Friday, 25 September 2026

अंत्योदय से ही साकार होगा नवभारत का सपना : प्रो. संजीत गुप्ता

तकनीक, शिक्षा तभी सार्थक, जब पहुंचे अंतिम व्यक्ति तकः प्रो. आर.के. सिंह
भारतीय ज्ञान परंपरा एवं नवभारत की वैचारिक आधारभूमि विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी
      जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट सभागार में शुक्रवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद में निहित भारतीय ज्ञान परंपरा एवं नवभारत की वैचारिक आधारभूमि विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
       कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय, बलिया के पूर्व कुलपति प्रो. संजीत कुमार गुप्ता ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में ज्ञान,  दर्शन,  विज्ञान और लोककल्याण को एक सूत्र में पिरोया गया है। भारत की ज्ञान परंपरा केवल भारत तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसने पूरे विश्व को ज्ञान और मानव कल्याण का मार्ग दिखाया है। उन्होंने कहा कि आज भारत अध्यात्म और दर्शन के साथ विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में भी निरंतर आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा की वैज्ञानिक दृष्टि का उल्लेख करते हुए कहा कि आर्यभट्ट ने पृथ्वी के गोल होने और खगोलीय ज्ञान के संबंध में महत्वपूर्ण तथ्य बहुत पहले प्रस्तुत कर दिए थे। 
प्रो. गुप्ता ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा का मूल उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं, बल्कि ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ और विश्व कल्याण की भावना के साथ ज्ञान का उपयोग करना है। 


कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चिंतन में अंत्योदय का भाव निहित है। आज की तकनीक तभी सार्थक है, जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि नवभारत की तकनीक गांव के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य, शिक्षा और विभिन्न सेवाओं को सहजता से पहुंचाने का माध्यम बन सकती है। 
     कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय के शिक्षक और विद्यार्थी अपने ज्ञान को केवल व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित न रखें, बल्कि उसे समाज के लिए उपयोगी बनाने का प्रयास करें। शिक्षा जब संवेदना से जुड़ेगी, तभी वह समाज और राष्ट्र के वास्तविक विकास का माध्यम बनेगी।   स्वागत भाषण करते हुए पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ के निदेशक प्रो. मानस पांडेय ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं से यह प्रश्न करना चाहिए कि वह कौन है और उसका लक्ष्य क्या है। अपने लक्ष्य को पहचानकर पूरी निष्ठा से कर्म पर ध्यान केंद्रित किया जाए तो सफलता और कैरियर का मार्ग स्वतः प्रशस्त होता है। 
इसके पूर्व मुख्य अतिथि और अध्यक्षता कर रहे कुलपति जी को अभिनंदन पत्र और अंगवस्त्रम से सम्मानित किया गया। 
   

इस अवसर पर छात्र अभिनव कीर्ति पांडेय ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने विपरीत परिस्थितियों में भी समाज का मार्गदर्शन किया। उन्होंने वसुधैव कुटुंबकम की भावना को जीवन-दृष्टि के रूप में स्वीकार करने तथा अंत्योदय के सिद्धांत को सामाजिक समरसता और सर्वजन हित से जोड़ने का मार्ग दिखाया। 
 कार्यक्रम का संचालन दीनदयाल शोधपीठ के सचिव डॉ. अनुराग मिश्रा ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. राहुल राय ने किया।
इस अवसर पर प्रो. प्रमोद कुमार यादव, प्रो. अविनाश पाठक, प्रो. अजय द्विवेदी, प्रो. मनोज मिश्रा, प्रो. मिथिलेश सिंह, प्रो. रजनीश भास्कर, डॉ. विजय सिंह, डॉ. राहुल सिंह, डॉ. शैलेंद्र सिंह,  डॉ. संतोष कुमार पांडेय, डॉ.विजय प्रताप तिवारी, डॉ. सुशील कुमार मिश्र, प्रो. रवि प्रकाश, प्रो. प्रमोद कुमार, प्रो. गिरधर मिश्रा, प्रो. विनोद कुमार गुप्ता, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. रशिकेश, डॉ. जाह्नवी श्रीवास्तव, कर्मचारी संघ के महामंत्री राधेश्याम सिंह मुन्ना, डॉ. आलोक गुप्ता, डॉ. अंकित कुमार सिंह, डॉ. वनिता सिंह, डॉ. प्रियंका,डॉ. आश्रेया दुबे,डॉ. शुभम सिंह, डॉ. विपिन सिंह, डॉ. दिनेश कुमार सिंह,रविकेश मौर्य, योगेश उत्तम सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

Thursday, 24 September 2026

नशामुक्त युवा–विकसित भारत के संकल्प के साथ मनाया गया एन एस एस स्थापना दिवस

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर में कंज्यूमर वॉयस, नई दिल्ली एवं कंज्यूमर गिल्ड, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय सेवा योजना स्थापना दिवस के अवसर पर “नशा मुक्त युवा–विकसित भारत” अभियान के अंतर्गत युवाओं में शराब के दुष्प्रभावों की रोकथाम, जागरूकता एवं संरक्षण विषयक युवा संवेदनी कार्यशाला का आयोजन किया गया। 
कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. आर. के. सिंह ने कहा कि युवाओं की ऊर्जा और प्रतिभा राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है। नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से युवाओं को बचाने के लिए परिवार, शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संगठनों और युवाओं को मिलकर कार्य करना होगा। 
मुख्य वक्ता अभिषेक श्रीवास्तव कंज्यूमर गिल्ड लखनऊ ने कहा कि एक जागरूक युवा वही है जो किसी वस्तु या आदत को अपनाने से पहले उसके प्रभाव और परिणाम को समझता है। आज आवश्यकता है कि हम युवाओं को केवल यह न कहें कि “नशा मत करो”, बल्कि उन्हें यह भी बताएं कि नशे से दूर रहकर जीवन में बेहतर विकल्प क्या हो सकते हैं—खेल, योग, अध्ययन, नवाचार, सामाजिक सेवा और रचनात्मक गतिविधियां।


सुश्री नीलजना बोस ने अपना उद्बोधन एक प्रस्तुतिकारण के साथ प्रस्तुत किया कई बार युवाओं पर दोस्तों का दबाव, सामाजिक वातावरण या यह सोच प्रभाव डालती है कि शराब पीना आधुनिक जीवनशैली का हिस्सा है। हमें इस सोच पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। 

 डीएसडब्ल्यू प्रो. प्रमोद कुमार यादव ने कहा कि   आज युवा जीवन में अनेक प्रकार के दबावों से गुजरता है—पढ़ाई का दबाव, करियर की चिंता, प्रतिस्पर्धा, सामाजिक अपेक्षाएं और साथियों का प्रभाव। ऐसे समय में हमें युवाओं को केवल उपदेश देने के बजाय उन्हें सही जानकारी, सही मार्गदर्शन और सकारात्मक वातावरण देना होगा। मैं कंज्यूमर वॉयस, नई दिल्ली एवं कंज्यूमर गिल्ड, लखनऊ का भी आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने युवाओं के बीच इस महत्वपूर्ण विषय को लेकर संवाद की पहल की है। 
राष्ट्रीय सेवा योजना स्थापना दिवस पर नशा मुक्ति युवा फॉर विकसित थीम पर स्वयंसेवकों निशांत एवं अंजली की टीम ने नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। रिया गुप्ता, आस्था सोनी, अंतिम विश्वकर्मा, अंजली चौहान, संध्या विंद ने नशा मुक्त पर सॉन्ग प्रस्तुत किया। अतिथियों का स्वागत परिचय कार्यक्रम समन्वयक डॉ शशिकांत यादव ने किया ।

कार्यक्रम का संचालन अभिनव कीर्ति पांडेय और श्री ओम प्रकाश मिश्र ने किया धन्यवाद ज्ञापन सुमित सिंह ने किया। इस अवसर पर डॉ श्याम कन्हैया डॉ अनुराग मिश्र, डॉ श्वेता पांडेय, डॉ राधिका उर्मिलिया, डॉ विवेक डॉ रिचा सिंह, अर्पिता यादव, शिवांगी कौशल,  आर्ची वर्मा, बृजेश एवं बड़ी संख्या में स्वयंसेवक उपस्थित रहे।

आधुनिकता की तेज रफ्तार में शाश्वत मूल्यों को बचाए रखना जरूरी : प्रो. राकेश कुमार सिंह

दैनिक जागरण की विचार संगोष्ठी में भारतीय और पश्चिमी मूल्यबोध, धर्म, कर्तव्य, चरित्र और बदलते सामाजिक सरोकारों पर हुआ मंथन

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के संकाय भवन स्थित कॉन्फ्रेंस हाल में गुरुवार को दैनिक जागरण की ओर से ‘आधुनिकता के दौर में शाश्वत मूल्य’ विषय पर विचार संगोष्ठी आयोजित की गई। मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह ने कहा कि समय और तकनीक लगातार बदल रहे हैं, लेकिन मनुष्य को मनुष्य बनाए रखने वाले शाश्वत मूल्य कभी पुराने नहीं होते। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव के बीच ज्ञान और आधुनिकता के साथ विवेक, निष्ठा, जिम्मेदारी और संवेदनशीलता को मजबूत बनाए रखना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि एआइ लिख सकता है और कई कार्य कर सकता है, लेकिन सही और गलत का निर्णय मनुष्य को ही करना होगा। तकनीक का उपयोग सुविधा बढ़ाने के लिए हो, विवेक को कमजोर करने के लिए नहीं। इंटरनेट मीडिया पर किसी संदेश को प्रसारित करने से पहले उसकी सत्यता पर विचार करना चाहिए। डीपफेक और साइबर अपराध जैसी चुनौतियों के बीच डिजिटल माध्यमों का जिम्मेदारी से इस्तेमाल जरूरी है। आधुनिकता का अर्थ अपनी जड़ों और मूल्यों को छोड़ना नहीं, बल्कि नए साधनों का उपयोग मानवीय मूल्यों के साथ करना है।

कुलपति ने एकलव्य और गुरु द्रोणाचार्य के प्रसंग का उल्लेख करते हुए गुरु के प्रति समर्पण और त्याग को शाश्वत मूल्य बताया। कहा कि विश्वविद्यालय केवल भवन, उपकरण और सुविधाओं से नहीं बनता, बल्कि यहां की गतिविधियों और विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण से उसकी पहचान बनती है। बच्चों के लिए किया गया प्रत्येक सकारात्मक प्रयास सामूहिक प्रभाव पैदा करता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के लिए उनका मन 24 घंटे के बजाय चार घंटे और काम करने को कहता है, क्योंकि काम की सार्थकता समय की लंबाई से नहीं, बल्कि परिणाम से तय होती है।
उन्होंने निष्ठा, सच्ची सेवा और जिम्मेदारी को भविष्य निर्माण का आधार बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के संसाधनों का उपयोग विद्यार्थियों के विकास में होना चाहिए। स्टेडियम का उल्लेख करते हुए कहा कि खेल शारीरिक क्षमता के साथ अनुशासन, टीम भावना और संघर्ष की क्षमता विकसित करते हैं। परिसर को हरा-भरा रखने के लिए पौधे लगाने के साथ उनकी देखभाल भी जरूरी है। उन्होंने सच बोलने तथा गरीब और जरूरतमंद की मदद करने का साहस रखने का आह्वान किया।
मुख्य वक्ता नवाचार एवं इंक्यूबेशन केंद्र के कार्यकारी निदेशक प्रो. अविनाश पार्थीडेकर ने कहा कि भारतीय समाज की जीवन-पद्धति में पीढ़ियों से चले आ रहे मूल्य आज भी महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने मैकियावेली के विचारों के माध्यम से राजनीति कौशल, आचरण, निर्णय क्षमता और समय के सदुपयोग की चर्चा की। रामायण और महाभारत के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में व्यक्ति की पहचान उसके चरित्र और आचरण से होती है। उन्होंने चार्ल्स डार्विन के सिद्धांत, अर्थशास्त्र और पश्चिमी जीवन-दृष्टि के उदाहरणों से भारतीय और पश्चिमी मूल्यबोध के अंतर को समझाया तथा मनुस्मृति का उल्लेख करते हुए धर्म को आचरण और कर्तव्य से जोड़कर समझाया।
विषय प्रवर्तन करते हुए जनसंचार एवं पत्रकारिता के संकायाध्यक्ष प्रो. मनोज मिश्र ने गुरु-शिष्य परंपरा, एकलव्य और सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र के प्रसंगों के माध्यम से शाश्वत मूल्यों की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि मूल्य किसी एक काल, व्यक्ति या वर्ग तक सीमित नहीं होते, बल्कि पीढ़ियों को दिशा देते हैं। भारतीय परंपरा में धर्म का उद्देश्य विद्वेष पैदा करना नहीं, बल्कि मानवता, सद्भाव और नैतिक आचरण को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता को स्वीकार करते हुए अपनी सांस्कृतिक चेतना और नैतिक आधार को सुरक्षित रखना समाज की जिम्मेदारी है।
स्वागत भाषण में डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर ने कहा कि तकनीकी बदलाव के साथ जीवन की प्राथमिकताएं तेजी से बदल रही हैं, इसलिए आधुनिकता के दौर में शाश्वत मूल्यों पर विमर्श और अधिक प्रासंगिक हो गया है। शिक्षा और तकनीक तभी सार्थक हैं, जब वे व्यक्ति को बेहतर मनुष्य बनाने में सहायक हों। उन्होंने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। दैनिक जागरण के ब्यूरो प्रमुख सर्वेश कुमार मिश्र ने अतिथियों को बुके, स्मृति चिह्न एवं अंगवस्त्रम भेंट कर स्वागत किया। संचालन डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर ने किया।इस मौके पर व्यावहारिक मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्ष एवं मुख्य अनुशास्ता प्रो. अजय प्रताप सिंह, डॉ. अमरेंद्र कुमार सिंह, डॉ. चंदन सिंह, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. श्याम कन्हैया सिंह, डॉ. जाह्नवी श्रीवास्तव, डॉ. अन्नू त्यागी और लक्ष्मी मौर्य समेत विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी एवं अन्य लोग उपस्थित रहे।

Wednesday, 23 September 2026

शिक्षा ही राष्ट्र का असली सशक्तिकरण : प्रो. आर. के. सिंह

अपोलो पाइप्स लिमिटेड की सीएसआर ने की  पहल

प्रेरणा पाठशाला के 64 बच्चों को मिले शैक्षणिक किट और चॉकलेट


जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर द्वारा ग्राम देवकली में 12 वर्षों से निरंतर संचालित 'निःशुल्क प्रेरणा पाठशाला' के 64 मेधावी छात्र-छात्राओं को बुधवार को अपोलो पाइप्स लिमिटेड की कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) पहल के तहत शैक्षणिक किट और चाकलेट वितरित की गईं।

विश्वविद्यालय परिसर स्थित उमानाथ सिंह इंजीनियरिंग संस्थान के स्मार्ट क्लास  में बुधवार को आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह ने कहा कि  शिक्षा वह आधारशिला है जो न केवल व्यक्ति का बल्कि पूरे राष्ट्र का भविष्य उज्ज्वल बनाती है। उन्होंने कहा कि जब समाज के वंचित वर्ग के बच्चे शिक्षा के दीये से जुड़ते हैं,  तो केवल एक परिवार नहीं,  बल्कि पूरा समाज प्रकाशमान होता है। प्रेरणा पाठशाला इसी दीपोत्सव का प्रतीक है। बच्चों के विकास के लिए निरंतर प्रयास होने चाहिए ताकि उनका समग्र विकास हो सके।

कार्यक्रम के दौरान कुलपति के हाथों स्कूल बैग, पानी की बोतल, पेंसिल किट एवं बिस्कुट पाकर बच्चों में उत्साह दिखा। किट में चॉकलेट न होने पर के लिए कुलपति जी ने चाकलेट मंगाकर बच्चों में वितरित किया, इससे बच्चों के चेहरे पर तुरंत मुस्कुराहट आ गई।

बताते चले की कार्यक्रम के संयोजक एवं प्रेरणा पाठशाला के संस्थापक-संचालक प्रो. राज कुमार (विभागाध्यक्ष, गणित विभाग) के अथक प्रयासों को इस अवसर पर विशेष रूप से सराहा गया।प्रो. राज कुमार ने कोचिंग की गतिविधियों एवं उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए बताया कि विश्वविद्यालय से जुड़े ग्रामीण क्षेत्रों के जरूरतमंद बच्चों को गुणवत्तापूर्ण एवं निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 'प्रेरणा कोचिंग' का संचालन किया जा रहा है।

कार्यक्रम में अपोलो पाइप्स लिमिटेड के डिप्टी रीजनल सेल्स मैनेजर (सेल्स एवं विपणन) शशिभूषण सिंह ने कहा कि कंपनी अपनी सीएसआर की  गतिविधियों के माध्यम से शिक्षा और सामाजिक विकास से जुड़े कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करती रही है। उन्होंने कहा कि जरूरतमंद विद्यार्थियों को शैक्षिक सामग्री उपलब्ध कराना उनके शैक्षणिक सफर को सुगम बनाने की दिशा में एक सार्थक पहल है। गौरतलब है कि वर्ष 2014 से विश्वविद्यालय से सटे देवकली गांव में 'प्रेरणा कोचिंग' का संचालन किया जा रहा है। संचालन डॉ. इंद्रेश कुमार ने किया। इस अवसर पर प्रो. सौरभपाल. डॉ. नृपेंद्र सिंह, डॉ दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ. सुनील कुमार, प्रशांत कुमार, डॉ. लक्ष्मी प्रसाद मौर्य समेत कई शिक्षक उपस्थित थे।