Monday, 14 June 2021

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विवि में सात दिवसीय कार्यशाला की हुई शुरुआत

 डिजिटल दौर में मीडिया के स्वरूप में दिखा क्रांतिकारी परिवर्तनः प्रो. केजी सुरेश


जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग एवं आंतरिक गुणवत्ता सुनिश्चित प्रकोष्ठ की ओर से 'डिजिटल दौर में मीडिया का बहुआयामी स्वरूप' विषयक सात दिवसीय कार्यशाला की शुरुआत  सोमवार को हुई। ऑनलाइन आयोजित कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि बोलते हुए माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय भोपाल, मध्य प्रदेश  के कुलपति प्रोफेसर केजी सुरेश ने कहा कि डिजिटल की दुनिया में क्रांतिकारी परिवर्तन देखने को मिला है। आज चार साल के बच्चे से लेकर 80 साल के बुजुर्ग ऑनलाइन कनेक्ट हो रहे हैं। कल तक जिन बच्चों को मोबाइल से दूर रखा जाता था, उन्हें आज मोबाइल से सीखने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

प्रोफेसर केजी सुरेश ने कोरोना काल से पत्रकारों को निराश न होने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि फिक्की ने मीडिया सेक्टर में 25 प्रतिशत का उछाल आने की संभावना जताई है। प्रोफेसर केजी सुरेश ने वर्तमान दौर में डिजिटल मीडिया की बढ़ती लोकप्रियता का हवाला देते हुए कहा कि आज 28 प्रतिशत विज्ञापन डिजिटल की तरफ जा रहे हैं, जबकि प्रिंट को सिर्फ 25 प्रतिशत विज्ञापन मिल रहा है।

बतौर विशिष्ट अतिथि जनसंचार केंद्र राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व अध्यक्ष प्रोफ़ेसर संजीव भानावत ने कहा कि आज छापाखानों से निकलकर पत्रकारिता मोबाइल में कैद हो चुकी है। कंटेंट का डिस्ट्रिब्यूशन तेजी से हो रहा है। डिजिटल दौर में पत्रकारिता मल्टीटास्किंग हो चुकी है। डिजिटल मीडिया में न स्पेस का संकट है न समय का। प्रोफेसर संजीव भानावत ने प्राचीन काल से लेकर वर्तमान दौर में मीडिया के विभिन्न माध्यमों पर चर्चा करते हुए महाभारत के संजय को पहला युद्ध संवाददाता बताया। उन्होंने कहा कि पहले नारद व संजय के पास जो ताकत थी, उसे आज डिजिटल माध्यम ने आम जनता को दी है। हर नई तकनीक कुछ नए खतरे को लेकर आती है, लेकिन इसमें चिंता की कोई बात नहीं है। आज प्रिंट, इलेक्ट्रानिक सभी माध्यम मोबाइल में समा गए हैं।
कुलपति प्रोफेसर निर्मला एस मौर्य ने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि समय के साथ समाज की सोच बदलती है। बदलते युग के साथ जनसंचार में भी बदलाव आता है। कभी एक पन्ने से शुरू हुई पत्रकारिता आज डिजिटल माध्यम तक पहुंची है। उन्होंने कहा कि समय की मांग के अनुरूप मीडिया का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है। आज इंटरनेट मीडिया के कारण अब मिनटों में पूरी दुनिया का हाल जान लेते हैं। कुलपति ने प्रिंट मीडिया की प्रासंगिकता हमेशा बरकरार रहने की भी बात कही।

अतिथियों का स्वागत आंतरिक गुणवत्ता सुनिश्चित प्रकोष्ठ के समन्वयक प्रो मानस पांडेय एवं कार्यशाला की रूपरेखा एवं संचालन संयोजक डॉ मनोज मिश्र ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ सुनील कुमार ने किया। सात दिवसीय कार्यशाला के आयोजन सचिव डॉ दिग्विजय सिंह राठौर ने अतिथियों का परिचय प्रस्तुत किया। कार्यशाला में सह संयोजक डॉ धर्मेंद्र सिंह, प्रो राजेश शर्मा, प्रो राघवेंद्र मिश्र, डॉ अवध बिहारी सिंह, डॉ चंदन सिंह, डॉ कौशल पांडेय, डॉ बुशरा जाफरी, डॉ प्रभा शर्मा, डॉ छोटेलाल, लता चौहान,डॉ सतीश जैसल, डॉ राधा ओझा, डॉ दयानंद उपाध्याय, डॉ विजय तिवारी,डॉ शशि कला यादव, वीर बहादुर सिंह  समेत देश के 21 राज्यों से प्रतिभागियों ने भाग लिया।

Thursday, 3 June 2021

पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी महत्वपूर्ण : प्रो. रविशंकर

मुफ्त ऑक्सीजन के लिये पर्यावरण संरक्षण आवश्यक: प्रो. रविशंकर

विश्व पर्यावरण दिवस की  पूर्व संध्या पर वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल के भू एवं ग्रहीय विज्ञान विभाग, रज्जू भइया संस्थान के तत्वावधान में "पर्यावरण संरक्षण : विश्लेषण एवं भविष्य की रणनीतियां" विषय पर वेबिनार  का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही पूर्वांचल विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोo निर्मला एस मौर्य ने पर्यावरण संरक्षण के लिए युवाओं को
आगे आने की अपील की। प्रो. मौर्य ने कहा कि  आज जब देश कोरोना  संकट से गुजर रहा है तब पर्यावरण संरक्षण व संतुलन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। प्रोo मौर्य ने विश्वविद्यालय के द्वारा इस दिशा में किये जा रहे कार्यों की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि आगामी 05 जून को विश्वविद्यालय परिसर में वृहद वृक्षारोपण किया जाएगा।

वेबिनार के मुख्य अतिथि के रूप में राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या के कुलपति प्रोo रविशंकर सिंह ने पर्यावरण व पारिस्थितिकी के विभिन्न आयामों पर चर्चा   की। प्रो सिंह के कहा कि इक्कीसवीं सदी में पर्यावरण संरक्षण एक महत्वपूर्ण चुनौती के रूप में उभर रहा है जिसके लिए हमारी सरकार तमाम प्रयास कर रही हैं । उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिये जनमानस को आगे आना होगा और इसे अभियान बनाकर अपनी दिनचर्या में शामिल करने की आवश्यकता है । जनजागरण व जनभागीदारी से ही पर्यावरण संरक्षण व  संवर्द्धन सुनिश्चित किया जा सकेगा एवं हम भावी पीढ़ीयों को बेहतर भविष्य दे पाएंगे।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ कमलेश कुमार सिंह, अपर महानिदेशक, भारत मौसम विज्ञान विभाग, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, नई दिल्ली ने पर्यावरण की वर्तमान चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। डॉ सिंह ने पर्यावरण असंतुलन के कारण उत्पन्न विभिन्न प्राकृतिक प्रभावों एवं आपदा पर प्रकाश डाला। उन्होंने जलवायु परिवर्तन तथा मौसम विज्ञान के अध्ययन का कृषि एवं दैनिक जीवन मे उपयोग की महत्ता बताया।  डॉ सिंह ने ग्रीनहाउस गैस के बढ़ते विपरीत प्रभाव के बारे में चर्चा की । उन्होंने बढ़ती जनसंख्या के कारण अत्यधिक अन्न उत्पादन हेतु अंधाधुंध खाद व कीटनाशकों को भी पारिस्थितिकीय असंतुलन के लिए जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि हम अपने मुनाफे के लिए प्रकृति व पर्यावरण को नजरअंदाज कर रहे हैं जो बेहद चिंता की बात है। उन्होंने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय व भारत सरकार द्वारा पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन व मानसून के  क्षेत्र में किये जा रहे प्रयासों व विभिन्न योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

वेबिनार का संचालन डॉ. नीरज अवस्थी ने किया व अथितियों का स्वागत संस्थान के निदेशक प्रो. देवराज सिंह ने किया। भू एवं ग्रहीय विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डा. श्याम कन्हैया सिंह ने कार्यक्रम की रूपरेखा रखी। तकनीकी सहयोग डा. शशिकांत यादव व अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन डा. श्रवण कुमार ने किया। इस अवसर पर रज्जू भैया संस्थान के समस्त शिक्षक सहित विश्वविद्यालय के सभी आचार्यगण उपस्थित रहे। इस अवसर पर भारी संख्या में शोधार्थी व छात्र छात्राओं ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराईं।

Sunday, 30 May 2021

तीसरी लहर के लिए पत्रकार रहें तैयार - आशुतोष शुक्ला


कोविड के प्रति जनचेतना में पत्रकारिता का अभिन्न योगदान – कुलपति
कोविड काल के बाद दुनिया बदली बदली होगी – प्रतीक त्रिवेदी
हिंदी पत्रकारिता: कोविड काल और जनसरोकार विषयक वेबिनार का हुआ आयोजन
विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग द्वारा हुआ आयोजित

वीर बहादुर पूर्वांचल विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग द्वारा हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर रविवार को हिंदी पत्रकारिता: कोविड काल और जनसरोकार विषयक वेबिनार का आयोजन किया गया। 
वेबिनार के मुख्य अतिथि  वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष शुक्ल { सम्पादक,दैनिक जागरण,उत्तर प्रदेश} ने कहा कि  पत्रकारिता पहले भी  मिशन थी , आज भी है और सदैव रहेगी । ईमानदारी से पत्रकारिता करने वालों पर सबसे अधिक सवाल उठाये जाते है. इससे विचलित होने की जरुरत नहीं है. उन्होंने कहा कि कोविड काल में जनता तक खबरें पहुँचानें के लिए पत्रकार प्रथम पंक्ति में खड़े  रहें है, तीसरी लहर के लिए पत्रकारों को और अधिक तैयार रहने की जरुरत है.उन्होंने कहा कि आपदा को अवसर बनाने वाले असुर है  स्वअनुशासन से ही हम कोविड से सुरक्षित रह सकते हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता के शिक्षक पत्रकारिता पर भी निगरानी रखें तब हम और हमारे साथी और अच्छा करने का प्रयास करेंगे।
मुख्य वक्ता  न्यूज़ -18 इंडिया के वरिष्ठ संपादक  प्रतीक त्रिवेदी ने कहा कि कोविड काल के बाद जब नया सवेरा आएगा तो  दुनिया बदली- बदली होगी । उन्होंने कहा कि समाचारों की दुनिया में पीएचसी, सीएचसी और जिला अस्पताल जो मीडिया के हासिए पर थे, उनकी उपयोगिता कोविड काल में समझ में आई। हमें और सरकार द्वारा इसको और मूल्यांकित किये जाने की जरूरत है ताकि यह अच्छी तरह से सुदृढ़ हो सके। उन्होंने कहा कि कि टेक्नोलॉजी ने हमें पूरी तरह बदल दिया है जो कि देशहित में हैं. उन्होंने कहा कि पत्रकार ख़बरों को चेक, रीचेक और क्रॉस चेक करें. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि परिस्थितियों के अनुरूप अपने नजरियें को बदले यहीं समाज के हित में है. 
अध्यक्षीय उदबोधन में विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. निर्मला एस.मौर्य ने सभी को हिंदी पत्रकारिता  दिवस की बधाई देते हुए कहा कि हिंदी पत्रकारिता ने सदैव समाज को जोड़ने का काम किया है.उन्होंने हिंदी पत्र के प्रथम सम्पादक पंडित युगलकिशोर शुक्ल के संघर्षों की चर्चा करते उनको नमन किया। उन्होंने कहा कि कोविड काल में पत्रकारों ने जनचेतना में अपनी अहम् भूमिका निभाई है उनके बिना कोरोना से नहीं लड़ा जा सकता. वेबिनार में अपने उदबोधन के पूर्व उन्होंने स्वर्गीय वीर बहादुर सिंह जी की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन कर अपनी श्रद्दांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम का संचालन वेबिनार संयोजक एवं विभागाध्यक्ष डॉ० मनोज मिश्र एवं धन्यवाद् ज्ञापन आयोजन सचिव डॉ० दिग्विजय सिंह राठौर ने किया. कार्यक्रम के सह संयोजक डॉ० सुनील कुमार एवं  शिफाली आहूजा ने तकनीकी सहयोग किया. इस अवसर पर मुख्य रूप से प्रो मानस पाण्डेय, प्रो एच सी पुरोहित, प्रो वंदना राय, प्रो देवराज सिंह, डॉ कायनात काजी,डॉ आलोक सिंह, डॉ आशिमा सिंह, डॉ उमेश पाठक, डॉ सतीश जैसल, डॉ अखिलेश चन्द्र, डॉ गीता सिंह, डॉ राजकुमार, डॉ प्रदीप कुमार, डॉ रसिकेश, डॉ अमरेन्द्र सिंह, डॉ धर्मेन्द्र सिंह, डॉ अवध बिहारी सिंह, डॉ चन्दन सिंह,डॉ वंदना समेत देश के विभिन्न प्रदेशों से पत्रकार, शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया.