Saturday, 28 February 2026

वैज्ञानिक सोच से आत्मनिर्भर भारत का निर्माण: प्रो. वंदना सिंह


विकसित भारत के लिए शोध,  नवाचार जरूरी : प्रो. बाल चन्द्र यादव
दो दिवसीय राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का भव्य समापन

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर के प्रो. राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैया) संस्थान में शनिवार को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर आर्यभट्ट सभागार में गरिमामय एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। 
अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने विज्ञान को समाज के सर्वांगीण विकास की आधारशिला बताते हुए विद्यार्थियों को नवाचार, शोध एवं सृजनात्मक चिंतन की दिशा में अग्रसर होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण ही राष्ट्र को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाती है तथा नई पीढ़ी को समस्याओं के समाधान हेतु तार्किक एवं प्रयोगात्मक सोच विकसित करनी चाहिए। भारत तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए हमें अपने युवा पीढ़ी को सशक्त करना पड़ेगा | इस दिशा में भारत सरकार के स्टार्टअप, इनक्यूबेटर, शोध और अनुसंधान में प्रोत्साहन दिया जा रहा है |
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय लखनऊ के प्रो. बाल चन्द्र यादव ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे नवीन वैज्ञानिक अनुसंधानों के साथ नैनोसाइंस एवं इसकी उपयोगिता तथा वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारत की भूमिका पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान युग ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था का है, जिसमें वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार की निर्णायक भूमिका है। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो. मृत्युञ्जय पाण्डेय ने वैज्ञानिक सोच, गुणवत्तापूर्ण शोध, अंतर्विषयी अध्ययन तथा युवाओं की जिम्मेदारी पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने विद्यार्थियों को शोध में मौलिकता, नैतिकता और समर्पण बनाए रखने की प्रेरणा दी।
रज्जू भैया संस्थान के निदेशक एवं अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. प्रमोद कुमार यादव ने स्वागत भाषण देते हुए राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। संकायाध्यक्ष प्रो. राजेश शर्मा ने विज्ञान में महिलाओं के  उपलब्धियों को विस्तार से बताया।
इस अवसर पर आयोजित क्विज, निबंध लेखन, पोस्टर एवं रंगोली प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। साथ ही सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाणपत्र वितरित किए गए। प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों की रचनात्मकता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और विषय के प्रति गहन समझ स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई।
कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन प्रो. देवराज सिंह द्वारा प्रस्तुत किया गया, जबकि संचालन डॉ. शशिकांत यादव ने कुशलतापूर्वक किया।
इस अवसर पर प्रो मनोज मिश्र, प्रो प्रदीप कुमार, प्रो. मिथिलेश सिंह, प्रो. गिरिधर मिश्र, प्रो. प्रमोद कुमार, डा दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ. नीरज अवस्थी, डॉ. अजीत सिंह, डॉ. सुजीत चौरसिया, डॉ. धीरेन्द्र चौधरी, डॉ. पुनीत धवन, डॉ. मिथिलेश यादव, डॉ. काजल डे, डॉ. आलोक वर्मा, डॉ. दिनेश वर्मा, डॉ. संदीप वर्मा, डॉ. रामांशु, डॉ. आशीष वर्मा, डॉ. दीपक मौर्य, डॉ. सौरभ सिंह, डॉ.अवधेश कुमार मौर्य सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के शिक्षकगण, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। पूरे आयोजन के दौरान विज्ञान के प्रति उत्साह, जिज्ञासा एवं नवाचार की भावना का सजीव और प्रेरणादायी वातावरण बना रहा।

Friday, 27 February 2026

नवाचार से उद्यमी बने विद्यार्थी: मुकुल वेदी


जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर के विज्ञान संकाय के अंतर्गत बॉयोटेक्नोलॉजी एवं बायोकेमिस्ट्री विभाग द्वारा एक व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान, अहमदाबाद से पधारे विशेषज्ञ वक्ता मुकुल वेदी ने छात्र-छात्राओं को उद्यमिता एवं नवाचार के विविध आयामों से अवगत कराया।

श्री वेदी ने विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए आइडिया से बिजनेस प्लान तक की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। उन्होंने कृषि, पर्यावरण, मेडिकल डिवाइस, फूड सेक्टर, टिश्यू कल्चर, डायग्नोस्टिक किट, स्टार्टअप संस्कृति तथा नवाचार की आवश्यकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डाला। साथ ही उद्योग–अकादमिक सहयोग में ईडीआईआई की भूमिका को रेखांकित करते हुए विद्यार्थियों को पारंपरिक रोजगार के साथ-साथ स्वरोजगार एवं अनुसंधान आधारित स्टार्टअप की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने शोध, कौशल विकास, इंटर्नशिप और नेटवर्किंग के महत्व को बताते हुए कहा कि सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से युवा उद्यमी वित्तीय सहायता प्राप्त कर अपने विचारों को व्यवसाय में परिवर्तित कर सकते हैं।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने सरकार द्वारा वित्तीय सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया सहित विभिन्न करियर संबंधी प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञ वक्ता ने विस्तार से समाधान किया।
कार्यक्रम के आयोजन सचिव एवं बायोकेमिस्ट्री विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष कुमार गुप्ता ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए अतिथि वक्ता का स्वागत किया और कहा कि ऐसे व्याख्यान विद्यार्थियों को नई दिशा एवं दृष्टि प्रदान करते हैं। कार्यक्रम के संयोजक विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो. राजेश शर्मा ने स्मृति चिन्ह भेंट कर श्री मुकुल वेदी का आभार व्यक्त किया तथा धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस व्याख्यान से विद्यार्थियों को उद्यमिता की समझ विकसित करने में विशेष सहायता मिलेगी।
कार्यक्रम का संचालन डॉ.संजीव कुमार मौर्य ने किया एवं अतिथि का जीवन परिचय फ़ूड साइंस टेक्नोलॉजी की छात्रा स्नेहा मौर्य ने प्रस्तुत किया। 
इस अवसर  प्रो एस पी तिवारी, डॉ ऋषि श्रीवास्तव, डॉ प्रतिमा, डॉ श्वेता, डॉ सिपाही लाल पटेल समेत शोधार्थी एवं  छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

पोस्टर, रंगोली, क्विज, निबंध प्रतियोगिताओं में छात्रों की उत्साहपूर्ण सहभागिता


विज्ञान दिवस की पूर्व संध्या पर विविध प्रतियोगिताओं का आयोजन
जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) भौतिक विज्ञान अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान द्वारा राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की पूर्व संध्या पर विभिन्न शैक्षणिक एवं रचनात्मक प्रतियोगिताओं का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत पोस्टर, रंगोली, क्विज एवं निबंध प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जिनमें विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों एवं संस्थानों के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नवाचार की भावना तथा विज्ञान के प्रति गहरी रुचि विकसित करना था। पोस्टर एवं रंगोली प्रतियोगिताओं में प्रतिभागियों ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, पर्यावरण संरक्षण तथा सतत विकास जैसे समसामयिक विषयों को सृजनात्मक और आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया। क्विज प्रतियोगिता में छात्रों ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से संबंधित प्रश्नों के उत्तर देकर अपनी ज्ञान क्षमता और त्वरित निर्णय कौशल का परिचय दिया। वहीं निबंध प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने विज्ञान की भूमिका, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा समाज पर उसके प्रभाव जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किए।
अधिष्ठाता छात्र कल्याण एवं कार्यक्रम संयोजक प्रो. प्रमोद कुमार यादव ने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, तार्किक क्षमता एवं रचनात्मकता के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों की सराहना करते हुए कहा कि राष्ट्रीय विज्ञान दिवस जैसे अवसर विद्यार्थियों को विज्ञान के महत्व को समझने और नवाचार के लिए प्रेरित करने का सशक्त माध्यम हैं।
इस अवसर पर आयोजन सचिव डॉ. नितेश जायसवाल, डॉ. शशिकांत यादव, डॉ. जान्हवी श्रीवास्तव, डॉ. नीरज अवस्थी, डॉ. अजीत सिंह, डॉ. वनिता सिंह, डॉ. संदीप वर्मा, डॉ. सुजीत चौरसिया सहित अन्य शिक्षक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के मुख्य समारोह में प्रदान किए जाएंगे, जबकि सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा। शिक्षकों एवं स्वयंसेवकों के सहयोग से कार्यक्रम का सफल संचालन संपन्न हुआ।
यह आयोजन राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के उपलक्ष्य में विज्ञान के प्रति जागरूकता प्रसारित करने तथा विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं प्रेरणादायक पहल सिद्ध हुआ।

पीयू में मतदाता जागरूकता की अलख



कुलपति प्रो. वंदना सिंह की अध्यक्षता में ईएलसी समीक्षा कार्यक्रम, शत-प्रतिशत मतदान का आह्वान
जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के महंत अवैद्यनाथ संगोष्ठी भवन में शुक्रवार को कुलपति प्रो. वंदना सिंह की अध्यक्षता में मतदाता साक्षरता क्लब (ईएलसी) की समीक्षा कार्यक्रम आयोजित की गई। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय से संबद्ध सभी राजकीय, अशासकीय एवं स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में मतदाता साक्षरता क्लब को सक्रिय किए जाने तथा पात्र छात्र-छात्राओं को मतदाता के रूप में पंजीकृत कराने के निर्देश दिए गए।

कार्यक्रम का स्वागत भाषण परीक्षा नियंत्रक डॉ. विनोद कुमार सिंह ने प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने सभी प्राचार्यों को निर्देशित करते हुए कहा कि प्रत्येक महाविद्यालय में निर्वाचन साक्षरता क्लब का गठन कर उसे निरंतर सक्रिय रखा जाए। उन्होंने कहा कि मतदान और मतदाता लोकतंत्र की रीढ़ हैं तथा लोकतंत्र की सशक्तता के लिए सभी पात्र नागरिकों का नाम मतदाता सूची में दर्ज होना आवश्यक है। आगामी चुनावों में शत-प्रतिशत मतदान सुनिश्चित करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
मुख्य वक्ता एवं जिला स्वीप कोऑर्डिनेटर सै. मो. मुस्तफा ने निर्वाचन साक्षरता क्लब की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि ईएलसी का उद्देश्य युवा छात्र-छात्राओं को उनके चुनावी अधिकारों के प्रति जागरूक करना तथा पंजीकरण और मतदान की प्रक्रिया से परिचित कराना है। उन्होंने निर्देश दिया कि प्रत्येक कक्षा में कैंपस एंबेसडर की नियुक्ति की जाए तथा प्रत्येक कॉलेज से एक स्वीप नोडल अधिकारी एवं एक-एक बालक व बालिका कैंपस एंबेसडर नामित कर उनकी सूची विश्वविद्यालय को उपलब्ध कराई जाए।

उन्होंने यह भी बताया कि जो छात्र-छात्राएं 01 जनवरी 2026 को 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके हैं, वे प्रारूप-6 के माध्यम से अपना नाम निर्वाचक नामावली में जुड़वा सकते हैं। आवेदन संबंधित बीएलओ को प्रस्तुत किया जा सकता है अथवा ECINET ऐप डाउनलोड कर ऑनलाइन आवेदन भी किया जा सकता है। सभी महाविद्यालयों में मतदाता हेल्प डेस्क स्थापित करने के निर्देश भी दिए गए।

विश्वविद्यालय के नोडल अधिकारी डॉ. दीपक कुमार मौर्य ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों के प्रति आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम के अंत में कुलपति ने उपस्थित सभी लोगों को मतदाता शपथ दिलाई।
मंच संचालन उत्कर्ष त्रिपाठी एवं श्रद्धा श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी लाल बहादुर, प्रो. मिथिलेश सिंह, डॉ. रसिकेश सहित विभिन्न महाविद्यालयों के प्राचार्य एवं शिक्षकगण उपस्थित रहे।

Wednesday, 25 February 2026

शोधार्थी के लिए नवाचार सबसे बड़ी पूंजीः कुलपति

डिजिटल युग में आईपीआर अत्यंत महत्वपूर्णः अशोक सहगल

नवाचार संरक्षण राष्ट्र की प्रगति के लिए जरूरीः आलोक मिश्रा

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट सभागार में गुरुवार को इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट (आईपीआर) सेल की ओर से एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का विषय “बौद्धिक संपदा अधिकार : उभरती प्रवृत्तियाँ और चुनौतियाँ” रहा। इस अवसर पर अपने आशीर्वचन में कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने कहा कि “इन्वेंशन ही एसेट है”। किसी भी संस्थान अथवा शोधकर्ता के लिए नवाचार  उसकी सबसे बड़ी पूंजी होती है। यदि नए विचारों, शोध कार्यों और आविष्कारों को सही दिशा में संरक्षित किया जाए तो वही आर्थिक उन्नति और सामाजिक विकास का मजबूत आधार बनते हैं। विश्वविद्यालयों को नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकार से जुड़े नियमों, पेटेंट प्रक्रिया और कानूनी प्रावधानों की सही जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है। साथ ही डिजिटल युग की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज कॉपीराइट उल्लंघन, डेटा सुरक्षा और ऑनलाइन सामग्री की सुरक्षा गंभीर विषय बन चुके हैं।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक सहगल ने कहा कि डिजिटल युग में बौद्धिक संपदा अधिकार अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है। यदि सृजनकर्ता जागरूक नहीं रहेगा तो उसके नवाचार, शोध एवं रचनात्मक कार्य का दुरुपयोग हो सकता है। उन्होंने पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क आदि के पंजीकरण की विधि को विस्तार से समझाते हुए समयबद्ध फाइलिंग की आवश्यकता पर बल दिया।

भारतीय पेटेंट कार्यालय, नई दिल्ली के सहायक नियंत्रक (पेटेंट एवं डिज़ाइन) आलोक मिश्रा ने कहा कि नवाचार को संरक्षित करना राष्ट्र की प्रगति के लिए अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि देश को विकसित करने के लिए आईपीआर सेक्टर को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने पेटेंट आवेदन की प्रक्रिया, परीक्षा प्रणाली तथा स्टार्टअप एवं शैक्षणिक संस्थानों को मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी दी।

कमला नेहरू प्रौद्योगिकी संस्थान (के.एन.आई.टी.) सुल्तानपुर के एसोसिएट प्रोफेसर प्रो. प्रदीप कुमार ने कहा कि तकनीकी संस्थानों में शोध को उद्योग से जोड़ते समय आईपीआर की समझ आवश्यक है। इससे शोध का व्यावसायीकरण संभव होता है और नवाचार को उचित पहचान मिलती है।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विधि संकाय के डॉ. अभिषेक कुमार ने कहा कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में बौद्धिक संपदा अधिकार आर्थिक विकास का प्रमुख आधार बन चुका है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समझौतों और भारतीय कानूनों के समन्वय पर प्रकाश डाला।

टी.डी. लॉ कॉलेज, जौनपुर के डॉ. यशवंत सिंह ने कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकार कानून और नवाचार के बीच सेतु का कार्य करता है। विधि के विद्यार्थियों को आईपीआर के बदलते स्वरूप और न्यायिक दृष्टिकोण की जानकारी होना समय की मांग है। इसके पूर्व आईपीआर सेल के नोडल अधिकारी प्रो. रविप्रकाश ने स्वागत भाषण कर कार्यशाला की रूपरेखा पर प्रकाश डाला। समापन सत्र में परीक्षा नियंत्रक डॉ विनोद कुमार सिंह ने कहा कि डिजीटल युग में अपने हर शोध हो या सृजन उसके प्रति सजग रहने की जरूरत है। इसी के तहत हर संस्थाओं में आपीआर सेल का गठन हो रहा है। संचालन डॉ. रसिकेश और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. प्रदीप कुमार ने किया।  

कार्यक्रम में प्रो. प्रमोद कुमार यादव, प्रो. राजेश शर्मा, प्रो. विनोद कुमार, प्रो. प्रमोद कुमार, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. मंगला प्रसाद यादव, डॉ. नीतेश जायसवाल, डॉ. प्रवीण कुमार सिंह, डॉ. नीरज अवस्थी, डॉ. जया शुक्ला, डॉ. नृपेन्द्र सिंह, पूनम सोनकर,  डॉ. ज्योति सिंह, डॉ. अजय कुमार मौर्य, डॉ. सुधीर सिंह, डॉ. शैलेश प्रजापति, रीतेश बरनवाल,   सहित अनेक शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

Monday, 23 February 2026

सराय ख्वाजा स्थित ऐतिहासिक सूरजकुंड पर ग्रामीण संपर्क कार्यक्रम का आयोजन

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग के विद्यार्थियों द्वारा सराय ख्वाजा गांव के ऐतिहासिक सूरजकुंड पर ग्रामीण संपर्क कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को ग्रामीण परिवेश और क्षेत्र की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ना था।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने स्थानीय ग्रामीणों से संवाद स्थापित किया और सूरजकुंड के ऐतिहासिक महत्व, परंपराओं एवं लोकमान्यताओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। विद्यार्थियों ने ग्रामीण जीवन, सामाजिक संरचना और सांस्कृतिक पहलुओं पर भी गहन अध्ययन किया।
इस अवसर पर संकायाध्यक्ष प्रोफेसर मनोज मिश्र ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम शिक्षा को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि कक्षा में पढ़ाई के साथ-साथ समाज के बीच जाकर अनुभव प्राप्त करना विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम में  विभाग के डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. चंदन सिंह, डॉ. अमित मिश्रा, डॉ. अवध बिहारी सिंह,अर्पित यादव, आशुतोष सिंह, पंकज सिंह,आनंद सिंह समेत  शिक्षक उपस्थित रहे। छात्र स्वयंसेवकों सुमित सिंह, दिव्यांशु सिंह और पृथ्वीराज ने कार्यक्रम को सुचारू रूप से संपन्न कराने में अहम भूमिका निभाई। ग्राम प्रधान रैना संतोष सिंह ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया. 
कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन और पारस्परिक संवाद के साथ किया गया। विश्वविद्यालय ने इस पहल को ग्रामीण संवाद और जागरूकता की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया।

पूर्वांचल विश्वविद्यालय को मिली “एक जिला–एक व्यंजन” योजना में बड़ी जिम्मेदारी


जौनपुर, आजमगढ़ और मऊ की खानपान परंपरा को मिलेगा नया मंच
तीनों जनपदों के 2- 2 व्यजनों की प्राथमिक रिपोर्ट भेजी गई 


जौनपुर। उत्तर प्रदेश सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा निर्यात प्रोत्साहन विभाग द्वारा प्रदेश में “एक जिला–एक व्यंजन” योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर को इस योजना के अंतर्गत “ज्ञान भागीदार” के रूप में नामित किया गया है।
सोमवार को कुलपति प्रो. वंदना सिंह को योजना के अंतर्गत तैयार की गई प्राथमिक रिपोर्ट समन्वयक प्रो. प्रदीप कुमार एवं नोडल अधिकारी डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर ने प्रस्तुत की।रिपोर्ट में शासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार आजमगढ़, मऊ और जौनपुर जिलों के दो-दो पारंपरिक व्यंजनों/खाद्य उत्पादों की पहचान कर उनका विस्तृत दस्तावेजीकरण तैयार किया गया है, जिसे शासन को प्रेषित किया जा रहा है।
यह योजना प्रत्येक जिले की पारंपरिक खानपान परंपरा को चिन्हित कर उसे बाजार आधारित उत्पाद के रूप में विकसित करने, स्थानीय उद्यमिता को प्रोत्साहित करने तथा युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर सृजित करने के उद्देश्य से प्रारंभ की गई है।
पूर्वांचल विश्वविद्यालय को आजमगढ़, मऊ और जौनपुर जिलों के पारंपरिक व्यंजनों/खाद्य उत्पादों की पहचान कर उनका दस्तावेजीकरण, गुणवत्ता मानक निर्धारण, पैकेजिंग सुधार, ब्रांडिंग एवं बाजार से जोड़ने की रणनीति तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
पारंपरिक खानपान और स्थानीय स्वाद की विविधता को देखते हुए यह योजना क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह पहल प्रसिद्ध स्थानीय व्यंजनों, मिठाइयों और पारंपरिक खाद्य उत्पादों को नई पहचान देने में सहायक सिद्ध होगी, जिससे छोटे उद्यमियों और कारीगरों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है।
समन्वयक प्रो. प्रदीप कुमार ने बताया कि “एक जिला–एक व्यंजन” योजना के अंतर्गत चयनित उत्पादों को केवल परंपरा के रूप में नहीं, बल्कि उद्योग एवं पर्यटन आधारित पहचान के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके अंतर्गत स्वच्छता, भंडारण अवधि, खाद्य सुरक्षा, लेबलिंग, पैकेजिंग तथा मूल्य श्रृंखला विकास जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी आने वाले समय में विशेष कार्य किया जाएगा।नोडल अधिकारी डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर ने कहा कि इस योजना के दूरगामी परिणाम बहुत सुखद होंगे।
इस अवसर पर कुलसचिव  केशलाल, प्रो. गिरिधर मिश्र, प्रो. राजेश सिंह, डॉ. धीरेन्द्र  सहित अन्य अधिकारी एवं शिक्षकगण भी उपस्थित रहे। सभी ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन एवं इसके दूरगामी लाभों पर अपने विचार साझा किए।

Saturday, 21 February 2026

पूविवि में आरुषि तलवार हत्याकांड पर आधारित मूट कोर्ट की हुई नाट्य प्रस्तुति

आभासी न्यायालय से निखरता है व्यक्तित्व और विधिक कौशल- कुलपति

परिश्रम और तैयारी से ही मिलती है सफलता- विवेक कुमार सिंह

करियर उन्नयन एवं मूट कोर्ट पर विशेष व्याख्यान का भी हुआ आयोजन

जौनपुर. वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के दत्तोपंत ठेंगड़ी विधि संस्थान द्वारा शनिवार को “करियर उन्नयन एवं मूट कोर्ट मार्गदर्शन” विषय पर विशेष व्याख्यान एवं कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण वर्ष 2008 के चर्चित आरुषि तलवार हत्याकांड पर आधारित आभासी न्यायालय की नाट्य प्रस्तुति रही।
अध्यक्षीय उद्बोधन में  कुलपति प्रोफेसर वंदना सिंह ने कहा कि आभासी न्यायालय जैसी शैक्षणिक गतिविधियां विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, अभिव्यक्ति कौशल एवं विधिक दक्षता को सुदृढ़ बनाती हैं। उन्होंने कहा कि व्यवहारिक प्रशिक्षण से विद्यार्थी भविष्य की पेशेवर चुनौतियों के लिए पूर्णतया तैयार होते हैं।
मुख्य वक्ता के रूप में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अधिवक्ता  विवेक कुमार सिंह ने विद्यार्थियों को व्यावसायिक उन्नति, आभासी न्यायालय की उपयोगिता तथा विधि व्यवसाय में सफलता के व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने नियमित अध्ययन, नवीनतम विधिक ज्ञान एवं न्यायालयीन अनुशासन के महत्व पर विशेष बल दिया।
विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ अधिवक्ता श्री पी. एच. वशिष्ठ ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि एक सफल अधिवक्ता बनने के लिए वाद की गहन तैयारी, तथ्यों की स्पष्ट समझ तथा पेशेवर नैतिकता अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने न्यायालयीन प्रक्रिया, साक्ष्य परीक्षण, जिरह तथा विधिक तर्कों का प्रभावशाली प्रदर्शन कर सभी का ध्यान आकर्षित किया। इस प्रस्तुति के माध्यम से छात्र-छात्राओं को वास्तविक न्यायिक कार्यवाही की अनुभूति प्राप्त हुई तथा उनके आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। वित्त अधिकारी आत्मा प्रकाश धर द्विवेदी, कुलसचिव केशलाल ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया ।
संस्थान के निदेशक प्रोफेसर विनोद कुमार ने अतिथियों का स्वागत, संचालन डॉ. अनुराग मिश्र एवं आभार डॉ. दिनेश सिंह ने व्यक्त किया।
आरुषि तलवार हत्याकांड पर आधारित आभासी न्यायालय में विभिन्न भूमिकाओं में विधि के विद्यार्थी अपर्णा उपाध्याय, प्राची जायसवाल, प्रतीक्षा शुक्ला, अजीत कुमार, ईशांत यादव, अभितांश यादव, अजय बिंद, शिवानी दुबे, अनन्या अग्रहरी, स्नेहा मिश्रा, वैष्णवी त्रिपाठी, हिमांशु, अंकित प्रजापति, अजीत राजभर, सारा फातिमा, खुदैजा शेख, सत्यम यादव, सन्दल फिरदौस अंसारी रहें.
इस अवसर पर प्रो. प्रमोद कुमार यादव, प्रो. देवराज सिंह, प्रो. अविनाश पाथर्डीकर, प्रो. मिथिलेश सिंह, डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ. वनिता सिंह, डॉ. प्रियंका कुमारी, मंगला प्रसाद यादव,डॉ. इंद्रजीत, डॉ. अंकित सिंह, डॉ. राजित राम सोनकर, डॉ. प्रमोद कुमार, श्रीप्रकाश यादव, डॉ. राजन तिवारी, डॉ. शुभम सिंह, प्रगति सिंह एवं जीशान अली सहित अनेक शिक्षक उपस्थित रहे।

Wednesday, 18 February 2026

पीयू में मनाई गई वीर बहादुर सिंह की जयंती

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में स्वर्गीय वीर बहादुर सिंह जी की जयंती के अवसर पर कुलपति प्रो. वंदना सिंह सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी एवं कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर पुष्पांजलि अर्पित की और नमन किया।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने कहा कि स्व. वीर बहादुर सिंह जी का व्यक्तित्व सरलता, दूरदर्शिता और जनसेवा की भावना से ओत-प्रोत था। वे ऐसे जननायक थे जिन्होंने सदैव समाज के प्रत्येक वर्ग के उत्थान को अपनी प्राथमिकता बनाया। उनका प्रशासनिक कौशल, निर्णय क्षमता तथा विकासोन्मुख दृष्टिकोण उन्हें एक प्रभावशाली एवं लोकप्रिय नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित करता है।
कार्यक्रम में प्रो. देवराज सिंह, प्रो. रजनीश भास्कर, प्रो. अविनाश पार्थिडकर, प्रो. प्रमोद कुमार यादव, प्रो. गिरिधर मिश्र, अजीत प्रताप सिंह, डॉ. विनोद कुमार, डॉ. अनुराग मिश्र, डॉ. अंकित सिंह, डॉ. राशिकेश, डॉ. राहुल राय, डॉ. मनीष कुमार गुप्ता, डॉ. मनोज पांडेय, डॉ. नितेश जायसवाल, डॉ. नीरज अवस्थी, डॉ. श्याम कन्हैया, डॉ. शशिकांत यादव, सुशील प्रजापति, रमेश यादव, नंद किशोर सिंह, इंद्रेश कुमार, रजनीश सिंह, राज नारायण, श्याम त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

विश्वविद्यालय में रोजगार-योग्यता कौशल प्रशिक्षण शुरू


जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के केंद्रीय प्रशिक्षण एवं नियोजन प्रकोष्ठ द्वारा नांदी फाउंडेशन एवं महिंद्रा प्राइड क्लासरुम के संयुक्त तत्वावधान में तथा राष्ट्रीय कौशल विकास निगम के सहयोग से विश्वविद्यालय परिसर में अध्ययनरत छात्राओं हेतु “रोजगार-योग्यता संवर्धन कौशल” विषय पर एक सप्ताह का व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। यह कार्यक्रम माननीय कुलपति जी की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन के अनुसार दिनांक 17 फरवरी से 23 फरवरी, 2026 तक विश्वविद्यालय के इनक्यूबेशन केंद्र में संचालित किया जा रहा है।
प्रशिक्षण हेतु राष्ट्रीय कौशल विकास निगम द्वारा नामित प्रशिक्षक हिना मिश्रा एवं रोहित द्वारा अंग्रेज़ी बोलचाल, संप्रेषण कौशल, वित्तीय साक्षरता, डिजिटल जागरूकता तथा साक्षात्कार कौशल जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को रोजगार की वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप आवश्यक कौशल प्रदान कर उन्हें रोजगार हेतु योग्य बनाना है।
प्रथम दिवस छात्राओं का ऑनलाइन पंजीकरण कराया गया तथा उन्हें कार्यक्रम की रूपरेखा बताई गई। साथ ही साक्षात्कार अभ्यास भी कराया गया। विभिन्न विभागों की छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की और कार्यक्रम को ज्ञानवर्धक व करियर निर्माण हेतु उपयोगी बताया। समापन पर प्रतिभागी छात्राओं को प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे।
इस अवसर पर उप समन्वयक सुशील कुमार ने अतिथियों का स्वागत किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. नितेश जायसवाल ने किया। कार्यक्रम में उप समन्वयक विशाल यादव, छात्र स्वयंसेवक सूर्यांशु मिश्रा, शिवम यादव, विनीत सिंह, आरती यादव, ब्यूटी मौर्या, सत्य प्रकाश मिश्रा सहित छात्राएं उपस्थित रहीं।

Friday, 13 February 2026

पीयू के इनक्यूबेटी “हीथोक्स” को फाइजर से 60 लाख रुपये का अनुदान

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर के बायोटेक्नोलॉजी विभाग के एलुमनाई एवं इनोवेशन सेंटर के इनक्यूबेटी “हीथोक्स प्राइवेट लिमिटेड” को फाइजर की हेल्थकेयर इनोवेशन योजना के अंतर्गत 60 लाख रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ है। यह अनुदान सिकल सेल एनीमिया एवं थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारियों की प्रारंभिक स्तर पर पहचान (Early Detection) के कार्य को आगे बढ़ाने के लिए प्रदान किया गया है।
यह अनुदान 12 फरवरी 2026 को वाणिज्य भवन, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली में आयोजित “मेडटेक इनोवेशन एंड स्टार्टअप शोकेस” प्रदर्शनी के दौरान प्रदान किया गया। कार्यक्रम का आयोजन डीपीआईआईटी (DPIIT) के अंतर्गत किया गया था। इस प्रदर्शनी में देशभर से प्राप्त 300 आवेदनों में से केवल 08 स्टार्टअप्स का चयन किया गया, जिनमें वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के इनक्यूबेटी “हीथोक्स प्राइवेट लिमिटेड” को भी चयनित किया गया।
फाइजर इंडोनेशन प्रोग्राम के अंतर्गत चयनित स्टार्टअप को यह अनुदान केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल (वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार) द्वारा प्रदान किया गया। “हीथोक्स प्राइवेट लिमिटेड” की ओर से संस्थापक निदेशक शेखर आनंद (शोध निर्देशक), कुसुम आनंद, प्रिया काकरान एवं उनकी टीम उपस्थित रही। साथ ही विश्वविद्यालय के बायोटेक्नोलॉजी विभाग के शिक्षक डॉ. मनीष कुमार गुप्ता (सह-मुख्य शोधकर्ता) भी कार्यक्रम में सम्मिलित रहे।
कार्यक्रम में स्टार्टअप इंडिया के निदेशक डॉ. सुमीत जारंगल, संयुक्त सचिव श्री संजीव, प्रो. शैलेंद्र सराफ (निदेशक, नाइपर अहमदाबाद), श्री दीपक बागला (मिशन डायरेक्टर, अटल इनोवेशन—नीति आयोग) तथा सुश्री मिनाक्षी नेवतिया (मैनेजिंग डायरेक्टर) की गरिमामयी उपस्थिति रही।

साक्षात्कार के लिए छात्रों में आत्मविश्वास जरूरीः प्रो. वंदना सिंह

सकारात्मक सोच और प्रभावी प्रस्तुति से ही खुलते हैं कॉरपोरेट के द्वार: विनोद मिश्रा
 सफल साक्षात्कार के लिए बताए चार मंत्र-  विभव मिश्रा
 पीयू में 'अकादमिक-उद्योग संवाद' का आयोजन
जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के केंद्रीय प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट सेल  के तत्वावधान में शुक्रवार को आर्यभट्ट सभागार में ‘अकादमिक-उद्योग संवाद’  का आयोजन किया गया। “साक्षात्कार कैसे दें: कौशल, तैयारी और आत्मविश्वास” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में देश-विदेश के विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को कॉरपोरेट जगत की चुनौतियों का सामना करने और साक्षात्कार  में सफलता पाने के गुर सिखाए।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) के वैज्ञानिक अधिकारी श्री विनोद कुमार मिश्रा ने छात्रों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि साक्षात्कार में अभ्यर्थी के ज्ञान और कौशल के प्रदर्शन में भाषा कभी बाधक नहीं होती। उन्होंने कहा, "साक्षात्कार लेने वाले की अपेक्षा होती है कि अभ्यर्थी अपने ज्ञान को कम समय में सटीक रूप से प्रस्तुत करे, ताकि आपसी बातचीत  के लिए अधिक समय मिल सके और व्यक्तित्व का सही आकलन हो सके।" उन्होंने जोर देकर कहा कि सफलता के लिए अपने कौशल को प्रभावी ढंग से व्यक्त करना सबसे जरूरी है। 
कार्यक्रम की संरक्षक और विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में मील का पत्थर साबित होते हैं। उन्होंने छात्रों का आह्वान किया कि वे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें। कुलपति ने आश्वस्त किया कि विश्वविद्यालय प्रशासन भविष्य में भी छात्रों को रोजगार के बेहतर अवसर प्रदान करने के लिए ऐसे आयोजन करता रहेगा।

कार्यक्रम के विशिष्ट वक्ता, मर्सिडीज-बेंज (कनाडा) के सीनियर आईटी बिजनेस कंसल्टेंट और अमेज़न के पूर्व प्रोग्राम मैनेजर श्री विभव मिश्रा ने अपने अंतरराष्ट्रीय अनुभवों को साझा किया। उन्होंने छात्रों को चार महत्वपूर्ण टिप्स दिए: साक्षात्कार के लिए चयन कैसे सुनिश्चित करें? चयन के बाद की तैयारी और प्रदर्शन। साक्षात्कार के बाद भविष्य की रणनीति। सकारात्मक सोच के साथ योजना बनाना। श्री विभव ने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि तकनीकी दक्षता के साथ-साथ व्यक्तित्व विकास भी अत्यंत आवश्यक है।
इससे पूर्व, कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति प्रो. वंदना सिंह द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया गया। विश्वविद्यालय की छात्राओं ने सुमधुर स्वर में 'पूर्वांचल गीत' की प्रस्तुति देकर सभागार का वातावरण भावपूर्ण बना दिया। बड़ी संख्या में उपस्थित छात्र-छात्राओं ने विशेषज्ञों से सीधा संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया।
कार्यक्रम का सफल संचालन और धन्यवाद ज्ञापन उप-समन्वयक डॉ. नितेश जायसवाल ने किया। इस अवसर पर प्रो. प्रमोद कुमार यादव, प्रो. अजय प्रताप सिंह, प्रो. मनोज मिश्र, प्रो. रजनीश भास्कर, डॉ. रसिकेश, सुशील कुमार, डॉ. अनु त्यागी, डॉ. द्विव्येंदु मिश्र ,डॉ. राजन तिवारी, डॉ विशाल यादव, डॉ राजन तिवारी, मनोज यादव, श्यामजी त्रिपाठी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

Wednesday, 11 February 2026

नैतिक मूल्य और सामाजिक समरसता जरूरी: कुलपति प्रो. वंदना सिंह


पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर पूर्वांचल विश्वविद्यालय में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित
जौनपुर। पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि के अवसर पर वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के संकाय भवन स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार के अधिकारियों, प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों ने पुष्पांजलि अर्पित कर उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति प्रोफेसर वंदना सिंह ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का ‘एकात्म मानववाद’ भारतीय चिंतन की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के समन्वित विकास की परिकल्पना प्रस्तुत की। कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालयों का दायित्व केवल शैक्षणिक उन्नयन तक सीमित नहीं है, बल्कि नैतिक मूल्यों, सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण की भावना को भी सुदृढ़ करना है। उन्होंने आह्वान किया कि हम सभी उनके आदर्शों को अपने आचरण में उतारें।
वित्त अधिकारी आत्म प्रकाश धर द्विवेदी ने अपने वक्तव्य में कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने आर्थिक दृष्टि से अंत्योदय और आत्मनिर्भरता पर विशेष बल दिया। वहीं परीक्षा नियंत्रक डॉ. विनोद कुमार सिंह ने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय का जीवन अनुशासन, संगठन और राष्ट्र समर्पण का आदर्श उदाहरण है।
इस अवसर पर प्रोफेसर अजय प्रताप सिंह, प्रोफेसर राजेश शर्मा, प्रोफेसर मनोज मिश्र, प्रोफेसर हरिओम त्रिपाठी, प्रोफेसर गिरधर मिश्रा, डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. वनिता सिंह, डॉ. प्रियंका सिंह, डॉ. अंकित कुमार सिंह, डॉ. ममता सिंह, डॉ. निलेश कुमार सिंह, डॉ. महेंद्र सिंह सहित विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षक एवं कर्मचारी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। शोधपीठ के सदस्य डॉ. अनुराग मिश्र ने सभी का आभार प्रकट किया।