Saturday, 24 October 2026

आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के बौद्धिक विकास की पहली सीढ़ीः सोनिया सिंह


आंगनबाड़ी केंद्र को पीयू ने दिए पुस्तकें, खिलौने
गोद लिए ग्राम सुल्तानपुर के बच्चों के साथ श्रीमती सोनिया सिंह ने किया संवाद
जौनपुर। गोद लिए ग्राम सुल्तानपुर के आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों के सर्वांगीण विकास को नया आयाम देते हुए वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर द्वारा शनिवार को पुस्तकें, कहानी की किताबें तथा खिलौने प्रदान किए गए। इस अवसर पर श्रीमती सोनिया सिंह ने केंद्र की बाल विकास व्यवस्थाओं का अवलोकन करते हुए बच्चों से आत्मीय संवाद किया और प्रारंभिक शिक्षा, पोषण एवं स्वच्छता पर बल दिया। 
इस अवसर पर श्रीमती सोनिया सिंह ने कहा कि बच्चे राष्ट्र का भविष्य हैं। उनका सर्वांगीण विकास केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें स्वच्छ वातावरण, पौष्टिक भोजन, स्वास्थ्य सेवा और गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा का समान महत्व है। आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के शारीरिक, मानसिक एवं बौद्धिक विकास की पहली सीढ़ी है। विश्वविद्यालय द्वारा प्रदान की गई पुस्तकें, कहानी की किताबें और खिलौने बच्चों की रुचि, कल्पनाशीलता तथा सीखने की क्षमता को और बढ़ाएँगे। हम सभी का प्रयास होना चाहिए कि हर बच्चे को सुरक्षित, स्वच्छ, खुशहाल और शिक्षाप्रद वातावरण मिले।
उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्र पर उपलब्ध बाल विकास सुविधाओं का अवलोकन किया। उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्र में उपस्थित सहायिका से संवाद स्थापित कर केंद्र की व्यवस्थाओं एवं बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी प्राप्त की।
भ्रमण के दौरान श्रीमती सोनिया सिंह को बच्चों ने उत्साहपूर्वक कहानी और कविता सुनाई। उन्होंने बच्चों के पठन-पाठन का भी अवलोकन किया और उनकी सीखने की क्षमता, प्रारंभिक शिक्षा तथा बाल विकास से जुड़ी गतिविधियों को देखा। उन्होंने केंद्र में साफ-सफाई की व्यवस्था का निरीक्षण करते हुए स्वच्छता को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बच्चों के समुचित विकास के लिए स्वच्छ वातावरण, गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएँ अत्यंत आवश्यक हैं।
कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय सेवा योजना समन्वयक डॉ शशिकांत यादव ने किया। इस अवसर पर डॉ. अनु त्यागी, सीडीपीओ करंजाकला मंजू तिवारी, आंगनबाड़ी केंद्र की सहायिका, प्राथमिक विद्यालय सुल्तानपुर के शिक्षक उपस्थित रहे।

पीयू का परीक्षा कैलेंडर जारी, 14 नवंबर से शुरू होंगी परीक्षाएं31 अक्टूबर तक भरे जाएंगे परीक्षा फॉर्म


  जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 की परीक्षाओं को निर्धारित समय पर संपन्न कराने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह ने परीक्षा कैलेंडर जारी कर दिया है। इस कैलेंडर में परीक्षा फॉर्म भरने, उनके सत्यापन और मुख्य सैद्धांतिक परीक्षाओं की तिथियां निर्धारित की गई हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन का उद्देश्य शैक्षणिक सत्र को नियमित रखते हुए परीक्षा, मूल्यांकन और परिणाम घोषित करने की प्रक्रिया को समयबद्ध बनाना है।
जारी परीक्षा कैलेंडर के अनुसार, विद्यार्थियों के परीक्षा फॉर्म भरने और उनके सत्यापन की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित की गई है। इस निर्धारित अवधि में विद्यार्थियों को अपने परीक्षा फॉर्म भरने तथा संबंधित प्रक्रिया पूरी करने का अवसर मिलेगा। वहीं, विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों और संबंधित विभागों को निर्धारित समय के भीतर परीक्षा फॉर्म के सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
विश्वविद्यालय की ओर से निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, विभिन्न पाठ्यक्रमों की मुख्य सैद्धांतिक यानी लिखित परीक्षाएं 14 नवंबर 2026 से  आयोजित की जाएंगी।  परीक्षा कार्यक्रम की घोषणा से विद्यार्थियों को अपनी तैयारी व्यवस्थित करने और आगामी परीक्षाओं के लिए समय का बेहतर प्रबंधन करने में मदद मिलेगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बीसीए, बीबीए, एलएलबी, बीएड, एमएड, बीपीएड, एलएलएम, बीएससी कृषि, एमएससी कृषि, बीपीईएस और बीएलआईबी पाठ्यक्रमों की परीक्षाओं का कार्यक्रम अलग से जारी किया जाएगा। इन पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को संबंधित परीक्षा कार्यक्रम की घोषणा के लिए विश्वविद्यालय की आधिकारिक सूचना पर नजर रखनी होगी।
परीक्षा कैलेंडर जारी होने के साथ ही विश्वविद्यालय के शैक्षणिक सत्र को निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार संचालित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। 
परीक्षा नियंत्रक डॉ. विनोद कुमार सिंह ने विद्यार्थियों को सलाह दी गई है कि वे परीक्षा फॉर्म भरने की निर्धारित समय-सीमा का ध्यान रखें और अपने पाठ्यक्रम से संबंधित परीक्षा कार्यक्रम की जानकारी के लिए विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट तथा संबंधित महाविद्यालय से जारी सूचनाओं का नियमित अवलोकन करें।

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में सेंट्रलिटी मेजर पर विशेष व्याख्यान का आयोजन


जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर के अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान में विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. आर के सिंह जी की प्रेरणा और संकायाध्यक्ष प्रो. सौरभ पाल विभागाध्यक्ष डॉ. विक्रांत भटेजा के मार्गदर्शन में छात्रों के लिए एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस व्याख्यान के मुख्य वक्ता के रूप में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ऋषि रंजन सिंह उपस्थित रहे। डॉ. ऋषि रंजन सिंह ने सेंट्रलिटी मेजर जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपना विस्तृत और ज्ञानवर्धक व्याख्यान दिया। उन्होंने अपने व्याख्यान में बताया कि सेंट्रलिटी मेजर नेटवर्क साइंस का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो किसी भी नेटवर्क में सबसे महत्वपूर्ण नोड की पहचान करने में मदद करता है। उन्होंने सेंट्रलिटी के विभिन्न प्रकारों जैसे डिग्री सेंट्रलिटी, बिटवीननेस सेंट्रलिटी, क्लोजनेस सेंट्रलिटी और ईजेनवेक्टर सेंट्रलिटी को विस्तार से समझाया। 

डॉ. सिंह ने इस सिद्धांत के रियल लाइफ में उपयोगों को बहुत ही रोचक तरीके से समझाया। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे इंस्टाग्राम, फेसबुक और ट्विटर पर कौन सबसे प्रभावशाली व्यक्ति है, इसका पता लगाने के लिए कंपनियां ईजेनवेक्टर और डिग्री सेंट्रलिटी का उपयोग करती हैं। इसी प्रकार गूगल का प्रसिद्ध पेजरैंक एल्गोरिदम भी सेंट्रलिटी पर ही आधारित है, जो यह तय करता है कि सर्च करने पर कौन सी वेबसाइट सबसे ऊपर आएगी। उन्होंने एक और महत्वपूर्ण उदाहरण देते हुए बताया कि कोरोना महामारी के दौरान यह पता लगाने के लिए कि किस व्यक्ति के संपर्क में आने से संक्रमण सबसे तेजी से फैल सकता है, वैज्ञानिकों ने बिटवीननेस सेंट्रलिटी का उपयोग किया था, ताकि ऐसे लोगों को आइसोलेट किया जा सके। साथ ही परिवहन व्यवस्था में यह पता लगाने के लिए कि किसी शहर का कौन सा चौराहा, रेलवे स्टेशन या एयरपोर्ट सबसे महत्वपूर्ण है, जहां से सबसे ज्यादा रास्ते जुड़ते हैं, क्लोजनेस सेंट्रलिटी का उपयोग किया जाता है। बैंकिंग फ्रॉड का पता लगाने और बिजली ग्रिड में सबसे संवेदनशील पॉइंट को खोजने में भी इसका उपयोग होता है।

इस व्याख्यान में इंजीनियरिंग संकाय के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे और उन्होंने पूरे मनोयोग से व्याख्यान सुना। छात्रों ने अंत में विषय से संबंधित प्रश्न भी पूछे, जिनका डॉ. सिंह ने बड़ी सहजता से उत्तर दिया। कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम के संयोजक डॉ. दिव्येन्दु मिश्रा ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत में संकाय के अधिष्ठाता प्रो. सौरभ पाल ने पुष्पगुच्छ भेंट कर मुख्य अतिथि डॉ. ऋषि रंजन सिंह का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन किया तथा मुख्य वक्ता का परिचय प्रियंका जायसवाल ने प्रस्तुत किया। अंत में संयोजक डॉ. दिव्येन्दु मिश्रा ने सभी अतिथियों, शिक्षकों और छात्रों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में कंप्यूटर एप्लीकेशन के विभागाध्यक्ष पंकज कुमार सहित प्रो नूपुर गोयल,  डॉ. मुनींद्र सिंह, डॉ प्रशांत यादव, प्रवीण पांडे, सौरभ सिंह, डॉ मिथिलेश पांडे, अवधेश यादव, आदित्य कुमार आदि शिक्षक उपस्थित रहे।

Friday, 23 October 2026

पूर्वांचल विश्वविद्यालय में एआई एवं एमएल लर्निंग सीरीज का चौथा व्याख्यान संपन्न



वीका टूल से रिग्रेशन एल्गोरिदम के व्यावहारिक उपयोग के टिप्स दिए

व्याख्यान में 96 छात्र-छात्राओं ने किया प्रतिभाग

जौनपुर।वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर के फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग द्वारा कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह के निर्देश पर संचालित ‘एआई एवं एमएल लर्निंग सीरीज’ के चौथे व्याख्यान का शुक्रवार को सफल आयोजन किया गया। “रिग्रेशन एल्गोरिदम” विषय पर आयोजित इस व्याख्यान में विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों के 96 छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। सत्र का उद्देश्य विद्यार्थियों को मशीन लर्निंग में रिग्रेशन की मूलभूत अवधारणाओं, प्रमुख एल्गोरिदम तथा उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों से परिचित कराना था।

इस व्याख्यान में मुख्य विशेषज्ञ एवं रिसोर्स पर्सन डॉ. अन्नुश्री अग्रवाल ने विद्यार्थियों को रिग्रेशन एल्गोरिदम की कार्यप्रणाली तथा वीका  टूल के माध्यम से उनके व्यावहारिक उपयोग की जानकारी दी।
व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों ने लीनियर रिग्रेशन तथा अन्य प्रमुख रिग्रेशन तकनीकों की कार्यप्रणाली को समझा। विशेषज्ञ ने बताया कि रिग्रेशन मशीन लर्निंग की एक महत्वपूर्ण तकनीक है, जिसका उपयोग निरंतर संख्यात्मक मानों का पूर्वानुमान लगाने के लिए किया जाता है। इसके अंतर्गत घरों की कीमत का पूर्वानुमान, बिक्री का अनुमान तथा मौसम संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण जैसे वास्तविक जीवन के उदाहरणों पर चर्चा की गई।

सत्र में वीका टूल के माध्यम से डेटा सेट का विश्लेषण करने, उपयुक्त रिग्रेशन एल्गोरिदम का चयन करने तथा मशीन लर्निंग मॉडल तैयार करने की प्रक्रिया को समझाया गया। 
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि प्रभावी मशीन लर्निंग मॉडल विकसित करने के लिए डेटा की गुणवत्ता, उपयुक्त एल्गोरिदम का चयन तथा मॉडल के परिणामों का सही मूल्यांकन अत्यंत आवश्यक है। वीका जैसे टूल विद्यार्थियों को विभिन्न एल्गोरिदम का प्रयोग करने, उनके परिणामों की तुलना करने तथा वास्तविक समस्याओं के समाधान विकसित करने का अवसर प्रदान करते हैं।

कार्यक्रम आयोजन समिति के सदस्य  दिलीप कुमार यादव, अशोक कुमार यादव एवं कृष्ण कुमार यादव ने कार्यक्रम का सफलतापूर्वक संचालन किया। उक्त व्याख्यान में विभाग के शिक्षक डॉ. संतोष कुमार यादव, प्रवीण कुमार पाण्डेय, डॉ. दिव्येंदु कुमार मिश्रा, रितेश  कुमार एवं  दीप्ति पाण्डेय सहित अन्य शिक्षकगण भी उपस्थित रहे।