Tuesday, 14 May 2019

बदलते दौर में संस्कार युक्त शिक्षा की जरूरत- कुलपति डॉ श्रेयांश

विश्वविद्यालय के प्रोफेसर राजेंद्र सिंह रज्जू भैया भौतिकी विज्ञान अध्ययन एवं शोध संस्थान में बदलते परिवेश में उच्च की शिक्षा एवं चुनौतियां विषय पर  मंगलवार को एक गोष्ठी का आयोजन किया गया।
बतौर मुख्य अतिथि महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय कैथल हरियाणा के कुलपति डॉ श्रेयांश द्विवेदी ने कहा कि भारत अर्पण, समर्पण और तर्पण की भूमि है हम शिक्षा के क्षेत्र में अपने विद्यार्थियों को इससे दूर रख रहे हैं जिससे निराशाजनक परिणाम आ रहे हैं।आज रोजगार के पैकेज के चक्कर में उन्हें संस्कारविहीन शिक्षा की ओर धकेला जा रहा है जो समाज के लिए घातक है। उन्होंने कहा कि बदलते परिवेश में हमें संस्कारयुक्त शिक्षा की जरूरत है। उन्होंने कहा कि तकनीकी के क्षेत्र में हमें अपने परंपरागत विज्ञान को भी संजोए रखने की जरूरत है आज ऐसे शोध की आवश्यकता है जिससे विदेशों में हमारे देश के योगदान पर प्रकाश डाला जा सके।
कुलपति प्रोफेसर डॉ राजाराम यादव ने कहा कि विश्वविद्यालय का मतलब विश्व के सभी विधाओं की एक जगह शिक्षा उपलब्ध कराने से है इन उद्देश्यों की पूर्ति भारत के नालंदा जैसे विश्वविद्यालय करते थे। बदलते दौर में विश्वविद्यालय को पूर्ण स्वायत्तता की आवश्यकता है जिससे वह शीघ्र पाठ्यक्रमों को मूर्त रूप दे सके।
अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रोफेसर अजय द्विवेदी ने कहा कि बेरोजगारी रोकने के लिए विद्यार्थियों में कौशल युक्त शिक्षा की जरूरत है। 
संस्थान के निदेशक डॉ प्रमोद यादव ने अतिथियों का स्वागत किया। कुलपति प्रोफेसर डॉ राजाराम यादव ने डॉक्टर श्रेयांश द्विवेदी को कुलाधिपति राम नाईक की पुस्तक चरैवेति- चरैवेति एवं विश्वविद्यालय की पत्रिका गतिमान भेंट की।
इस अवसर पर प्रो के पी सिंह, प्रो ए के श्रीवास्तव, प्रो अजय प्रताप सिंह, डॉ राजकुमार, डॉ संतोष कुमार, डॉ सुनील कुमार, डॉ दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ अमरेंद्र सिंह, डॉ पुनीत धवन, डॉ मनीष गुप्ता, डॉ गिरिधर मिश्र, डॉ नीरज अवस्थी समेत तमाम शिक्षक मौजूद रहे।

Wednesday, 1 May 2019

विश्वविद्यालय के उन्नयन के लिए मिल कर करें काम



माननीय  कुलपति जी के कार्यकाल के 2 वर्ष पूरे होने पर शिक्षकों ने दी बधाई
जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो डॉ राजाराम यादव को कार्यकाल के दो वर्ष पूरे होने पर बुधवार को कुलपति सभागार में शिक्षकों एवं  अधिकारियों ने बधाई दी. कुलपति प्रो डॉ राजराम यादव ने कहा कि विश्वविद्यालय नया कीर्तिमान स्थापित करें इसके लिए सबको मिल कर काम करना पड़ेगा। कुलपति डॉ राजाराम यादव ने कहा कि विश्वविद्यालय में अशोक सिंहल  परम्परागत विज्ञान एवं तकनीकी संस्थान की स्थापना अन्तिम चरण में है। जिसके अंतर्गत योग चिकित्सा विज्ञान, संगीत विभाग, गौ विज्ञान अनुसंधान केन्द्र, परम्परागत औषधि विज्ञान रक्षा एवं आन्तिरिक सुरक्षा विज्ञान जैसे पाठ्यक्रमों की शिक्षा दी जाएगी.उन्होंने कहा कि शिक्षकों आवसीय सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 36 भवनों का निर्माण कराया जा रहा है इस के साथ ही केन्द्रीयकृत मूल्यांकन के लिए बहुमंजिलीय बाला साहब देवरस मूल्यांकन केंद्र  का निर्माण शीघ्र पूरा होने वाला है. प्रो बी बी तिवारी ने कहा कि अनुसंधान उन्नयन हेतु इन्स्टीटयूशनल प्रोस्ट डाक्टरेट फैलोशिप देने वाला   यह पहला विश्वविद्यालय है . ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट सेल की सक्रियता से  लगभग दो हजार  छात्रों का कैंपस सेलेक्शन  हुआ। निःशुल्क कोचिंग की शुरूआत एवं बीए एलएलबी पंचवर्षीय एकीकृत पाठ्यक्रम से यहाँ के विद्यार्थियों को बहुत सहूलियत मिली है. इसी क्रम में प्रो वंदना राय  ने कहा कि परिसर में राजेन्द्र सिंह प्रो0 राजेन्द्र सिंह (रज्जू भइया) भौतिकीय विज्ञान अध्ययन एवं शोध संस्थान की स्थापना से इस क्षेत्र के विद्यार्थियों को बेसिक साइंस की बेहतर शिक्षा मिली है. प्रो मानस पाण्डेय ने कहा कि आपके कार्यकाल में विश्वविद्यालय  शोध गंगा पोर्टल पर प्रदेश में पहले और देश में तीसरे स्थान पर है . विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना की पूरे देश में सर्वाधिक 600 इकाइयों का गठन हुआ एवं ‘‘युवादिवस समारोह’’ के आयोजन राष्ट्रीय सेवा योजना इकाइयों के माध्यम से सम्पन्न हए। जिसका प्रशस्ति पत्र  भारत सरकार द्वारा प्राप्त हुआ। इसी के साथ केरल त्रासदी पर राष्ट्रीय सेवा योजना के विश्वविद्यालय  तीन लाख उनचास  हजार का योगदान भी किया जो कि विश्वविद्यालय के  मानवीय पक्ष को दिखाता है .इस अवसर पर वित्त अधिकारी एम के सिंह, कुलसचिव सुजीत कुमार जायसवाल, परीक्षा नियंत्रक डॉ राजीव कुमार, प्रो अजय द्विवेदी, प्रो अशोक  श्रीवास्तव, प्रो वी डी शर्मा, प्रो अजय प्रताप सिंह,डॉ मनोज मिश्र, प्रो रामनारायण,डॉ रजनीश भास्कर, डॉ रसिकेस, डॉ संजीव गंगवार, डॉ के एस तोमर, डॉ मुराद अली, डॉ पुनीत धवन समेत तमाम शिक्षक उपस्थित रहे .

Thursday, 25 April 2019

अल्ट्रासोनिक तरंगों से होगी नैनो पदार्थों की जांच



रज्जू  भैया भौतिकीय विज्ञान अध्ययन एवं  शोध संस्थान में लगा देश का नवीनतम जीटा  एपीएस 

विश्वविद्यालय के प्रोफेसर राजेंद्र सिंह रज्जू भैया भौतिकीय  विज्ञान अध्ययन  एवं शोध संस्थान में शोध कार्य के लिए जीटा  एपीएस एवं टीपीएस 500 की स्थापना की गई।  यह  नवीनतम उपकरण देश में पहली बार किसी विश्वविद्यालय में लगाया गया है। इसके लगने से शोध कार्यों को नई दिशा मिलेगी। गुरुवार को कुलपति प्रोफेसर डॉ राजाराम यादव ने इसका निरीक्षण कर वैज्ञानिकों से इस पर चर्चा की। इसको स्थापित कराने के लिए दिल्ली और मुंबई के वैज्ञानिक विश्वविद्यालय परिसर में आए हुए है। यह जीटा उपकरण मेडिकल साइंस,टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज की जरूरतों के साथ वैज्ञानिकों एवं शोधार्थियों  के लिए उपयोगी है। 
यह उपकरण विलियन में 05 नैनोमीटर से लेकर 100 माइक्रॉन तक के पदार्थ का आकार माप सकता है। साथ ही यह कणों के आकार का भी आकलन  करेगा।  संस्थान में टीपीएस 500 एस उपकरण की भी  स्थापना की गई है। इस उपकरण से बहुत कम प्रवाह वाले विलयन  को भी नापा जा सकता है।  साथ ही यह किसी भी पदार्थ की कंडक्टिविटी -40 (माइनस चालीस ) से 200 सेंटीग्रेट के तापमान पर भी माप  कर सकता है.
इस  संस्थान में  स्थापित विश्वस्तरीय उपकरणों की सुविधा का लाभ देश के शोध छात्र, वैज्ञानिक एवं  उद्योग जगत के लोग ले सकेंगे।  इन उपकरणों के  संचालन की जिम्मेदारी  संस्थान के निदेशक डॉ प्रमोद कुमार यादव को दी गयी  है। उपकरणों की तकनीकी की जानकारी  के लिए  संस्थान के  शिक्षक डॉ पुनीत धवन एवं डॉ गिरिधर मिश्र ने  अमेरिका के वैज्ञानिकों से ऑनलाइन ट्रेनिंग ली। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव सुजीत कुमार जायसवाल, वित्त अधिकारी एम के सिंह,  इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो के पी सिंह,प्रो मानस पांडे, प्रो अशोक  श्रीवास्तव, डॉ मनोज मिश्र,  प्रो अजय प्रताप सिंह, डॉ राजकुमार, डॉ संतोष कुमार, डॉ के एस  तोमर, डॉ रजनीश भास्कर, डॉ दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ सुनील कुमार, डॉ जान्हवी श्रीवास्तव, डॉ मनोज पांडेय, डॉ नितेश जायसवाल, डॉ अजीत सिंह, डॉ अभिषेक,डॉ अमित वत्स, डॉ पी के कौशिक, डॉ  संजय श्रीवास्तव  सहित तमाम लोग उपस्थित रहे। 

Wednesday, 24 April 2019

सूचना तकनीकी से उच्च शिक्षण संस्थान हुए लाभान्वित


विश्वविद्यालय के व्यवसाय प्रबंधन विभाग एवं अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के सयुंक्त तत्वाधान में शौक्षिणक नेतृत्व प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन वक्ताओं ने उच्च शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए अनेक उपायों पर विचार विमर्श किया। यह सात दिवसीय अकादमिक प्रशिक्षण कार्यक्रम भारत सरकार के पंडित मदन मोहन मालवीय राष्ट्रीय शिक्षक मिशन एवं शिक्षण द्वारा आयोजित है।
मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, प्रयागराज, के व्यवसाय प्रबंधन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर जी.पी.साहू ने उच्च शिक्षा के प्रभावी शासन के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करने पर बल दिया। सूचना प्रौद्योगिकी क्रांति से उच्च शिक्षण संस्थान लाभान्वित हुए हैं। ऑनलाइन परीक्षा आवेदन, ऑनलाइन परीक्षा परिणाम एवं अंक पत्र प्राप्त करना, ऑनलाइन पाठ्यक्रम सामग्री से छात्रों को शिक्षा ग्रहण करने में आसानी हुई है। इससे भ्रष्टाचार पर भी रोक लगी है। ई-पुस्तक ,ई-जर्नल एवं मूक्स( एम.ओ.ओ.सी.एस) आदि के द्वारा उच्च शिक्षा क्षेत्र में शिक्षकों एवं छात्रों के पाठय-पठन कार्यक्रम से शिक्षा और प्रगतिशील हुई है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे सत्र में एन.सी.ई.आर.टी नई दिल्ली,के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर एस.के.यादव ने उच्च शिक्षा संस्थान के बुनियादी ढांचों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। अच्छे भवन एवं आधुनिक प्रयोगशाला से विश्वविद्यालय के पाठय-पठन कार्यक्रम को सुचारू रूप से संचालित करने में सरलता होती है। भारत के आई.आई.टी एवं  आई.आई.एम इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं। 
व्यवसाय प्रबंधन विभाग के अध्यक्ष एवं कार्यक्रम के संयोजक डॉ मुराद अली ने कार्यक्रम का संचालन किया एवं डॉ सुशील सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया।