Tuesday, 11 November 2025

शरीर, मन और आत्मा का सामंजस्य है जरूरी –कुलपति


संतुलित जीवन शैली और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाये- डॉ. दिलीप 
मनोवैज्ञानिक प्राथमिक उपचार विशेष 6 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला की हुई शुरुआत

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के अनुप्रयुक्त मनोविज्ञान विभाग एवं वेलनेस सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में मनोवैज्ञानिक प्राथमिक उपचार पर  छह दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ मंगलवार को हुआ। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 15 नवंबर 2025 तक विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित किया जा रहा है। 
मंगलवार को रज्जू भैया भौतिक विज्ञान अध्ययन एवं शोध संस्थान में प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुलपति प्रोफेसर वंदना सिंह ने कहा कि हमें जीवन में केवल खुशी पाने की इच्छा नहीं रखनी चाहिए, बल्कि जो काम हम कर रहे हैं उसे खुशी के साथ करना चाहिए। उन्होंने बताया कि जब हम पढ़ाई या ज्ञान प्राप्ति जैसे कार्यों को आनंदपूर्वक करते हैं, तो उसकी उत्पादकता स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि हमारी लाइफस्टाइल ऐसी होनी चाहिए, जिससे हमारा शरीर, मस्तिष्क और आत्मा तीनों प्रसन्न और समन्वित रहें। 
इस कार्यक्रम में  जौनपुर जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम टीम के विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के विविध पहलुओं पर चर्चा की । मनोचिकित्सक डॉ. दिलीप कुमार चौरसिया ने कहा कि मानसिक रोगों का एक प्रमुख कारण जीवन में अनावश्यक तनाव लेना है। हमें प्रसन्न रहने के लिए संतुलित जीवन शैली और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिये।
क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट राम प्रकाश पाल ने कहा कि जैसे शारीरिक बीमारियों का इलाज जरूरी है, वैसे ही मानसिक बीमारियों के लिए भी समाज को आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा ‘स्टिग्मा’ (कलंक) तोड़ना जरूरी है। 
सामाजिक कार्यकर्ता मनोज वैज्ञानिक विकास सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित अभियान चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि परिवार का मानसिक स्वास्थ्य में बड़ा योगदान होता है। उन्होंने झाड़-फूंक जैसी पारंपरिक गलत धारणाओं से बचने की सलाह दी और ‘टेली-मानस’ कार्यक्रम की जानकारी दी, जिसके माध्यम से लोग फोन पर मानसिक स्वास्थ्य परामर्श प्राप्त कर सकते हैं।
कार्यक्रम का उद्घाटन सत्र सोमवार की शाम विश्वविद्यालय परिसर स्थित द्रौपदी महिला छात्रावास में आयोजित किया गया था ।  समन्वयक प्रो. अजय प्रताप सिंह ने विषय प्रवर्तन किया । डॉ. आयोजन सचिव डॉ.अन्नू त्यागी ने मनोवैज्ञानिक प्राथमिक उपचार के सिद्धांत लुक, लिसन, लिंक को विस्तार पूर्वक बताया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मनोज पाण्डेय ने किया । इस अवसर पर अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. प्रमोद यादव, डॉ. शशिकांत यादव समेत विभिन्न संकायों के विद्यार्थी उपस्थित रहे।

सकारात्मक सोच और जागरूकता से ही संभव है मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा: प्रो. वंदना सिंह


मनोवैज्ञानिक प्राथमिक उपचार (Psychological First Aid) विशेष 6 दिवसीय कार्यशाला हुई शुरुआत

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के अनुप्रयुक्त मनोविज्ञान विभाग एवं वेलनेस सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में “Psychological First Aid (PFA) Training)” नामक छह दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। यह प्रशिक्षण 10 से 15 नवंबर 2025 तक विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित किया जा रहा है।

इस प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रतिभागियों को मानसिक स्वास्थ्य संकट की स्थिति में त्वरित सहायता प्रदान करने की तकनीकों से परिचित कराना है, ताकि वे स्वयं एवं समाज के प्रति अधिक सजग और सहयोगी बन सकें।

कार्यक्रम का उद्घाटन सत्र विश्वविद्यालय परिसर स्थित द्रौपदी महिला छात्रावास में आयोजित किया गया। 
इस अवसर पर कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने कहा कि मानसिक समस्याओं को पहचानना और उनसे निपटने के लिए जागरूक होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को किसी मानसिक समस्या का सामना करना पड़ रहा है, तो उसे अपने करीबी लोगों से साझा करने में हिचकिचाना नहीं चाहिए। प्रो. सिंह ने कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए सकारात्मक सोच और निरंतर प्रयास सबसे महत्वपूर्ण तत्व हैं। हमें अपने साथ-साथ अपने आसपास के लोगों को भी खुश रखना चाहिए। यह हम सभी के मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है।
चीफ वार्डन प्रो. अविनाश पाथर्डीकर, समन्वयक प्रो. अजय प्रताप सिंह, डॉ. जाह्नवी श्रीवास्तव विषय से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार व्यक्त किए। आयोजन सचिव डॉ.अन्नू त्यागी ने मनोवैज्ञानिक प्राथमिक उपचार के सिद्धांत
“Look, Listen, Link”  को विस्तार पूर्वक बताया।
इस अवसर पर डॉ.झांसी मिश्रा, डॉ.निमिषा यादव,जया शुक्ला समेत तीनों महिला छात्रावास की छात्राएं उपस्थित रहीं।

Saturday, 1 November 2025

आई ट्रिपल ई स्थापना सप्ताह में छात्रों ने दिखाई तकनीकी प्रतिभा

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग संकाय में शनिवार को आई ट्रिपल ई (IEEE) स्टूडेंट ब्रांच द्वारा आई ट्रिपल ई स्थापना सप्ताह के अंतर्गत टेक क्वेस्ट (Technical Quiz Competition) का आयोजन किया गया। इस वर्ष के लिए आई ट्रिपल ई दिवस की थीम “प्रौद्योगिकी की सहायता से बेहतर भविष्य की कल्पना” (Imagining a Better Future with Technology) निर्धारित की गई है।

इसी थीम के तहत आयोजित टेक क्वेस्ट प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने अपनी रचनात्मकता, तकनीकी ज्ञान और समस्या समाधान क्षमता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में तकनीकी विषयों पर नए और चुनौतीपूर्ण प्रश्न पूछे गए, जिनके प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक उत्तर दिए। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों में तकनीकी नवाचार के प्रति रुचि और जागरूकता बढ़ाना था।

आई ट्रिपल ई स्टूडेंट ब्रांच विश्वविद्यालय में संकायाध्यक्ष प्रो. सौरभ पाल और कंप्यूटर साइंस विभागाध्यक्ष डॉ. विक्रांत भटेजा के मार्गदर्शन में सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। फैकल्टी कोऑर्डिनेटर श्री दिलीप यादव ने कहा कि “विश्वविद्यालय के छात्र तकनीकी कौशल के माध्यम से मानव जीवन को सरल बनाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए नवाचार की दिशा में कार्य कर रहे हैं।”

कार्यक्रम में निर्णायक मंडल में श्रीमती दीप्ति पांडे, श्री कृष्ण कुमार यादव और श्री प्रवीण पांडे उपस्थित रहे।
इस अवसर पर आई ट्रिपल ई स्टूडेंट ब्रांच के सदस्य अनुराग पाल, निहार, इप्सिता, आद्रीका, ऋचा, युगांत्रा, सृजन, अमन, शिवांश, सागर, हिमानी, अदिति, पवन, आंचल, विवेक सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन टीम के सदस्यों ने संयोजित ढंग से किया और समापन पर विजेताओं को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर पूरे विश्वविद्यालय परिसर में तकनीकी नवाचार और उत्साह का माहौल देखने को मिला।

Wednesday, 29 October 2025

शोधार्थियों को मिलेगा प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग


शोध और नवाचार को बढ़ावा देगी डीएसटीपर्स परियोजना

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) की “डीएसटीपर्स” परियोजना की प्रगति समीक्षा बैठक कुलपति प्रो. वंदना सिंह की अध्यक्षता में कुलपति सभागार में आयोजित हुई। बैठक में कुलपति ने दिसंबर 2025 तक सभी स्वीकृत उपकरणों और रसायनों की खरीद प्रक्रिया पूर्ण करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि परियोजना के वैज्ञानिक सामाजिक उत्तरदायित्व (एसएसआर) के तहत विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों के 10 शोधार्थियों को शोध उपकरणों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। चयनित विद्यार्थियों को उनके शोध कार्य हेतु पाँच हजार रुपये तक की वित्तीय सहायता भी दी जाएगी। इसके अतिरिक्त दो परास्नातक छात्रों को डिज़र्टेशन कार्य में सहयोग देने, 20 छात्रों को दो हजार रुपये तक की सहायता और पाँच छात्रों को स्टार्टअप या औद्योगिक सहयोग के अंतर्गत कृषि उत्पादों से जुड़े लघु उपकरणों के डिज़ाइन हेतु आर्थिक सहयोग प्रदान करने की घोषणा की गई।

परियोजना समन्वयक डॉ. धीरेंद्र चौधरी ने बताया कि डीएसटी द्वारा परियोजना की प्रथम वर्ष की धनराशि 22 मई 2025 को जारी की गई थी। परियोजना से जुड़ी टीम ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उच्च दक्षता वाले सोलर सेल का सफल प्रदर्शन किया हैजबकि हाइड्रोजन ऊर्जा के क्षेत्र में जल अपघटन तकनीक से हाइड्रोजन उत्पादन की दिशा में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की गई है। ऊर्जा संचयन हेतु उच्च धारिता वाले सुपर कैपेसिटर और पर्यावरणअनुकूल हरित स्नेहक का विकास भी किया गया है। अब तक 15 शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैंजबकि 18 शोध पत्र प्रकाशनार्थ भेजे गए हैं। बैठक में आईक्यूएसी समन्वयक प्रो. गिरिधर मिश्र, प्रोजेक्ट सह-समन्वयक डॉ. काजल डेडॉ. पुनीत धवनडॉ. रमांशु सिंहडॉ. आलोक वर्माडॉ. सुजीत चौरसियाडॉ. दिनेश वर्माडॉ. अजीत सिंह और डॉ. मिथिलेश यादव आदि प्राध्यापक उपस्थित रहे।