Sunday, 8 May 2022

स्मार्ट फोन विविध ज्ञान का स्रोत: गिरीश यादव

टैबलेट स्मार्टफोन से छात्र अपने को सशक्त बनाएं: कुलपति

200 छात्र-छात्राओं को वितरित किए गये टैबलेट 

8 मई को वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में प्रदेश सरकार की स्मार्ट फोन योजना के तहत 200 छात्र-छात्राओं को रविवार को फार्मेसी संस्थान में टैबलेट वितरित किये गये। टैबलेट मिलने पर विद्यार्थी खुश नजर आए। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार गिरीश चंद्र यादव और कुलपति निर्मला एस मौर्य ने मां सरस्वती के सम्मुख द्वीप प्रज्ज्वलित कर किया। 
समारोह में बतौर मुख्य अतिथि राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार गिरीश चंद यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की योजना के अन्तर्गत छात्र-छात्राओं को प्रदेश भर में स्मार्ट फोन वितरण का सराहनीय कार्य हो रहा है। स्मार्ट फोन विविध ज्ञान का स्रोत तथा उपयोगी ज्ञानार्जन का साधन है। आज मोबाइल फोन समय की आवश्यकता है, इसके बिना इसका उपयोग करने वाले लोगों को अपना जीवन अधूरा सा लगता है। वर्तमान परिवेश में स्मार्ट फोन जीवन का एक बहुत ही उपयोगी, आवश्यक और अभिन्न अंग बन गया है। डिजिटल भारत मानवता के उत्थान का रास्ता है। उन्होंने कहा कि जो छात्र का नाम सूची में नहीं है आने वाले समय में उन छात्रों को भी योजना का लाभ मिलेगा। 
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं कुलपति निर्मला एस. मौर्य ने कहा टैबलेट के माध्यम से छात्र अपने आप को सशक्त बनाएं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मोबाइल, टैबलेट और लैपटॉप आदि के बिना शिक्षा पूर्ण नहीं हो सकती। बशर्ते इसका प्रयोग सकारात्मक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मोबाइल व लैपटॉप का प्रयोग विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रयोग करके सफलता को पाया जा सकता है। कार्यक्रम का संचालन डा. जाह्नवी श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापन डॉ विनय वर्मा ने किया। इस अवसर पर वित्त अधिकारी संजय राय परीक्षा नियंत्रक वीएन सिंह, एसडीएम सदर हिमांशु नागपाल डॉ. रजनीश भास्कर और छात्र-छात्राएं मौजूद थे।

Saturday, 7 May 2022

कुलपति ने 51 गरीबों को दिया खाद्यान्न

अपने बीच कुलपति को पाकर चहक उठी बनवासी महिलाएं

7 मई को वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो.निर्मला एस.मौर्य ने जसोपुर,करंजाकला बनवासी-मुसहर बस्ती में 51 गरीबों कोनिजी तौर पर खाद्यान्न के दस-दस किलोग्राम के पैकेट वितरित किया।कुलपति ने एक- एक महिला से उनकी समस्याओं की जानकारी लिया तथा विश्वविद्यालय द्वारा महिलाओं के कौशल विकास के लिए महिला अध्ययन केंद्र के माध्यम से सिलाई- कढ़ाई,दीपक,अगरबत्ती आदि दिए जाने वाले विभिन्न प्रशिक्षणों के बारे में बताया।
 रासेयो समन्वयक डॉ राकेश कुमार यादव ने वहां उपस्थित छात्रों के लिए विश्वविद्यालय द्वारा चलाई जा रही प्रेरणा नि:शुल्क कोचिंग के बारे में बताया तथा अभिभावकों से बच्चों को पढ़ने के लिए भेजने के लिए प्रेरित किया। प्रभारी महिला अध्ययन केंद्र एवं समन्वयक मिशन शक्ति डॉ. जाह्नवी श्रीवास्तव ने महिलाओं से विभिन्न प्रशिक्षण लेकर सामान बनाकर विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित रोजगार मेला एवं सावन मेला में अपने सामान को बेंचकर अर्थोपार्जन करने का आह्वान किया। इस अवसर परडॉ लक्ष्मी प्रसाद मौर्य, कार्यक्रम अधिकारी डॉ विनय कुमार वर्मा,इसरार, मन्ना, मनोज, विजय प्रताप सहित अजय वर्मा, विवेक पांडेय,आलोक मौर्य, शिवम मिश्रा, विकास यादव, सनी सरोज, आनंद सिंह आदि ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया।

Thursday, 5 May 2022

प्रबंधन के लिए धैर्य और दृष्टि दोनों जरूरी: रामाशीष

वेदों से प्रभावित हैं जीवन का सार: प्रो. निर्मला एस. मौर्य

 विद्या‌ विनय के लिए है धन के लिए नहीं : प्रो. गोपबंधु मिश्र

 वैदिक प्रबंधन अध्ययन केंद्र के उत्कृष्टता केंद्र का उद्घाटन समारोह

 


वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के वैदिक प्रबंधन अध्ययन केंद्र के उत्कृष्टता केंद्र का उद्घाटन समारोह बृहस्पतिवार को आर्यभट्ट सभागार में किया गया। यह समारोह मानव संसाधन विकास विभाग और प्रबंध अध्ययन संकाय की ओर से किया जा रहा है।

इस अवसर पर समारोह के मुख्य अतिथि एवं क्षेत्रीय संगठन मंत्री प्रज्ञा प्रवाह श्रीरामाशीष ने कहा कि भारत को जानना है तो उसकी परंपरा को जानना होगा। उन्होंने कहा कि पश्चिम की दृष्टि प्रबंधन में धन कमाना सिखाती हैलेकिन भारतीय दृष्टि कारपोरेट के साथ नहीं जिंदगी के साथ शुरू होती है। उनका मानना है कि मैनेजमेंट के लिए धैर्य और दृष्टि दोनों जरूरी है। यर्जुवेद में भी इसका विस्तार से वर्णन किया गया है। उन्होंने महर्षि नारद युधिष्ठिर संवाद को मैनेजमेंट के परिप्रेक्ष्य में समझाया।

बतौर अध्यक्ष विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. निर्मला एस. मौर्य ने कहा कि जीवन का प्रबंधन अर्थधर्मकाममोक्ष से ही है। ये चारों वेदों से प्रभावित हैं। वेदों का सार उपनिषद में है। पांचवां वेद गीता है। उन्होंने कहा कि जीवन का सार और रास्ता इन्हीं धार्मिक पुस्तकों से ही होकर गुजरता हैऐसे में उन ग्रंथों का ज्ञान जरूरी है।

विशिष्ट अतिथि  श्री सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर गोप बंधु मिश्र ने कहा कि मनुष्य का प्रमुख धर्म परोपकार का है। सभी का लक्ष्य विश्व को एक सूत्र में पिरोना है, यह धर्म के बिना संभव नहीं है। प्रबंधन में विवेक की जरूरत होती है। उन्होंने हनुमानजी के प्रबंधन को विस्तार से समझाया।उन्होंने कहा कि विद्या से धन की नहीं विनय की कल्पना की जानी चाहिए।

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि दून विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हरीश चंद्र पुरोहित ने कहां की वैदिक मैनेजमेंट का मूल मंत्र वसुधैव कुटुंबकम है। राष्ट्र सर्वोपरि है इसी को ध्यान में रखकर हर क्षेत्र में काम करने की जरूरत है।

स्वागत भाषण प्रो. मानस पांडेय ने और समारोह का परिचय और विषय प्रवर्तन प्रो. अविनाश पाथर्डीकर किया। संचालन शोध छात्र अभिनव श्रीवास्तव और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. अजय द्विवेदी ने किया।

इस अवसर पर वित्त अधिकारी संजय राय,  प्रो. बीबी तिवारी,. प्रो. अजय प्रताप सिंहप्रो. रामनारायणप्रो. बीडी शर्माप्रो. देवराज सिंहडॉ. मनोज मिश्रप्रज्ञा प्रवाह के संतोष त्रिपाठीसंतोष सिंहडॉ. मनीष कुमार गुप्तडॉ राकेश यादवडॉ. नुपुर तिवारीडॉ. जाह्नवी श्रीवास्तवडॉ. प्रदीप कुमारडॉ. रसिकेशडॉ मनीष प्रताप सिंहडॉ. सुशील कुमारडॉ. मुराद अली,  डॉ. सुनील कुमारडॉ. दिग्विजय सिंह राठौरडॉ. मनोज पांडेयडॉ. अमित वत्स,  डॉ. परमेंद्र विक्रम सिंहडॉ. नृपेन्द्र सिंहडॉ. सुशील कुमार ‌सिंहडॉ राजीव कुमारडॉक्टर आलोक दासइन्द्रेश कुमार आदि ने भाग लिया।












Monday, 2 May 2022

देश और संस्कृति को एक सूत्र में बांधती है हिंदी - प्रो पातंजलि


अनुवाद में रोजगार के बहुत है अवसर 
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में अनुवाद की भूमिका विषय पर आयोजित हुई संगोष्ठी 

वीर बहादुर सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति सभागार में सोमवार को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में अनुवाद की भूमिका विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह आयोजन भारतीय भाषा संस्कृति एवं कला प्रकोष्ठ और जनसंचार विभाग की ओर से किया गया।
बतौर मुख्य अतिथि पूर्व कुलपति प्रो. पीसी पांतजलि ने कहा कि हिंदी सशक्त भाषा है जो सभी भाषाओं को समाहित कर लेती है। यह संस्कृति की संवाहक है हिंदी ही देश की संस्कृति को बचाने के साथ-साथ राष्ट्र को एक सूत्र में बांधने का काम करती है।
उन्होंने कहा कि हिंदी जब तक रोजगारपरक नहीं बनेगी तब तक राष्ट्रवाद नहीं पनपेगा। अनुवाद पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि हरिवंश राय बच्चन सर्वश्रेष्ठ अनुवादक थे। अनुवादक  मानव में संवेदना पैदा करता है। कहा कि अनुवादक शब्दावली , भाषा, सामाजिक, सांस्कृतिक विविधता से हमेशा जूझता रहता है. भाषा अगर बोधगम्य नहीं है तो वह किसी काम की नहीं। 

अध्यक्षीय उद्बोधन में  कुलपति प्रोफेसर निर्मला एस. मौर्य ने कहा कि बैंकिंग साहित्य में अनुवाद की महत्वपूर्ण भूमिका है, इसमें रोजगार के अवसर उपलब्ध है। अनुवादक स्रोत  को लक्ष्य भाषा बनाते हैं। साहित्य जानने वाले लोगों की भाषा पर पकड़ होती है वह हर विषय पर बोल सकता है। अनुवाद  का क्षेत्र बहुत बड़ा है इसमें बहुत  काम हो रहा है और रोजगार के अवसर भी उपलब्ध है।

इस अवसर पर कुलसचिव महेंद्र कुमार ने कहा कि भाषा को समझने का माध्यम अनुवाद है.  संचालन जनसंचार विभाग के अध्यक्ष डॉ मनोज मिश्र एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रो अजय द्विवेदी ने किया. इस अवसर पर प्रो बीबी तिवारी, प्रो अविनाश, प्रो रामनारायण, प्रो बीडी शर्मा, प्रो देवराज सिंह , डॉ  रजनीश भास्कर, डॉ नुपुर तिवारी, डॉ प्रमोद यादव, डॉ मुराद अली, डॉ श्याम कन्हैया, डॉ सुनील कुमार, डॉ दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ अवध बिहारी सिंह, डॉ चन्दन सिंह,डॉ जान्हवी श्रीवास्तव, मंगला प्रसाद, डॉ  पुनीत धवन, प्रवीण सिंह, डॉ प्रमोद कौशिक,डॉ लक्ष्मी मौर्य, श्याम कन्हैया, सुशील प्रजापति, प्रमोद विश्वकर्मा  तमाम लोग उपस्थित रहे.