Friday, 16 October 2026

पूर्वांचल विश्वविद्यालय में एआई एवं एमएल लर्निंग सीरीज का तीसरा व्याख्यान संपन्न


वीका टूल से विद्यार्थियों ने सीखे क्लासिफिकेशन अल्गोरिथम  के व्यावहारिक उपयोग, 144 छात्र-छात्राओं ने किया प्रतिभाग

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर के फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग द्वारा संचालित ‘ एआई एवं एमएल  लर्निंग सीरीज ’ के तीसरे व्याख्यान का शुक्रवार को सफल आयोजन किया गया। “क्लासिफिकेशन अल्गोरिथम  ” विषय पर आयोजित इस व्याख्यान में विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों के 144 छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। सत्र का उद्देश्य विद्यार्थियों को मशीन लर्निंग के प्रमुख वर्गीकरण एल्गोरिदम तथा उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों से परिचित कराना था।

विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में एआई एवं एमएल  लर्निंग सीरीज का आयोजन किया जा रहा है । मुख्य विशेषज्ञ एवं रिसोर्स पर्सन डॉ. अन्नुश्री अग्रवाल ने विद्यार्थियों को क्लासिफिकेशन अल्गोरिथम की मूलभूत अवधारणाओं तथा वीका टूल के माध्यम से उनके व्यावहारिक उपयोग की जानकारी दी। 

व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों ने डिसीजन ट्री तथा केएनएन  जैसे प्रमुख वर्गीकरण एल्गोरिदम की कार्यप्रणाली को समझा। इसके साथ ही मशीन लर्निंग मॉडल के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए शुद्धता, परिशुद्धता, पुनःप्राप्ति दर, संवेदनशीलता तथा काम्प्लेक्स मैट्रिक्स  जैसे महत्वपूर्ण मानकों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञ ने ई-मेल में स्पैम की पहचान तथा बैंकिंग क्षेत्र में ऋण जोखिम के आकलन जैसे वास्तविक जीवन के उदाहरणों के माध्यम से क्लासिफिकेशन अल्गोरिथम  की उपयोगिता को स्पष्ट किया।

डॉ. अग्रवाल ने बताया कि प्रभावी मशीन लर्निंग मॉडल विकसित करने के लिए उपयुक्त एल्गोरिदम का चयन, डेटा का सही विश्लेषण तथा मॉडल के प्रदर्शन का उचित मूल्यांकन अत्यंत आवश्यक है। वीका  जैसे टूल की सहायता से विद्यार्थी विभिन्न एल्गोरिदम का प्रयोग कर सकते हैं और उनके परिणामों की तुलना करते हुए वास्तविक समस्याओं के समाधान विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

कार्यक्रम का आयोजन फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के डीन प्रो. सौरभ पाल तथा कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष डॉ. विक्रांत भटेजा के मार्गदर्शन में किया गया। आयोजन समिति के सदस्य दिलीप कुमार यादव, अशोक कुमार यादव, कृष्ण कुमार यादव, डॉ. संतोष कुमार यादव एवं प्रवीन कुमार पाण्डेय का कार्यक्रम के सफल संचालन में महत्वपूर्ण योगदान रहा।

ड्रोन तकनीक में नवाचार से खुलेंगे नए अवसर: कुलपति


सी-डैक, नोएडा के वैज्ञानिकों ने दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण
पाँच दिवसीय ड्रोन तकनीक कार्यशाला का समापन

 पूर्वांचल विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग में आयोजित पाँच दिवसीय ड्रोन तकनीक कार्यशाला का समापन समारोह शुक्रवार को संपन्न हुआ। कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों ने ड्रोन की असेंबलिंग, उसके विभिन्न घटकों की कार्यप्रणाली, उड़ान भरने तथा नियंत्रण की तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया।
 विद्यार्थियों के लगन से खुश होकर आए वैज्ञानिकों ने विश्वविद्यालय को एक ड्रोन उपहार में दिया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर. के. सिंह ने कहा कि ड्रोन तकनीक आज केवल तकनीकी प्रयोग का विषय नहीं है, बल्कि कृषि, आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवा, पर्यावरण संरक्षण एवं राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में देश की प्रगति का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को इस प्रकार के प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान का उपयोग नई परियोजनाएँ विकसित करने, अनुसंधान करने और समस्याओं के स्थानीय समाधान खोजने के लिए करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों को लगातार आगे बढ़ाएगा, ताकि विद्यार्थी अपने ही परिसर में आधुनिक तकनीक सीखने तथा विशेषज्ञों से सीधे संवाद करने का अवसर प्राप्त कर सकें। कुलपति ने सी-डैक, नोएडा के वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों के योगदान की सराहना की और कहा कि ऐसी कार्यशालाएँ विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तकनीकी आत्मविश्वास तथा नवाचार की भावना विकसित करती हैं।
पाँच दिनों तक चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विद्यार्थियों को व्याख्यान, प्रस्तुतियों, हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण तथा प्रायोगिक गतिविधियों के माध्यम से ड्रोन तकनीक के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई। 
कार्यशाला के अंतिम दिन सी-डैक, नोएडा की वैज्ञानिक डॉ. कल्पना जौहरी ने विद्यार्थियों को विभिन्न उपकरणों के मध्य संचार के नियमों तथा संचार स्थापित होने की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया। अन्य विशेषज्ञों में श्रीमती ईशा गुप्ता, श्रीमती किरण वालिया एवं श्री देवेश वर्मा ने प्रस्तुतियों और प्रायोगिक प्रदर्शनों के माध्यम से विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी विकास से अवगत कराया।
कार्यशाला में बताया गया कि वर्तमान समय में ड्रोन का उपयोग कृषि, फसल निगरानी, आपदा प्रबंधन, भौगोलिक सर्वेक्षण, पर्यावरण संरक्षण, औद्योगिक निरीक्षण, चिकित्सा सामग्री की आपूर्ति तथा रक्षा क्षेत्र सहित अनेक क्षेत्रों में किया जा रहा है। कार्यशाला के समापन पर एक घंटे की परीक्षा के परिणाम के आधार पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र एवं शील्ड प्रदान की गई। कार्यशाला का समन्वय डॉ. प्रवीण सिंह एवं डॉ. ज्योति सिंह ने किया, जबकि समापन समारोह का संचालन पूनम सोनकर ने किया। 
कार्यक्रम में प्रो. रवि प्रकाश,डॉ. अजय मौर्या, पी. सी. यादव, प्रीति शर्मा, डॉ. रितेश बरनवाल, तुषार श्रीवास्तव, डॉ. विशाल यादव, शैलेश प्रजापति, डॉ. संतोष त्रिपाठी, डॉ. पारुल त्रिवेदी, डॉ. जया शुक्ला, श्री अनुराग एवं श्री सुधीर सिंह उपस्थित रहे।

Thursday, 15 October 2026

सत्य, अनुशासन, त्याग की प्रेरणा देता है श्रीराम का जीवनः प्रो. आर.के. सिंह


रामोत्सव-2026: श्रीराम के आदर्शों को जीवन में उतारने का संदेश
जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर के मानव संसाधन विकास (एचआरडी) विभाग द्वारा गुरुवार को विश्वविद्यालय के मुक्तांगन परिसर स्थित मंदिर प्रांगण में ‘रामोत्सव-2026’ का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने भजन-कीर्तन, नृत्य प्रस्तुति, श्री हनुमान चालीसा पाठ एवं श्रीराम स्तुति के सामूहिक वाचन के माध्यम से भक्ति, आस्था और सांस्कृतिक मूल्यों का सुंदर संदेश दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर.के. सिंह ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जीवन विद्यार्थियों के लिए आदर्श और प्रेरणास्रोत है। उनके जीवन से हमें सत्य, अनुशासन, त्याग, कर्तव्यनिष्ठा, विनम्रता और मर्यादा का पालन करना सीखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को इन आदर्शों को केवल उत्सवों तक सीमित न रखते हुए अपने व्यवहार, अध्ययन और सामाजिक जीवन में उतारना चाहिए। युवा केवल अपनी व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रहें, बल्कि अपने ज्ञान, कौशल और चरित्र के माध्यम से समाज एवं राष्ट्र के विकास में भी योगदान दें। कार्यक्रम का शुभारंभ विभाग के शिक्षक डॉ. प्रवीण कुमार मिश्र ने गणेश वंदना के गायन के साथ किया। 
कार्यक्रम की पहली कड़ी में अंशिका सिंह ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवन एवं आदर्शों पर अपने विचार रखे। शुभांगी श्रीवास्तव ने ‘बजाओ ढोल, स्वागत में मेरे घर राम आए हैं’ गीत पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया।
शोध छात्र उद्देश्य सिंह ने ‘राम की शक्ति पूजा’ प्रसंग के माध्यम से श्रीराम के जीवन के संघर्ष, धैर्य और कर्तव्यनिष्ठा पर प्रकाश डाला। सुमित ने कविता पाठ के माध्यम से प्रभु श्रीराम के व्यक्तित्व को प्रस्तुत किया, जबकि दिव्यांशु सिंह ने कार्यक्रम के महत्व पर अपने विचार रखे। विभाग के शिक्षक अनुपम कुमार ने भजन गायन कर विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए एचआरडी विभागाध्यक्ष डॉ. रसिकेश ने श्रीराम एवं रावण के चरित्र के विभिन्न पहलुओं का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को नैतिकता, संयम, कर्तव्यनिष्ठा और सदाचार जैसे जीवन मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने के साथ ही भारतीय संस्कृति एवं जीवन मूल्यों के प्रति उनकी समझ को सुदृढ़ करते हैं। इस अवसर पर आगामी राष्ट्रीय स्केटिंग प्रतियोगिता में वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व करने जा रहे छात्र विनय अग्रहरि को अंगवस्त्र भेंट कर शुभकामनाएँ दी गईं। कार्यक्रम का संचालन प्रियांगी सिंह एवं पारुल श्रीवास्तव ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रसिकेश ने किया।

ऑब्जेक्ट आधारित प्रोग्रामिंग की बारीकियां समझाईं


सी-डैक की वैज्ञानिक डॉ. कल्पना जौहरी ने विद्यार्थियों को दिया व्यावहारिक ज्ञान
जौनपुर । वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर के कंप्यूटर अनुप्रयोग विभाग में बीसीए एवं एकीकृत एमसीए के विद्यार्थियों के लिए “ऑब्जेक्ट आधारित प्रोग्रामिंग” विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। व्याख्यान में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की वैज्ञानिक “एफ” डॉ. कल्पना जौहरी ने विद्यार्थियों को इस प्रोग्रामिंग पद्धति की मूलभूत अवधारणाओं, महत्त्व एवं व्यावहारिक उपयोगों से परिचित कराया।
डॉ. जौहरी ने वर्ग, वस्तु, संलग्नकरण, वंशानुक्रम, बहुरूपता एवं अमूर्तता जैसी प्रमुख अवधारणाओं को सरल तथा व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया। उन्होंने कहा कि ऑब्जेक्ट आधारित प्रोग्रामन आधुनिक सॉफ्टवेयर निर्माण की एक महत्त्वपूर्ण पद्धति है, जो प्रोग्राम को सुव्यवस्थित, पुनः प्रयोग योग्य तथा रखरखाव के अनुकूल बनाने में सहायक होती है।
डॉ. जौहरी ने विद्यार्थियों को प्रोग्रामन की अवधारणाओं को वास्तविक समस्याओं से जोड़कर समझने तथा तार्किक चिंतन एवं समस्या-समाधान की क्षमता विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि कंप्यूटर विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए प्रोग्रामन की मूलभूत अवधारणाओं की स्पष्ट समझ अत्यंत आवश्यक है। यह समझ उन्हें उन्नत तकनीकों, सॉफ्टवेयर निर्माण एवं अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए सुदृढ़ आधार प्रदान करती है।
कार्यक्रम में कंप्यूटर अनुप्रयोग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. सुरजीत यादव एवं पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. मिथिलेश कुमार पांडेय उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त सहायक आचार्य आदित्य कुमार, अवधेश कुमार यादव एवं प्रियंका जायसवाल भी रही। यह विशेष व्याख्यान विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक एवं उपयोगी रहा। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को ऑब्जेक्ट आधारित प्रोग्रामन की सैद्धांतिक अवधारणाओं को व्यावहारिक दृष्टिकोण से समझने तथा अपने तकनीकी ज्ञान एवं प्रोग्रामन कौशल को विकसित करने का अवसर प्राप्त हुआ।