Saturday, 12 September 2015

सफल व सुखी जीवन के लिए कैरियर प्लानिंग महत्वपूर्ण: प्रोफेसर अजय सिंह

विश्वाद्यालय के एच.आर.डी. विभाग द्वारा आयोजित करिअर मेनेजमेंट कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि बोलते हुए दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के आचार्य व सुप्रसिद्ध प्रबंध गुरु प्रोफेसर अजय कुमार सिंह ने कहा कि युवाओं को छात्र जीवन से ही अपने करिअर के प्रति सजग होना चाहिए और स्कूली कक्षा से ही जीवन के लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए समुचित करिअर प्रबंधन के माध्यम से ही व्यक्ति जीवन में अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकेगा और जीवन में उद्देश्य पूर्ति होने पर व्यक्ति सुखी एवं संतोषजनक जीवन यापन करेगा। 

प्रोफेसर अजय सिंह ने कहा कि आज नित-रोज बदलते और विकसित होते तकनीकि और विज्ञान के युग में यह संभव नहीं है कि हम जिस संस्था से करिअर प्रारंभ करें उसी संस्था में अंत तक टिके रहें आज तो व्यक्ति अपनी क्षमता खुद ही तय करता है और उसी के अनुरूप संस्थान व जिम्मेदारियों को बदलते रहतें हैं जो व्यक्ति अपने करिअर का समुचित प्रबंधन नहीं कर पाएगा उसको जीवन में अवसाद व कष्ट के दौर से गुजरना पड़ सकता है। 

प्रबंध गुरु ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि व्यक्ति को ही नहीं बल्कि संस्थानों को भी अपने कर्मियों का समुचित करिअर प्रबंधन करना आज की आवश्यकता है अन्यथा उस संस्थान में कार्यरत कर्मियों की कार्यक्षमता व मनोबल पर उसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और संस्थान छोड़्कर जाने वाले योग्य-अनुभवी कर्मियों की संख्या बड़ने से संस्थान को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। प्रोफेसर सिंह ने करिअर प्रबंधन से संबंधित कई रोचक उदाहरण, प्रसंग तथा छोटी-छोटी फिल्मों को दृश्य-श्रव्य साधन के माध्यम से छात्रों के समक्ष प्रभावी एवं मनो-विनोद के साथ प्रस्तुत किया और उत्साही छात्रों के कई सवालों के जवाब भी उदाहरण के साथ स्पष्ट किए ।

कार्यक्रम के आरंभ में विभागाध्यक्ष डॉ. अविनाश पाथर्डीकर ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विभाग के कार्यक्रमों की संक्षिप्त रूप-रेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि एच.आर.डी. विभाग का उद्देश्य कुशल मानव संसाधन विकसित करना है और इसी दिशा में यह कार्यशाला अति महत्वपूर्ण कड़ी है। कार्यशाला की अध्यक्षता प्रबंध संकायाध्यक्ष डॉ. एच.सी. पुरोहित ने की और कहा कि प्रबंध संकाय में व्यक्तित्व विकास के कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित होते रहेंगे। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रशिकेश ने किया। संचालन श्री अभिनव व अनुपम ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए।

युवाओं के लिए विववेकानन्द सदा प्रेरणा के स्रोत


  • स्वामी जी के शिकागो उद्बोधन दिवस पर कार्यक्रम
  • स्वामी जी के मूर्ति के समक्ष 11 सितम्बर 1893  के शिकागो उद्बोधन को पढा गया
  • विवेकानंद के विचार पर आधारित व्यक्तित्व का विकास पुस्तक का हुआ वितरण

विश्वविद्यालय में शुक्रवार को स्वामी विवेकानंद के विश्व धर्म सम्मलेन शिकागो में  उद्बोधन दिवस के अवसर पर परिसर के विद्यार्थियों एवं राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयं सेवक- सेविकाओं को विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो बी बी तिवारी ने विवेकानंद के विचार पर आधारित व्यक्तित्व का विकास पुस्तक वितरित की.यह पुस्तक भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय की ओर से विश्वविद्यालय को उपलब्ध कराई गई है. 


इस अवसर पर प्रो तिवारी ने विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार के समीप स्थित शिकागो उद्बोधन शिलापट्ट के समक्ष विद्यार्थिओं को समाज के लिए जीने का संकल्प दिलवाया। उन्होंने कहा कि स्वामी जी युवाओं के सदा प्रेरणा के स्रोत रहेंगे।उनके विचारों को आत्मसात कर लक्ष्य प्राप्ति की जा सकती है.शिकागो सम्मलेन में स्वामी जी के कुछ ही समय के सम्बोधन ने भारत को अंतर्राष्ट्रीय पटल पर मजबूती प्रदान की थी.इससे पुरे विश्व में हिंदुस्तान का नाम रोशन हुआ. विश्वविद्यालय में स्थापित स्वामी जी का यह शिकागो उद्बोधन शिलापट्ट सदैव युवाओं में ऊर्जा का संचार करता रहेगा।




इसके पूर्व विद्यार्थिओं ने पद यात्रा कर विवेकानंद केंद्रीय पुस्तकालय स्थित स्वामी जी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर नमन किया। डॉ बी डी शर्मा ने कहा कि विवेकानंद शिकागो सम्मलेन में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। उनके अमेरिकी भाइयों और बहनों के उद्बोधन करते ही पूरे धर्म स्थल तालियों से गूंज गया। उन्होंने भारत में भी धर्म जाति से हट  कर एक नए समाज की अवधारणा विकसित की।डॉ शर्मा ने स्वामी जी के मूर्ति के समक्ष 11  सितम्बर 1893  के शिकागो उद्बोधन को पढा।

कार्यक्रम के संयोजक  प्राध्यापक  डॉ राजकुमार सोनी ने कहा कि अहं का त्याग कर समाज की सेवा के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए।कार्यक्रम का संचालन  डॉ दिग्विजय सिंह राठौर ने किया। इस अवसर पर डॉ संतोष कुमार, डॉ रवि प्रकाश,डॉ अवध बिहारी सिंह, डॉ सुनील कुमार, रघुनंदन समेत विश्विद्यालय के विभिन्न संकायों के विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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सांख्यकीय के ज्ञान के बिना शोध पूर्ण नहीं

विश्वविद्यालय में शुक्रवार को संकाय भवन के कॉन्फ्रेंस हॉल में व्यवहारिक मनोविज्ञान विभाग द्वारा सामजिक विज्ञान एवं सांख्यकीय विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गयाव्याख्यान में गुरु नानक देव विश्वविद्यालय अमृतसर के मनोविज्ञान विभाग के प्रो एन एस तुंग ने कहा कि  सांख्यकीय के ज्ञान के बिना शोध पूर्ण नहीं हो सकता। शोध प्रश्नों का  उत्तर सांख्यकीय के माध्यम से सरलता से दिया जा सकता हैसांख्यकीय का सामजिक विज्ञान के साथ साथ अन्य विषयों में भी बड़े स्तर पर प्रयोग हो रहा है. तकनिकी के युग में सांख्यकीय के लिए  बहुत से सॉफ्टवेयर गए है. जिसके कारण शोध के आकड़ों का विश्लेषण सरल हो गया है. उन्होंने  भौतिकी एवं सामाजिक विज्ञान में शोध की विभिन्न विधियों के प्रयोग के विषय में विस्तार से चर्चा की. शोध में निदर्शन के चयन पर विशेष ध्यान देने पर बल दिया।

प्रो राम जी लाल ने भी विषय पर विचार दिया। संकायाध्यक्ष डॉ अजय प्रताप सिंह ने अतिथि का स्वागत एवं संचालन  डॉ अवध बिहारी सिंह ने किया। इस अवसर पर प्रो आर एस सिंह, डॉ मनोज मिश्र, डॉ दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ सुभाष, डॉ रुश्दा आज़मी,  डॉ सुनील कुमार समेत  विद्यार्थी उपस्थित रहे.



Wednesday, 9 September 2015

पीजी विद्यार्थियों के लिए कैरियर काउंसिलिंग एण्ड ओरिएंटेशन प्रोग्राम

विश्वविद्यालय के संगोष्ठी भवन में प्रबंध अध्ययन संकाय, विज्ञान संकाय एवं सामाजिक विज्ञान संकाय के नवागत पीजी विद्यार्थियों के लिए कैरियर काउंसिलिंग एण्ड ओरिएंटेशन प्रोग्राम का आयोजन बुधवार को किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ आईआईएम लखनऊ के प्रो. प्रकाश सिंह एवं विश्वविद्यालय के वित्त अधिकारी एम.के सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। 

    बतौर मुख्य अतिथि आईआईएम लखनऊ के प्रोफेसर प्रकाश सिंह ने विद्यार्थियों से संवाद स्थापित करते हुए कहा कि आज विद्यार्थियों को किताबी दुनिया के साथ-साथ व्यवहारिक जगत में भी तालमेल बिठाने की जरूरत है। अपना ध्यान विषय एवं उसकी अवधारणा को समझने में लगानी चाहिए। रटा-रटाया फार्मूला आगे चलकर कई दिक्कतें लाता है। उन्होंने खास तौर पर मैनेजमेंट के विद्यार्थियों से कहा कि आप जो कुछ भी अपनी पुस्तकों में पढ़ रहे है उसे अपने जीवन में भी लागू करें। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलते सामाजिक परिवेश और सूचना प्रौद्योगिकी ने हमारी लिखने और पढ़ने दोनों की क्षमता को प्रभावित किया है। हम अध्यापकों और विद्यार्थियों का यह महत्वपूर्ण दायित्व है कि हम पढ़ने व लिखने दोनों की क्षमता को उत्तरोत्तर विकास करें। विद्या विनय देती है। अतः हम अपने अध्ययन और सेवा काल के दौरान विनम्रता को प्राथमिकता दें। आप इस विश्वविद्यालय के ब्राण्ड एम्बेसडर है इस विश्वविद्यालय की पताका को आपको ही आगे ले जाना है।
 

अध्यक्षीय उद्बोधन में विश्वविद्यालय के वित्त अधिकारी एम.के. सिंह ने कहा कि विद्यार्थी जीवन में कुछ प्रेरक घटनाएं जीवन को सही राह की ओर ले जाती है। हमारे गुरूजन इस प्रेरणा के मूल स्रोत है। इनके द्वारा ही हमारे भीतर सकारात्मक विचार जन्म लेते है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि हम आस पड़ोस की घटनाओं से जागरूक रहे एवं सामाजिक परिवेश से जुड़कर विद्या अध्ययन करें। विश्वविद्यालय आपके लिए उच्च कोटि की प्रयोगशाला, स्मार्ट क्लास, बेहतरीन पुस्तकें एवं उच्च परिवेश देने को कृत संकल्प है। 

इस अवसर पर डा. मानस पाण्डेय एवं डा. अजय प्रताप सिंह ने मुख्य अतिथि एवं कार्यक्रम अध्यक्ष को श्रीफल, स्मृति चिन्ह एवं शाल भेंटकर सम्मानित किया। इसके पूर्व कार्यक्रम को डा. मानस पाण्डेय, डा. अजय प्रताप सिंह, डा. सुरजीत कुमार, डा. मनोज मिश्र, डा. रजनीश भाष्कर, डा. मुराद अली, डा. प्रदीप कुमार, अमित वत्स एवं डा. एसपी तिवारी ने सम्बोधित किया एवं विद्यार्थियों को महत्वपूर्ण सुझाव दिये। स्वागत डा. अविनाश पाथर्डिकर, संचालन डा. एचसी पुरोहित एवं धन्यवाद ज्ञापन डा. अजय द्विवेदी ने किया। 
 

इस अवसर पर डा. बीडी शर्मा, डा. राजेश शर्मा, डा. अवध बिहारी सिंह, डा. दिग्विजय सिंह राठौर, डा. सुनील कुमार, डा. सुशील कुमार, डा. आलोक सिंह, धर्मेंद्र सिंह, डा. कार्तिकेय शुक्ल, डा. सुधीर उपाध्याय, डा. विवेक पाण्डेय, प्रमेंद्र विक्रम सिंह, ऋषि श्रीवास्तव, अंशुमान यादव, राजेश कुमार सहित विभिन्न विभागों के विद्यार्थी मौजूद रहे। 

Tuesday, 8 September 2015

बुक बैंक

विश्वविद्यालय के विवेकानंद केंद्रीय पुस्तकालय में मंगलवार को कुलपति प्रो. पीयूष रंजन अग्रवाल ने बुक बैंक का उद्घाटन किया। इस अवसर पर बी.फार्मा के साठ  विद्यार्थियों को पुस्तकें प्रदान की गयी।
इस अवसर पर विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए कुलपति प्रो. पीयूष रंजन अग्रवाल ने कहा कि विश्वविद्यालय में किसी भी विद्यार्थी को पुस्तक के लिए अब भटकना नहीं पड़ेगा। संख्या के हिसाब से सभी विभागों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए पुस्तकें मंगा ली गयी है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अच्छे प्रकाशक एवं लेखक की पुस्तकें मुहैया की जा रही है जिससे उन्हें विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम के हिसाब से पढ़ने में सहूलियत रहेगी।
कुलसचिव डा. बीके पाण्डेय ने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर के सभी विभागों के प्रथम सेमेस्टर में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार बुक बैंक द्वारा पुस्तकें प्रदान की जा रही है। सेमेस्टर की परीक्षा उपरांत विद्यार्थियों को पुस्तकें केंद्रीय पुस्तकालय में जमा करनी होंगी। उसके बाद ही अगले सेमेस्टर के लिए पुस्तकें उपलब्ध करायी जाएंगी। पुस्तक के लिए प्रति विद्यार्थी सौ रूपये जमा करके अपना पंजीकरण करा सकता है।
इस अवसर पर डा. एके श्रीवास्तव, डा. एचसी पुरोहित, डा. मनोज मिश्र, डा. अवध बिहारी सिंह,  राजीव कुमार, आशीष गुप्ता, आलोक दास, विजय बहादुर मौर्य, द्विजेन्द्र उपाध्याय, अवधेश कुमार एवं पंकज सिंह मौजूद रहे। स्वागत मानद पुस्तकालयाध्यक्ष डा. मानस पाण्डेय, संचालन डा. विद्युत मल्ल एवं धन्यवाद ज्ञापन डा. अविनाश पाथर्डिकर द्वारा किया गया।