Saturday, 18 April 2015

मनुष्य के लिए पृथ्वी ही स्वर्ग है

                                               पृथ्वी दिवस सप्ताह की शुरुआत  पौधरोपण से हुई  
विश्वविद्यालय के उमानाथ सिंह इंजीनियरिंग संस्थान में विश्व पृथ्वी दिवस सप्ताह के अंतर्गत  शनिवार को एक छात्र एक पेड़ अभियान के समन्वयक एवं संकायाध्यक्ष प्रो. बीबी तिवारी ने विद्यार्थियों के साथ पौधरोपण कर पृथ्वी की रक्षा का संकल्प दिलवाया। आज से पुरे विश्व में  पृथ्वी दिवस से जुड़े कार्यक्रमों की शुरुआत हो गई है.

उन्होंने पौधरोपण कार्यक्रम के पश्चात अपने सम्बोधन में कहा कि कि ईश्वर ने मनुष्य को जीने के लिए पृथ्वी जैसा स्वर्ग दिया है। पृथ्वी की रक्षा करना हर नागरिक का धर्म है। आज पर्यावरणीय बदलाव का सबसे बड़ा कारण मनुष्य खुद है। जिसने प्रकृति के साथ समय-समय पर छेड़छाड़ की है। पृथ्वी को सुसज्जित करने के लिए सभी को अधिक से अधिक पौधरोपण करना चाहिए। जिससे वर्तमान और आने वाली पीढ़ी के लिए स्वच्छ वातावरण व सुसज्जित पृथ्वी मिल सकेगी। 
राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी अमरेंद्र सिंह ने कहा कि आज मानव अपने स्वार्थ के लिए प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रहा है। सुख, सुविधाओं में प्रकृति द्वारा मिलने वाली सामग्रियों का प्रयोग कर प्राकृतिक संतुलन बिगाड़ रहा है। आज का दिन संकल्प लेने का दिन है कि हम सभी उस पृथ्वी को उसके वास्तविक रूप में संभाल कर रख सके। 
कार्यक्रम अधिकारी डा. संतोष कुमार ने कहा कि पृथ्वी पर हमारे जीवन यापन की हर वस्तु मिल जाती है। आज पूरे विश्व के वैज्ञानिक पृथ्वी जैसी सुविधाओं की खोज अन्य ग्रहों पर कर रहे है लेकिन उन्हें बहुत सफलता नहीं प्राप्त हुई है। इस स्वर्ग को सुंदर बनाने के लिए हम सभी को सदैव जागृत रहना होगा। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

Thursday, 16 April 2015

पूर्वांचल विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय वार्षिक खेल समारोह शुरू



 विश्वविद्यालय में परिसर के छात्र-छात्राओं के लिए 15 से 17 अप्रैल तक तीन दिवसीय वार्षिक खेल समारोह की शुरूआत कुलपति प्रो. पीयूष रंजन अग्रवाल ने बुधवार को एकलव्य स्टेडियम में गुब्बारा उड़ाकर किया। खिलाडि़यों को सम्बोधित करते हुए कुलपति ने कहा कि खेल की गतिविधियों से विद्यार्थियों को असीम स्फूर्ति मिलती है। इससे उनका जहां व्यक्तित्व का विकास होता है वहीं अनुशासन के पालन की चेतना भी आती है। समय प्रबंधन की कला को सीखने के अवसर के साथ ही विद्यार्थियों में समय के सद्पयोग का महत्व भी पता चलता है। छात्र जीवन में खेलों में प्रतिभाग की यादें जीवन पर्यन्त सकारात्मक ऊर्जा देती रहती है। कहा कि हर प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य जीत का प्रयास होता है जिसके लिए अपनी पूरी क्षमता लगाकर प्रयास करने से एक अलग कौशल का विकास होता है। छात्र केवल अपने लिये ही नहीं खेलता अपितु समूह, संस्था, समाज एवं देश के लिए भी खेलता है। इस अवसर पर समन्वयक प्रो. बीबी तिवारी ने कहा कि चतुर्दिक विकास के लिए खेल जरूरी है। छात्र जीवन में खेल जैसी गतिविधियों में भाग लेने से भविष्य में स्वास्थ्य सम्बंधी समस्याएं नहीं रहती। 
समारोह के उद्घाटन सत्र में कुलपति ने झंडा रोहण किया। जिसके पश्चात विभिन्न खेलों में भाग लेने वाले खिलाडि़यों ने मार्च पास्ट किया। इसके साथ ही खिलाडि़यों ने शपथ भी लिया। पहले दिन उद्घाटन सत्र के पश्चात एकलव्य स्टेडियम में 100, 200, 800, 1500 मीटर पुरूष एवं महिला दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। इसके साथ ही डिस्क थ्रो, लांग जम्प, बास्केटबाल, बाॅलीबाल, पुरूष एवं महिला प्रतियोगिता आयोजित हुई। प्रतियोगिताओं में परिसर के विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। खेल समारोह के दूसरे दिन चार सौ मीटर रेस हाईजम्प, जावेलिन थ्रो, रिले रेस आदि खेल होंगे। इसके साथ ही शिक्षकों एवं कर्मचारियों के लिए सौ मीटर रेस की प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। स्वागत डा. प्रदीप कुमार एवं संचालन अशोक सिंह ने किया। विभिन्न गतिविधियों में प्रो. वीके सिंह, डा. जितेंद्र सिंह, डा. रामाश्रय शर्मा, खेल सचिव डा. देवेंद्र सिंह, डा. अजय प्रताप सिंह, डा. रजनीश भाष्कर, डा. अविनाश पार्थडिकर, डा. मनोज मिश्र, डा. अवध बिहारी सिंह, डा. दिग्विजय सिंह राठौर, डा. सुनील कुमार, डा. रूश्दा आजमी, सुरजीत यादव, डा. धर्मेंद्र सिंह, डा. आलोक दास, डा. विवेक पाण्डेय, डा. केएस तोमर आदि उपस्थित रहे।


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सफलता के लिए अनुशासन जरुरी :ब्रिगेडियर बी.एस.ठाकर
वीर बहादुर सिह पूर्वाञ्चल विश्वविद्यालय के प्रबंध अध्यय्यन संकाय के एच आर.डी विभाग में एक दिवसीय विशेष व्याख्यान में ब्रिगेडियर बी.एस.ठाकर ने छात्रों को एटीट्य़ूट बिल्डिन्ग पर विस्तार से चर्चा की। उन्हौने बताया कि प्रत्येक छात्र को अपने जीवन मे सफलता प्राप्त करने के लिए आवश्यक है कि वो सेल्फ-बिलीफ, सेल्फ-डिसीप्लेन और सेल्फ-कन्ट्रोल जैसे सिद्धान्तों को आत्मसात करना चहिए। ब्रिगेडियर ठाकर ने इन बातों को भारतीय सैना मे गुजारे अनुभवों के आधार पर विस्तार से समझाया और बताया कि प्रत्येक फौजी अपने कार्यकाल में इन सभी बातों का अनुसरण कर असम्भव को सम्भव में तब्दील करता है। कार्यक्रम में बायोटेक्लोलोजी के वरिष्ठ आचार्य प्रोफेसर वी.के.सिंह ने छात्रों को सकारात्मकता अपनाने पर बल दिया और कहा कि प्रत्येक को जीवन में ज्ञानवान होना और विचारों में सकारात्मकता का अपना महत्व है जिसे किसी भी दशा में अनदेखा नहीं कर सकते। कार्यक्रम के शुभारम्भ में एच.आर.डी. विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डाॉ. अविनाश पाथर्डीकर ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्हौने बताया कि विश्विद्यालय आने वाले सत्र मे भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के ज्ञान से परिसर के छात्रों को लाभान्वित करवाएगा और इस तरह के विषयों पर कार्याशालाएं आयोजित करेगा। कार्यक्रम के अन्त में व्यावसाइक अर्थशास्त्र विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक डाॉ. वी.डी. शर्मा ने अतिथियों को धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर श्री अनुपम किमार, अभिनव श्रीवस्तव सहित प्रबंध अध्ययन संकाय के समस्त शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।


Thursday, 9 April 2015

फार्मेसी संस्थान में दो दिवसीय संगोष्ठी का हुआ समापन

स्वास्थ्य जागरूकता सत्र में ग्रामीण स्कूली बच्चों को
सम्बोधित करते प्रो ए के श्रीवास्तव 

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के फार्मेसी संस्थान द्वारा रिसेंट ट्रेंड्स इन फार्मास्यूटिकल साइंसेज (औषधि विज्ञान में नवीन प्रवृत्तियां) विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन फार्मेसी संस्थान में पोस्टर प्रस्तुतिकरण, माॅडल प्रदर्शनी एवं उपकरणों के माध्यम से औषधि निर्माण की प्रक्रिया को दिखाया गया। बाजार में उपलब्ध दवाओं की गुणवत्ता की भी जांच की गयी। जहां वक्ताओं ने फार्मास्यूटिकल साइंस के विभिन्न आयामों पर अपनी बात रखी वहीं ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को स्वास्थ्य जागरूकता सत्र के अंतर्गत प्रो. एके श्रीवास्तव ने गूढ़ जानकारियां दी।
प्राध्यापक धर्मेंद्र सिंह की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई पोस्टर प्रस्तुतिकरण में कुल 85 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। आरके फार्मेसी कालेज आजमगढ़, कुंवर हरिवंश सिंह फार्मेसी कालेज, प्रसाद इंस्टीच्यूट जौनपुर एवं हरिश्चंद्र पीजी कालेज फार्मेसी संस्थान वाराणसी के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। पोस्टर के माध्यम से स्वाइन फ्लू, मधुमेह, अस्थमा, इबोला वायरस, एचआईवी, हाइपरटेंशन मैनेजमेंट, एंटी बाॅयोटिक का प्रतिरोध, मिर्गी की दवाएं, फार्मास्यूटिकल मार्केटिंग, हर्बल ड्रग फार ट्रीटमेंट आॅफ डाॅयबिटिज आदि विषयों पर अपने विचार रखे। प्रो. डीडी दूबे, प्रो. वीके सिंह ने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया व उनके पोस्टर से सम्बन्धित तमाम सवाल पूछे। निर्णायक मंडल में डा. कार्तिकेय शुक्ला, डा. विवेक पाण्डेय, श्रीमती किरन प्रजापति, डा. राजकुमार अग्रहरि एवं राजबहादुर यादव रहे। 
संगोष्ठी में फार्मेसी के निदेशक प्रो. एके श्रीवास्तव ने फार्मेसी प्रैक्टिस नियमन 2015 पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 1940 में ड्रग एवं कास्मेटिक एक्ट के बाद 2015 में जो नियमन आया है उसके तहत फार्मासिस्ट को अस्पताल में प्रैक्टिस करने के लिए अधिकृत कर दिया गया है। हर 10 बेड पर एक फार्मासिस्ट होगा इसका इसमें उल्लेख है। इससे आम आदमी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी वहीं फार्मा के क्षेत्र में नये रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।
संगोष्ठी में हरिश्चंद्र पीजी कालेज फार्मेसी संस्थान वाराणसी के डा. प्रदीप कुमार ने कहा कि भारत में अवस्थित दवाओं की कम्पनी एक वर्ष में टर्न ओवर लगभग 75 हजार 542 करोड़ है, जो आने वाले समय में कई गुना हो जाएगा। 2020 तक फार्मासिस्ट की भूमिका नये दवाओं की गुणवत्ता एवं उनके नकारात्मक प्रभावों को कम करने में बढ़ेगी। आईआईटी बीएचयू के डा. सुनील मिश्र ने कहा कि बाजार में उपलब्ध जो प्राकृतिक दवाएं है, उन्हें डब्ल्यूएचओ मानक से परखकर ही प्रयोग में लाना चाहिए। 
      बेहतरीन प्रस्तुतिकरण करने वाले प्रतिभागियों को संगोष्ठी के समापन सत्र में पुरस्कृत किया गया। पोस्टर प्रस्तुतिकरण में एचआईवी पर पोस्टर बनाने वाले छात्र रामजीवन को प्रथम, स्वाइन फ्लू के पोस्टर पर सुरभि सिन्हा एवं फार्मास्यूटिकल मार्केटिंग पोस्टर पर अनम बेग को द्वितीय स्थान मिला। माॅडल में सत्यम को प्रथम एवं धर्मपाल को द्वितीय स्थान मिला। संस्थान के प्रोफेसर एके श्रीवास्तव, आयोजन सचिव राजीव कुमार एवं नृपेंद्र सिंह ने प्रतिभागियों को पुरस्कार दिया।
विभिन्न गतिविधियों में प्रो. बीबी तिवारी, डा. दिग्विजय सिंह राठौर, आलोक दास, नृपेंद्र सिंह, पूजा सक्सेना, विजय मौर्या, विनय कुमार वर्मा, सुरेंद्र सिंह, आशीष कुमार गुप्ता, डा. अवध बिहारी सिंह सहित प्रतिभागीगण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

Wednesday, 8 April 2015

रिसेंट ट्रेंड्स इन फार्मास्यूटिकल साइंसेज विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी


विश्वविद्यालय के संगोष्ठी भवन में बुधवार को फार्मेसी संस्थान द्वारा रिसेंट ट्रेंड्स इन फार्मास्यूटिकल साइंसेज (औषधि विज्ञान में नवीन प्रवृत्तियां) विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ द्वीप प्रज्जवलन के साथ हुआ। वक्ताओं ने वर्तमान समय में फार्मास्यूटिकल के क्षेत्र में हो रहे बदलाव और चुनौतियों के विभिन्न आयामों पर अपनी बात रखी।




बतौर मुख्य अतिथि सागर विश्वविद्यालय के प्रो. वीके दीक्षित ने औषधियों की गुणवत्ता और लाइलाज बीमारियों पर चर्चा करते हुए कहा कि आज भारत पूरी दुनिया में औषधि उत्पादन के क्षेत्र में तीसरा स्थान रखता है। उन्होंने कतिपय दवाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि पहले यह दवाएं गर्भवती महिलाओं के दर्द निवारण के लिए उपयोग में आती थी और आज इनका उपयोग हृदय रोगों के लिए किया जा रहा है। उन्होंने औषधि शोध की आवश्यकता पर बल देते हुए आम जन को दृष्टिगत रखते हुए सुरक्षित एवं कम मूल्य पर दवा उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर ध्यान आकृष्ट किया। निश्चित मात्रा एवं सही समय पर औषधि के उपयोग को आवश्यक बताते हुए शोधार्थियों से उन्होंने अपील की कि ऐसे औषधियों को प्रभावी बनाया जाय जिससे मानव शरीर पर उसका दुष्प्रभाव न पड़े।

उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. पीयूष रंजन अग्रवाल ने कहा कि यह सदी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण हो चली है। उन्होंने कई उदाहरणों के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि आज चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में लोगों की रूचि एवं पहुंच दोनों बढ़ी है लेकिन अभी भी मांग और आपूर्ति के बीच एक दूरी बनी हुई है। उन्होंने प्रयोगशालाओं की स्थापना पर बल देते हुए कहा कि अभी भी दवाओं के परीक्षण की उपलब्धता बहुत कम है। जिस कारण सही दवा के गुणवत्ता की पहचान समय पर नहीं हो पाती। दवा उद्योग से जुड़े लोगों से उन्होंने अपील की कि अपने उत्पादों का निर्माण करते समय पर्यावरण का ध्यान रखते हुए सही मूल्य, सही समय, सही गुणवत्ता की औषधि मानव कल्याण हेतु प्रस्तुत करें।


मंच पर फार्मेसी संस्थान के पूर्व निदेशक एवं बाॅयोटेक्नोलाॅजी विभाग के प्रो. वीके सिंह, वाराणसी कालेज आॅफ फार्मेसी के निदेशक डा. ओपी तिवारी एवं हरिश्चंद्र पीजी कालेज वाराणसी के एसोसिएट प्रोफेसर डा. प्रदीप कुमार उपस्थित रहे।

इसके पूर्व विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा सरस्वती वंदना एवं विश्वविद्यालय का कुलगीत प्रस्तुत किया गया। संगोष्ठी की स्मारिका का विमोचन कुलपति एवं मुख्य अतिथि द्वारा किया गया। संगोष्ठी का विषय प्रवर्तन करते हुए फार्मेसी संस्थान के निदेशक प्रो. एके श्रीवास्तव ने आये हुए अतिथियों का स्वागत किया। डा. राजीव कुमार द्वारा संगोष्ठी की रूपरेखा प्रस्तुत की गयी। धन्यवाद ज्ञापन डा. धर्मेंद्र सिंह द्वारा एवं संचालन डा. एचसी पुरोहित द्वारा किया गया।
इस अवसर पर कुलसचिव डा. बीके पाण्डेय, प्रो. बीबी तिवारी, डा. एके श्रीवास्तव, डा. अविनाश पार्थडिकर, आलोक दास, नृपेंद्र सिंह, पूजा सक्सेना, विजय मौर्या, विनय कुमार वर्मा, सुरेंद्र सिंह, आशीष कुमार गुप्ता, विवेक पाण्डेय, कार्तिकेय शुक्ला, डा. मनोज मिश्र, डा. दिग्विजय सिंह राठौर, डा. सुनील कुमार, डा. अवध बिहारी सिंह, डा. सौरभ पाल, मुनिन्द्र सिंह, डा. केएस तोमर, डा. श्याम त्रिपाठी, ज्ञानेश पाराशरी सहित प्रतिभागीगण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।