया।
इस अवसर पर पूर्व राज्यपाल श्री माता प्रसाद, कुलसचिव सुजीत कुमार जायसवाल, वित्तअधिकारी एम0के0 सिंह,परीक्षा नियंत्रक व्यास नारायन सिंह, प्रो0 बी0बी0 तिवारी, प्रो0 मानस पाण्डेय,पो0 रामनारायण, प्रो0 अविनाश पाथर्डिकर, विधायक लीना तिवारी,सीमा द्विवेदी,सुरेन्द्र प्रताप सिंह,शतरूद्र प्रताप सिंह,अशोक सिंह,सुरेन्द्र त्रिपाठी,समेत विश्व विद्यालय के कार्यपरिषद,विद्यापरिषद,आदि समितियों के सदस्य उपस्थित रहे।
                   
64 मेधावियों को मिला स्वर्ण पदक 

जौनपुर। 23वें दीक्षान्त समारोह में प्रथम प्रयास में स्नातक कक्षा में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले 16 मेधावियों को स्वर्ण पदक मिला, जिसमें 10 छात्राएं व 6 छात्र शामिल रहे। बी.टेक. मैकेनिकल में अबूफजल, बी.टेक. इलेक्ट्रानिक्स एण्ड इन्स्ट्रूमेंटेशन में रवि पटेल, बी.टेक. इलेक्ट्रिकल, मान्डवी जायसवाल, बी.टेक. इलेक्ट्रानिक्स एण्ड कम्युनिकेशन में रूपम यादव, बी.टेक. इनफारमेशन टेक्नालाॅजी में अंजली गुप्ता, बी.टेक. कम्प्यूटर साइंस में पूजा शर्मा, बी.फार्मा में चित्रा गंगवार, बी.ए. में शिवांगी सिंह, बी.एस-सी. में सूर्य प्रकाश पाल, बी.काम. में शिवांगी सिंह, बी.एस-सी. (कृषि) में समृद्धि सिंह, बी.पी.ई. में त्रिभुवन चैहान, बी.एड में अनुराग दूबे, एल एल. बी. में हृतिका श्रीवास्तव, बी.सी.ए. में आदर्श पाल एवं बी.बी.ए. में नेहा वर्मा को गोल्ड मेडल मिला।
प्रथम प्रयास में स्नातकोत्तर कक्षा में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले 49 मेधावियों को स्वर्ण पदक मिला जिसमें 31 छात्राएं व 18 छात्र शामिल रहे। इस बार अतुल माहेश्वरी स्वर्ण पदक की शुरूआत हुई है। जनसंचार विषय मे सर्वोच्च अंक पाने पर आशुतोष त्रिपाठी, को यह पदक मिला।
एम.सी.ए. में विजय कुमार गौड़, एम.बी.ए. ई-कामर्स में रोहित सिंह, एम.बी.ए. में पारूल पाण्डेय, एम.बी.ए. एग्री-बिजनेस में अंकित सिंह, एम.बी.ए. बिजनेस इकोनामिक्स में शिवानी पाण्डेय, एम.बी.ए. फाइनेन्स एण्ड कन्ट्रोल में लक्ष्मी मौर्या, एम.बी.ए. एच.आर.डी. में अदीबा अनवर, एम.एस-सी. बायोकेमेस्ट्री में रंजीत कुमार विश्वकर्मा, एम.एस-सी. माईक्रोबायोलाॅजी में अजीजा नेयाज, एम.एस-सी. बायोटेक्नोलाॅजी में जूही शर्मा, एम.एस-सी. पर्यावरण विज्ञान में अंकिता कुशवाहा, एम.ए. व्यावहारिक मनोविज्ञान में प्रज्ञा सिंह, एम.ए. मास कम्यूनिकेशन में आशुतोष त्रिपाठी, प्राचीन इतिहास में आशुतोष कुमार, सैन्य विज्ञान में सौरभ दूबे, अर्थशास्त्र में शिवानी सिंह, शिक्षाशास्त्र में श्रद्धा दूबे अंगे्रजी में अदनान खान, भूगोल में शिवांगी सिंह, हिन्दी में कु0 ज्योति मिश्रा एवं  साजिदा बानो  गृह विज्ञान फूड न्यूट्रिशन में निधि सिंह, गृह विज्ञान ह्यूमन डेवलपमेन्ट में बीना त्रिगुनाइत, मध्यकालीन इतिहास में ऋचा पाण्डेय, संगीत गायन में प्रियंका सिंह, दर्शनशास्त्र में श्वेता सिंह, राजनीति शास्त्र में कु0 प्रियंका मोदनवाल, संस्कृत में कु0 हेमलता विश्वकर्मा, समाजशास्त्र में राम चन्द्र यादव, उर्दू में उज़्मा खातून, मनोविज्ञान में लक्ष्मी, एम.एड में प्रमोद कुमार, एम.काम में प्राची गर्ग, वनस्पति विज्ञान में प्रिया सिंह, रसायन विज्ञान में राहत फिरदौस, गणित में शिप्रा सिंह, भौतिक विज्ञान में पूजा मिश्र, जन्तु विज्ञान में कु0 सन्ध्या सिंह,  एम.एस-सी. कृषि एग्रीकल्चरल इकोनामिक्स में निधि कुमारी एम.एस-सी एनिमल हस्बेन्ड्री एण्ड डेयरिंग में आकाश कुमार सिंह, जेनेटिक्स एण्ड प्लांट ब्रीडिंग में नेहा सिंह, हार्टिकल्चर में अमन श्रीवास्तव, प्लांट पैथोलाॅजी में अजीत प्रताप यादव , एग्रोनाॅमी में आदित्य कुमार, एग्रीकल्चल कमेस्ट्री एण्ड स्वायल साइंस में धनन्जय मौर्या, इन्टोमोलाॅजी में अजीत पाण्डेय, एग्रीकल्चर एक्सटेन्शन में पार्थ प्रतीक एवं एल एल.एम. में तान्या गुप्ता को स्वर्ण पदक मिला। इस वर्ष स्नातक अंतिम वर्ष की परीक्षा में 150507 परीक्षार्थी शामिल हुए थे, जिसमें से 142235 परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए। परास्नातक में 28303 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी जिसमें से 27348 उत्तीर्ण हुए।

121 को मिली पीएच.डी. की उपाधि
जौनपुर। दीक्षांत समारोह में 121 शोधार्थियों की पीएच.डी. की उपाधि मिली है।  कला संकाय में 83, विज्ञान संकाय में 16, शिक्षा में 10, वाणिज्य में 01, कृषि में 06 एवं विधि संकाय मे 05 शोधार्थियों को पीएच.डी. उपाधि मिली। डिग्री पाने के बाद शोधार्थियों के चेहरे पर खुशी देखी गयी।

हेलीपैड पर कुलपति ने किया स्वागत
दीक्षांत समारोह में शामिल होने पहंुची प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का स्वागत कुलपति प्रो0डाॅ0 राजाराम यादव ने बुके देकर किया, हेलीपैड पर पुलिस के जवानांे द्वारा गार्ड आफ अॅानर दिया गया। इस अवसर पर जिले के अधिकारी मौजूद रहे।

पी0जी0 छात्रावास का हुआ लोकार्पण
जौनपुर। महन्त अवैद्यनाथ संगोष्ठी भवन में प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने श्री निवास रामानुजन रिसर्ुचति प्रो0डाॅ0 राजाराम यादव, कुलसचिव सुजीत कुमार जायसवाल, वित्तअधिकारी एम0के0 सिंह, प्रो0 बी0बी0 तिवारी आदि मौजूद थें।

पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के 50 विद्यार्थी हुए शामिल
जौनपुर। 23वे दीक्षान्त समारोह में पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के 25 छात्र एवं 25 छात्राएं शामिल हुए इसमें पूर्व माध्यमिक विद्यालय देवकली करन्जाकला, वीरबलपुर मड़ियाहूॅ, मंगदपुर करन्जाकला, खलीलपुर शाहगंज, उॅचगाॅव सुईथाकला के विद्यार्थी रहे। दीक्षान्त समारोह में पहली बार पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थी  राज्यपाल के विशेष अतिथि रहे। इसके संयोजक एन.एस.एसच समन्वयक राकेश यादव थे। 

हुई ग्रुप फोटोग्राफी
स्वर्ण पदक धारकों, पी0एचडी0 उपाधि धारकों और दीक्षान्त समारोह में आये स्कूली बच्चों की राज्यपाल, मुख्य अतिथि, एवं कुलपति के साथ ग्रुप फोटोग्राफी हुई।

मूर्ति और स्मृति चिह्न नहीं चाहिए
राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने कहा दीक्षांत और अन्य समारोह में जो मूर्ति और स्मृति चिह्न दिए जाते हैं उसकी कोई जरूरत नहीं । सरकारी स्कूल के बच्चे ही हमारे लिए मूर्ति हैं, बच्चों को अतिथि बनाकर विश्वविद्यालय में लाने, किताब और फल देकर सम्मानित करने के पीछे उद्देश्य है की जब भी यूनिवर्सिटी के छात्रों को गोल्ड मेडल पाते वे देखें उनके मन में एक सपना आए कि हमें अपनी स्कूली पढ़ाई नहीं छोड़नी है। उन्होंने समारोह में मिलने वाले भेंट की जगह स्कूली बच्चों की किताब भेट में लिया ताकि वह उन बच्चों तक पहुंचाई जा सके।

पी0जी0 छात्रावास का हुआ लोकार्पण

जौनपुर। महन्त अवैद्यनाथ संगोष्ठी भवन में प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उच्चीकृत  श्री  निवास रामानुजन रिसर्च स्कॉलर हास्टल का उद्घाटन किया। इस अवसर पर श्री नव योगेन्द्र स्वामी जी,  प्रो0डाॅ0 राजाराम यादव, कुलसचिव सुजीत कुमार जायसवाल, वित्तअधिकारी एम0के0 सिंह, प्रो0 बी0बी0 तिवारी आदि मौजूद थें।

गतिमान के  सातवें  अंक का राज्यपाल ने किया विमोचन

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के 23 वें दीक्षांत समारोह में गतिमान वार्षिक पत्रिका का  विमोचन  राज्यपाल ने किया।  इस पत्रिका में विश्वविद्यालय के वर्ष भर की  गतिविधियां, स्वर्ण पदक धारकों  की सूची, अतिथियों का परिचय समेत तमाम जानकारियां बड़े आकर्षण ढंग से प्रकाशित की गयी है। पत्रिका के सम्पादन मण्डल में डॉ0 मनोज मिश्र, डॉ0 दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ0 के0एस0 तोमर, डॉ सुनील कुमार  एवं डॉ0 पुनीत कुमार धवन शामिल है।