Monday, 30 October 2017

पीएचडी प्रवेश 2017 आवेदन पत्रों की जमा करने की तिथि बढ़ी


 वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफ़ेसर डॉ राजाराम यादव ने पी-एचडी प्रवेश 2017 में  इच्छुक अभ्यर्थियों के आवेदन पत्रों की जमा करने की तिथि 10 नवंबर तक के लिए बढ़ा दी है।  जानकारी देते हुए विश्वविद्यालय के कुलसचिव संजीव कुमार सिंह ने बताया कि अभ्यर्थी अपना आवेदन पत्र समस्त निर्धारित प्रपत्रों  की छाया प्रतियों के साथ संबंधित समस्त राजकीय एवं अनुदानित महाविद्यालय   के सम्बंधित विभागों एवं परिसर में संचालित पाठ्यक्रमों   में व्यक्तिगत रूप से या रजिस्टर्ड डाक द्वारा 10 नवंबर की शाम 4:30 बजे तक जमा कर सकते हैं। 10 नवंबर  के बाद प्राप्त आवेदन पत्र पर विचार नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रत्येक अर्हता प्राप्त अभ्यर्थी का आवेदन फार्म संबंधित संस्थानों के प्राचार्य एवं विभागाध्यक्ष स्वीकार करेंगे तथा संबंधित महाविद्यालयों द्वारा दिनांक 15 नवंबर से 15 दिसंबर तक अपने स्तर पर साक्षात्कार की प्रक्रिया संपन्न कराई जाएगी। इसके बाद विभागाध्यक्ष एवं प्राचार्य अपने माध्यम से समस्त प्रपत्रों  सहित शोध प्रस्ताव विश्वविद्यालय को 23 दिसंबर तक उपलब्ध कराएंगे। उन्होंने बताया कि यह निर्देश समस्त राजकीय एवं  अनुदानित महाविद्यालय के प्राचार्य एवं विश्वविद्यालय परिसर में संचालित पाठ्यक्रमों के विभागाध्यक्ष, शोध निर्देशक एवं पीएचडी प्रवेश  हेतु समस्त शोध निर्देशकों  एवं प्राचार्यों के लिए विश्वविद्यालय द्वारा भेजा जा रहा है। 

पुरातन संस्कृति से विद्यार्थियों जोड़ना होगा - प्रो० गौतम


पूर्वांचल विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय सम्मलेन का हुआ समापन 

 विश्वविद्यालय में दीनदयाल उपाध्याय जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य  में चल रही तीन दिवसीय सम्मेलन का सोमवार को इंजिनियरिंग संस्थान के विश्वेशरैया हॉल में  समापन हुआ।तीसरे दिन भारत में प्राचीन शिक्षा पद्धति व एकात्म मानववाद और भारतीय मूल्य विषयों पर  सत्र का आयोजन किया गया।
 विभिन्न सत्रों में मुख्य वक्ताओं के क्रम में महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफ़ेसर नरेश चंद्र गौतम ने कहा कि आज के दौर में गुरु शिष्य के संबंधों की पुरातन संस्कृति समाप्त हो गई है.विलुप्त हुई संस्कृति को  नई पीढ़ी से पुनः जोड़ना होगा।उन्होंने कहा कि विदेशों की नकल कर शिक्षा का निजीकरण कर दिया गया.धनवान व्यक्तियों ने शिक्षा को उद्योग बना दिया है और आज यह लाभ के केंद्र तक सीमित हो गए हैं.उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को स्वायत्तता  मिली है लेकिन बहुत सारे ऐसे नियम है जिससे सहायता प्रभावित हो रही है.
अरुंधति वशिष्ठ अनुसन्धान पीठ के  निदेशक डॉ चंद्र प्रकाश सिंह ने कहा कि भारत में पुरातन व्यवस्था के अंतर्गत शिक्षा ऐसी  थी जिससे  मोक्ष मिलता था। लेकिन आज के युग में शिक्षा का उद्देश्य बदल गया है।आज शिक्षा के बिना सर्वांगीण विकास संभव नहीं है और इसके मूल को समझने की आवश्यकता है।
वाराणसी के उद्योगपति दीनानाथ झुनझुनवाला ने कहा कि छात्र राजनीति गलत दिशा में जा रही है.राजनीतिक पार्टियों के  छात्र संघ में हस्तक्षेप पर रोक लगनी चाहिए।
काशीि हिन्दू विश्वविद्यालय  के गणित के प्रोफेसर डॉक्टर एसके मिश्रा  ने कहा कि हमारे देश में उच्च शिक्षा के लिए बहुत कम बजट है.भारत में जहां कुल बजट का 1.5 5% है वही चाइना में 15.72 प्रतिशत बजट की व्यवस्था है.सरकारों को उच्च शिक्षा में सुधार के लिए इस बजट को बढ़ाना चाहिए।उन्होंने देश में उच्च शिक्षा की स्थिति पर विस्तार से अपनी बात रखी.

अध्यक्षीय संबोधन में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफ़ेसर राजाराम यादव ने कहा कि विश्वविद्यालय के लिए विद्यार्थी सबसे महत्वपूर्ण है उनके बिना कोई संस्थान सजीव नहीं हो सकता।ऐसे में ऐसी विश्वविद्यालय शिक्षा पद्धति निर्मित हो जो विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के में सहायक हो सके.उन्होंने राज्य विश्वविद्यालयों को अनुदान बढ़ाने पर भी जोर दिया।

सम्मेलन के संयोजक डॉ अविनाश पर्थिडेकर ने  तीन दिवसीय सम्मेलन की रिपोर्ट प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन डॉ मुराद अली ने किया।
इस अवसर  पर डॉ विनोद सिंह, डॉ अजय प्रताप सिंह, डॉक्टर बी डी शर्मा, डॉ आर एन ओझा, डॉक्टर ए के श्रीवास्तव, डॉ अजय द्विवेदी, डॉ मनोज मिश्र, डॉक्टर हिमांशु सिंह, डॉ राजेश शर्मा, डॉ दिग्विजय सिंह राठौर, डॉक्टर सुनील कुमार, डॉक्टर अवध बिहारी सिंह, डॉक्टर अमरेंद्र  सिंह, डॉक्टर सुशील सिंह समेत तमाम  उपस्थित रहे. 

Sunday, 29 October 2017

तीन दिवसीय सम्मेलन में दूसरे दिन वक्ताओं ने किया विचार मंथन



 विश्वविद्यालय में दीनदयाल उपाध्याय जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित भारतीय विश्वविद्यालय शिक्षा पद्धति विषयक तीन दिवसीय सम्मेलन में रविवार को दूसरे दिन वक्ताओं ने विचार मंथन किया।

इंजीनियरिंग संस्थान के विश्वेसरैया हाल में उच्च शिक्षा पद्धति में बदलाव, उच्च शिक्षा के प्रति पंडित दीनदयाल उपाध्याय का दृष्टिकोण, एकात्म मानववाद और शिक्षा पद्धति विषयों पर तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया। हिमांचल  प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री ने कहा कि अगर हिंदुस्तान को विश्वगुरु बनाना है और 125 करोड़ लोगों के अंदर ताकत पैदा करनी है तो शिक्षा की पद्धति को भारतीय भाषाओं में करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि हमारी विश्वविद्यालय में शिक्षा पद्धति ऐसी बने जिससे छात्रों के मन में प्रश्न पैदा हो और विद्यार्थी उसके उत्तर ढूंढने के लिए व्याकुल हो जाए।


सामाजिक चिंतक -विचारक एवं वरिष्ठ संघ प्रचारक  रत्नाकर ने कहा कि भारतीय समाज का चिंतन, मूल्य, संस्कृति एवं अवधारणा भारतीय शिक्षा का आधार होगी तब जाकर हम दुनिया का मार्गदर्शन कर सकेंगे। आज के समय में हमें समीक्षा करने के साथ-साथ चिंतन करने की आवश्यकता है। कुछ मुट्ठी भर लोगों ने आर्य- अनार्य की गलत व्यख्या कर समाज में गलत सन्देश देने की कोशिश की। सबसे पहले इसका खंडन भारत रत्न बाबा साहब भीम राव  अम्बेडकर ने ही किया है। जब तक भारत का प्राचीन ज्ञान -विज्ञान पुनः प्रस्फुटित नहीं होगा तब तक विश्व का कल्याण संभव नहीं है। 



महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के मदन मोहन हिंदी पत्रकारिता संस्थान के निदेशक प्रो ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि  शिक्षा केवल रोजगार के लिए नहीं बल्कि आत्मचिंतन, मूल्य एवं आचरण पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय को संदर्भित करते हुए कहा कि जो विद्यार्थी पैसे के बल पर डिग्री पाते हैं उनके अंदर राष्ट्रप्रेम नहीं हो सकता।



सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय  के प्रोफेसर पी एन सिंह ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में एकात्म मानववाद एक अनुपम प्रयोग है। एकात्म मानववाद पर आधारित शिक्षा व्यवस्था केवल पाठ्यक्रमों पर आधारित सूचनाओं का आदान प्रदान करने वाली शिक्षा व्यवस्था नहीं है बल्कि इसके कि केंद्र में विद्यार्थी का संपूर्ण व्यक्तित्व है।

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ की प्रोफेसर कल्पलता पांडेय ने कहा कि उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के समय शिक्षकों को विद्यार्थियों द्वारा पूरे वर्ष की गई मेहनत को ध्यान में रखना चाहिए बिना पढ़े मूल्यांकन करना एक बड़ा अपराध है।
सामाजिक कार्यकर्ता सुनील भराला ने कहा कि वर्तमान शिक्षा पद्धति में संस्कार का अभाव है। शिक्षा व्यवस्था राष्ट्रीय सोच की होनी चाहिए।उन्होंने कहा कि ऐसी शिक्षा व्यवस्था बने जिससे देश के अंतिम नागरिक शिक्षित हो सके।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के भौतिकी के पूर्व प्रोफेसर राम गोपाल ने कहा कि आज शिक्षा का निजीकरण हो गया है। अधिकांश महाविद्यालयों में मूलभूत सुविधाएं भी नहीं है।उन्होंने कहा कि जब प्राथमिक शिक्षा मजबूत होगी तब उच्च शिक्षा में अच्छे विद्यार्थी आएंगे। 
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ राजाराम यादव ने वक्ताओं को स्मृति चिन्ह  देकर सम्मानित किया। सत्र में संचालन डॉ. मुराद अली एवं धन्यवाद ज्ञापन संयोजक डॉ अविनाश पाथर्डीकर ने किया. दूसरे दिन आयोजित सत्र में शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने भी अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
सम्मेलन में डॉक्टर बी डी शर्मा, डॉक्टर जगदीश सिंह दीक्षित, शतरुद्र प्रताप सिंह , डॉक्टर अजय द्विवेदी, डॉ राजेश शर्मा,  डॉ आशुतोष सिंह ,डॉक्टर ए के श्रीवास्तव, डॉक्टर एस पी तिवारी, डॉ आर एन ओझा, डॉक्टर मनोज मिश्रा ,डॉक्टर दिग्विजय सिंह राठौर, डॉक्टर सुनील कुमार, डॉ अमरेंद्र सिंह, डॉक्टर सुशील सिंह, डॉ आलोक सिंह, डॉक्टर विवेक पांडे, डॉक्टर सुधीर उपाध्याय, शैलेश प्रजापति, परमेन्द्र विक्रम सिंह  समेत तमाम लोग मौजूद रहे ।

नाद ही ब्रह्म - प्रो डॉ राजाराम यादव




विश्वविद्यालय में  सांस्कृतिक संध्या  सम्पन्न 

 विश्वविद्यालय में रविवार की रात सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। छतरपुर मध्यप्रदेश से पधारे मृदंग मार्तंड पंडित अवधेश कुमार द्विवेदी, संगीत नाटक अकादमी अवार्ड से सम्मानित प्रख्यात शास्त्रीय संगीत गायक पंडित सत्य  प्रकाश मिश्र एवं स्वामी शांति देव महाराज के शिष्य तथा ठुमरी एवं तराना  गायन में सिद्धहस्त कुलपति  प्रो डॉ   राजाराम यादव की युगलबंदी ने श्रोताओं  को अपने उत्कृष्ट गायन से मंत्रमुग्ध  कर दिया। इस अवसर पर मालकोश राग में रावण- मंदोदरी संवाद पर प्रो डॉ राजाराम यादव की प्रस्तुति- मैं कहां जाऊं कासे कहूं पर श्रोता  झूम उठे। उनके द्वारा  प्रस्तुत तराना एवं  ठुमरी बुद्धि न जागी,निकल  आयो  घमवा,जब जागी तब मूरत पायी,आगि लागे धंधा   वज्र परे कमवा पर   समूचा हाल तालियों की गूंज से अनुगुंजित होता  रहा।   शास्त्रीय गायक पंडित सत्यप्रकाश मिश्र द्वारा प्रस्तुत भजन एवं मृदंगाचार्य   पंडित अवधेश कुमार द्विवेदी  के शिव तांडव स्त्रोत पर मृदंग वादन ने लोगों का मन मोह लिया।  इस   अवसर पर  कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अरुंधति वशिष्ठ अनुसन्धान पीठ के  निदेशक डॉ चंद्र प्रकाश सिंह  ने कहा कि संगीत मानसिक तनाव से मुक्ति देता है।  अपने उदबोधन में कुलपति  प्रो  डॉ राजाराम यादव ने कहा  कि नाद ही ब्रह्म है। आहत नाद को ब्रह्म नहीं माना गया लेकिन अनाहत नाद को ब्रह्म की संज्ञा से अभिहित किया गया है।  धन्यवाद ज्ञापन संयोजक डॉ. अविनाश पाथर्डीकर एवं संचालन  मीडिया प्रभारी डॉ  मनोज मिश्र ने किया। इस अवसर पर डॉ अजय द्विवेदी, डॉ राम नारायण, डॉ ए के श्रीवास्तव, डॉ अमरेंद्र सिंह , डॉ दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ रजनीश भास्कर, डॉक्टर संतोष कुमार, डॉ राजकुमार सोनी, डॉ सुशील सिंह, डॉ अलोक सिंह , डॉ विवेक पांडे, डॉ रजनीश भास्कर ,आलोक दास डॉ संजय श्रीवास्तव डॉक्टर विद्युत मल, डॉ पीके कौशिक, सुशील प्रजापति, धीरज श्रीवास्तव समेत विश्वविद्यालय के छात्र- छात्राएं उपस्थित रहे।