Tuesday, 31 May 2016

हार्टफुलनेसः तनावमुक्ति एवं ध्यान विषयक गोष्ठी

वीर बहादुर सिंह पू.वि.वि. के संकाय भवन स्थित संगोष्ठी कक्ष में राष्ट्रीय सेवा योजना के सात दिवसीय राज्यस्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला के समापन सत्र में हार्टफुलनेसः तनावमुक्ति एवं ध्यान विषयक गोष्ठी का आयोजन किया गया।
बतौर मुख्य अतिथि गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त माननीय न्यायमूर्ति आर.आर.के. त्रिवेदी ने कहा कि स्वस्थ शरीर में स्वस्थ दिमाग की संकल्पना को बनाए रखने की जरूरत है। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क होता है। उन्होंने कहा कि अपनी वास्तविक प्रकृति की प्रसन्न व पुलकित अवस्था को महसूस कर उसे अपने हृदय में अनुभव करना चाहिए। जब हम अपनी अन्तःप्रेरणा से कुछ करते हैं तो हम अपने जीवन को सार्थक करते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय सेवा योजना की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि सेवा भाव से बड़ा कोई कार्य नहीं है।
गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. पीयूष रंजन अग्रवाल ने कहा कि जीवन को अपने घर परिवार के साथ जीते हुए यह जरूरी है कि आप समाज के अन्य लोगों के लिए भी उनके साथ जीना सीखिए। यदि सफर में आप रेलगाड़ी से उतरते हैं तो राहगीरों से भी बातचीत करना सीखिए। किसी की भी परेशानियों को नजरअन्दाज न करें बल्कि उसमें समाहित हों। सदैव कल्याण की भावना रखें। संवेदनशीलता से ही बेहतर समाज का निर्माण किया जा सकता है।
विशिष्ट अतिथि के रूप में गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए कार्य परिषद के सदस्य एवं चौधरी चरण सिंह वि.वि. मेरठ के प्रोफेसर वीके मेहरोत्रा ने कहा कि सेवा कार्य में अर्पित होते समय तन, मन एवं धन समस्त न्यौछावर होते हैं। उन्होंने कहा कि मानवता की सेवा से व्यक्ति ऊंचाई हासिल करता है।
इसके पूर्व प्रशिक्षण शिविर में उपस्थित समस्त कार्यक्रम अधिकारियों को कर्नल सुरेन्द्र कुमार शर्मा एवं सुयश मिश्र द्वारा तनाव मुक्ति हेतु ध्यान का प्रशिक्षण दिया गया। इस अवसर पर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से पधारे कार्यक्रम अधिकारियों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन एनएसएस के कार्यक्रम समन्वयक डा. हसीन खान ने किया। इस अवसर पर वित्त अधिकारी एम.के. सिंह, उपकुलसचिव संजीव सिंह, डा. मानस पाण्डेय, डा. मनोज मिश्र, डा. वेदप्रकाश चौबे, डा. अवधेश कुमार, डा.
विजय प्रताप तिवारी, डा. अजय विक्रम सिंह, डा. आरके गुप्ता, डा. केएस तोमर, डा. मधुलिका सिंह, डा. शमीम, डा. हुमा परवेज, डा. पूनम सिन्हा, रजनीश सिंह, अरूण सिंह सहित प्रतिभागी मौजूद रहे।

हिंदी पत्रकारिता दिवस



Saturday, 28 May 2016

क्वालिटी इश्यूज इन एकेडमिक एंड एडमिनिस्ट्रेशन विषयक कार्यशिविर



 विश्वविद्यालय  के फार्मेसी संस्थान स्थित इनोवेशन सेंटर में चल रहे क्वालिटी इश्यूज इन एकेडमिक एंड एडमिनिस्ट्रेशन विषयक कार्यशिविर के दूसरे दिन समापन सत्र को सम्बोधित करते हुए कुलपति प्रो. पीयूष  रंजन अग्रवाल ने विश्वविद्यालय के सम्पूर्ण विकास की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए विश्वविद्यालयी कार्यकलापों के विभिन्न आयामों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि अध्ययन, अध्यापन एवं प्रषासन सिक्के के दो पहलू है। बिना इनके बेहतर तालमेल के शैक्षणिक परिवेश  नहीं बनाया जा सकता। 

उन्होंने उपस्थित सभी से यह अपेक्षा की कि हमारे कार्य समयबद्ध तरीके से हो और सब अपना सर्वोत्कृष्ट  योगदान विश्वविद्यालय  को दें। शिक्षा  एवं परिवेश  के साथ प्रशासन महत्वपूर्ण है। अपनी सोच को जितना बड़ा किया जाएगा गुणवत्ता भी उतनी ही उच्च होगी। समय पर सही ढंग से, समुचित रूप से कार्य करना ही गुणवत्ता है। यही हमारी संस्कृति होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कर्तव्य एवं अधिकार आत्मसंतोष  से आता है। आत्मसंतोष   से बढ़कर कुछ नहीं है। आज विश्वविद्यालय की बेहतरी के लिए जो प्रयास हो रहे है उसका लाभ आने वाली पीढ़ी को दृष्टिकोण में  रखके किया जा रहा है। आगे चलकर हम सभी गर्व से यह कह सकेंगे कि इस विश्वविद्यालय को हमने क्या कुछ नया दिया है। उन्होंने समस्याओं के निराकरण, पारदर्शिता , कार्यसंस्कृति, पत्रावली के रख-रखाव, साफ-सफाई, समस्याओं एवं त्रुटियों आदि के निराकरण में तुरन्त कार्रवाई जैसे बिंदुओं पर अपने बहुमूल्य सुझाव दिये।
इसके पूर्व तकनीकी सत्र में कार्यशाला  के संयोजक प्रो. बीबी तिवारी ने विश्वविद्यालय परिसर में उपलब्ध सुविधाओं एवं भविष्यगत  सुविधाओं की चर्चा की। उन्होंने नैक मूल्यांकन के सम्बन्धित 250 बिन्दुओं पर प्रकाश डालते हुए नैक द्वारा निर्धारित मानक के अनुरूप विश्वविद्यालय की प्रगति की दिशा  में सम्पूर्ण विकास की आवश्यकता  को रेखांकित किया। 
कार्यशाला में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ  एवं सहायक अधीक्षकों के साथ विभिन्न प्रशासनिक स्तर पर वरीयता क्रम में की जाने वाली कार्रवाई की जानकारी प्राप्त की गयी। तकनीकी सत्र को अधीक्षक डीपी घिल्डियाल, एमएम भट्ट, विनोद तिवारी, वीएस जायसवाल, रामआसरे, संजय श्रीवास्तव, अनिल श्रीवास्तव एवं दिवाकर राम ने सम्बोधित किया। उन्होंने पत्रावली के रख रखाव एवं त्वरित कार्य निष्पादन  पर चर्चा की। इस अवसर पर प्रो. डीडी दूबे, वित्त अधिकारी एमके सिंह, उपकुलसचिव संजीव सिंह, डा. एके श्रीवास्तव, डा. अजय द्विवेदी, डा. मनोज मिश्र, डा. एसपी तिवारी, डा. राजेष शर्मा , डा. रामनारायण, धर्मेंद्र सिंह, पूजा सक्सेना, डा. संजीव गंगवार, डा. सुशील  कुमार, डा. आलोक सिंह, डा. अवध बिहारी सिंह, डा. कार्तिकेय शुक्ल , डा. सुधीर उपाध्याय, डा. विवेक पाण्डेय, डा. केएस तोमर, जगदम्बा मिश्रा, रामसूरत यादव, डा. पीके कौशिक , रामसामुझ सहित विश्वविद्यालय के प्राध्यापक एवं कर्मचारी मौजूद रहे।










Friday, 27 May 2016

क्वालिटी इश्यूज इन एकेडमिक एंड एडमिनिस्ट्रेशन विषयक दो दिवसीय कार्यशिविर


 विश्वविद्यालय के फार्मेसी संस्थान स्थित इनोवेशन सेंटर में क्वालिटी इश्यूज इन एकेडमिक एंड एडमिनिस्ट्रेशन विषयक दो दिवसीय कार्यशिविर का आयोजन किया गया ।उद्घाटन सत्र में कुलपति प्रो पीयूष रंजन अग्रवाल ने विश्वविद्यालय के शिक्षकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि जीवन एक कैनवास है आने वाले हर व्यक्ति को अपनी कृति बनाना है, उसमें रंग भरना है.इंद्रधनुषी रंगों से आप अपने जीवन को भरें और सदैव बेहतर प्रस्तुति के लिए तैयार रहें .प्रत्येक शैक्षणिक गतिविधियों को सूचीबद्ध करने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि हमें कक्षा, प्रयोगशाला, पुस्तकालय  एवं अन्य गतिविधियों में शामिल होकर उसे उच्च शिखर देना है.प्रत्येक कार्य, विधा एवं कार्यकर्ता का एक निश्चित योगदान होता है जो किसी भी संस्थान के उच्चीकरण हेतु चरणबद्ध तरीके से उसे अभ्यास में लाए  जाने की जरूरत है.
उन्होंने विद्यार्थियों के पठन पाठन एवं कार्यकलापों के समुचित वर्गीकरण, सूचीकरण, प्रयोगशाला उपकरण, इ क्लास रूम आदि का उपयोग, शोध एवं  विकास, दैनिक सुविधाओं आदि  के उच्चीकरण पर अपनी बात रखी.
विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो डी डी दुबे ने प्रयोगशाला उपकरणों की अनुकूलता, देखभाल, स्थापना, रख रखाव से सम्बंधित पहलुओं पर जानकारी दी. उन्होंने कहा कि प्रयोगशाला के उपकरणों की तकनीकी जानकारी शिक्षकों को होना चाहिए।कार्यक्रम संयोजक प्रो बी बी तिवारी ने कहा कि शिक्षकों को कक्षाओं में जाने के पूर्व तैयारी करके जाना चाहिए।विषय को बेहतर तरीके से विद्याथिओं के समक्ष रखने के लिए संचार कौशल बहुत जरुरी है इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
द्वितीय सत्र में परिसर में संचालित पाठ्यक्रमों के विभागाध्यक्ष प्रो ए के श्रीवास्तव, डॉ मानस पांडेय, डॉ अजय प्रताप सिंह, डॉ अविनाश पाथर्डिकर, डॉ अजय द्विवेदी,डॉ मुराद अली, डॉ संतोष कुमार आदि ने अपने विभागों की कार्य विधि, चुनौतियों एवं भावी योजनाओं पर प्रकाश डाला।
कार्यशाला का संचालन डॉ एच सी पुरोहित ने किया। इस अवसर पर वित्त अधिकारी एम के सिंह, उपकुलसचिव संजीव सिंह, डॉ ए के श्रीवास्तव,डॉ मनोज मिश्र,डॉ राम नारायण,डॉ रसिकेश, डॉ दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ नुपूर तिवारी, डॉ आशुतोष सिंह,डॉ सुशील कुमार,डॉ सुरजीत यादव, डॉ अमरेंद्र सिंह, डॉ संजीव गंगवार, डॉ अवध बिहारी सिंह, डॉ रूश्दा आज़मी, डॉ सुनील कुमार, डॉ के एस तोमर, डॉ परमेंद्र सिंह,  अमित वत्स समेत विश्वविद्यालय के शिक्षक उपस्थित रहे.