Tuesday 30 April 2024

पाकिस्तानी नंबर से फ़ोन आये तो हो जाये अलर्ट- डॉ दिग्विजय सिंह

-अनजान  नंबर से आए व्हाट्सएप कॉल तो न उठाएं

-नंबर की शुरुआत में रहता है +92

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के साइबर क्लब के नोडल अधिकारी एवं जनसंचार विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ दिग्विजय सिंह राठौर ने बताया कि इन दिनों पाकिस्तानी कोड का इस्तेमाल कर साइबर अपराधियों द्वारा  लोगों के नंबरों पर व्हाट्सएप कॉल कर धमकाया जा रहा है। उन्हें डराकर ऑनलाइन धन ट्रांसफर कराया जा रहा है। नंबर पर वर्दी में पुलिस की फोटो भी लगाकर लोगों को फसा रहे है।

उन्होंने कहा कि अगर आप व्हाट्सएप और फेसबुक का प्रयोग करते हैं तो अधिक सावधान रहने की जरूरत है।  साइबर अपराधी  आपके नंबर और व्यक्तिगत जानकारी को जुटा लेते हैं फिर व्हाट्सएप कॉल कर आपको डराते है। आपके किसी परिवार के सदस्य को किसी अपराध में लिप्त होने की जानकारी देते हैं और फिर उसे बचाने के लिए अकाउंट में पैसा ट्रांसफर कर लेते हैं। काल के दौरान यह इतना अधिक मनोवैज्ञानिक दबाव डालते हैं कि अगर कोई व्यक्ति तत्काल पैसा ट्रांसफर नहीं किया तो उसका बच्चा या परिवार का सदस्य गिरफ्तार हो जाएगा और उसे इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

पाकिस्तान के कोड वाले नंबर से व्हाट्सएप कॉल करने वाले हिंदी में बात करते हैं और आप उनकी बातचीत से यह नहीं पकड़ सकते कि वह कौन है।अभी कुछ दिनों पहले जनपद के एक व्यक्ति को फोन कर उसके बेटे को एक  मामले में फंसे होने का बताकर तीस हजार रुपये ट्रांसफर कर लिए गए। घर से बाहर रह रहे बच्चे से जब फोन कटने के बाद संपर्क किया तो पता चला कि वह पढ़ाई कर रहा है।

वहीं दूसरे व्यक्ति को फोन कर उनके बच्चे को किसी अपराध में लिप्त होने का भय दिखाया गया लेकिन वह जागरूक होने के कारण साइबर अपराधियों से बच गए। इसके साथ ही पूर्वांचल विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर को पाकिस्तान के कोड वाले नंबर से फोन आया और फोन करने वाले ने उन्हें पुराना मित्र बताया। जागरूक होने के कारण उनके साथ साइबर अपराध नहीं हो पाया।

इसके साथ ही कई विद्यार्थियों के अभिभावकों को फोन करके +92 कोड वाले नंबर से डराया जा रहा है।साइबर क्लब के नोडल अधिकारी डॉक्टर दिग्विजय सिंह राठौर ने कहा है कि पूरे देश में आजकल विदेशी नंबरों से साइबर अपराधी  व्हाट्सएप कॉल करके लोगों को डरा धमका रहे है। पाकिस्तान के कोड वाले कॉल के नंबर के पहले +92 लगा रहता है।अगर इस तरह की घटना आपके साथ होती है तो अलर्ट रहें, बिल्कुल डरे नहीं और इसकी शिकायत साइबर क्राइम पोर्टल अथवा साइबर थाने में दर्ज कराये। पहली नजर में तो लगता है कि यह फोन पाकिस्तान से आ रहा है लेकिन वर्चुअल नंबर का इस्तेमाल करके इंटरनेट और एप्प के माध्यम से ऐसी कॉल की जा रही है। ऐसा भी हो सकता है कि भारत से ही बैठकर पाकिस्तान के कोड का इस्तेमाल साइबर अपराधी कर रहे है।

दिव्यांग बच्चों को हौसला अफजाई की जरूरत: डॉक्टर जाह्नवी

बच्चों का किया गया मनोवैज्ञानिक परीक्षण

जौनपुर ‌। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के व्यावहारिक मनोविज्ञान विभाग के  शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का प्रतिनिधिमंडल रासमंडल स्थित रचना विशेष विद्यालय में दिव्यांग बच्चों का मनोवैज्ञानिक परीक्षण किया।

प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व असिस्टेंट प्रोफेसर  डॉ जान्हवी श्रीवास्तव एवं असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ मनोज कुमार पाण्डेय ने किया।रचना विशेष विद्यालय एवं शिक्षण प्रशिक्षण संस्थान (इंटीग्रेटेड इंस्टीट्यूट फॉर द  डिसेबल्ड चिल्ड्रन) में अपने छात्र  एवं छात्राओं ( प्रिया पाल,अकीदा नसीम शेख,अभीष्ट मौर्य ,दिव्या सोनकर ,अंजली मिश्रा अनिकेत सोनकर ,उजमा खान ,सोनाली मिश्रा ,अंजू प्रजापति, पूजा यादव,रेशमी पाल )के साथ मिलकर दिव्यांग बच्चों का मनोवैज्ञानिक परीक्षण किया और कहा दिव्यांग बच्चों को दया से ज्यादा हौसला अफजाई की जरूरत है। इंस्टिट्यूट के प्रिंसिपल  नसीम अख्तर एवं उनके अध्यापक- अध्यापिका डॉक्टर संतोष सिंह ,सचिन यादव, दामिनी यादव ,लाल साहब ,हरिंदर ,नीतू यादव ,रवि रंजन प्रसाद, गौतम चंद्र एवं नीरज तिवारी के कार्यों की सराहना की ।


Sunday 28 April 2024

पीयू के दो शिक्षक आईआईटी में शोध अध्येता हेतु चयनित

आई आई टी दिल्ली में 2 माह तक करेंगे शोध

 

जौनपुर. वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर को दो शिक्षकों का चयन आई आई टी दिल्ली में शोध अध्येता के लिए हुआ है। इसके अंतर्गत परिसर स्थित रज्जू भइया संस्थान के भू एवं ग्रहीय विज्ञान विभाग के शिक्षक डा. श्याम कन्हैया आई आई टी दिल्ली के एटमास्फेरिक साइंस विभाग की डा. यामा दीक्षित के साथ शोध कार्य करेंगे तथा गणित विभाग के सौरभ कुमार सिंह आई आई टी दिल्ली में गणित विभाग के प्रो. विप्लव बसक के साथ शोध कार्य करेंगे। उक्त शोध अध्ययन की अवधि दो माह की होगी जिसमें वह अपने विषय से संबंधित शोध करेंगे । इस फेलोशिप प्रोग्राम में देश भर से 147 लोगों का चयन हुआ है जो विज्ञान की विभिन्न विधाओं पर शोध करेंगे।
कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा है कि यह विश्वविद्यालय के शिक्षकों में शोध की गुणवत्ता एवं अनुसंधान के प्रति गहरे लगाव को प्रदर्शित करता है. वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के शिक्षक आज अपने शोध कार्यों के चलते अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे है. रज्जू भइया संस्थान के निदेशक प्रो. प्रमोद यादव, प्रो. मनोज मिश्र, विभागाध्यक्ष डा. नीरज अवस्थी, डॉ दिग्विजय सिंह राठौर सहित समस्त शिक्षकों ने बधाई दी है।

Tuesday 23 April 2024

फील्ड वाटर टेस्टिंग किट की मदद से पानी की केमिकल जांच संभव

 वायु में पीएम 10 एवं 2.5 की अधिकता स्वास्थ्य के लिए हानिकारक : राकेश कुमार सिंह

वायु और जल की गुणवत्ता जांचने के विभिन्न तरीकों पर हुआ व्याख्यान

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय परिसर स्थित प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) भौतिकीय विज्ञान अध्ययन एवं शोध संस्थान के रसायन विज्ञान विभाग में कुलपति प्रो. वंदना सिंह के प्रेरणा से एम.एससी. के विद्यार्थियों द्वारा संचालित केमिकल कम्युनिकेशन सोसायटी द्वारा विश्व पृथ्वी दिवस पर वॉटर एवं एयर टेस्टिंग विषय पर ऑनलाइन संगोष्ठी का आयोजन किया गया I

इस कार्यक्रम में आई टी एस लेबोरेट्रीज, नोएडा के निदेशक राजेश कुमार सिंह बतौर मुख्य वक्ता उपस्थित रहे I संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता ने बताया कि वायु के गुणवत्ता को कुल बारह मापदंडों पर मापा जाता है तथा वायु में  पीएम 10 की मात्रा में अधिक बढ़ोत्तरी होने से मनुष्य की औसत आयु में पाँच से छह वर्षो की गिरावट आ रही है तथा पीएम 10  की वायुमंडल में अधिकता मनुष्य मे कैंसर होने की मुख्य वजहों मे से एक हैं।

विद्यार्थियों के साथ वॉटर टेस्टिंग के विभिन्न तरीकों को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि पेयजल को मुख्यतः रंग, गंध और स्वाद के आधार पर विश्लेषित किया जाता है। उन्होंने बताया की फील्ड टेस्ट किट्स पानी की क्वालिटी जांचने के लिए एक तरह का किट है, इस किट्स के जरिए पानी में मौजूद आर्सेनिक, हानिकारक बैक्टीरिया, रासायनिक अशुद्धियां, एलिमेंट्स, पार्टिकल्स आदि का पता लगाया जा सकता है, फील्ड टेस्ट किट्स (FTK) की मदद से पानी की जांच आसानी से किया जा सकता है। आरओ वॉटर के अधिकाधिक उपभोग के दुष्परिणामों पर चर्चा करते हुए कहा कि बाजार में आज कल मिलने वाले 99 प्रतिशत आरओ पेयजल अम्लीय प्रकृति के हैं और उसमे खनिज तत्वों का स्थान कार्बन डाई आक्साइड ने ले रखा है। अम्लीय आरओ जल का लंबे समय तक सेवन स्वास्थ के लिए नुकसानदायक है।

संगोष्ठी में मुख्य वक्ता का स्वागत करते हुए रसायन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रमोद कुमार ने विश्लेषणात्मक रसायन के विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।

संगोष्ठी का संचालन केमिकल कम्युनिकेशन सोसाइटी के सचिव व एमएससी के छात्र हर्ष प्रताप सिंह ने किया । धन्यवाद ज्ञापन एमएससी की छात्रा सुचिता मिश्रा ने किया। इस अवसर पर रसायन विभाग के डॉ. अजीत सिंह, डॉ. नितेश जायसवाल, डॉ. मिथिलेश यादव, डॉ. दिनेश वर्मा, छात्र, मंजीत गुप्ता, आदित्य सिंह, सुशील मिश्रा, आकाश सेठ, अमृता मिश्रा, मोहित मिश्रा सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी व शोधार्थी उपस्थित रहे .