Saturday, 31 October 2020

मा० राज्यपाल ने विश्वविद्यालय में ऑनलाइन सरदार पटेल की मूर्ति का किया अनावरण



सरदार पटेल समाज के लिए प्रेरणास्रोत: कुलाधिपति

               राज्यपाल ने विश्वविद्यालय में ऑनलाइन सरदार पटेल की मूर्ति का किया अनावरण 

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में लौह पुरुष भारतरत्न सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती एवं राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर शनिवार को प्रदेश की राज्यपाल  ने विश्वविद्यालय में ऑनलाइन सरदार पटेल की मूर्ति का अनावरण किया ।
इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि प्रदेश की राज्यपाल एवं माननीय कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने कहा कि सरदार पटेल का व्यक्तित्व और कृतित्व न केवल विद्यार्थियों के लिए अपितु समस्त युवा पीढ़ी, प्रबुद्धजन एवं राष्ट्रीय मूल्यों के प्रति श्रद्धा रखने वाले समस्त भारतवासियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि आज के दिन विश्वविद्यालय में सरदार पटेल की प्नतिमा का अनावरण वास्तव में देश और प्रदेश के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि आज कश्मीर से कन्याकुमारी तक जो हम अखंड भारत देख रहे हैं वह सरदार पटेल की ही देन है, इसलिए हम उनकी जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाते हैं। उनके व्यक्तित्व को जन-जन तक पहुंचाने के लिए ही गुजरात में 182 मीटर ऊंची उनकी प्रतिमा स्थापित की गई जो कि दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है। सरदार पटेल ने किसानों के कर माफी के लिए आंदोलन चलाया था उन्हीं की प्रेरणा से देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने किसानों की आर्थिक स्थिति ठीक करने के लिए और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए संसद में बिल लाए।

 उन्होंने नई शिक्षा नीति- 2020 पर चर्चा करते हुए कहा कि यह शिक्षा नीति भारत को नई दिशा देने के साथ-साथ युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम भी साबित होगी। उन्होंने आचार्य नरेन्द्र देव और वाल्मीकि जयंती और इंदिरागांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें भी नमन किया।  प्रतिमा अनावरण समारोह में विश्वविद्यालय की कुलपति  निर्मला एस. मौर्य ने  कुलाधिपति जी का स्वागत करते हुए कहा कि आपके  निर्देशन में उत्तर प्रदेश के संपूर्ण विश्वविद्यालय में एवं महाविद्यालयों में नूतन चेतना, नई स्फूर्ति तथा नई दृष्टि उत्पन्न हुई है, जिसने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन और सुधारों को जन्म दिया है। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल दृढ़ इच्छाशक्ति नेतृत्व, कौशल और अदम्य साहस के कारण पूरे देश में याद किए जाते हैं हम सौभाग्यशाली कि हमें ऐसे महापुरुष की प्रतिमा विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित कर अपने विद्यार्थियों, शिक्षकों और समाज के सभी वर्गों को राष्ट्रीय एकता का संदेश देने का अवसर मिला।समारोह की शुरुआत राष्ट्रगीत, कुलगीत के साथ हुई। समारोह में कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल उपस्थित लोगों को  राष्ट्रीय एकता की शपथ दिलाई। संचालन प्रो. मानस पांडेय और धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव सुजीत कुमार जायसवाल ने किया। ऑनलाइन कार्यक्रम में तकनीकी सहयोग डॉ सुरजीत यादव की टीम ने किया।  इस अवसर पर कुलपति प्रो निर्मला एस मौर्य ने पौधरोपण किया। मुक्तांगन परिसर में अपराह्न शिक्षकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों को एकता की शपथ दिलाई गई। इस समारोह का संचालन प्रो अजय द्विवेदी ने किया। इस अवसर पर परीक्षा नियंत्रक वीएन सिंह, प्रोफ़ेसर अविनाश पाथर्डीकर, प्रो.एके श्रीवास्तव, प्रो.बीडी शर्मा, प्रो.अजय प्रताप सिंह,प्रो.रामनारायण, प्रो. देवराज सिंह,  डॉ. संतोष कुमार, एनएसएस समन्वयक राकेश यादव, सहायक कुलसचिव अमृतलाल, अजीत प्रताप सिंह, सुश्री बबिता,डॉ के एस तोमर,डॉ.दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ जाह्नवी श्रीवास्तव, डॉ.सुनील कुमार, डॉ.अवध बिहारी सिंह, डॉ.चंदन सिंह समेत शिक्षक और कर्मचारी उपस्थित थे। 


Tuesday, 27 October 2020

नई शिक्षा नीति से विश्व गुरु बनेगा भारत-कोठारी

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का क्रियान्वयन विषयक वेबिनार का हुआ आयोजन

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के अनुप्रयुक्त सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी संकाय के जनसंचार विभाग द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का क्रियान्वयन विषयक वेबिनार का आयोजन किया गया।बतौर मुख्य अतिथि शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास नई दिल्ली के राष्ट्रीय सचिव अतुल भाई कोठारी ने  राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन के विविध आयामों पर विस्तार पूर्वक अपनी बात रखी,  उन्होंने कहा कि  राष्ट्रीय शिक्षा नीति  को धरातल पर उतारने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति से भारत विश्व गुरु बनेगा।देश के सभी शिक्षण संस्थानों को पाठ्यक्रमों पर नए सिरे से विचार कर इसे विकसित करना होगा। 150 सालों से हमारे पाठ्यक्रमों से गायब भारतीय ज्ञान परम्परा के मूलभूत ज्ञान को भी समाहित करना होगा। उन्होंने मानव संसाधन मंत्रालय का नाम शिक्षा मंत्रालय करने की पहल का स्वागत करते हुए कहा कि मानव सोर्स तो हो सकता है पर कभी रिसोर्स नहीं हो सकता इसलिए शिक्षा मंत्रालय का नामकरण एक सराहनीय और उचित कदम है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के इतने समय बाद हम अपनी भाषा में तकनीकी व अन्य पुस्तकें नही बना पाए। इस समस्या का निराकरण होगा ऐसी आशा है।

अध्यक्षीय संबोधन में विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर निर्मला एस मौर्य ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर निरंतर  शिक्षण संस्थान मंथन कर रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में दूरदृष्टि है। इसमें समस्त विद्यार्थियों को लाभान्वित करने और उनके समग्र विकास के लिए बात की गई है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी शिक्षा अर्जित करने के बाद स्वरोजगार प्रारंभ करें यह बहुत ही महत्वपूर्ण है। विश्व विद्यालय के शिक्षक शिक्षा नीति के सभी पहलुओं से परिचित हो।

बतौर विशिष्ट अतिथि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के सदस्य प्रोफ़ेसर आरएन त्रिपाठी ने कहा कि राष्ट्रीय  शिक्षा नीति में मानवता के साथ-साथ प्रकृति को भी जोड़ा गया है। इससे व्यक्ति के चरित्र निर्माण के साथ राष्ट्र निर्माण का भी काम हो सकेगा ‌। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के चलते देश एक भारत श्रेष्ठ भारत बनने की ओर अग्रसर है।

अतिथियों का स्वागत संकाय अध्यक्ष डॉ मनोज मिश्र एवं आभार डॉ सुनील कुमार ने व्यक्त किया. वेबिनार का संचालन डॉ दिग्विजय सिंह राठौर ने किया। वेबिनार का संयोजन डॉ अवध बिहारी सिंह, डॉ चंदन सिंह, डॉ नितेश जायसवाल, अभिषेक कटिहार ने किया। इस अवसर पर प्रो मानस पांडे, प्रोफेसर एच सी पुरोहित, प्रो विक्रम देव, डॉ राकेश यादव,डॉ जगदेव, डॉ तरुणा गौर, डॉ प्रमोद यादव, डॉ श्याम कन्हैया सिंह, डॉ अनु चौहान समेत तमाम लोग मौजूद रहे।