Friday, 16 October 2026

पूर्वांचल विश्वविद्यालय में एआई एवं एमएल लर्निंग सीरीज का तीसरा व्याख्यान संपन्न


वीका टूल से विद्यार्थियों ने सीखे क्लासिफिकेशन अल्गोरिथम  के व्यावहारिक उपयोग, 144 छात्र-छात्राओं ने किया प्रतिभाग

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर के फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग द्वारा संचालित ‘ एआई एवं एमएल  लर्निंग सीरीज ’ के तीसरे व्याख्यान का शुक्रवार को सफल आयोजन किया गया। “क्लासिफिकेशन अल्गोरिथम  ” विषय पर आयोजित इस व्याख्यान में विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों के 144 छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। सत्र का उद्देश्य विद्यार्थियों को मशीन लर्निंग के प्रमुख वर्गीकरण एल्गोरिदम तथा उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों से परिचित कराना था।

विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में एआई एवं एमएल  लर्निंग सीरीज का आयोजन किया जा रहा है । मुख्य विशेषज्ञ एवं रिसोर्स पर्सन डॉ. अन्नुश्री अग्रवाल ने विद्यार्थियों को क्लासिफिकेशन अल्गोरिथम की मूलभूत अवधारणाओं तथा वीका टूल के माध्यम से उनके व्यावहारिक उपयोग की जानकारी दी। 

व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों ने डिसीजन ट्री तथा केएनएन  जैसे प्रमुख वर्गीकरण एल्गोरिदम की कार्यप्रणाली को समझा। इसके साथ ही मशीन लर्निंग मॉडल के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए शुद्धता, परिशुद्धता, पुनःप्राप्ति दर, संवेदनशीलता तथा काम्प्लेक्स मैट्रिक्स  जैसे महत्वपूर्ण मानकों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञ ने ई-मेल में स्पैम की पहचान तथा बैंकिंग क्षेत्र में ऋण जोखिम के आकलन जैसे वास्तविक जीवन के उदाहरणों के माध्यम से क्लासिफिकेशन अल्गोरिथम  की उपयोगिता को स्पष्ट किया।

डॉ. अग्रवाल ने बताया कि प्रभावी मशीन लर्निंग मॉडल विकसित करने के लिए उपयुक्त एल्गोरिदम का चयन, डेटा का सही विश्लेषण तथा मॉडल के प्रदर्शन का उचित मूल्यांकन अत्यंत आवश्यक है। वीका  जैसे टूल की सहायता से विद्यार्थी विभिन्न एल्गोरिदम का प्रयोग कर सकते हैं और उनके परिणामों की तुलना करते हुए वास्तविक समस्याओं के समाधान विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

कार्यक्रम का आयोजन फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के डीन प्रो. सौरभ पाल तथा कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष डॉ. विक्रांत भटेजा के मार्गदर्शन में किया गया। आयोजन समिति के सदस्य दिलीप कुमार यादव, अशोक कुमार यादव, कृष्ण कुमार यादव, डॉ. संतोष कुमार यादव एवं प्रवीन कुमार पाण्डेय का कार्यक्रम के सफल संचालन में महत्वपूर्ण योगदान रहा।

ड्रोन तकनीक में नवाचार से खुलेंगे नए अवसर: कुलपति


सी-डैक, नोएडा के वैज्ञानिकों ने दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण
पाँच दिवसीय ड्रोन तकनीक कार्यशाला का समापन

 पूर्वांचल विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग में आयोजित पाँच दिवसीय ड्रोन तकनीक कार्यशाला का समापन समारोह शुक्रवार को संपन्न हुआ। कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों ने ड्रोन की असेंबलिंग, उसके विभिन्न घटकों की कार्यप्रणाली, उड़ान भरने तथा नियंत्रण की तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया।
 विद्यार्थियों के लगन से खुश होकर आए वैज्ञानिकों ने विश्वविद्यालय को एक ड्रोन उपहार में दिया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर. के. सिंह ने कहा कि ड्रोन तकनीक आज केवल तकनीकी प्रयोग का विषय नहीं है, बल्कि कृषि, आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवा, पर्यावरण संरक्षण एवं राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में देश की प्रगति का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को इस प्रकार के प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान का उपयोग नई परियोजनाएँ विकसित करने, अनुसंधान करने और समस्याओं के स्थानीय समाधान खोजने के लिए करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों को लगातार आगे बढ़ाएगा, ताकि विद्यार्थी अपने ही परिसर में आधुनिक तकनीक सीखने तथा विशेषज्ञों से सीधे संवाद करने का अवसर प्राप्त कर सकें। कुलपति ने सी-डैक, नोएडा के वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों के योगदान की सराहना की और कहा कि ऐसी कार्यशालाएँ विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तकनीकी आत्मविश्वास तथा नवाचार की भावना विकसित करती हैं।
पाँच दिनों तक चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विद्यार्थियों को व्याख्यान, प्रस्तुतियों, हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण तथा प्रायोगिक गतिविधियों के माध्यम से ड्रोन तकनीक के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई। 
कार्यशाला के अंतिम दिन सी-डैक, नोएडा की वैज्ञानिक डॉ. कल्पना जौहरी ने विद्यार्थियों को विभिन्न उपकरणों के मध्य संचार के नियमों तथा संचार स्थापित होने की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया। अन्य विशेषज्ञों में श्रीमती ईशा गुप्ता, श्रीमती किरण वालिया एवं श्री देवेश वर्मा ने प्रस्तुतियों और प्रायोगिक प्रदर्शनों के माध्यम से विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी विकास से अवगत कराया।
कार्यशाला में बताया गया कि वर्तमान समय में ड्रोन का उपयोग कृषि, फसल निगरानी, आपदा प्रबंधन, भौगोलिक सर्वेक्षण, पर्यावरण संरक्षण, औद्योगिक निरीक्षण, चिकित्सा सामग्री की आपूर्ति तथा रक्षा क्षेत्र सहित अनेक क्षेत्रों में किया जा रहा है। कार्यशाला के समापन पर एक घंटे की परीक्षा के परिणाम के आधार पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र एवं शील्ड प्रदान की गई। कार्यशाला का समन्वय डॉ. प्रवीण सिंह एवं डॉ. ज्योति सिंह ने किया, जबकि समापन समारोह का संचालन पूनम सोनकर ने किया। 
कार्यक्रम में प्रो. रवि प्रकाश,डॉ. अजय मौर्या, पी. सी. यादव, प्रीति शर्मा, डॉ. रितेश बरनवाल, तुषार श्रीवास्तव, डॉ. विशाल यादव, शैलेश प्रजापति, डॉ. संतोष त्रिपाठी, डॉ. पारुल त्रिवेदी, डॉ. जया शुक्ला, श्री अनुराग एवं श्री सुधीर सिंह उपस्थित रहे।

Thursday, 15 October 2026

सत्य, अनुशासन, त्याग की प्रेरणा देता है श्रीराम का जीवनः प्रो. आर.के. सिंह


रामोत्सव-2026: श्रीराम के आदर्शों को जीवन में उतारने का संदेश
जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर के मानव संसाधन विकास (एचआरडी) विभाग द्वारा गुरुवार को विश्वविद्यालय के मुक्तांगन परिसर स्थित मंदिर प्रांगण में ‘रामोत्सव-2026’ का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने भजन-कीर्तन, नृत्य प्रस्तुति, श्री हनुमान चालीसा पाठ एवं श्रीराम स्तुति के सामूहिक वाचन के माध्यम से भक्ति, आस्था और सांस्कृतिक मूल्यों का सुंदर संदेश दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर.के. सिंह ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जीवन विद्यार्थियों के लिए आदर्श और प्रेरणास्रोत है। उनके जीवन से हमें सत्य, अनुशासन, त्याग, कर्तव्यनिष्ठा, विनम्रता और मर्यादा का पालन करना सीखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को इन आदर्शों को केवल उत्सवों तक सीमित न रखते हुए अपने व्यवहार, अध्ययन और सामाजिक जीवन में उतारना चाहिए। युवा केवल अपनी व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रहें, बल्कि अपने ज्ञान, कौशल और चरित्र के माध्यम से समाज एवं राष्ट्र के विकास में भी योगदान दें। कार्यक्रम का शुभारंभ विभाग के शिक्षक डॉ. प्रवीण कुमार मिश्र ने गणेश वंदना के गायन के साथ किया। 
कार्यक्रम की पहली कड़ी में अंशिका सिंह ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवन एवं आदर्शों पर अपने विचार रखे। शुभांगी श्रीवास्तव ने ‘बजाओ ढोल, स्वागत में मेरे घर राम आए हैं’ गीत पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया।
शोध छात्र उद्देश्य सिंह ने ‘राम की शक्ति पूजा’ प्रसंग के माध्यम से श्रीराम के जीवन के संघर्ष, धैर्य और कर्तव्यनिष्ठा पर प्रकाश डाला। सुमित ने कविता पाठ के माध्यम से प्रभु श्रीराम के व्यक्तित्व को प्रस्तुत किया, जबकि दिव्यांशु सिंह ने कार्यक्रम के महत्व पर अपने विचार रखे। विभाग के शिक्षक अनुपम कुमार ने भजन गायन कर विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए एचआरडी विभागाध्यक्ष डॉ. रसिकेश ने श्रीराम एवं रावण के चरित्र के विभिन्न पहलुओं का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को नैतिकता, संयम, कर्तव्यनिष्ठा और सदाचार जैसे जीवन मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने के साथ ही भारतीय संस्कृति एवं जीवन मूल्यों के प्रति उनकी समझ को सुदृढ़ करते हैं। इस अवसर पर आगामी राष्ट्रीय स्केटिंग प्रतियोगिता में वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व करने जा रहे छात्र विनय अग्रहरि को अंगवस्त्र भेंट कर शुभकामनाएँ दी गईं। कार्यक्रम का संचालन प्रियांगी सिंह एवं पारुल श्रीवास्तव ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रसिकेश ने किया।

ऑब्जेक्ट आधारित प्रोग्रामिंग की बारीकियां समझाईं


सी-डैक की वैज्ञानिक डॉ. कल्पना जौहरी ने विद्यार्थियों को दिया व्यावहारिक ज्ञान
जौनपुर । वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर के कंप्यूटर अनुप्रयोग विभाग में बीसीए एवं एकीकृत एमसीए के विद्यार्थियों के लिए “ऑब्जेक्ट आधारित प्रोग्रामिंग” विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। व्याख्यान में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की वैज्ञानिक “एफ” डॉ. कल्पना जौहरी ने विद्यार्थियों को इस प्रोग्रामिंग पद्धति की मूलभूत अवधारणाओं, महत्त्व एवं व्यावहारिक उपयोगों से परिचित कराया।
डॉ. जौहरी ने वर्ग, वस्तु, संलग्नकरण, वंशानुक्रम, बहुरूपता एवं अमूर्तता जैसी प्रमुख अवधारणाओं को सरल तथा व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया। उन्होंने कहा कि ऑब्जेक्ट आधारित प्रोग्रामन आधुनिक सॉफ्टवेयर निर्माण की एक महत्त्वपूर्ण पद्धति है, जो प्रोग्राम को सुव्यवस्थित, पुनः प्रयोग योग्य तथा रखरखाव के अनुकूल बनाने में सहायक होती है।
डॉ. जौहरी ने विद्यार्थियों को प्रोग्रामन की अवधारणाओं को वास्तविक समस्याओं से जोड़कर समझने तथा तार्किक चिंतन एवं समस्या-समाधान की क्षमता विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि कंप्यूटर विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए प्रोग्रामन की मूलभूत अवधारणाओं की स्पष्ट समझ अत्यंत आवश्यक है। यह समझ उन्हें उन्नत तकनीकों, सॉफ्टवेयर निर्माण एवं अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए सुदृढ़ आधार प्रदान करती है।
कार्यक्रम में कंप्यूटर अनुप्रयोग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. सुरजीत यादव एवं पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. मिथिलेश कुमार पांडेय उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त सहायक आचार्य आदित्य कुमार, अवधेश कुमार यादव एवं प्रियंका जायसवाल भी रही। यह विशेष व्याख्यान विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक एवं उपयोगी रहा। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को ऑब्जेक्ट आधारित प्रोग्रामन की सैद्धांतिक अवधारणाओं को व्यावहारिक दृष्टिकोण से समझने तथा अपने तकनीकी ज्ञान एवं प्रोग्रामन कौशल को विकसित करने का अवसर प्राप्त हुआ।

छात्रों ने अपने हाथों से बनाए ड्रोन को उड़ाया


‘स्वयान’ बूटकैंप के चौथे दिन स्व-निर्मित ड्रोन का हुआ सफल परीक्षण 
जौनपुर । वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर में सी-डैक, नोएडा के सहयोग से आयोजित “मानवरहित विमान प्रणाली एवं उसके उपयोग” विषयक पांच दिवसीय ‘स्वयान’ बूटकैंप का चौथा दिन तकनीकी ज्ञान, नवाचार एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण से भरपूर रहा। इस दौरान विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को ड्रोन तकनीक की बारीकियों से अवगत कराया, जबकि विद्यार्थियों द्वारा स्वयं निर्मित ड्रोन का सफल परीक्षण कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा।
सत्र के प्रथम चरण में सी-डैक, नोएडा के परियोजना अभियंता दीपेश वर्मा ने ड्रोन कैमरा सेंसर पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को कैमरे के विभिन्न महत्त्वपूर्ण अंगों, जैसे छनक (फिल्टर) एवं संवेदक (सेंसर) के बारे में तकनीकी जानकारी दी। उन्होंने कृषि एवं पर्यावरण के क्षेत्र में ड्रोन की उपयोगिता को रेखांकित करते हुए वनस्पति विभेदन, जल वेधन, रोग की पहचान तथा पौधों के स्वास्थ्य की निगरानी हेतु विभिन्न तरंगदैर्ध्य के उपयोग पर प्रकाश डाला।
इसके पश्चात सी-डैक, नोएडा की परियोजना अभियंता ईशा गुप्ता ने ड्रोन के व्यापक अनुप्रयोगों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि आधुनिक समय में यह तकनीक कृषि, पर्यावरण, आपदा प्रबंधन, सर्वेक्षण एवं अन्य क्षेत्रों में क्रांतिकारी परिवर्तन ला रही है।
बूटकैंप का सबसे रोमांचक एवं प्रेरणादायक क्षण तब आया, जब विद्यार्थियों ने अपने हाथों से तैयार किए गए ड्रोन को विश्वविद्यालय के एकलव्य स्टेडियम में सफलतापूर्वक आकाश में उड़ाया। विद्यार्थियों का उत्साह इस अवसर पर देखते ही बनता था।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह की गरिमामयी उपस्थिति ने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों का उत्साह कई गुना बढ़ा दिया। कुलपति ने विद्यार्थियों के इस नवाचार की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यावहारिक प्रशिक्षण विद्यार्थियों को तकनीकी कौशल, आत्मविश्वास एवं अनुसंधान की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। यह संपूर्ण कार्यक्रम इलेक्ट्रॉनिक्स अभियांत्रिकी विभाग के सहयोग से सी-डैक, नोएडा द्वारा संचालित किया जा रहा है। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. प्रवीण कुमार सिंह, डॉ. रीतेश बरनवाल, डॉ. शैलेश प्रजापति, डॉ. संतोष कुमार त्रिपाठी, श्री सुधीर सिंह, डॉ. पारुल त्रिवेदी, डॉ. ज्योति पी. सिंह, सुश्री प्रीति शर्मा, श्री अनुराग सिंह एवं सुश्री जया शुक्ला सहित अन्य शिक्षकों की सक्रिय भूमिका रही। शिक्षकों के मार्गदर्शन एवं तकनीकी दल के समन्वय से यह बूटकैंप विद्यार्थियों के लिए व्यावहारिक शिक्षा, नवाचार एवं कौशल विकास का एक बेहतरीन मंच साबित हो रहा है।

Tuesday, 6 October 2026

साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में तकनीकी दक्षता विकसित करें विद्यार्थी : प्रो. राकेश कुमार सिंह

साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में तकनीकी दक्षता विकसित करें विद्यार्थी : प्रो. राकेश कुमार सिंह

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में ‘सिक्योर एप्लीकेशन डेवलपमेंट’ विषय पर आयोजित छह दिवसीय कार्यशाला के द्वितीय दिवस में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। कार्यशाला में मुख्य विषय विशेषज्ञ के रूप में देश के प्रख्यात साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. अनूप गिरधर ने विद्यार्थियों को सुरक्षित एप्लीकेशन डेवलपमेंट के विभिन्न तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी।

कार्यक्रम में कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में साइबर सुरक्षा और सिक्योर एप्लीकेशन डेवलपमेंट के क्षेत्र में भविष्य की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को तकनीकी कौशल विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की रुचि और सहभागिता इसी प्रकार बनी रही तो विश्वविद्यालय द्वारा भविष्य में और भी अधिक प्रायोगिक एवं इंडस्ट्री ओरिएंटेड कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों को रोजगारपरक शिक्षा के साथ व्यावहारिक तकनीकी ज्ञान प्राप्त हो सके।

तकनीकी सत्र में विषय विशेषज्ञ डॉ. अनूप गिरधर ने विद्यार्थियों को प्रोग्रामिंग की मूलभूत अवधारणाओं से लेकर सिक्योर एप्लीकेशन डेवलपमेंट के तकनीकी पक्ष को सरल एवं व्यावहारिक तरीके से समझाया। उन्होंने सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट आर्किटेक्चर के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि सुरक्षित और मजबूत एप्लीकेशन के निर्माण में किन सुरक्षा मानकों का ध्यान रखना आवश्यक है।

सत्र की प्रमुख कड़ी हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग रही। डॉ. गिरधर ने विद्यार्थियों को लाइव प्रोग्रामिंग के माध्यम से वर्चुअल मशीन सेटअप करने तथा कोड में आवश्यक सुरक्षा मानकों को लागू करने का प्रशिक्षण दिया। इस दौरान विद्यार्थियों ने स्वयं तकनीकी गतिविधियों में भाग लेते हुए सुरक्षित एप्लीकेशन डेवलपमेंट की बारीकियों को समझा।

कार्यशाला में 90 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला का आयोजन इंजीनियरिंग संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो. सौरभ पाल के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। कार्यक्रम में प्रो. अशोक श्रीवास्तव, प्रो. गिरिधर मिश्र, प्रो. राजकुमार, , डॉ. दिव्येंदु मिश्र, प्रियंका जायसवाल सहित अन्य शिक्षक उपस्थित रहे।

दूध से पनीर तक संरक्षण की वैज्ञानिक तकनीक जरूरी : प्रो. सुधीर सिंह

दुग्ध एवं दुग्ध उत्पादों के संरक्षण पर विशेष व्याख्यान आयोजित

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय में संचालित फूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों के लिए कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह के निर्देश पर ‘दुग्ध एवं दुग्ध उत्पादों के संरक्षण’ विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी के पूर्व वैज्ञानिक प्रो. सुधीर सिंह ने विद्यार्थियों को दुग्ध एवं विभिन्न दुग्ध उत्पादों के संरक्षण की वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मानव द्वारा दुग्ध एवं दुग्ध उत्पादों का बड़ी मात्रा में सेवन किया जाता है। ऐसे में इनकी गुणवत्ता, पोषणात्मक मूल्य और खाद्य सुरक्षा बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। दूध, पनीर के  संरक्षण के लिए वैज्ञानिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाना जरूरी है।

प्रो. सुधीर सिंह ने कहा कि दुग्ध अत्यधिक शीघ्र खराब होने वाला खाद्य पदार्थ है। इसकी गुणवत्ता, पोषणात्मक मूल्य एवं सुरक्षित शेल्फ लाइफ बनाए रखने के लिए उचित प्रसंस्करण, ताप उपचार, शीत भंडारण, स्वच्छता और प्रभावी पैकेजिंग अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।उन्होंने विशेष रूप से दूध, पनीर और बटर के संरक्षण की तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की। पनीर के संदर्भ में उन्होंने इसके निर्माण, नमी नियंत्रण, स्वच्छता, पैकेजिंग, शीत भंडारण तथा गुणवत्ता बनाए रखने के उपायों की जानकारी दी। वहीं बटर के संरक्षण में तापमान नियंत्रण, उचित पैकेजिंग, ऑक्सीकरण से सुरक्षा तथा भंडारण की उपयुक्त परिस्थितियों के महत्व को समझाया।उन्होंने विद्यार्थियों को बटर, क्रीम, मिल्क पाउडर सहित अन्य दुग्ध उत्पादों के संरक्षण एवं उनकी शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए अपनाई जाने वाली आधुनिक तकनीकों से भी अवगत कराया। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक संरक्षण तकनीकों का उपयोग न केवल खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करता है, बल्कि दुग्ध उत्पादों के मूल्यवर्धन और उनके व्यावसायिक उपयोग की संभावनाओं को भी बढ़ाता है।

व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों ने दूध, पनीर, बटर एवं अन्य दुग्ध उत्पादों के प्रसंस्करण और संरक्षण से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका प्रो. सुधीर सिंह ने विस्तारपूर्वक समाधान किया।कार्यक्रम के अंत में संकायाध्यक्ष प्रो. प्रदीप कुमार ने प्रो. सुधीर सिंह के प्रति आभार व्यक्त किया।

Monday, 5 October 2026

पीयू के 12 शिक्षकों ने अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में बनाई जगह

 स्कॉलरली इंडेक्स की प्रतिष्ठित टॉप-1000 स्कॉलर रैंकिंग में शामिल हुए 12 शिक्षक

शोध एवं अकादमिक उत्कृष्टता का वैश्विक सम्मान, कुलपति ने दी बधाई

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर के लिए यह अत्यंत गौरव और हर्ष का विषय है कि विश्वविद्यालय परिसर के 12 शिक्षकों ने अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग संस्था स्कॉलरली इंडेक्स की प्रतिष्ठित टॉप-1000 स्कॉलर रैंकिंग में स्थान प्राप्त कर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं शोध उत्कृष्टता को वैश्विक पहचान दिलाई है। यह उपलब्धि शिक्षकों के निरंतर शोध प्रयासों, अकादमिक प्रतिबद्धता और ज्ञान सृजन के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान का प्रमाण है।

स्कॉलरली इंडेक्स द्वारा जारी यह अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग शोधकर्ताओं के शोध प्रकाशनों, उद्धरणों, एच-इंडेक्स, डी-इंडेक्स तथा समग्र शोध प्रभाव जैसे महत्वपूर्ण मानकों के आधार पर निर्धारित की जाती है। इस रैंकिंग में न केवल शोध प्रकाशनों की संख्या, बल्कि शोध की गुणवत्ता, प्रासंगिकता, प्रभावशीलता और अंतरराष्ट्रीय अकादमिक जगत में उसकी स्वीकार्यता को भी महत्व दिया जाता है। ऐसे प्रतिष्ठित वैश्विक मंच पर विश्वविद्यालय के 12 शिक्षकों का स्थान प्राप्त करना संस्थान की बढ़ती शोध क्षमता, अकादमिक सक्रियता और गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सभी चयनित शिक्षकों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के शिक्षकों की यह अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि पूरे विश्वविद्यालय परिवार के लिए गर्व का विषय है। यह सफलता शोध, नवाचार और गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विश्वविद्यालय की निरंतर प्रगति को दर्शाती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शिक्षकों की यह वैश्विक पहचान विद्यार्थियों एवं युवा शोधार्थियों को उत्कृष्ट शोध कार्य करने के लिए प्रेरित करेगी तथा विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

कुलपति ने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की वास्तविक पहचान उसके शिक्षकों की शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध उपलब्धियों और समाज के लिए किए गए ज्ञानपरक योगदान से स्थापित होती है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में शिक्षकों की भागीदारी विश्वविद्यालय में विकसित हो रहे सकारात्मक शोध वातावरण और अकादमिक उत्कृष्टता का परिचायक है।

स्कॉलरली इंडेक्स की प्रतिष्ठित टॉप-1000 स्कॉलर रैंकिंग में स्थान प्राप्त करने वाले शिक्षकों में प्रो. अशोक कुमार श्रीवास्तव. प्रो. राजकुमार, प्रो. संदीप कुमार  सिंह, प्रो. नूपुर गोयल, डॉ. मिथिलेश यादव, डॉ. अजीत सिंह, डॉ. विक्रांत भटेजा, डॉ. आशीष वर्मा, डॉ. राम नरेश यादव, डॉ. दीपक कुमार मौर्य, डॉ. राम नारायण एवं डॉ. पारुल त्रिवेदी शामिल हैं।

विश्वविद्यालय के इन शिक्षकों की उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत अकादमिक एवं शोध कौशल का सम्मान है, बल्कि वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय की बढ़ती वैश्विक शैक्षणिक प्रतिष्ठा का भी प्रतीक है।

एप्लीकेशन बनाते समय सुरक्षा को दें प्राथमिकताः डॉ. अनूप गिरिधर

सुरक्षित एप्लीकेशन विकास पर छह दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ

पीयू में 90 से अधिक छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों एवं संकाय सदस्यों ने किया प्रतिभाग

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में सोमवार को कुलपति प्रो. आर. के. सिंह के मार्गदर्शन में सुरक्षित एप्लीकेशन विकास  विषय पर छह दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। कार्यशाला में 90 से अधिक छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों एवं संकाय सदस्यों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

कार्यशाला के प्रथम दिन डॉ. अनूप  गिरिधर ने प्रतिभागियों को सुरक्षित एप्लीकेशन विकास के मूलभूत सिद्धांतों से सरल, व्यावहारिक एवं प्रभावी ढंग से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि वर्तमान डिजिटल युग में एप्लीकेशन विकास केवल उपयोगी और आकर्षक सॉफ्टवेयर बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उपयोगकर्ता, डेटा, सर्वर तथा संपूर्ण डिजिटल प्रणाली को साइबर हमलों और अनधिकृत पहुंच से सुरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक है।

डॉ. गिरिधर ने वर्चुअल मशीन (Virtual Machine) के माध्यम से सुरक्षित वातावरण में एप्लीकेशन विकसित करने की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि किसी भी एप्लीकेशन की संरचना तैयार करते समय सुरक्षा को प्रारंभिक स्तर से ही शामिल किया जाना चाहिए। यदि सुरक्षा को विकास प्रक्रिया के अंतिम चरण में जोड़ा जाता है, तो कमजोरियों और साइबर जोखिमों की संभावना बढ़ जाती है।


उन्होंने उपयोगकर्ता की पहचान की समुचित जांच, भूमिका आधारित अधिकार निर्धारण तथा सुरक्षित प्रमाणीकरण व्यवस्था के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि एप्लीकेशन में उपयोगकर्ता द्वारा दिए गए इनपुट की जांच और शुद्धिकरण आवश्यक है, ताकि एसक्यूएल इंजेक्शन, क्रॉस-साइट स्क्रिप्टिंग तथा अन्य सामान्य साइबर कमजोरियों से बचाव किया जा सके।

विशेषज्ञ ने संवेदनशील डेटा की सुरक्षा के लिए कूटलेखन, सुरक्षित संचार माध्यमों के उपयोग तथा डेटाबेस में केवल आवश्यक अधिकार प्रदान करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि किसी तकनीकी त्रुटि की स्थिति में उपयोगकर्ता को संवेदनशील तकनीकी जानकारी प्रदर्शित नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि ऐसी जानकारी का दुरुपयोग साइबर अपराधी कर सकते हैं।

डॉ. गिरिधर ने प्रतिभागियों को बाहरी पुस्तकालयों और सॉफ्टवेयर घटकों को नियमित रूप से अद्यतन रखने, कोड की सुरक्षा जांच करने तथा विकास, परीक्षण और परिनियोजन की संपूर्ण प्रक्रिया में सुरक्षा मानकों को शामिल करने की सलाह दी। उन्होंने गतिविधियों की निगरानी, सुरक्षा घटनाओं का अभिलेखन, नियमित सुरक्षा अद्यतन और समय-समय पर परीक्षण को सुरक्षित डिजिटल वातावरण के लिए आवश्यक बताया।

कार्यक्रम का शुभारंभ इंजीनियरिंग संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो. सौरभ पाल एवं कंप्यूटर साइंस विभागाध्यक्ष डॉ. विक्रांत भटेजा द्वारा डॉ. अनुप गिरिधर का स्वागत एवं अभिनंदन कर किया गया। कार्यशाला में उपस्थित छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों एवं संकाय सदस्यों ने डॉ. अनुप गिरिधर के सत्र को अत्यंत ज्ञानवर्धक, समसामयिक और प्रेरणादायक बताया। प्रतिभागियों ने कहा कि कार्यशाला से उन्हें साइबर सुरक्षा के व्यावहारिक पहलुओं तथा सुरक्षित एप्लीकेशन निर्माण की प्रक्रिया को समझने में विशेष सहायता मिली।

छह दिवसीय कार्यशाला के आगामी सत्रों में साइबर सुरक्षा, सुरक्षित कोडिंग, डेटा संरक्षण, एप्लीकेशन परीक्षण तथा डिजिटल सुरक्षा से संबंधित विभिन्न तकनीकी विषयों पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह ने की शिष्टाचार भेंट

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर के मा. कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह ने लखनऊ में उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी महाराज से शिष्टाचार भेंट की।

इस अवसर पर कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री जी को विश्वविद्यालय से जुड़े विभिन्न शैक्षणिक एवं विकासात्मक विषयों के बारे में बताया । उन्होंने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों, उपलब्धियों तथा भविष्य की योजनाओं की जानकारी भी दी।मुख्यमंत्री जी ने विश्वविद्यालय की प्रगति एवं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण कार्यों के लिए शुभकामनाएं दीं।

Sunday, 4 October 2026

खेल सुविधाओं के लिए कुलपति ने खेल मंत्री को सौंपा प्रस्ताव

पीयू में सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक और एकलव्य स्टेडियम के नवीनीकरण की मांग

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल अवसंरचना विकसित करने के उद्देश्य से कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह ने उत्तर प्रदेश सरकार के खेल एवं युवा कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गिरीश चन्द्र यादव से मुलाकात कर मांगपत्र सौंपा। खेल मंत्री ने प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए विश्वविद्यालय में खेल सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण हेतु पूर्ण सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया है।

कुलपति ने राज्यमंत्री से विश्वविद्यालय परिसर में आधुनिक सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक की स्थापना तथा एकलव्य स्टेडियम के क्रिकेट मैदान के उच्चीकरण और नवीनीकरण के लिए वित्तीय और विभागीय स्वीकृति प्रदान करने का अनुरोध किया। पत्र में उल्लेख किया गया कि विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध महाविद्यालयों में 3 लाख से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। विश्वविद्यालय ने देश को कई नामचीन अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी दिए हैं, जिन्होंने ओलंपिक और वैश्विक प्रतियोगिताओं में देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है। इनमें प्रमुख रूप से हॉकी खिलाड़ी कोथाजीत सिंह, ललित कुमार उपाध्याय, हाल ही में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित राजकुमार पाल तथा अंतरराष्ट्रीय स्टीपलचेज एथलीट पारुल चौधरी शामिल हैं।

विश्वविद्यालय परिसर में मानक स्तर के सिंथेटिक ट्रैक का अभाव है, जिसके कारण खिलाड़ियों को आधुनिक अभ्यास में कठिनाई होती है और अखिल भारतीय अंतर-विश्वविद्यालयीय एथलेटिक प्रतियोगिताओं के आयोजन में भी बाधा आती है। सिंथेटिक ट्रैक बनने से पूर्वांचल की नई खेल प्रतिभाओं को तराशने में बड़ी मदद मिलेगी। इसके साथ ही परिसर स्थित एकलव्य स्टेडियम के क्रिकेट ग्राउंड के नवीनीकरण का भी प्रस्ताव रखा गया है। इसके तहत मैदान का समतलीकरण, जलनिकासी (ड्रेनेज), उच्च गुणवत्ता की पिच, अभ्यास के लिए नेट्स और खिलाड़ियों के लिए आवश्यक आधुनिक सुविधाओं के विकास की योजना शामिल है। इससे विश्वविद्यालय व संबद्ध कॉलेजों के बीच उच्चस्तरीय क्रिकेट प्रतियोगिताओं का नियमित आयोजन संभव हो सकेगा।

कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रेरक संदेश “जो खेलते हैं, वो खिलते हैं” और ‘फिट इंडिया’ मिशन को धरातल पर उतारने के लिए इन सुविधाओं का विकास आवश्यक है। विश्वविद्यालय का लक्ष्य परिसर को आधुनिक खेल सुविधाओं से सुसज्जित कर पूर्वांचल को देश के खेल मानचित्र पर एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

Saturday, 3 October 2026

जल सुरक्षा के लिए वैज्ञानिक सोच और सतत जल प्रबंधन जरूरी : प्रो. प्रफुल्ल सिंह


पूर्वांचल विश्वविद्यालय में ‘पृथ्वी, पर्यावरण एवं भविष्य’ विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के भू एवं ग्रहीय विज्ञान विभाग की ओर से ‘पृथ्वी, पर्यावरण एवं भविष्य’ विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने जल सुरक्षा, भूजल संरक्षण, मृदा एवं पर्यावरण तथा पृथ्वी के भू-वैज्ञानिक विकास के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।

कार्यक्रम के मुख्य विशेषज्ञ वक्ता दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय, गया के भूविज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. प्रफुल्ल कुमार सिंह ने जल संसाधनों की वैश्विक एवं भारतीय स्थिति पर चर्चा करते हुए कहा कि जल जीवन, खाद्य सुरक्षा और पारिस्थितिक संतुलन का आधार है। उन्होंने बताया कि विश्व की लगभग 18 प्रतिशत आबादी भारत में निवास करती है, जबकि वैश्विक जल संसाधनों में देश की हिस्सेदारी लगभग चार प्रतिशत है। बढ़ती आबादी, शहरीकरण, औद्योगीकरण, भूजल का अत्यधिक दोहन और जलवायु परिवर्तन जल संसाधनों पर दबाव बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विश्व में लगभग 2.3 अरब लोग जल संकट से प्रभावित क्षेत्रों में रह रहे हैं और वर्ष 2030 तक वैश्विक जल मांग उपलब्ध आपूर्ति से लगभग 40 प्रतिशत अधिक होने का अनुमान है।
प्रो. सिंह ने जल सुरक्षा के लिए वर्षाजल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और आधुनिक रिमोट सेंसिंग तकनीकों के उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भू-आकृति, भूमि उपयोग, जल निकासी, भूगर्भीय संरचना और वर्षा जैसे कारकों के समेकित अध्ययन से भूजल पुनर्भरण की संभावनाओं वाले क्षेत्रों की पहचान की जा सकती है। इससे जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण के लिए उपयुक्त स्थलों का वैज्ञानिक निर्धारण संभव है। उन्होंने विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों से जल और पर्यावरण संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान तथा नवाचार को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो. बी. पी. सिंह ने मृदा को पृथ्वी के जलवायु एवं पर्यावरणीय इतिहास का महत्वपूर्ण प्राकृतिक अभिलेख बताया। उन्होंने कहा कि मृदा के विभिन्न घटकों तथा ऑक्सीजन एवं कार्बन समस्थानिकों के अध्ययन से अतीत की जलवायु और पर्यावरणीय परिस्थितियों को समझा जा सकता है। उन्होंने भारतीय प्लेट के दक्षिणी गोलार्ध से उत्तरी दिशा में हुए भू-वैज्ञानिक संचलन तथा प्लेट विवर्तनिकी के संदर्भ में पृथ्वी के दीर्घकालिक विकास की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मृदा का निर्माण लंबी प्राकृतिक प्रक्रियाओं के माध्यम से होता है, इसलिए इसका संरक्षण और विवेकपूर्ण उपयोग सतत विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।

कार्यक्रम में कुलपति प्रो. आर.के. सिंह का संदेश अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. प्रमोद यादव ने पढ़कर सुनाया। विषय प्रवर्तन प्रो. प्रदीप कुमार ने किया तथा अतिथियों का स्वागत प्रो. मिथिलेश कुमार ने किया।

इस अवसर पर प्रो. देवराज सिंह, प्रो. प्रमोद कुमार, डॉ. मिथिलेश यादव, डॉ. शशिकांत यादव, डॉ. नितेश जायसवाल, डॉ. विवेक पाण्डेय सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन अंजू यादव ने किया तथा डॉ. नीरज अवस्थी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

Friday, 2 October 2026

सामूहिक प्रयास से पीयू नई ऊंचाइयों पर पंहुचेगा: कुलपति


पीयू का 39वां स्थापना दिवस समारोह हर्षोल्लास से मनाया गया

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर का 39वां स्थापना दिवस समारोह शुक्रवार को विश्वविद्यालय परिसर में गरिमापूर्ण एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महात्मा गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री एवं विश्वविद्यालय के संस्थापक वीर बहादुर सिंह जी की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।
कार्यक्रम में अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. प्रमोद कुमार यादव ने स्वागत करते हुए कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह का ऑनलाइन प्राप्त संदेश प्रस्तुत किया। कुलपति ने  संदेश में कहा कि विश्वविद्यालय की 39 वर्षों की विकास यात्रा सामूहिक परिश्रम, समर्पण एवं सहयोग का परिणाम है। सामूहिक प्रयासों से विश्वविद्यालय को विकास और उपलब्धियों की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा एवं सेवा तथा लाल बहादुर शास्त्री के सादगी, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध, नवाचार, अनुशासन और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को विश्वविद्यालय की प्राथमिकता बताया।
कुलपति ने कहा कि शिक्षक, कर्मचारी और विद्यार्थी अपने-अपने दायित्वों का ईमानदारी एवं समर्पण से निर्वहन करें, तो विश्वविद्यालय की उपलब्धियां और अधिक गौरवपूर्ण होंगी। उन्होंने विद्यार्थियों से अध्ययन के साथ खेल एवं शारीरिक गतिविधियों को जीवन का हिस्सा बनाने तथा ज्ञान, संस्कार, आत्मविश्वास और राष्ट्रसेवा की भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।
कुलसचिव डॉ. विनोद कुमार सिंह ने महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री के जीवन आदर्शों और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को स्मरण किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ आचार्य प्रो. मानस पांडेय ने विश्वविद्यालय की विकास यात्रा पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को अनुशासन, सेवा एवं राष्ट्रहित की भावना के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।
इस अवसर पर प्रशासनिक अधिकारी राज नारायण सिंह एवं उनकी टीम द्वारा रामधुन प्रस्तुत की गई। एनसीसी कैडेट्स ने साइकिल यात्रा निकालकर स्वच्छता, अनुशासन, स्वास्थ्य एवं राष्ट्रसेवा का संदेश दिया।
अंत में मुख्य कुलानुशासक प्रो. अजय प्रताप सिंह ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। समारोह में विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

Thursday, 1 October 2026

व्यावहारिक प्रशिक्षण से बढ़ेगा कौशल : प्रो. उमेश चंद्रा



महर्षि पराशर कृषि विज्ञान संस्थान पहुंचे निदेशक, बोले, शोध को नयी दिशा देने की जरुरत 

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर के महर्षि पराशर कृषि विज्ञान संस्थान में नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुमारगंज, अयोध्या के कीट विज्ञान विभाग के प्रोफेसर एवं निदेशक शोध प्रो. उमेश चंद्रा का गुरुवार को आगमन हुआ। संस्थान पहुंचने पर शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने उनका स्वागत किया।

संस्थान के भ्रमण के दौरान प्रो. उमेश चंद्रा ने शिक्षकों के साथ संवाद करते हुए यहां संचालित शैक्षणिक, शोध, प्रशिक्षण एवं कृषि संबंधी गतिविधियों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने विभिन्न योजनाओं, प्रयोगात्मक कार्यों तथा भविष्य की कार्ययोजनाओं पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि कृषि शिक्षा को केवल कक्षा तक सीमित न रखकर उसे प्रयोगशाला, खेत और बाजार की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ना समय की मांग है। विद्यार्थियों को आधुनिक कृषि तकनीकों के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव प्रदान करने से उनमें रोजगार एवं उद्यमिता की संभावनाएं बढ़ेंगी।

उन्होंने संस्थान के विद्यार्थियों से संवाद कर कृषि शिक्षा, शोध, कीट प्रबंधन, उत्पादन तकनीक तथा व्यावहारिक कृषि के विभिन्न पहलुओं पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने विद्यार्थियों को जिज्ञासा के साथ सीखने, प्रयोग करने और कृषि क्षेत्र में नवाचार के लिए प्रेरित किया।
प्रो. उमेश चंद्रा ने संस्थान में संचालित दो दिवसीय मशरूम उत्पादन तकनीक प्रशिक्षण कार्यक्रम का भी निरीक्षण किया। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से संवाद कर मशरूम उत्पादन की प्रक्रिया, प्रशिक्षण की उपयोगिता तथा इससे जुड़ी संभावनाओं की जानकारी ली। उन्होंने संस्थान में संचालित गतिविधियों को देखकर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि मशरूम उत्पादन का कार्यक्रम व्यवस्थित एवं उपयोगी ढंग से संचालित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के व्यावहारिक प्रशिक्षण विद्यार्थियों को स्वरोजगार और कृषि उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि निरंतर परिश्रम, नवाचार और टीमवर्क के माध्यम से संस्थान कृषि शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बना सकता है।
इस अवसर पर महर्षि पराशर कृषि विज्ञान संस्थान के समन्वयक प्रो. गिरधर मिश्र ने प्रो. उमेश चंद्रा का संस्थान के शिक्षकों से परिचय कराया तथा संस्थान में संचालित विभिन्न शैक्षणिक एवं कृषि गतिविधियों की जानकारी दी।
परिचय के क्रम में कीट विज्ञान विभाग के डॉ. सत्यम प्रजापति, उद्यान विज्ञान विभाग के डॉ. विपिन, सस्य विज्ञान विभाग के डॉ. हरिवंश सिंह, कृषि प्रसार विभाग के डॉ. प्रदीप कुमार यादव तथा पादप विज्ञान विभाग के डॉ. शुभम सिंह उपस्थित रहे। शिक्षकों ने अपने-अपने विभागों की शैक्षणिक, प्रयोगात्मक एवं शोध गतिविधियों से प्रो. उमेश चंद्रा को अवगत कराया।

प्रो. उमेश चंद्रा ने संस्थान की गतिविधियों की सराहना करते हुए शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को कृषि शिक्षा, शोध एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों के अनुरूप विद्यार्थियों को नई तकनीकों और नवाचारों से जोड़ना आवश्यक है।
कार्यक्रम के अंत में संस्थान के समस्त शिक्षकों ने प्रो. उमेश चंद्रा के प्रति आभार व्यक्त किया।

सेवा मेरा योगदान अभियान के चौथे दिन छात्रों ने चलाया स्वच्छता एवं पौधरोपण अभियान


डिप्लोमा मैकेनिकल इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों ने डिवाइडर की घास साफ कर रोपे गेंदे के पौधे, कक्षाओं का भी किया सौंदर्यीकरण
जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर में आयोजित ‘सेवा मेरा योगदान’ कार्यक्रम के चौथे दिन डिप्लोमा मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र-छात्राओं ने स्वच्छता, पौधरोपण एवं परिसर सौंदर्यीकरण अभियान में सक्रिय सहभागिता की।
कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय परिसर के डिवाइडरों पर उगी सूखी एवं अनावश्यक घास की सफाई की। इसके बाद वहां गेंदे के पौधे रोपे गए। विद्यार्थियों ने अपनी कक्षाओं की भी साफ-सफाई की तथा कक्षा-कक्षों की व्यवस्था और सौंदर्यीकरण में योगदान दिया।छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. प्रमोद कुमार यादव ने कहा कि छात्र-छात्राओं का उत्साह और सेवा भाव पूरे विश्वविद्यालय के लिए प्रेरणादायक है। यु
वाओं की सकारात्मक ऊर्जा परिसर को स्वच्छ, हरा-भरा और सुंदर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस प्रकार की गतिविधियों से विद्यार्थियों में अनुशासन, श्रमदान और टीम वर्क की भावना भी विकसित होती है।कार्यक्रम संयोजक प्रो. राजकुमार ने कहा कि स्वच्छता एवं पौधरोपण अभियान के माध्यम से विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सेवा के प्रति जागरूकता बढ़ाना कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य है। 
‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत छात्र जिस निष्ठा और उत्साह के साथ परिसर को स्वच्छ एवं सुंदर बनाने में योगदान दे रहे हैं, वह सराहनीय है। युवाओं की यही सहभागिता स्वच्छ एवं हरित परिसर के निर्माण का आधार बनेगी। वार्डन डॉ. नितेश जायसवाल ने बताया कि ‘सेवा मेरा योगदान’ कार्यक्रम के चतुर्थ दिवस पर डिप्लोमा मैकेनिकल इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों ने परिसर के डिवाइडर की घास साफ की, गेंदे के पौधे रोपे और अपनी कक्षाओं का सौंदर्यीकरण किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की यह सहभागिता सेवा, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनकी जिम्मेदारी को दर्शाती है।

भाषण प्रतियोगिता में अभिनव कीर्ति पांडेय प्रथम

मेरे सपनों का भारत” विषय पर भाषण प्रतियोगिता का आयोजन

जौनपुर। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के जनसेवा से राष्ट्रसेवा के 25 वर्षों के उपलक्ष्य में आयोजित “सेवा संकल्प अभियान” के अंतर्गत कुलपति प्रो. आर. के. सिंह जी के दिशा-निर्देशन में 1 अक्टूबर 2026 को वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर में विश्वविद्यालय स्तरीय “मेरे सपनों का भारत” विषय पर भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय परिसर सहित संबद्ध महाविद्यालयों के प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग करते हुए भारत के भविष्य, विकास, युवा शक्ति एवं राष्ट्र निर्माण से जुड़े अपने विचार प्रस्तुत किए।

 कार्यक्रम समन्वयक राष्ट्रीय सेवा योजना डॉ. शशिकांत यादव ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा एवं उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. प्रमोद कुमार यादव ने अतिथियों का स्वागत किया तथा “मेरे सपनों का भारत” विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्र के विकास में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और युवाओं के सपनों, संकल्पों एवं सकारात्मक सोच से ही विकसित भारत की मजबूत आधारशिला तैयार होगी।

विश्वविद्यालय स्तरीय प्रतियोगिता में वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय परिसर की अभिनव कीर्ति पांडेय ने प्रथम स्थान, पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय महिला महाविद्यालय, बलूची, केराकत, जौनपुर की राधा गिरी ने द्वितीय स्थान तथा डॉ. राम मनोहर लोहिया राजकीय महाविद्यालय, मुफ्तीगंज, जौनपुर के मनीष ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

इसी क्रम में गाजीपुर जनपद स्तरीय भाषण प्रतियोगिता में समता पी.जी. कॉलेज की जागृति बरनवाल ने प्रथम स्थान, समता पी.जी. कॉलेज की शुभांगी चौबे ने द्वितीय स्थान तथा वासुदेव यादव ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में डॉ. अनुराग यादव, डॉ. अनुराग मिश्रा, डॉ. उदयभान यादव, डॉ. सूर्योदय भट्टाचार्य एवं डॉ. शैलेंद्र चौधरी ने प्रतिभागियों के वक्तव्य, विषय-वस्तु, प्रस्तुतीकरण, भाषा एवं अभिव्यक्ति के आधार पर मूल्यांकन किया।
कार्यक्रम का मंच संचालन सत्यम त्रिपाठी ने किया।
कार्यक्रम में उच्च शिक्षा के नोडल अधिकारी एवं प्राचार्य प्रो. धर्मेंद्र द्विवेदी, डॉ. राम मनोहर लोहिया राजकीय महाविद्यालय, मुफ्तीगंज, जौनपुर के प्राचार्य प्रो. पीयूष वर्मा, समता पी.जी. कॉलेज के प्राचार्य सहित विभिन्न महाविद्यालयों के शिक्षक एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

इस अवसर पर डॉ. अंकित राय, डॉ. राहुल राय, डॉ. विपुल यादव, डॉ. सोहन यादव, डॉ. अनामिका शुक्ला, डॉ. सोमरू राम, डॉ श्वेता पांडेय, डॉ अजय मौर्य, डॉ विशाल यादव, श्री अजीत कुमार यादव, श्री आदित्य जायसवाल एवं श्री अविनाश कुमार राय सहित विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षक उपस्थित रहे।

Wednesday, 30 September 2026

लॉ इंस्टीट्यूट में 'संवैधानिक कानून' पर हुई क्विज़ प्रतियोगिता 35 टीमों ने लिया भाग



 जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय स्थित दत्तोपंत ठेंगड़ी लॉ इंस्टीट्यूट में बुधवार को भारतीय संविधान विषय पर एक भव्य क्विज़ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
प्रतियोगिता का आयोजन विश्वविद्यालय परिसर के विधि संस्थान में स्थित 'एस. पी. गुप्ता मेमोरियल लॉ लाइब्रेरी'  में संपन्न हुआ।
इस प्रतियोगिता में कुल 35 टीमों ने भाग लिया, जिसमें प्रत्येक टीम में 4-4 सदस्य शामिल थे। प्राथमिक चरण के बाद द्वितीय एवं फाइनल राउंड के लिए कुल 10 उत्कृष्ट टीमों ने क्वालीफाई किया।
कार्यक्रम का सफल आयोजन संस्थान के निदेशक एवं विभागाध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार की अध्यक्षता में हुआ। प्रतियोगिता के कार्यक्रम समन्वयक सहायक प्राध्यापक श्री रविकेश कुमार मौर्या रहे। वहीं सह-समन्वयक की भूमिका श्री योगेश उत्तम, डॉ. आश्रया दुबे, डॉ. शुभम सिंह एवं डॉ. विपिन कुमार सिंह ने निभाई। इस अवसर पर दत्तोपंत ठेंगड़ी लॉ इंस्टीट्यूट के सभी सम्मानित प्राध्यापक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

नवाचार से स्टार्टअप और उद्यमिता की ओर बढ़ें विद्यार्थी : प्रो. अविनाश

 राष्ट्रीय इनोवेशन एवं उत्तर प्रदेश इनोवेशन चैलेंज विषय पर हुआ ओरिएंटेशन कार्यक्रम 
 जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज एवं उत्तर प्रदेश इनोवेशन चैलेंज विषय पर ओरिएंटेशन कार्यक्रम का आयोजन बुधवार को किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में नवाचार, स्टार्टअप, उद्यमिता एवं सामाजिक प्रभाव आधारित विचारों को प्रोत्साहित करना तथा उन्हें इनोवेशन चैलेंज में भागीदारी के लिए आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराना था।
   कार्यक्रम में वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विद्यालय के इनक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर के कार्यकारी निदेशक प्रो. अविनाश पाथर्डीकर ने विद्यार्थियों को इनोवेशन की अवधारणा, नवाचार की प्रक्रिया तथा किसी समस्या की पहचान कर उसके प्रभावी एवं व्यावहारिक समाधान विकसित करने के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि एक अच्छे विचार को व्यवस्थित तरीके से विकसित कर प्रोटोटाइप में परिवर्तित किया जा सकता है और आगे चलकर उसे उत्पाद अथवा सेवा के रूप में स्टार्टअप का स्वरूप दिया जा सकता है।
   प्रो. पाथर्डीकर ने विद्यार्थियों को स्टार्टअप की संभावनाओं, बिजनेस मॉडल तैयार करने, मेंटरशिप एवं इनक्यूबेशन की भूमिका तकनीकी विकास, फंडिंग तथा उद्यमिता के अवसरों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को केवल नौकरी की तलाश तक सीमित न रहकर अपने ज्ञान और रचनात्मक सोच के माध्यम से रोजगार सृजनकर्ता बनने की दिशा में भी प्रयास करना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे अपने आसपास की सामाजिक, पर्यावरणीय, तकनीकी एवं स्थानीय समस्याओं को पहचानें और उनके नवीन, टिकाऊ एवं व्यावहारिक समाधान विकसित करें। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े स्टार्टअप की शुरुआत एक छोटी लेकिन प्रभावी समस्या के समाधान से हो सकती है।
   कार्यक्रम के सह-संयोजक डॉ. नितेश जायसवाल ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित उत्तर प्रदेश इनोवेशन चैलेंज की प्रक्रिया, पात्रता, आवेदन एवं आइडिया प्रस्तुत करने की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। उन्होंने विद्यार्थियों को चैलेंज में भाग लेने, अपने नवाचारी विचारों को प्रस्तुत करने तथा उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।
   कार्यक्रम के अंत में प्रो. रजनीश भास्कर ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर निदेशक, ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल प्रो. प्रदीप कुमार एवं डॉ. सुशील कुमार  सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों एवं संस्थानों के शिक्षक तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
   इस कार्यक्रम के लिए 396 विद्यार्थियों ने ऑनलाइन पंजीकरण किया था, जिसमें से 101 विद्यार्थियों ने अपने विचार ऑनलाइन प्रस्तुत किए थे।

हर क्षेत्र में बढ़ रही है एआई की संभावनाः डॉ. अनुश्री अग्रवाल


200 से अधिक विद्यार्थियों ने लिया ऑनलाइन प्रशिक्षण
जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर के इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संकाय तथा आई ट्रिपल ई स्टूडेंट ब्रांच, यूएनएसआईईटी के संयुक्त तत्वावधान में कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह के मार्गदर्शन एवं संरक्षण में एआई एवं एमएल लर्निंग सीरीज के प्रथम व्याख्यान का  आनलाइन आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग की मूल बातें” रहा। ऑनलाइन आयोजित इस व्याख्यान में विभिन्न पाठ्यक्रमों के 200 से अधिक छात्र-छात्राओं एवं प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम की विशेषज्ञ वक्ता डॉ. अनुश्री अग्रवाल ने विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग की मूल अवधारणाओं, उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों तथा जेनरेटिव एआई के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में एआई और मशीन लर्निंग केवल तकनीकी विषय नहीं रह गए हैं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, मीडिया, प्रशासन और शोध सहित विभिन्न क्षेत्रों में इनके उपयोग की संभावनाएं निरंतर बढ़ रही हैं।
डॉ. अनुश्री अग्रवाल सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग एवं एप्लाइड मशीन लर्निंग के क्षेत्र में विशेषज्ञता रखने वाली शिक्षाविद एवं तकनीकी विशेषज्ञ हैं। उन्होंने दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में एम.टेक. तथा इंदिरा गांधी दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी फॉर विमेन से पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की है। उन्होंने विद्यार्थियों को एआई आधारित कौशल विकसित करने, व्यावहारिक परियोजनाओं पर कार्य करने तथा नवीन तकनीकों के प्रति निरंतर सीखने की प्रवृत्ति अपनाने के लिए प्रेरित किया। एआई एवं एमएल लर्निंग सीरीज का उद्देश्य विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग की आधारभूत अवधारणाओं से परिचित कराने के साथ-साथ उन्हें व्यावहारिक ज्ञान, तकनीकी दक्षता तथा प्रोजेक्ट डेवलपमेंट के लिए तैयार करना है। कार्यक्रम के सफल आयोजन में आई ट्रिपल ई स्टूडेंट ब्रांच के सदस्यों एवं आयोजन टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

विद्यार्थी नई तकनीकी सीखने की प्रवृत्ति रखें : कुलपति

सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग पर छात्रों का कुलपति के समक्ष प्रभावी प्रस्तुतीकरण

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कंप्यूटर अनुप्रयोग विभाग में कुलपति प्रो. आर. के. सिंह द्वारा पूर्व में किए गए विभागीय अवलोकन के क्रम में छात्रों के आग्रह पर सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग विषय पर विशेष शैक्षणिक प्रस्तुतीकरण आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को विषय की व्यावहारिक समझ प्रदान करने के साथ-साथ उनके तकनीकी ज्ञान, तार्किक चिंतन, रचनात्मकता एवं प्रस्तुतीकरण कौशल को विकसित करना रहा।

प्रस्तुतीकरण के दौरान विद्यार्थियों ने सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं को व्यावहारिक उदाहरणों एवं आधुनिक तकनीकी परिप्रेक्ष्य के साथ प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि गुणवत्तापूर्ण सॉफ्टवेयर के विकास में योजनाबद्ध प्रक्रिया, तकनीकी दक्षता, उपयोगकर्ता की आवश्यकताओं की समझ तथा विकास के विभिन्न चरणों का महत्वपूर्ण योगदान होता है।

इसी क्रम में बीसीए तृतीय वर्ष की छात्रा हर्षिता गुप्ता ने ‘फ्लो ऑफ वेब डेवलपमेंट’ विषय पर प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने वेब डेवलपमेंट की संपूर्ण प्रक्रिया को विभिन्न चरणों के माध्यम से स्पष्ट करते हुए बताया कि किसी वेबसाइट की परिकल्पना से लेकर उसके विकास एवं उपयोगकर्ता तक पहुंचने की प्रक्रिया किस प्रकार आगे बढ़ती है। वहीं बीसीए के छात्र विशाल कुमार यादव ने ‘फुल स्टैक डेवलपमेंट’ विषय पर प्रभावी प्रस्तुतीकरण प्रस्तुत किया। उन्होंने फ्रंटएंड, बैकएंड, डेटाबेस एवं सर्वर-साइड तकनीकों के बीच समन्वय को उदाहरणों के माध्यम से समझाया।

कुलपति प्रो. आर. के. सिंह ने दोनों प्रस्तुतियों का अवलोकन करते हुए विद्यार्थियों के प्रयास एवं प्रस्तुतीकरण कौशल की सराहना की। उन्होंने छात्रों को नवीनतम तकनीकों के प्रति निरंतर सीखने की प्रवृत्ति विकसित करने, तकनीकी कौशल को मजबूत करने तथा अर्जित ज्ञान को व्यावहारिक परियोजनाओं में प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां विद्यार्थियों को कक्षा-कक्ष की शिक्षा को वास्तविक तकनीकी दुनिया से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

इस अवसर पर संकायाध्यक्ष प्रो. सौरभ पाल ने विद्यार्थियों के उत्साह, परिश्रम एवं प्रस्तुतीकरण कौशल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी शैक्षणिक गतिविधियां विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, तकनीकी दक्षता एवं नवाचार की भावना विकसित करने में सहायक हैं। 
कार्यक्रम में बीसीए कोर्स कोऑर्डिनेटर डॉ. मिथिलेश कुमार पाण्डेय तथा पाठ्यक्रम के सहायक आचार्य प्रियंका जायसवाल, आदित्य कुमार एवं अवधेश कुमार यादव उपस्थित रहे।

हर क्षेत्र में बढ़ रही है एआई की संभावनाः डॉ. अनुश्री अग्रवाल


200 से अधिक विद्यार्थियों ने लिया ऑनलाइन प्रशिक्षण
जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर के इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संकाय तथा आई ट्रिपल ई स्टूडेंट ब्रांच, यूएनएसआईईटी के संयुक्त तत्वावधान में कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह के मार्गदर्शन एवं संरक्षण में एआई एवं एमएल लर्निंग सीरीज के प्रथम व्याख्यान का  आनलाइन आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग की मूल बातें” रहा। ऑनलाइन आयोजित इस व्याख्यान में विभिन्न पाठ्यक्रमों के 200 से अधिक छात्र-छात्राओं एवं प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम की विशेषज्ञ वक्ता डॉ. अनुश्री अग्रवाल ने विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग की मूल अवधारणाओं, उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों तथा जेनरेटिव एआई के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में एआई और मशीन लर्निंग केवल तकनीकी विषय नहीं रह गए हैं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, मीडिया, प्रशासन और शोध सहित विभिन्न क्षेत्रों में इनके उपयोग की संभावनाएं निरंतर बढ़ रही हैं।
डॉ. अनुश्री अग्रवाल सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग एवं एप्लाइड मशीन लर्निंग के क्षेत्र में विशेषज्ञता रखने वाली शिक्षाविद एवं तकनीकी विशेषज्ञ हैं। उन्होंने दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में एम.टेक. तथा इंदिरा गांधी दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी फॉर विमेन से पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की है। उन्होंने विद्यार्थियों को एआई आधारित कौशल विकसित करने, व्यावहारिक परियोजनाओं पर कार्य करने तथा नवीन तकनीकों के प्रति निरंतर सीखने की प्रवृत्ति अपनाने के लिए प्रेरित किया। एआई एवं एमएल लर्निंग सीरीज का उद्देश्य विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग की आधारभूत अवधारणाओं से परिचित कराने के साथ-साथ उन्हें व्यावहारिक ज्ञान, तकनीकी दक्षता तथा प्रोजेक्ट डेवलपमेंट के लिए तैयार करना है। कार्यक्रम के सफल आयोजन में आई ट्रिपल ई स्टूडेंट ब्रांच के सदस्यों एवं आयोजन टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

नवाचार से स्टार्टअप और उद्यमिता की ओर बढ़ें विद्यार्थी : प्रो. अविनाश

राष्ट्रीय इनोवेशन एवं उत्तर प्रदेश इनोवेशन चैलेंज विषय पर हुआ ओरिएंटेशन कार्यक्रम 
   जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज एवं उत्तर प्रदेश इनोवेशन चैलेंज विषय पर ओरिएंटेशन कार्यक्रम का आयोजन बुधवार को किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में नवाचार, स्टार्टअप, उद्यमिता एवं सामाजिक प्रभाव आधारित विचारों को प्रोत्साहित करना तथा उन्हें इनोवेशन चैलेंज में भागीदारी के लिए आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराना था।
   कार्यक्रम में वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्विवद्यालय के इनक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर के कार्यकारी निदेशक प्रो. अविनाश पाथर्डीकर ने विद्यार्थियों को इनोवेशन की अवधारणा, नवाचार की प्रक्रिया तथा किसी समस्या की पहचान कर उसके प्रभावी एवं व्यावहारिक समाधान विकसित करने के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि एक अच्छे विचार को व्यवस्थित तरीके से विकसित कर प्रोटोटाइप में परिवर्तित किया जा सकता है और आगे चलकर उसे उत्पाद अथवा सेवा के रूप में स्टार्टअप का स्वरूप दिया जा सकता है।
   प्रो. पाथर्डीकर ने विद्यार्थियों को स्टार्टअप की संभावनाओं, बिजनेस मॉडल तैयार करने, मेंटरशिप एवं इनक्यूबेशन की भूमिका तकनीकी विकास, फंडिंग तथा उद्यमिता के अवसरों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को केवल नौकरी की तलाश तक सीमित न रहकर अपने ज्ञान और रचनात्मक सोच के माध्यम से रोजगार सृजनकर्ता बनने की दिशा में भी प्रयास करना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे अपने आसपास की सामाजिक, पर्यावरणीय, तकनीकी एवं स्थानीय समस्याओं को पहचानें और उनके नवीन, टिकाऊ एवं व्यावहारिक समाधान विकसित करें। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े स्टार्टअप की शुरुआत एक छोटी लेकिन प्रभावी समस्या के समाधान से हो सकती है।
   कार्यक्रम के सह-संयोजक डॉ. नितेश जायसवाल ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित उत्तर प्रदेश इनोवेशन चैलेंज की प्रक्रिया, पात्रता, आवेदन एवं आइडिया प्रस्तुत करने की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। उन्होंने विद्यार्थियों को चैलेंज में भाग लेने, अपने नवाचारी विचारों को प्रस्तुत करने तथा उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।
   कार्यक्रम के अंत में प्रो. रजनीश भास्कर ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर निदेशक, ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल प्रो. प्रदीप कुमार एवं डॉ. सुशील कुमार  सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों एवं संस्थानों के शिक्षक तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
   इस कार्यक्रम के लिए 396 विद्यार्थियों ने ऑनलाइन पंजीकरण किया था, जिसमें से 101 विद्यार्थियों ने अपने विचार ऑनलाइन प्रस्तुत किए थे।

लॉ इंस्टीट्यूट में 'संवैधानिक कानून' पर हुई क्विज़ प्रतियोगिता 35 टीमों ने लिया भाग


 जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय स्थित दत्तोपंत ठेंगड़ी लॉ इंस्टीट्यूट में बुधवार को भारतीय संविधान विषय पर एक भव्य क्विज़ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
प्रतियोगिता का आयोजन विश्वविद्यालय परिसर के विधि संस्थान में स्थित 'एस. पी. गुप्ता मेमोरियल लॉ लाइब्रेरी'  में संपन्न हुआ।
इस प्रतियोगिता में कुल 35 टीमों ने भाग लिया, जिसमें प्रत्येक टीम में 4-4 सदस्य शामिल थे। प्राथमिक चरण के बाद द्वितीय एवं फाइनल राउंड के लिए कुल 10 उत्कृष्ट टीमों ने क्वालीफाई किया।
कार्यक्रम का सफल आयोजन संस्थान के निदेशक एवं विभागाध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार की अध्यक्षता में हुआ। प्रतियोगिता के कार्यक्रम समन्वयक सहायक प्राध्यापक श्री रविकेश कुमार मौर्या रहे। वहीं सह-समन्वयक की भूमिका श्री योगेश उत्तम, डॉ. आश्रया दुबे, डॉ. शुभम सिंह एवं डॉ. विपिन कुमार सिंह ने निभाई। इस अवसर पर दत्तोपंत ठेंगड़ी लॉ इंस्टीट्यूट के सभी सम्मानित प्राध्यापक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

Tuesday, 29 September 2026

‘विकसित भारत’ के संकल्प से गूंजा पीयू

भाषण प्रतियोगिता में अभिनव कीर्ति पांडेय प्रथम

सेवा संकल्प अभियान के तहत 53 छात्र-छात्राओं ने प्रस्तुत किए  विचार

जौनपुर। प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी के जनसेवा से राष्ट्रसेवा के 25 वर्षों के उपलक्ष्य में आयोजित ‘सेवा संकल्प अभियान’  के अंतर्गत वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर में 29 सितंबर को भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कुलपति प्रो. आर. के. सिंह के दिशा-निर्देशन में प्रतियोगिता विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट सभागार में आयोजित हुई।

प्रतियोगिता में ‘विकसित भारत की संकल्पना’ तथा ‘सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं’ विषय निर्धारित किए गए थे। विश्वविद्यालय परिसर के विभिन्न विभागों के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग करते हुए विकसित भारत की परिकल्पना, जनकल्याणकारी योजनाओं तथा राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर अपने विचार प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम का उद्घाटन छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. प्रमोद कुमार यादव एवं राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. शशिकांत यादव ने संयुक्त रूप से किया। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा के माध्यम से सामाजिक सरोकारों और राष्ट्र निर्माण से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।

प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में डॉ. श्वेता पांडेय, डॉ. सुरेंद्र सिंह, डॉ. विशाल यादव एवं डॉ. अजय मौर्य शामिल रहे। प्रतिभागियों के भाषण की विषय-वस्तु, प्रस्तुतीकरण, तार्किकता, भाषा एवं अभिव्यक्ति के आधार पर मूल्यांकन किया गया।

प्रतियोगिता में अभिनव कीर्ति पांडेय ने प्रथम, वैष्णवी त्रिपाठी ने द्वितीय तथा मनीष जायसवाल ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। प्रतियोगिता में कुल 53 छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने विकसित भारत के निर्माण में युवा शक्ति की भूमिका, नागरिक जिम्मेदारियों और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे विषयों पर अपने विचार साझा किए। प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों को सार्वजनिक मंच पर अपनी अभिव्यक्ति और विचार रखने का अवसर प्रदान किया।

Monday, 28 September 2026

कक्षा से शोध तक गुणवत्ता ही पीयू की पहचान : कुलपति

नियमित पठन-पाठन, शोध और विद्यार्थी हित के कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से कुलपति प्रो. आर.के. सिंह ने सोमवार को इंजीनियरिंग संकाय स्थित विभिन्न विभागों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विभागाध्यक्षों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं शोधार्थियों से संवाद कर विभागों में संचालित शैक्षणिक, शोध एवं प्रशासनिक गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की।

निरीक्षण के दौरान कुलपति ने विभागों में नियमित कक्षाओं के संचालन, विद्यार्थियों की उपस्थिति, पठन-पाठन की स्थिति, शोध गतिविधियों, प्रयोगशालाओं एवं उपलब्ध संसाधनों, कार्यालयी कार्यों तथा आधारभूत सुविधाओं की समीक्षा की। उन्होंने विभागों में स्वच्छता, अनुशासन और समयबद्ध कार्यप्रणाली बनाए रखने पर विशेष जोर दिया।

कुलपति प्रो. आर.के. सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता केवल भवनों, संसाधनों या व्यवस्थाओं से नहीं, बल्कि कक्षा में होने वाले गुणवत्तापूर्ण संवाद, नियमित पठन-पाठन, शोध की सक्रियता और विद्यार्थियों के समग्र विकास से तय होती है। इसलिए विश्वविद्यालय के सभी विभागों को एक-दूसरे के साथ समन्वय स्थापित करते हुए गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण के निर्माण के लिए निरंतर प्रयास करना होगा।

उन्होंने कहा कि कक्षा विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था का केंद्र है और विद्यार्थी उसकी सबसे महत्वपूर्ण इकाई हैं। शिक्षकों का दायित्व है कि वे विद्यार्थियों से निरंतर संवाद करते हुए उनकी शैक्षणिक समस्याओं को समझें और उनके समाधान के लिए प्रभावी प्रयास करें। विद्यार्थियों की उपस्थिति, नियमित कक्षाओं और गुणवत्तापूर्ण अध्ययन को किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

निरीक्षण के दौरान कुलपति ने कई कक्षाओं में जाकर विद्यार्थियों से सीधे संवाद किया। उन्होंने विद्यार्थियों से पठन-पाठन, कक्षाओं की नियमितता और विभागीय शैक्षणिक गतिविधियों के संबंध में जानकारी ली तथा उनकी समस्याओं और सुझावों को भी सुना। उन्होंने शिक्षकों को विद्यार्थियों के साथ सहज एवं सकारात्मक संवाद बनाए रखने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर इंजीनियरिंग संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो. सौरभ पाल, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. रजनीश भास्कर सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक एवं संबंधित कर्मचारी उपस्थित रहे।

Sunday, 27 September 2026

पीयू ने जारी किया सत्र 2026-27 का खेलकूद कैलेंडर

विश्वविद्यालय परिसर में होंगी प्रमुख प्रतियोगिताएं, 

विभिन्न महाविद्यालयों को भी मिली जिम्मेदारी

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर के खेलकूद परिषद ने सत्र 2026-27 के लिए अंतर महाविद्यालयीय प्रतियोगिताओं का वार्षिक खेलकूद कैलेंडर जारी कर दिया है। खेलकूद परिषद के सचिव प्रो. शेखर सिंह की ओर से जारी कैलेंडर में विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए विश्वविद्यालय परिसर तथा संबद्ध महाविद्यालयों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

विश्वविद्यालय परिसर में होंगी ये प्रतियोगिताएं

खेलकूद कैलेंडर के अनुसार कुश्ती पुरुष एवं महिला, क्रिकेट पुरुष, क्रिकेट महिला तथा एथलेटिक्स पुरुष एवं महिला की प्रतियोगिताओं का आयोजन वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय परिसर में होगा। इसके अलावा योगासन पुरुष एवं महिला प्रतियोगिता भी विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित की जाएगी। इस तरह विश्वविद्यालय परिसर में विभिन्न खेल विधाओं की महत्वपूर्ण प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा।

महाविद्यालयों को मिली विभिन्न खेलों की जिम्मेदारी

बैडमिंटन पुरुष एवं महिला की जिम्मेदारी टीडीपीजी कॉलेज, जौनपुर , हैंडबाल पुरुष की फरीदुल हक मेमोरियल पीजी कॉलेज, जौनपुर तथा फुटबॉल पुरुष की जिम्मेदारी राजा श्री कृष्ण दत्त पीजी कॉलेज, जौनपुर को दी गई है। खो-खो पुरुष के लिए गुलाबी देवी पीजी कॉलेज, सिद्दीकपुर तथा खो-खो महिला के लिए सहकारी पीजी कॉलेज, मिहरावां को आयोजन की जिम्मेदारी मिली है। बास्केटबाल पुरुष के लिए पीजी कॉलेज, गाजीपुर को नामित किया गया है।

कबड्डी पुरुष के लिए टीडीपीजी कॉलेज, जौनपुर तथा कबड्डी महिला के लिए मड़ियाहूं पीजी कॉलेज, मड़ियाहूं जौनपुर को जिम्मेदारी दी गई है। वालीबाल पुरुष की प्रतियोगिता सत्यदेव पीजी कॉलेज, गाजीपुर तथा क्रासकंट्री पुरुष एवं महिला की प्रतियोगिता पं. दीन दयाल उपाध्याय राजकीय महाविद्यालय, सैदपुर, गाजीपुर में होगी।

ट्रायल स्तर पर हॉकी महिला एवं पुरुष के लिए श्री मेघबरन सिंह पीजी कॉलेज, करमपुर, गाजीपुर को जिम्मेदारी दी गई है। शक्तितोलन पुरुष एवं महिला तथा शरीर सौष्ठव पुरुष के लिए स्वामी सहजानंद पीजी कॉलेज, गाजीपुर को नामित किया गया है। बास्केटबाल महिला के लिए पीजी कॉलेज, गाजीपुर तथा ताइक्वांडो पुरुष एवं महिला के लिए स्वामी सहजानंद पीजी कॉलेज, गाजीपुर को जिम्मेदारी मिली है।

बॉक्सिंग पुरुष एवं महिला के लिए श्री आचार्य बलदेव पीजी कॉलेज पतरही, जौनपुर, शूटिंग पुरुष एवं महिला के लिए टीडीपीजी कॉलेज, जौनपुर, हैंडबाल महिला के लिए राजाराम महाविद्यालय, बैलोनाकला, जौनपुर तथा वालीबाल महिला के लिए राम अवध यादव गन्ना कृषक महाविद्यालय, ताखा, शाहगंज, जौनपुर को प्रतियोगिताएं आवंटित की गई हैं।

इसी क्रम में कराटे पुरुष एवं महिला और वूशू पुरुष एवं महिला की जिम्मेदारी मोहम्मद हसन पीजी कॉलेज, जौनपुर, तीरंदाजी पुरुष एवं महिला की हिन्दू पीजी कॉलेज, जमानियां, गाजीपुर तथा भारतोलन महिला एवं पुरुष की राजा हरपाल सिंह महाविद्यालय, सिंगरामऊ, जौनपुर को दी गई है। बॉक्सिंग की जिम्मेदारी श्री आचार्य बलदेव पीजी कॉलेज, पतरही, जौनपुर को सौंपी गई है।

खेलकूद परिषद की ओर से जारी कैलेंडर के माध्यम से सत्र 2026-27 में होने वाली अंतर महाविद्यालयीय प्रतियोगिताओं के आयोजन की जिम्मेदारियां स्पष्ट कर दी गई हैं, जिससे प्रतियोगिताओं के संचालन की तैयारियां निर्धारित जिम्मेदारी वाले संस्थानों द्वारा की जा सकेंगी।

सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं, अभ्यास ही असली कुंजी : प्रो. आर.के. सिंह

पीयू के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग में फ्रेशर्स पार्टी का आयोजन
जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग संकाय के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग में रविवार को आर्यभट्ट सभागार में नवागंतुक विद्यार्थियों के स्वागत में फ्रेशर्स पार्टी का आयोजन किया गया।  

 मुख्य अतिथि के रूप में कुलपति प्रोफेसर आरके सिंह ने  नवागंतुक विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए उन्हें परिश्रम, अनुशासन और निरंतर अभ्यास के माध्यम से जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की वास्तविक पहचान उसके भव्य भवनों, आधुनिक प्रयोगशालाओं, शिक्षकों अथवा कर्मचारियों की संख्या से नहीं, बल्कि वहां अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों की उपलब्धियों, उनके आचरण, ज्ञान और सामाजिक योगदान से होती है। विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा उसके विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और कृतित्व से निर्मित होती है। विद्यार्थी जब अपनी प्रतिभा, परिश्रम और नैतिक मूल्यों के बल पर जीवन में सफलता अर्जित करते हैं, तो उससे न केवल उनका परिवार और समाज गौरवान्वित होता है, बल्कि उनके शिक्षण संस्थान का नाम भी रोशन होता है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में प्रवेश लेना जीवन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन इसे अंतिम लक्ष्य नहीं समझना चाहिए। यह एक नई यात्रा की शुरुआत है, जहां विद्यार्थियों को अपने ज्ञान, कौशल और व्यक्तित्व को निरंतर विकसित करना है। इंजीनियरिंग जैसे व्यावहारिक एवं तकनीकी विषय में सफलता प्राप्त करने के लिए कक्षा में प्राप्त सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ प्रयोगशाला में अभ्यास, तकनीकी दक्षता और समस्याओं के समाधान की क्षमता विकसित करना आवश्यक है।

कुलपति ने विद्यार्थियों को सफलता का मंत्र देते हुए ‘पीपीपी मॉडल’ यानी ‘प्रैक्टिस, प्रैक्टिस और केवल प्रैक्टिस’ का सूत्र दिया। उन्होंने कहा कि निरंतर अभ्यास ही किसी व्यक्ति को अपने कार्य में दक्ष बनाता है। केवल ज्ञान प्राप्त कर लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस ज्ञान को व्यवहार में उतारना और बार-बार अभ्यास के माध्यम से उसमें निपुणता हासिल करना जरूरी है। अभ्यास से आत्मविश्वास बढ़ता है, गलतियों को सुधारने का अवसर मिलता है और कठिन से कठिन लक्ष्य को प्राप्त करने की क्षमता विकसित होती है।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपनी कमजोरियों को पहचानें, उनसे घबराने के बजाय उन्हें दूर करने का प्रयास करें। असफलता को सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा मानें और प्रत्येक चुनौती को स्वयं को बेहतर बनाने के अवसर के रूप में स्वीकार करें। नियमित अध्ययन, समय का सदुपयोग, अनुशासन और निरंतर प्रयास को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। तकनीकी शिक्षा के विद्यार्थियों को बदलती तकनीक और उद्योग जगत की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार करना चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विभागाध्यक्ष प्रो. रजनीश भास्कर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए अपने जीवन-संघर्ष से जुड़ा प्रेरक प्रसंग साझा किया। उन्होंने बताया कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है और संघर्ष ही व्यक्ति को अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ बनाता है। 
कार्यक्रम में डा. लक्ष्मी मौर्य एवं शिवांग सहित विभाग के शिक्षक डॉ. सत्यम उपाध्याय, डॉ. सौरभ कुमार, डॉ. जया शुक्ला, डॉ. अनुराग सिंह, डॉ. मनीष गुप्ता, डॉ. श्वेता सिंह, शरद चन्द्र और धर्मेन्द्र यादव प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

Saturday, 26 September 2026

नए पाठ्यक्रम, स्मार्ट क्लास और कौशल प्रशिक्षण पर जोर

कुलपति ने संकायाध्यक्षों एवं विभागाध्यक्षों के साथ की बैठक
नए प्रस्ताव 30 सितंबर तक भेजने के निर्देश 

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति सभागार में शनिवार को कुलपति प्रो. आर. के . सिंह की अध्यक्षता में संकायाध्यक्षों एवं विभागाध्यक्षों की बैठक की गई। बैठक में विश्वविद्यालय में शैक्षणिक गुणवत्ता को और प्रभावी बनाने, विद्यार्थियों को रोजगारपरक एवं कौशल आधारित शिक्षा उपलब्ध कराने तथा विभागों को आधुनिक शैक्षणिक जरूरतों के अनुरूप विकसित करने सहित विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
   कुलपति प्रो. सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय में नए एवं रोजगारपरक पाठ्यक्रम शुरू करने की दिशा में विभाग ठोस प्रस्ताव तैयार करें। नए पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों की संभावित मांग, रोजगार की संभावनाओं तथा समाज की आवश्यकता को ध्यान में रखा जाए। सभी संबंधित प्रस्ताव निर्धारित समय में विश्वविद्यालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
   बैठक में खेलकूद गतिविधियों को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया गया। विभागों को विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचानने तथा उन्हें खेल एवं अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों से जोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया। 
   कुलपति ने कहा कि कक्षा शिक्षण को विद्यार्थियों के लिए अधिक रोचक और संवादपरक बनाया जाए। शिक्षक कक्षा की शुरुआत सीधे विषय की औपचारिक चर्चा से करने के बजाय विद्यार्थियों की रूचि जगाने वाली घटनाओं, उदाहरणों, प्रश्नों और समसामयिक संदर्भों से करें, जिससे कक्षा में सहभागिता बढ़े।
   बैठक में स्मार्ट क्लासरूम को अधिक प्रभावी बनाने तथा उपलब्ध तकनीकी संसाधनों का शिक्षण में बेहतर उपयोग करने पर भी चर्चा हुई।   विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के कौशल विकास और व्यावहारिक प्रशिक्षण पर भी विशेष चर्चा हुई। बाहर के विशेषज्ञों के माध्यम से साइबर सिक्योरिटी सहित विभिन्न समसामयिक विषयों पर कार्यशालाएं आयोजित करने की योजना पर विचार किया गया।
   बैठक में  एनआईआरएफ सहित विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय स्तर की शैक्षणिक पहचान और रैंकिंग से जुड़े प्रयासों को और व्यवस्थित करने पर भी चर्चा हुई। 
   कुलपति ने पाठ्यक्रमों को नवीनतम बनाने पर विशेष बल देते हुए कहा कि विद्यार्थियों को केवल पुराने संदर्भों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। 
   कुलपति ने विश्वविद्यालय परिसर में कार्यरत कर्मचारियों के साथ भी सम्मानजनक एवं मानवीय व्यवहार की आवश्यकता पर बल दिया। सफाईकर्मियों सहित सभी कर्मचारियों के साथ सम्मान और आत्मीयता से व्यवहार किया जाए तथा परिसर की स्वच्छता और बेहतर वातावरण बनाए रखने में सभी विभाग सहयोग करें।
   कुलपति ने निर्देश दिया कि विभाग अपने प्रस्तावों को प्राथमिकता के आधार पर तैयार      कर निर्धारित समय सीमा में विश्वविद्यालय प्रशासन को उपलब्ध कराएं, ताकि आगामी  शैक्षणिक सत्र में आवश्यक योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू किया जा सके।
   बैठक में कुलसचिव डॉ विनोद कुमार सिंह, डीएसडब्लयू प्रो. प्रमोद यादव प्रो. मनोज मिश्र, प्रो. अविनाश पाथर्डीकर, प्रो. प्रदीप कुमार, प्रो. मिथिलेश कुमार सिंह, प्रो. सौरभ पाल, प्रो. विनोद गुप्ता, समेत समस्त विभागाध्यक्ष  उपस्थित रहे।

Friday, 25 September 2026

विश्व फार्मासिस्ट दिवस पर फार्मेसी विभाग में विविध कार्यक्रम आयोजित

जौनपुर । वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर के फार्मेसी विभाग में शुक्रवार को विश्व फार्मासिस्ट दिवस उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया। इस वर्ष की थीम इंपावरिंग फार्मासिस्ट फार ए हेल्थियर फ्यूचर  अर्थात “स्वस्थ भविष्य के लिए फार्मासिस्टों को सशक्त बनाना” को केंद्र में रखते हुए विभाग में विभिन्न रचनात्मक एवं जागरूकतापरक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
कार्यक्रम का शुभारंभ विभागाध्यक्ष डॉ. नृपेन्द्र सिंह एवं प्रो. नरेन्द्र सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर रंगोली प्रतियोगिता, पोस्टर प्रस्तुति तथा निबंध लेखन प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें फार्मेसी विभाग के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।
विभागाध्यक्ष डॉ. नृपेन्द्र सिंह ने कहा कि फार्मासिस्ट स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग हैं। उन्होंने दवाओं के तर्कसंगत एवं उचित उपयोग  पर विशेष जोर देते हुए कहा कि मरीजों को दवाओं की सही मात्रा, सही समय और सही तरीके से सेवन के संबंध में उचित परामर्श देना फार्मासिस्ट की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
प्रो. नरेन्द्र सिंह ने कहा कि फार्मेसी के छात्रों को अपने ज्ञान और व्यावसायिक कौशल का उपयोग समाज के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए करना चाहिए। उन्होंने एंटीबायोटिक प्रतिरोध  के बढ़ते खतरे पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एंटीबायोटिक दवाओं का अनावश्यक एवं गलत उपयोग भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन सकता है। 
डॉ. विजय बहादुर मौर्य ने कहा कि बदलती स्वास्थ्य आवश्यकताओं के अनुरूप फार्मासिस्टों का ज्ञान, कौशल और व्यावसायिक क्षमता के स्तर पर सशक्त होना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को निरंतर सीखने तथा अपने ज्ञान एवं कौशल में निरंतर अभिवृद्धि करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती पूजा  और धन्यवाद ज्ञापन विभागाध्यक्ष डॉ. नृपेन्द्र सिंह ने किया।
इस अवसर पर डॉ. सुरेंद्र कुमार सिंह, डॉ. झांसी मिश्रा, डॉ. सुरेंद्र कुमार गौतम, अभिषेक कुमार यादव,  शक्ति जायसवाल , हेमन्त दूबे एवं प्रशांत यादव सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

अंत्योदय से ही साकार होगा नवभारत का सपना : प्रो. संजीत गुप्ता

तकनीक, शिक्षा तभी सार्थक, जब पहुंचे अंतिम व्यक्ति तकः प्रो. आर.के. सिंह
भारतीय ज्ञान परंपरा एवं नवभारत की वैचारिक आधारभूमि विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी
   
  जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट सभागार में शुक्रवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद में निहित भारतीय ज्ञान परंपरा एवं नवभारत की वैचारिक आधारभूमि विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
       कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय, बलिया के पूर्व कुलपति प्रो. संजीत कुमार गुप्ता ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में ज्ञान,  दर्शन,  विज्ञान और लोककल्याण को एक सूत्र में पिरोया गया है। भारत की ज्ञान परंपरा केवल भारत तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसने पूरे विश्व को ज्ञान और मानव कल्याण का मार्ग दिखाया है। उन्होंने कहा कि आज भारत अध्यात्म और दर्शन के साथ विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में भी निरंतर आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा की वैज्ञानिक दृष्टि का उल्लेख करते हुए कहा कि आर्यभट्ट ने पृथ्वी के गोल होने और खगोलीय ज्ञान के संबंध में महत्वपूर्ण तथ्य बहुत पहले प्रस्तुत कर दिए थे। 
प्रो. गुप्ता ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा का मूल उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं, बल्कि ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ और विश्व कल्याण की भावना के साथ ज्ञान का उपयोग करना है। 


कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चिंतन में अंत्योदय का भाव निहित है। आज की तकनीक तभी सार्थक है, जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि नवभारत की तकनीक गांव के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य, शिक्षा और विभिन्न सेवाओं को सहजता से पहुंचाने का माध्यम बन सकती है। 
     कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय के शिक्षक और विद्यार्थी अपने ज्ञान को केवल व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित न रखें, बल्कि उसे समाज के लिए उपयोगी बनाने का प्रयास करें। शिक्षा जब संवेदना से जुड़ेगी, तभी वह समाज और राष्ट्र के वास्तविक विकास का माध्यम बनेगी।   स्वागत भाषण करते हुए पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ के निदेशक प्रो. मानस पांडेय ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं से यह प्रश्न करना चाहिए कि वह कौन है और उसका लक्ष्य क्या है। अपने लक्ष्य को पहचानकर पूरी निष्ठा से कर्म पर ध्यान केंद्रित किया जाए तो सफलता और कैरियर का मार्ग स्वतः प्रशस्त होता है। 
इसके पूर्व मुख्य अतिथि और अध्यक्षता कर रहे कुलपति जी को अभिनंदन पत्र और अंगवस्त्रम से सम्मानित किया गया। 
 
 
इस अवसर पर छात्र अभिनव कीर्ति पांडेय ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने विपरीत परिस्थितियों में भी समाज का मार्गदर्शन किया। उन्होंने वसुधैव कुटुंबकम की भावना को जीवन-दृष्टि के रूप में स्वीकार करने तथा अंत्योदय के सिद्धांत को सामाजिक समरसता और सर्वजन हित से जोड़ने का मार्ग दिखाया। 
 कार्यक्रम का संचालन दीनदयाल शोधपीठ के सचिव डॉ. अनुराग मिश्रा ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. राहुल राय ने किया।
इस अवसर पर प्रो. प्रमोद कुमार यादव, प्रो. अविनाश , प्रो. अजय द्विवेदी, प्रो. मनोज मिश्रा, प्रो. मिथिलेश सिंह, प्रो. रजनीश भास्कर, डॉ. विजय सिंह, डॉ. राहुल सिंह, डॉ. शैलेंद्र सिंह,  डॉ. संतोष कुमार पांडेय, डॉ.विजय प्रताप तिवारी, डॉ. सुशील कुमार मिश्र, प्रो. रवि प्रकाश, प्रो. प्रमोद कुमार, प्रो. गिरधर मिश्रा, प्रो. विनोद कुमार गुप्ता, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. रशिकेश, डॉ. जाह्नवी श्रीवास्तव, कर्मचारी संघ के महामंत्री राधेश्याम सिंह मुन्ना, डॉ. आलोक गुप्ता, डॉ. अंकित कुमार सिंह, डॉ. वनिता सिंह, डॉ. प्रियंका,डॉ. आश्रेया दुबे,डॉ. शुभम सिंह, डॉ. विपिन सिंह, डॉ. दिनेश कुमार सिंह,रविकेश मौर्य, योगेश उत्तम सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

Thursday, 24 September 2026

नशामुक्त युवा फॉर विकसित भारत के संकल्प के साथ मनाया गया एन एस एस स्थापना दिवस

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर में कंज्यूमर वॉयस, नई दिल्ली एवं कंज्यूमर गिल्ड, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय सेवा योजना स्थापना दिवस के अवसर पर “नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत” अभियान के अंतर्गत युवाओं में शराब के दुष्प्रभावों की रोकथाम, जागरूकता एवं संरक्षण विषयक युवा संवेदनी कार्यशाला का आयोजन किया गया। 
कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. आर. के. सिंह ने कहा कि युवाओं की ऊर्जा और प्रतिभा राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है। नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से युवाओं को बचाने के लिए परिवार, शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संगठनों और युवाओं को मिलकर कार्य करना होगा। 
मुख्य वक्ता अभिषेक श्रीवास्तव कंज्यूमर गिल्ड लखनऊ ने कहा कि एक जागरूक युवा वही है जो किसी वस्तु या आदत को अपनाने से पहले उसके प्रभाव और परिणाम को समझता है। आज आवश्यकता है कि हम युवाओं को केवल यह न कहें कि “नशा मत करो”, बल्कि उन्हें यह भी बताएं कि नशे से दूर रहकर जीवन में बेहतर विकल्प क्या हो सकते हैं—खेल, योग, अध्ययन, नवाचार, सामाजिक सेवा और रचनात्मक गतिविधियां।


सुश्री नीलजना बोस ने अपना उद्बोधन एक प्रस्तुतिकारण के साथ प्रस्तुत किया कई बार युवाओं पर दोस्तों का दबाव, सामाजिक वातावरण या यह सोच प्रभाव डालती है कि शराब पीना आधुनिक जीवनशैली का हिस्सा है। हमें इस सोच पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। 

 डीएसडब्ल्यू प्रो. प्रमोद कुमार यादव ने कहा कि   आज युवा जीवन में अनेक प्रकार के दबावों से गुजरता है—पढ़ाई का दबाव, करियर की चिंता, प्रतिस्पर्धा, सामाजिक अपेक्षाएं और साथियों का प्रभाव। ऐसे समय में हमें युवाओं को केवल उपदेश देने के बजाय उन्हें सही जानकारी, सही मार्गदर्शन और सकारात्मक वातावरण देना होगा। मैं कंज्यूमर वॉयस, नई दिल्ली एवं कंज्यूमर गिल्ड, लखनऊ का भी आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने युवाओं के बीच इस महत्वपूर्ण विषय को लेकर संवाद की पहल की है। 
राष्ट्रीय सेवा योजना स्थापना दिवस पर नशा मुक्ति युवा फॉर विकसित थीम पर स्वयंसेवकों निशांत एवं अंजली की टीम ने नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। रिया गुप्ता, आस्था सोनी, अंतिम विश्वकर्मा, अंजली चौहान, संध्या विंद ने नशा मुक्त पर सॉन्ग प्रस्तुत किया। अतिथियों का स्वागत परिचय कार्यक्रम समन्वयक डॉ शशिकांत यादव ने किया ।

कार्यक्रम का संचालन अभिनव कीर्ति पांडेय और श्री ओम प्रकाश मिश्र ने किया धन्यवाद ज्ञापन सुमित सिंह ने किया। इस अवसर पर डॉ श्याम कन्हैया डॉ अनुराग मिश्र, डॉ श्वेता पांडेय, डॉ राधिका उर्मिलिया, डॉ विवेक डॉ रिचा सिंह, अर्पिता यादव, शिवांगी कौशल,  आर्ची वर्मा, बृजेश एवं बड़ी संख्या में स्वयंसेवक उपस्थित रहे।