Tuesday, 6 October 2026

साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में तकनीकी दक्षता विकसित करें विद्यार्थी : प्रो. राकेश कुमार सिंह

साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में तकनीकी दक्षता विकसित करें विद्यार्थी : प्रो. राकेश कुमार सिंह

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में ‘सिक्योर एप्लीकेशन डेवलपमेंट’ विषय पर आयोजित छह दिवसीय कार्यशाला के द्वितीय दिवस में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। कार्यशाला में मुख्य विषय विशेषज्ञ के रूप में देश के प्रख्यात साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. अनूप गिरधर ने विद्यार्थियों को सुरक्षित एप्लीकेशन डेवलपमेंट के विभिन्न तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी।

कार्यक्रम में कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में साइबर सुरक्षा और सिक्योर एप्लीकेशन डेवलपमेंट के क्षेत्र में भविष्य की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को तकनीकी कौशल विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की रुचि और सहभागिता इसी प्रकार बनी रही तो विश्वविद्यालय द्वारा भविष्य में और भी अधिक प्रायोगिक एवं इंडस्ट्री ओरिएंटेड कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों को रोजगारपरक शिक्षा के साथ व्यावहारिक तकनीकी ज्ञान प्राप्त हो सके।

तकनीकी सत्र में विषय विशेषज्ञ डॉ. अनूप गिरधर ने विद्यार्थियों को प्रोग्रामिंग की मूलभूत अवधारणाओं से लेकर सिक्योर एप्लीकेशन डेवलपमेंट के तकनीकी पक्ष को सरल एवं व्यावहारिक तरीके से समझाया। उन्होंने सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट आर्किटेक्चर के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि सुरक्षित और मजबूत एप्लीकेशन के निर्माण में किन सुरक्षा मानकों का ध्यान रखना आवश्यक है।

सत्र की प्रमुख कड़ी हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग रही। डॉ. गिरधर ने विद्यार्थियों को लाइव प्रोग्रामिंग के माध्यम से वर्चुअल मशीन सेटअप करने तथा कोड में आवश्यक सुरक्षा मानकों को लागू करने का प्रशिक्षण दिया। इस दौरान विद्यार्थियों ने स्वयं तकनीकी गतिविधियों में भाग लेते हुए सुरक्षित एप्लीकेशन डेवलपमेंट की बारीकियों को समझा।

कार्यशाला में 90 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला का आयोजन इंजीनियरिंग संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो. सौरभ पाल के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। कार्यक्रम में प्रो. अशोक श्रीवास्तव, प्रो. गिरिधर मिश्र, प्रो. राजकुमार, , डॉ. दिव्येंदु मिश्र, प्रियंका जायसवाल सहित अन्य शिक्षक उपस्थित रहे।

दूध से पनीर तक संरक्षण की वैज्ञानिक तकनीक जरूरी : प्रो. सुधीर सिंह

दुग्ध एवं दुग्ध उत्पादों के संरक्षण पर विशेष व्याख्यान आयोजित

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय में संचालित फूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों के लिए कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह के निर्देश पर ‘दुग्ध एवं दुग्ध उत्पादों के संरक्षण’ विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी के पूर्व वैज्ञानिक प्रो. सुधीर सिंह ने विद्यार्थियों को दुग्ध एवं विभिन्न दुग्ध उत्पादों के संरक्षण की वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मानव द्वारा दुग्ध एवं दुग्ध उत्पादों का बड़ी मात्रा में सेवन किया जाता है। ऐसे में इनकी गुणवत्ता, पोषणात्मक मूल्य और खाद्य सुरक्षा बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। दूध, पनीर के  संरक्षण के लिए वैज्ञानिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाना जरूरी है।

प्रो. सुधीर सिंह ने कहा कि दुग्ध अत्यधिक शीघ्र खराब होने वाला खाद्य पदार्थ है। इसकी गुणवत्ता, पोषणात्मक मूल्य एवं सुरक्षित शेल्फ लाइफ बनाए रखने के लिए उचित प्रसंस्करण, ताप उपचार, शीत भंडारण, स्वच्छता और प्रभावी पैकेजिंग अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।उन्होंने विशेष रूप से दूध, पनीर और बटर के संरक्षण की तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की। पनीर के संदर्भ में उन्होंने इसके निर्माण, नमी नियंत्रण, स्वच्छता, पैकेजिंग, शीत भंडारण तथा गुणवत्ता बनाए रखने के उपायों की जानकारी दी। वहीं बटर के संरक्षण में तापमान नियंत्रण, उचित पैकेजिंग, ऑक्सीकरण से सुरक्षा तथा भंडारण की उपयुक्त परिस्थितियों के महत्व को समझाया।उन्होंने विद्यार्थियों को बटर, क्रीम, मिल्क पाउडर सहित अन्य दुग्ध उत्पादों के संरक्षण एवं उनकी शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए अपनाई जाने वाली आधुनिक तकनीकों से भी अवगत कराया। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक संरक्षण तकनीकों का उपयोग न केवल खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करता है, बल्कि दुग्ध उत्पादों के मूल्यवर्धन और उनके व्यावसायिक उपयोग की संभावनाओं को भी बढ़ाता है।

व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों ने दूध, पनीर, बटर एवं अन्य दुग्ध उत्पादों के प्रसंस्करण और संरक्षण से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका प्रो. सुधीर सिंह ने विस्तारपूर्वक समाधान किया।कार्यक्रम के अंत में संकायाध्यक्ष प्रो. प्रदीप कुमार ने प्रो. सुधीर सिंह के प्रति आभार व्यक्त किया।

Monday, 5 October 2026

पीयू के 12 शिक्षकों ने अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में बनाई जगह

 स्कॉलरली इंडेक्स की प्रतिष्ठित टॉप-1000 स्कॉलर रैंकिंग में शामिल हुए 12 शिक्षक

शोध एवं अकादमिक उत्कृष्टता का वैश्विक सम्मान, कुलपति ने दी बधाई

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर के लिए यह अत्यंत गौरव और हर्ष का विषय है कि विश्वविद्यालय परिसर के 12 शिक्षकों ने अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग संस्था स्कॉलरली इंडेक्स की प्रतिष्ठित टॉप-1000 स्कॉलर रैंकिंग में स्थान प्राप्त कर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं शोध उत्कृष्टता को वैश्विक पहचान दिलाई है। यह उपलब्धि शिक्षकों के निरंतर शोध प्रयासों, अकादमिक प्रतिबद्धता और ज्ञान सृजन के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान का प्रमाण है।

स्कॉलरली इंडेक्स द्वारा जारी यह अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग शोधकर्ताओं के शोध प्रकाशनों, उद्धरणों, एच-इंडेक्स, डी-इंडेक्स तथा समग्र शोध प्रभाव जैसे महत्वपूर्ण मानकों के आधार पर निर्धारित की जाती है। इस रैंकिंग में न केवल शोध प्रकाशनों की संख्या, बल्कि शोध की गुणवत्ता, प्रासंगिकता, प्रभावशीलता और अंतरराष्ट्रीय अकादमिक जगत में उसकी स्वीकार्यता को भी महत्व दिया जाता है। ऐसे प्रतिष्ठित वैश्विक मंच पर विश्वविद्यालय के 12 शिक्षकों का स्थान प्राप्त करना संस्थान की बढ़ती शोध क्षमता, अकादमिक सक्रियता और गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सभी चयनित शिक्षकों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के शिक्षकों की यह अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि पूरे विश्वविद्यालय परिवार के लिए गर्व का विषय है। यह सफलता शोध, नवाचार और गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विश्वविद्यालय की निरंतर प्रगति को दर्शाती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शिक्षकों की यह वैश्विक पहचान विद्यार्थियों एवं युवा शोधार्थियों को उत्कृष्ट शोध कार्य करने के लिए प्रेरित करेगी तथा विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

कुलपति ने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की वास्तविक पहचान उसके शिक्षकों की शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध उपलब्धियों और समाज के लिए किए गए ज्ञानपरक योगदान से स्थापित होती है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में शिक्षकों की भागीदारी विश्वविद्यालय में विकसित हो रहे सकारात्मक शोध वातावरण और अकादमिक उत्कृष्टता का परिचायक है।

स्कॉलरली इंडेक्स की प्रतिष्ठित टॉप-1000 स्कॉलर रैंकिंग में स्थान प्राप्त करने वाले शिक्षकों में प्रो. अशोक कुमार श्रीवास्तव. प्रो. राजकुमार, प्रो. संदीप कुमार  सिंह, प्रो. नूपुर गोयल, डॉ. मिथिलेश यादव, डॉ. अजीत सिंह, डॉ. विक्रांत भटेजा, डॉ. आशीष वर्मा, डॉ. राम नरेश यादव, डॉ. दीपक कुमार मौर्य, डॉ. राम नारायण एवं डॉ. पारुल त्रिवेदी शामिल हैं।

विश्वविद्यालय के इन शिक्षकों की उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत अकादमिक एवं शोध कौशल का सम्मान है, बल्कि वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय की बढ़ती वैश्विक शैक्षणिक प्रतिष्ठा का भी प्रतीक है।

एप्लीकेशन बनाते समय सुरक्षा को दें प्राथमिकताः डॉ. अनूप गिरिधर

सुरक्षित एप्लीकेशन विकास पर छह दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ

पीयू में 90 से अधिक छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों एवं संकाय सदस्यों ने किया प्रतिभाग

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में सोमवार को कुलपति प्रो. आर. के. सिंह के मार्गदर्शन में सुरक्षित एप्लीकेशन विकास  विषय पर छह दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। कार्यशाला में 90 से अधिक छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों एवं संकाय सदस्यों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

कार्यशाला के प्रथम दिन डॉ. अनूप  गिरिधर ने प्रतिभागियों को सुरक्षित एप्लीकेशन विकास के मूलभूत सिद्धांतों से सरल, व्यावहारिक एवं प्रभावी ढंग से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि वर्तमान डिजिटल युग में एप्लीकेशन विकास केवल उपयोगी और आकर्षक सॉफ्टवेयर बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उपयोगकर्ता, डेटा, सर्वर तथा संपूर्ण डिजिटल प्रणाली को साइबर हमलों और अनधिकृत पहुंच से सुरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक है।

डॉ. गिरिधर ने वर्चुअल मशीन (Virtual Machine) के माध्यम से सुरक्षित वातावरण में एप्लीकेशन विकसित करने की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि किसी भी एप्लीकेशन की संरचना तैयार करते समय सुरक्षा को प्रारंभिक स्तर से ही शामिल किया जाना चाहिए। यदि सुरक्षा को विकास प्रक्रिया के अंतिम चरण में जोड़ा जाता है, तो कमजोरियों और साइबर जोखिमों की संभावना बढ़ जाती है।


उन्होंने उपयोगकर्ता की पहचान की समुचित जांच, भूमिका आधारित अधिकार निर्धारण तथा सुरक्षित प्रमाणीकरण व्यवस्था के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि एप्लीकेशन में उपयोगकर्ता द्वारा दिए गए इनपुट की जांच और शुद्धिकरण आवश्यक है, ताकि एसक्यूएल इंजेक्शन, क्रॉस-साइट स्क्रिप्टिंग तथा अन्य सामान्य साइबर कमजोरियों से बचाव किया जा सके।

विशेषज्ञ ने संवेदनशील डेटा की सुरक्षा के लिए कूटलेखन, सुरक्षित संचार माध्यमों के उपयोग तथा डेटाबेस में केवल आवश्यक अधिकार प्रदान करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि किसी तकनीकी त्रुटि की स्थिति में उपयोगकर्ता को संवेदनशील तकनीकी जानकारी प्रदर्शित नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि ऐसी जानकारी का दुरुपयोग साइबर अपराधी कर सकते हैं।

डॉ. गिरिधर ने प्रतिभागियों को बाहरी पुस्तकालयों और सॉफ्टवेयर घटकों को नियमित रूप से अद्यतन रखने, कोड की सुरक्षा जांच करने तथा विकास, परीक्षण और परिनियोजन की संपूर्ण प्रक्रिया में सुरक्षा मानकों को शामिल करने की सलाह दी। उन्होंने गतिविधियों की निगरानी, सुरक्षा घटनाओं का अभिलेखन, नियमित सुरक्षा अद्यतन और समय-समय पर परीक्षण को सुरक्षित डिजिटल वातावरण के लिए आवश्यक बताया।

कार्यक्रम का शुभारंभ इंजीनियरिंग संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो. सौरभ पाल एवं कंप्यूटर साइंस विभागाध्यक्ष डॉ. विक्रांत भटेजा द्वारा डॉ. अनुप गिरिधर का स्वागत एवं अभिनंदन कर किया गया। कार्यशाला में उपस्थित छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों एवं संकाय सदस्यों ने डॉ. अनुप गिरिधर के सत्र को अत्यंत ज्ञानवर्धक, समसामयिक और प्रेरणादायक बताया। प्रतिभागियों ने कहा कि कार्यशाला से उन्हें साइबर सुरक्षा के व्यावहारिक पहलुओं तथा सुरक्षित एप्लीकेशन निर्माण की प्रक्रिया को समझने में विशेष सहायता मिली।

छह दिवसीय कार्यशाला के आगामी सत्रों में साइबर सुरक्षा, सुरक्षित कोडिंग, डेटा संरक्षण, एप्लीकेशन परीक्षण तथा डिजिटल सुरक्षा से संबंधित विभिन्न तकनीकी विषयों पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा।