Thursday, 22 September 2022

विद्यार्थियों ने सॉफ्टवेयर डिजाइनिंग के नए तरीके सीखे

इंजीनियरिंग संस्थान में स्टूडेंट क्लब की शुरुआत 

 वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग संकाय में गुरुवार के दिन प्रोग्रामिंग के क्षेत्र मे एक नई शुरुआत हुई । इंजीनियरिंग संकाय के कंप्यूटर साइंस विभाग के बच्चों और शिक्षकों द्वारा गूगल डेवलपर स्टूडेंट्स क्लब की शुरुआत की गयी ।  सॉफ्टवेयर डिजाइनिंग के क्षेत्र में विद्यार्थियों ने कोडिंग के माध्यम से डिजाइनिंग के नए तरीके सीखे।इस क्लब का पहला कार्यक्रम विश्वस्वरैया हाल मे हुआ । इस अवसर पर गरिमा पांडेय ने कंम्युनिटी के बारे में विस्तार से प्रकाश डाला |
 कार्यक्रम मे पूरे एक साल में होने वाले सभी स्किल्स के बारे में अभिषेक तिवारी ने जानकारी दी। कार्यक्रम के अंत में बच्चों से सवाल जवाब मे यत्नदीप दुबे और अवनीश दुबे ने मिलकर उत्तर दिया और कम्युनिटी से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। इस कार्यक्रम को इंजीनियरिंग संकाय के डीन प्रो. बी बी. तिवारी और कंप्यूटर साइंस विभाग के हेड डॉ संजीव गंगवार द्वारा सॉफ्टवेयर  बनाया गया । इस कार्यक्रम में कंप्यूटर साइंस विभाग के शिक्षक अशोक कुमार यादव, डॉ दिव्येंदु मिश्रा, दीप्ति पांडेय, रविकांत यादव, संतोष यादव, सुनील यादव ,ज्ञानेंद्र पाल और छात्र भास्कर उपाध्याय, आदित्य पांडेय, रचित भरद्वाज,विनीत रौशन,मिली श्रीवास्तव और लगभग  सभी विभाग के 100 विधार्थी उपस्थित रहे |

Monday, 19 September 2022

टी.बी. मुक्त भारत अभियान में पीयू रहेगा साथ: प्रो. निर्मला एस. मौर्य

करंजाकला स्वास्थ्य केंद्र पर 45 क्षय रोगियों को दिया गया पौष्टिक आहार

करंजाकला स्वास्थ्य केंद्र के सभागर में सोमवार को माननीय राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल के निर्देश पर क्षय रोग जागरूकता एवं पौष्टिक आहार वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बतौर अध्यक्ष वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय की  कुलपति प्रो. निर्मला एस. मौर्य ने कहा कि टीबी मुक्त भारत अभियान में विश्वविद्यालय परिवार अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर रहा है। उन्होंने कहा कि कोविड काल की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद विश्वविद्यालय परिवार ने पूर्व में 66 क्षय रोगियों को गोद लेकर उनके स्वस्थ होने तक पूरी देखभाल की है। पुनः 779 क्षय रोगियों को गोद लेकर उनके स्वस्थ होने में लगातार मदद की जा रही है और आज 72 क्षय रोगियों को गोद लिया गया। टीबी की बीमारी को सावधानी और सही इलाज से मात दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सेवा से बढ़कर और कोई धर्म नही है। हम सभी सेवाभाव और उचित उपचार से प्रदेश और देश को 2025 तक टीबी मुक्त करेंगे। इस अवसर पर उन्होंने 45 क्षय रोगियों को पौष्टिक आहार का वितरण भी किया।

कुलसचिव महेंद्र कुमार ने सभी क्षय रोगियों को समय से दवा एवं पौष्टिक आहार लेने के लिए प्रेरित किया और कहा कि हमारा विश्वविद्यालय परिवार परहित सरिस धर्म नहिं भाई, पर पीड़ा सम नहिं अधमाई की भावना से आपके साथ है।

समन्वयक राष्ट्रीय सेवा योजना डॉ राकेश कुमार यादव ने पूरे कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की और अभी तक विश्वविद्यालय द्वारा क्षय रोगियों के लिए किए गए कार्यों को विस्तार से बताया। कार्यक्रम को प्रो. मानस पांडेय ने भी संबोधित किया। संचालन डॉ सुशील अग्रहरी और धन्यवाद ज्ञापन प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ विवेक ने किया। इस अवसर पर परीक्षा नियंत्रक वी.एन.सिंह, प्रो. सुरजीत यादव, डॉ. मनोज मिश्र, सहायक कुलसचिव श्रीमती बबिता सिंह, डॉ अजय कुमार सिंह, डॉ राकेश कुमार बिंद, डॉ लक्ष्मी प्रसाद मौर्य, डॉ अमित वत्स, डॉ विनय कुमार वर्मा, राजीव श्रीवास्तव, प्रमोद यादव, रवि कांत पांडेय, सर्वेश यादव, संदीप कुमार यादव आदि उपस्थित रहे।

Sunday, 18 September 2022

पीयू के तीन शिक्षकों को मिला रिसर्च ग्रांट

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय परिसर स्थित प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भइया) भौतिकीय अध्ययन एवं शोध संस्थान के रसायन विज्ञान के दो शिक्षकों डॉ. दिनेश कुमार वर्मा व डॉ. मिथिलेश यादव और नैनोसाइंस सेंटर के वैज्ञानिक डॉ. सुजीत कुमार चौरसिया को कॉउंसिल ऑफ़  साइंस  एंड  टेक्नोलॉजी, उत्तर प्रदेश (यू.पी.सी.एस.टी) द्वारा क्रमशः 12-12 लाख रुपये प्रोजेक्ट के अन्तर्गत शोध कार्य के लिए मिला है। इस रिसर्च ग्रांट की अवधि तीन वर्षों की होगी। डॉ. दिनेश कुमार वर्मा, ग्रैफीन के नैनोकम्पोजिट से नैनो-लुब्रीकेंट तैयार करेंगे। इस विकसित नैनो लुब्रीकेंट का उपयोग वाहनों/मशीनों के इंजन में फिसलने वाली मेटैलिक सतहों के बीच घर्षण एवं घिसाव के कारण उत्पन्न गर्मी तथा मैटेलिक क्षति को कम करने में किया जायेगा। डॉ. वर्मा ने बताया कि विकसित लुब्रीकेंट पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ बहुत सस्ते होंगे तथा इनके उपयोग से वाहनों/मशीनों को चलाने की लागत बहुत कम हो जायेगी और इंजन खराब होने का खतरा नहीं रहेगा उसकी समय सीमा बढ़ जाएगी। इससे पहले डॉ. वर्मा, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (बी. एच. यू.), वाराणसी, में नैनो-लुब्रीकेंट के क्षेत्र में रिसर्च कर चुके हैं।

वही डॉ. मिथिलेश यादव "जैव आधारित खाद्य फिल्म से खाद्य पदार्थों के पैकेजिंग" के विषय पर शोध करेंगे। पैकेजिंग में खाद्य बायोफिल्म का प्रयोग, पेट्रोकेमिकल पॉलिमर के उपयोग को कम करता है जो मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। उच्च गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थों और उत्पादों के लिए उपभोक्ताओं की बढ़ती मांग के साथ-साथ पर्यावरण की चिंताओं  को ध्यान में रखते हुए, बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग सामग्रियों का उपयोग उत्पाद की गुणवत्ता बनाए रखने में कर सकते हैं। खाद्य जैव-फिल्में, विभिन्न उत्पादों के शेल्फ लाइफ को बढ़ाती है। चूंकि जैव आधारित खाद्य पैकेजिंग फिल्में, रसायनों और प्लास्टिक के बजाय जैव-स्रोतों (पौधे और शैवाल) पुनर्नवीनीकरण सामग्री से बनाई जाती है, इसलिए वे पर्यावरण के लिए बेहतर होती है। सक्रिय पैकेजिंग खाद्य फिल्मों को तैयार करने के लिए आवश्यक तेलों को अक्सर बायोपॉलिमर में शामिल किया जाता है जो बैक्टीरिया के विकास को रोकते हैं और इस तरह भोजन को खराब होने से बचा सकते हैं। डॉ. यादव  इससे पहले दक्षिण कोरिया और ताइवान में बायो-पॉलीमर बेस्ड थिन-फिल्म का निर्माण करके खाद्य पैकेजिंग के क्षेत्र में उपयोग कर चुके हैं।  
इसी क्रम में, रज्जू भइया संस्थान में स्थित नैनो-साइंस सेंटर के वैज्ञानिक डॉ. सुजीत कुमार चौरसिया, पॉलीमर व बायोमास के अपशिष्ट पदार्थों का उपयोग करके सुपरकैपेसिटर बनायेंगे, जिनका उपयोग मोबाइल, लैपटॉप, से लेकर इलेक्ट्रिक कारों तक में किया जा सकता है। डॉ. चौरसिया ने बताया कि इस सुपरकैपेसिटर को भविष्य में बैटरी से चलने वाले इलेक्ट्रिक व्हीकल में बैटरी के स्थान पर इस्तेमाल किया जा सकेगा जो बहुत ही कम टाइम में चार्ज हो जाता है और इसका उपयोग बहुत देर तक किया जा सकता है। डॉ. चौरसिया इससे पहले यूनिवर्सिटी ऑफ़ वारमिआ, पोलैंड व दिल्ली विश्वविद्यालय में पॉलीमर बेस्ड हल्के एवं लचीले कम्पोजिट पदार्थ का निर्माण करके सोडियम-आयन रिचार्जेबल बैटरी व सुपरकैपेसिटर सम्बंधित शोध कार्य कर चुके है।
इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. निर्मला एस. मौर्य ने तीनों शिक्षकों को बधाई दी तथा यह उम्मीद जताई की भविष्य में रज्जू भैया संस्थान विज्ञान क्षेत्र में पूर्वांचल विश्वविद्यालय को विश्व पटल पर स्थापित करेगा। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक प्रो. देवराज सिंह, डॉ. प्रमोद कुमार यादव, डॉ. प्रमोद कुमार, डॉ. नितेश जायसवाल, डॉ. अजीत सिंह, डॉ. श्याम कन्हैया सिंह, डॉ.आशीष वर्मा, डॉ. श्रवण कुमार, डॉ. दीपक मौर्य, डॉ. काजल कुमार डे, डॉ. धीरेन्द्र कुमार चौधरी, डॉ. अलोक वर्मा, सौरभ कुमार सिंह, संदीप वर्मा समेत विश्वविद्यालय के समस्त शिक्षकों ने बधाई दी।

Thursday, 15 September 2022

तकनीकी के दौर में मशीनें बताएंगी अपनी जरूरत: प्रो. देवेन्द्र सिंह

भगवान है सबसे बड़ा अभियंता : प्रो. निर्मला एस. मौर्य
साइबर अपराधियों से सचेत रहें  : एस.एस. उपाध्याय
उमानाथ सिंह इंजीनियरिंग संस्थान ने मनाया इंजीनियर्स डे

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में गुरुवार को इंजीनियर्स डे के अवसर पर रज्जू भैया संस्थान के आर्यभट्ट सभागार में  संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय था आत्मनिर्भर भारत में इंजीनियरों की भूमिका। इस अवसर पर बतौर  मुख्य वक्ता उत्तर प्रदेश राज्यपाल के पूर्व लीगल एडवाइजर एस एस उपाध्याय ने कहा कि प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विश्वेश्वरैया जी की क्रांति को भुलाया नहीं जा सकता उनके प्रयास से देश  विकास की राह पर है। कहा कि जितने भी अच्छे शोध हुए हैं वे अभाव में हुए हैं। उनका रिश्ता गांव से ही रहा है। उन्होंने साइबर क्राइम पर विस्तार से प्रकाश डाला और इससे बचने के उपाय भी बताएं। साइबर अपराध से बचने के लिए अपने पासवर्ड और अन्य गोपनीय चीज किसी से शेयर नहीं करें। साइबर अपराधियों से बचने के लिए सचेत रहने की जरूरत है.
आईआईटी बीएचयू के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर देवेंद्र सिंह ने कहा इंजीनियरिंग की पढ़ाई मातृभाषा में होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग की शुरुआत पॉलिसी और कानून से होती है । बिजली इंजीनियर बनाता है लेकिन बेच नहीं सकता, बेचने के लिए कानून बना है। कहा कि  होम एरिया नेटवर्क में मशीनें बोलेंगी कब, क्या इसकी जरूरत है।  यह सूचना इंटरनेट के माध्यम से आपके पास जाएगी। टेक्नोलॉजी के मामले में हम विश्व में कहीं पीछे नहीं है।  उन्होंने कहा कि बिजली की कीमत पर समाज का नजरिया सकारात्मक हो नहीं तो यह अधिक लोगों की पहुंच से दूर हो जाएगी।
इस अवसर पर कुलपति प्रोफेसर निर्मला एस. मौर्य ने कहा कि सबसे बड़ा अभियंता भगवान है, जिसने सृष्टि की रचना की। रामायण, महाभारत के समय भी इंजीनियर थे, जिन्होंने पुष्पक विमान बनाया था। एम विश्वेश्वरैया ने राष्ट्र निर्माण में काफी अहम योगदान दिया था। उन्होंने भारत के बांधों, जलाशयों और जल विद्युत परियोजना के निर्माण में अहम भूमिका अदा की थी। संकायाध्यक्ष प्रो बीबी तिवारी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विश्वेश्वरैया जी के जीवन पर प्रकाश डाला। प्रो.संदीप सिंह ने  विषय प्रवर्तन किया।  शिक्षकों ने संस्थान में स्थापित मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया जी के मूर्ति पर माल्यार्पण किया। इंजीनियरिंग संस्थान में विज्ञान प्रदर्शनी, विज्ञान क्विज, पोस्टर प्रस्तुतीकरण, एक्सटेंपोर रंगोली और भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का संचालन शेफाली, धन्यवाद ज्ञापन प्रो. अशोक कुमार श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर प्रो.वंदना राय, प्रो. मानस पांडेय, प्रो. अजय द्विवेदी, प्रो.देवराज सिंह, प्रो. संदीप सिंह, प्रो. रजनीश भास्कर, प्रो. रवि प्रकाश, प्रो. प्रदीप कुमार, डॉ. राजकुमार, डॉ. मनोज मिश्र, डा. गिरधर मिश्र,. संतोष कुमार, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ संजीव गंगवार, डॉ अमरेंद्र कुमार सिंह, डॉ प्रवीण कुमार सिंह ज्योति प्रशांत सिंह, पूनम सोनकर, प्रीति शर्मा, जया शुक्ला आदि  उपस्थित रहीं।