Wednesday, 30 September 2026

लॉ इंस्टीट्यूट में 'संवैधानिक कानून' पर हुई क्विज़ प्रतियोगिता 35 टीमों ने लिया भाग



 जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय स्थित दत्तोपंत ठेंगड़ी लॉ इंस्टीट्यूट में बुधवार को भारतीय संविधान विषय पर एक भव्य क्विज़ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
प्रतियोगिता का आयोजन विश्वविद्यालय परिसर के विधि संस्थान में स्थित 'एस. पी. गुप्ता मेमोरियल लॉ लाइब्रेरी'  में संपन्न हुआ।
इस प्रतियोगिता में कुल 35 टीमों ने भाग लिया, जिसमें प्रत्येक टीम में 4-4 सदस्य शामिल थे। प्राथमिक चरण के बाद द्वितीय एवं फाइनल राउंड के लिए कुल 10 उत्कृष्ट टीमों ने क्वालीफाई किया।
कार्यक्रम का सफल आयोजन संस्थान के निदेशक एवं विभागाध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार की अध्यक्षता में हुआ। प्रतियोगिता के कार्यक्रम समन्वयक सहायक प्राध्यापक श्री रविकेश कुमार मौर्या रहे। वहीं सह-समन्वयक की भूमिका श्री योगेश उत्तम, डॉ. आश्रया दुबे, डॉ. शुभम सिंह एवं डॉ. विपिन कुमार सिंह ने निभाई। इस अवसर पर दत्तोपंत ठेंगड़ी लॉ इंस्टीट्यूट के सभी सम्मानित प्राध्यापक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

नवाचार से स्टार्टअप और उद्यमिता की ओर बढ़ें विद्यार्थी : प्रो. अविनाश

 राष्ट्रीय इनोवेशन एवं उत्तर प्रदेश इनोवेशन चैलेंज विषय पर हुआ ओरिएंटेशन कार्यक्रम 
 जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज एवं उत्तर प्रदेश इनोवेशन चैलेंज विषय पर ओरिएंटेशन कार्यक्रम का आयोजन बुधवार को किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में नवाचार, स्टार्टअप, उद्यमिता एवं सामाजिक प्रभाव आधारित विचारों को प्रोत्साहित करना तथा उन्हें इनोवेशन चैलेंज में भागीदारी के लिए आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराना था।
   कार्यक्रम में वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विद्यालय के इनक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर के कार्यकारी निदेशक प्रो. अविनाश पाथर्डीकर ने विद्यार्थियों को इनोवेशन की अवधारणा, नवाचार की प्रक्रिया तथा किसी समस्या की पहचान कर उसके प्रभावी एवं व्यावहारिक समाधान विकसित करने के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि एक अच्छे विचार को व्यवस्थित तरीके से विकसित कर प्रोटोटाइप में परिवर्तित किया जा सकता है और आगे चलकर उसे उत्पाद अथवा सेवा के रूप में स्टार्टअप का स्वरूप दिया जा सकता है।
   प्रो. पाथर्डीकर ने विद्यार्थियों को स्टार्टअप की संभावनाओं, बिजनेस मॉडल तैयार करने, मेंटरशिप एवं इनक्यूबेशन की भूमिका तकनीकी विकास, फंडिंग तथा उद्यमिता के अवसरों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को केवल नौकरी की तलाश तक सीमित न रहकर अपने ज्ञान और रचनात्मक सोच के माध्यम से रोजगार सृजनकर्ता बनने की दिशा में भी प्रयास करना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे अपने आसपास की सामाजिक, पर्यावरणीय, तकनीकी एवं स्थानीय समस्याओं को पहचानें और उनके नवीन, टिकाऊ एवं व्यावहारिक समाधान विकसित करें। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े स्टार्टअप की शुरुआत एक छोटी लेकिन प्रभावी समस्या के समाधान से हो सकती है।
   कार्यक्रम के सह-संयोजक डॉ. नितेश जायसवाल ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित उत्तर प्रदेश इनोवेशन चैलेंज की प्रक्रिया, पात्रता, आवेदन एवं आइडिया प्रस्तुत करने की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। उन्होंने विद्यार्थियों को चैलेंज में भाग लेने, अपने नवाचारी विचारों को प्रस्तुत करने तथा उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।
   कार्यक्रम के अंत में प्रो. रजनीश भास्कर ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर निदेशक, ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल प्रो. प्रदीप कुमार एवं डॉ. सुशील कुमार  सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों एवं संस्थानों के शिक्षक तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
   इस कार्यक्रम के लिए 396 विद्यार्थियों ने ऑनलाइन पंजीकरण किया था, जिसमें से 101 विद्यार्थियों ने अपने विचार ऑनलाइन प्रस्तुत किए थे।

हर क्षेत्र में बढ़ रही है एआई की संभावनाः डॉ. अनुश्री अग्रवाल


200 से अधिक विद्यार्थियों ने लिया ऑनलाइन प्रशिक्षण
जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर के इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संकाय तथा आई ट्रिपल ई स्टूडेंट ब्रांच, यूएनएसआईईटी के संयुक्त तत्वावधान में कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह के मार्गदर्शन एवं संरक्षण में एआई एवं एमएल लर्निंग सीरीज के प्रथम व्याख्यान का  आनलाइन आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग की मूल बातें” रहा। ऑनलाइन आयोजित इस व्याख्यान में विभिन्न पाठ्यक्रमों के 200 से अधिक छात्र-छात्राओं एवं प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम की विशेषज्ञ वक्ता डॉ. अनुश्री अग्रवाल ने विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग की मूल अवधारणाओं, उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों तथा जेनरेटिव एआई के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में एआई और मशीन लर्निंग केवल तकनीकी विषय नहीं रह गए हैं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, मीडिया, प्रशासन और शोध सहित विभिन्न क्षेत्रों में इनके उपयोग की संभावनाएं निरंतर बढ़ रही हैं।
डॉ. अनुश्री अग्रवाल सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग एवं एप्लाइड मशीन लर्निंग के क्षेत्र में विशेषज्ञता रखने वाली शिक्षाविद एवं तकनीकी विशेषज्ञ हैं। उन्होंने दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में एम.टेक. तथा इंदिरा गांधी दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी फॉर विमेन से पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की है। उन्होंने विद्यार्थियों को एआई आधारित कौशल विकसित करने, व्यावहारिक परियोजनाओं पर कार्य करने तथा नवीन तकनीकों के प्रति निरंतर सीखने की प्रवृत्ति अपनाने के लिए प्रेरित किया। एआई एवं एमएल लर्निंग सीरीज का उद्देश्य विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग की आधारभूत अवधारणाओं से परिचित कराने के साथ-साथ उन्हें व्यावहारिक ज्ञान, तकनीकी दक्षता तथा प्रोजेक्ट डेवलपमेंट के लिए तैयार करना है। कार्यक्रम के सफल आयोजन में आई ट्रिपल ई स्टूडेंट ब्रांच के सदस्यों एवं आयोजन टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

विद्यार्थी नई तकनीकी सीखने की प्रवृत्ति रखें : कुलपति

सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग पर छात्रों का कुलपति के समक्ष प्रभावी प्रस्तुतीकरण

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कंप्यूटर अनुप्रयोग विभाग में कुलपति प्रो. आर. के. सिंह द्वारा पूर्व में किए गए विभागीय अवलोकन के क्रम में छात्रों के आग्रह पर सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग विषय पर विशेष शैक्षणिक प्रस्तुतीकरण आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को विषय की व्यावहारिक समझ प्रदान करने के साथ-साथ उनके तकनीकी ज्ञान, तार्किक चिंतन, रचनात्मकता एवं प्रस्तुतीकरण कौशल को विकसित करना रहा।

प्रस्तुतीकरण के दौरान विद्यार्थियों ने सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं को व्यावहारिक उदाहरणों एवं आधुनिक तकनीकी परिप्रेक्ष्य के साथ प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि गुणवत्तापूर्ण सॉफ्टवेयर के विकास में योजनाबद्ध प्रक्रिया, तकनीकी दक्षता, उपयोगकर्ता की आवश्यकताओं की समझ तथा विकास के विभिन्न चरणों का महत्वपूर्ण योगदान होता है।

इसी क्रम में बीसीए तृतीय वर्ष की छात्रा हर्षिता गुप्ता ने ‘फ्लो ऑफ वेब डेवलपमेंट’ विषय पर प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने वेब डेवलपमेंट की संपूर्ण प्रक्रिया को विभिन्न चरणों के माध्यम से स्पष्ट करते हुए बताया कि किसी वेबसाइट की परिकल्पना से लेकर उसके विकास एवं उपयोगकर्ता तक पहुंचने की प्रक्रिया किस प्रकार आगे बढ़ती है। वहीं बीसीए के छात्र विशाल कुमार यादव ने ‘फुल स्टैक डेवलपमेंट’ विषय पर प्रभावी प्रस्तुतीकरण प्रस्तुत किया। उन्होंने फ्रंटएंड, बैकएंड, डेटाबेस एवं सर्वर-साइड तकनीकों के बीच समन्वय को उदाहरणों के माध्यम से समझाया।

कुलपति प्रो. आर. के. सिंह ने दोनों प्रस्तुतियों का अवलोकन करते हुए विद्यार्थियों के प्रयास एवं प्रस्तुतीकरण कौशल की सराहना की। उन्होंने छात्रों को नवीनतम तकनीकों के प्रति निरंतर सीखने की प्रवृत्ति विकसित करने, तकनीकी कौशल को मजबूत करने तथा अर्जित ज्ञान को व्यावहारिक परियोजनाओं में प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां विद्यार्थियों को कक्षा-कक्ष की शिक्षा को वास्तविक तकनीकी दुनिया से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

इस अवसर पर संकायाध्यक्ष प्रो. सौरभ पाल ने विद्यार्थियों के उत्साह, परिश्रम एवं प्रस्तुतीकरण कौशल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी शैक्षणिक गतिविधियां विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, तकनीकी दक्षता एवं नवाचार की भावना विकसित करने में सहायक हैं। 
कार्यक्रम में बीसीए कोर्स कोऑर्डिनेटर डॉ. मिथिलेश कुमार पाण्डेय तथा पाठ्यक्रम के सहायक आचार्य प्रियंका जायसवाल, आदित्य कुमार एवं अवधेश कुमार यादव उपस्थित रहे।