Thursday, 5 October 2017

पूर्वांचल विश्वविद्यालय में पांच दिवसीय राम कथा का दूसरा दिन

                 राम किसी धर्म विशेष के नहीं सबके













विश्वविद्यालय  के संगोष्ठी भवन में गुरुवार को पांच दिवसीय राम कथा के दूसरे दिन  प्रवचन में देश  के प्रख्यात राम कथा वाचक श्री शांतनु जी महाराज ने कहा कि श्री राम किसी धर्म विशेष  के  नहीं हैं। वे स्वयं  धर्म हैं। मर्यादा पुरुषोत्तम  हैं। वो सभी भावों  ,विचारों से बढ़ कर है। राम कथा देश की संस्कृति की कथा
है। राम कथा श्रवण से मानव पूर्णता प्राप्त करता है। शिव विवाह का भावपूर्ण सजीव वर्णन करते हुए शांतनु महराज ने कहा कि  काम क्रोध के समापन के लिए शिव भजन सर्वोत्तम है। इसी लिए मानस में गोस्वामी तुलसी दास ने शिव विवाह का आनंद मय  वर्णन किया है जिसमे वर और बाराती के मर्यादित बारात का वर्णन किया है। सदाशिव से पार्वती ने सवाल किया कि  प्रभुराम ब्रह्म क्यों है। शिव ने जनहित में पूछे गए पार्वती के प्रश्न पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि सगुन और निर्गुण में अपने आप को मत बांधो। भक्त जिस रूप में श्री रामको चाहते हैं। श्री राम, उसी रूप में  सभी भक्त को प्राप्त होते हैं। प्रवचन के पूर्व व्यास पीठ का पूजन  कुलपति प्रो डॉ  राजा राम यादव , एनएसएस समन्वयक राकेश कुमार यादव,डॉ ए के श्रीवास्तव ,हिमांचल सिंह ,रामसूरत यादव तथा श्रीमती ममता भट्ट  ने किया। पूर्व प्रचारक एवं राम कथा समिति के समन्वयक शतरुद्र प्रताप ,  डॉ वीडी शर्मा ,डॉ अजय दिवेदी ,डॉ अविनाश पाथर्डीकर ,डॉ दिनेश कुमार सिंह,डॉ अवध बिहारी सिंह ,डॉ सुनील कुमार ,श्याम त्रिपाठी ,  ने कथा वाचक शांतनु जी महाराज का माल्यार्पण कर स्वागत किया। संचालन मीडिया प्रभारी डॉ मनोज मिश्र ने किया।इस अवसर पर कशी प्रान्त के प्रान्त कार्यवाह बांकेलाल यादव ,डॉ राजीव प्रकाश सिंह ,डॉ समर बहादुर सिंह ,डॉ विजय कुमार सिंह ,प्रो बीबी तिवारी , डॉ अजय  प्रताप सिंह, डॉ राम नारायण ,वित्त अधिकारी एम् के सिंह , कार्यवाहक कुलसचिव संजीव सिंह, डॉ राजकुमार सोनी , डॉ संतोष कुमार ,डॉ राजेश शर्मा ,डॉ अमरेंद्र सिंह
,अमल दार यादव, डॉ संजय श्रीवास्तव एवं  आस पास के ग्रामीण सहित तमाम लोग उपस्थित रहे ।





Wednesday, 4 October 2017

पूर्वांचल विश्वविद्यालय में पांच दिवसीय राम कथा का शुभारंभ

राम कथा सुन भाव विभोर हुए श्रोता 

विश्वविद्यालय  के संगोष्ठी भवन में पांच दिवसीय राम कथा का शुभारंभ हुआ। पहले दिन राम कथा प्रवचन में देश  के प्रख्यात राम कथा वाचक श्री शांतनु जी महाराज ने कहा कि विद्या मंदिर में राम कथा का आयोजन अद्भुत  संयोग है।आज विज्ञान का युग है।विज्ञान ने  तन के मैल को धोने के लिए बहुत कुछ दिया है लेकिन मन के मैल के धोने के कोई विधि नहीं बताई। गोस्वामी जी ने मन के मैल को धोने के लिए राम का नमन करने को कहा है। आज का मनुष्य कुसंग में शामिल होने के लिए विचार नहीं करता लेकिन सत्संग में शामिल होने के लिए अपने से तमाम सवाल करता है।

उन्होंने कहा कि जब भक्त मन से प्रभु को याद करता है तो प्रभु चले आते है।भक्त और एकादशी के भोग पर एक लौकिक प्रसंग राजा राम आइये मेरे भोजन का भोग लगाइये सुना कर सभी को भाव विभोर कर दिया।कथानक में  भक्त के प्रेम पर प्रभु राम  ने भरत को भंडारी बना दिया, लखन को लकड़ी लाने को भेजा , हनुमान को सफाई का काम सौप दिया ,माँ जानकी को रसोई की जिम्मेदारी दे दी। भक्त के स्नेह पर प्रभु राम ने खुद उसे भोजन कराया। प्रभु राम ने  भक्त से कहा कि मेरा मेल सरल लोगों से है कठिन लोगों को मैं नहीं दिखता। 
प्रवचन के पूर्व व्यास पीठ का पूजन दरबारी लाल,कुलपति प्रो डॉ  राजा राम यादव , प्रो बी बी तिवारी,प्रबंधक अशोक सिंह,  वित्त अधिकारी एम के सिंह, कुलसचिव संजीव सिंह, संयोजक डॉ अजय प्रताप सिंह, डॉ के एस तोमर , डॉ बी डी शर्मा ने किया।
 कुलपति प्रो डॉ  राजा राम यादव ,प्राचार्य डॉ विनोद कुमार सिंह, डॉ एस पी सिंह, डॉ राधे श्याम सिंह, डॉ ए के श्रीवास्तव, डॉ दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ दिनेश कुमार सिंह,सुमन सिंह, हिमांचल सिंह, एम एम भट्ट, संजय श्रीवास्तव, अशोक सिंह, रजनीश सिंह ने कथा वाचक शांतनु जी महाराज का माल्यार्पण कर स्वागत किया।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पूर्व प्रचारक एवं राम कथा समिति के समन्वयक  शतरुद्र प्रताप सिंह ने श्री राम कथा वाचक श्री शांतनु जी महाराज का जीवन वृत्त प्रस्तुत किया।संचालन मीडिया प्रभारी डॉ मनोज मिश्र ने किया।कथा सुनने के लिए विश्वविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी, विद्यार्थी, आस पास के ग्रामीण सहित तमाम लोग उपस्थित रहे ।






Tuesday, 3 October 2017

विश्वविद्यालय में पांच दिवसीय श्री रामकथा की तैयारी पूरी


  सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी होगा आयोजन 


विश्वविद्यालय में   पांच दिवसीय श्री रामकथा प्रवचन  के आयोजन को अंतिम रूप देते हुए  कुलपति सभागार  में समन्वयकों की एक बैठक कुलपति प्रो डॉ राजाराम यादव की अध्यक्षता में  आहूत की गई  । बैठक में  कुलपति प्रो डॉ राजाराम यादव ने आयोजन को लेकर बिंदुवार समीक्षा की। उन्होंने बताया कि स्थापना दिवस सप्ताह के  अंतर्गत परिसर में नैतिक एवं सांस्कृतिक संचार हेतु 4 से 8 अक्टूबर तक प्रतिदिन शाम 4 से 7 बजे तक रामकथा का आयोजन विश्वविद्यालय के संगोष्ठी भवन में किया गया है। 

इस राम कथा को सुनने के लिए विश्वविद्यालय के आस पास के ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को भी आमंत्रित किया गया है। देश  के प्रसिद्ध  श्री राम  कथा वाचक आचार्य  शांतनु जी महाराज  राम कथा का वाचन करेंगे।इसके साथ ही लोक परंपरा को ध्यान में रखते हुए  स्थापना दिवस सप्ताह के  अंतर्गत सांस्कृतिक कार्यक्रम भी विश्वविद्यालय के संगोष्ठी भवन में 7:30 से 10:00 रात्रि बजे तक आयोजित किये गए हैं।  

6 अक्टूबर को भजन संध्या में अवनीश तिवारी की प्रस्तुति होगी। 7 अक्टूबर को डॉ रमाशंकर द्वारा शास्त्रीय गायन एवं विशाल कृष्णा द्वारा कथक की प्रस्तुति की जाएगी।  8 अक्टूबर को प्रख्यात सांस्कृतिक कलाकार रवीश सिंह भजन संध्या में अपनी सुर लहरी बिखेरेंगे। 8 अक्टूबर को ही  जौनपुर के प्रख्यात लोक गायक आल्हा सम्राट   फौजदार सिंह अपनी प्रस्तुति देंगे । सांस्कृतिक  कार्यक्रम तक चलेगा। इस अवसर पर वित्त अधिकारी एमके सिंह ,कार्यवाहक कुलसचिव संजीव सिंह ,  प्रो बीबी तिवारी ,डॉ ए के श्रीवास्तव ,डॉ अजय प्रताप सिंह , डॉ वीडी शर्मा ,डॉ मनोज मिश्र ,डॉ रामनारायण ,डॉ आशुतोष सिंह ,डॉ सुरजीत यादव ,डॉ संतोष कुमार,डॉ के एस  तोमर, डॉ संजय श्रीवास्तव , अशोक सिंह ,रहमतुल्लाह,डॉ विद्युत् मल्ल सहित व्यवस्था समिति के लोग उपस्थित रहे।  

Monday, 2 October 2017

विश्वविद्यालय स्थापना दिवस समारोह

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय  में 2 अक्टूबर को विश्वविद्यालय स्थापना दिवस समारोह का आयोजन किया गया. इस अवसर पर गांधी वाटिका में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो डॉ. राजाराम यादव  ने  महात्मा गांधी एवं स्व.वीर बहादुर सिंह की प्रतिमा पर   पुष्प अर्पित कर नमन किया। 2 अक्टूबर 1987 को  विश्वविद्यालय की स्थापना हुई थी। पूर्वांचल विश्वविद्यालय ने 30  वर्षों की यात्रा पूरी कर ली है।  
इस अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो.डॉ राजाराम यादव  ने कहा कि गाँधी जी का  मानवीय दृष्टिकोण सर्वोपरि था। गाँधी  ने देशवासियों  में राष्ट्रवाद,सत्याग्रह और अहिंसा  की भावना को मज़बूती दी । आज उनके आदर्श ही हमें शांति दे सकते है।  गाँधी जी ने स्वच्छता को जनांदोलन बनाया ।  शास्त्री जी को नमन करते हुए उन्होंने कहा कि शास्त्री ने अपना  पूरा जीवन सादगी में बिताया। शास्त्री जी ने जय जवान और जय किसान का नारा  देकर देश  के अन्नदाता और वीर जवानों का मान बढ़ाया। उन्होंने कहा कि पूर्वांचल विश्वविद्यालय दिनों दिन नए प्रतिमान स्थापित करें यही हम सब का सदा प्रयास होना चाहिए।  इस अवसर पर   विश्वविद्यालय परिवार द्वारा राम धुन का सस्वर पाठ किया गया। विश्वविद्यालय के जगदम्बा प्रसाद मिश्र,डॉ संजय श्रीवास्तव ,राजनारायण सिंह,रवींद्र तिवारी , रमेश पाल एवं साथियों द्वारा रघुपति राघव राजा राम पतित पावन सीताराम  के गायन से पूरा परिसर गुंजायमान हो उठा।
  




इस अवसर पर प्रो.  बी बी तिवारी, डॉ अजय प्रताप सिंह ,डॉ मानस पांडेय ,डॉ वीडी शर्मा ,डॉ अविनाश पाथर्डीकर ,कार्यवाहक  कुलसचिव संजीव सिंह, सहित समस्त प्राध्यापक एवं कर्मचारी मौजूद रहे। धन्यवाद ज्ञापन वित्त अधिकारी एमके सिंह   एवं संचालन अशोक सिंह ने किया।