Saturday, 30 April 2022

दो महाविद्यालयों की परीक्षा में अचानक पहुंचीं कुलपतिपरीक्षा केंद्र का‌ किया निरीक्षण

 वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर से संबद्ध महाविद्यालयों की स्नातकोत्तर हिंदी, मनोविज्ञान की परीक्षाओं का शनिवार को कुलपति प्रोफेसर निर्मला एस. मौर्य ने औचक निरीक्षण किया। जौनपुर के महाविद्यालयों में सुबह की पाली में वह अचानक पहुंचीं।
शनिवार की सुबह की प्रथम पाली में स्नातकोत्तर हिंदी, मनोविज्ञान, की परीक्षा थी।
सबसे पहले वह अब्दुल अजीज अंसारी मजडीहा शाहगंज, फरीदुलहक मेमोरियल महाविद्यालय शाहगंज का निरीक्षण किया। इस दौरान कुलपति ने स्ट्रांग रूम, कंट्रोल रूम, सीसीटीवी कैमरे की रिकॉर्डिंग को भी देखा।  कोविड-19 के नियमों के अनुपालन के संबंध में भी प्राचार्य और केंद्र व्यवस्थापक से  पूछताछ की । 
कुलपति प्रोफ़ेसर मौर्य ने सभी महाविद्यालयों को बढ़ती गर्मी को देखते हुए पीने के पानी की व्यवस्था करने का कड़ा निर्देश दिया। 
सभी जगह  सीसीटीवी कैमरों की निगरानी के साथ परीक्षाएं चल रही थीं। उन्होंने कहा कि हर हाल में परीक्षा के दौरान कोविड-19 सुरक्षा निर्देशों का पालन होना चाहिए। उनके साथ उनके निजी सहायक डॉ. लक्ष्मी प्रसाद मौर्य भी थे।

Tuesday, 26 April 2022

विद्यार्थी होते है गुरु का गौरव: प्रो. निर्मला एस. मौर्य

प्रेरणा कोचिंग में शिक्षा देने वाले विद्यार्थी हुए सम्मानित
विश्वविद्यालय से सटे गाँव में 2014 से चल रही है निःशुल्क कोचिंग
 वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति सभागार में मंगलवार को विश्वविद्यालय से सटे देवकली गाँव में बच्चों को प्रेरणा निःशुल्क कोचिंग में शिक्षा देने वाले 16 विद्यार्थियों को कुलपति प्रो. निर्मला एस. मौर्य ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. निर्मला एस. मौर्य ने कहा कि विद्यार्थी गुरु का गौरव होते है। पढ़ाई के साथ ही साथ गाँव के बच्चों के लिए इन विद्यार्थियों ने जो समय निकाला है वह प्रकाश की तरह है। उन्होंने कहा कि प्रेरणा कोचिंग के सफल संचालन के लिए हर तरह का सहयोग दिया जायेगा।
गौरतलब है कि 4 फ़रवरी 2014 से विश्वविद्यालय से सटे देवकली गाँव में बच्चों के लिए निःशुल्क प्रेरणा कोचिंग निरंतर चल रही है. इस कोचिंग के माध्यम से अब तक 1435 विद्यार्थी लाभान्वित हो चुके है. वर्तमान समय में 1 से 12 तक की कक्षाओं के 135 विद्यार्थी शिक्षा ले रहे है. विश्वविद्यालय परिसर के विद्यार्थियों का एक समूह इन बच्चों को पढ़ाता है।
कार्यक्रम में कुलसचिव महेंद्र कुमार ने कहा कि प्रेरणा कोचिंग में अपनी सेवा देने वाले विद्यार्थी आइकोन है. प्रो. मानस पाण्डेय ने कहा कि विद्यार्थियों ने परंपरा का निर्वहन किया है, आगे भी यह जारी रहेगा. परीक्षा नियंत्रक बी. एन. सिंह ने कहा कि समाज के हर व्यक्ति को लोक भावना के अनुरूप कार्य करना चाहिए।

शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. विजय सिंह ने कहा कि प्रेरणा कोचिंग से विश्वविद्यालय के उन विद्यार्थियों का व्यक्तित्व विकास हुआ है जो इससे जुड़े हुए है। राष्ट्रीय सेवा योजना के समन्वयक डॉ. राकेश कुमार यादव ने कहा कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों से जुड़कर गाँव के बच्चे बड़ा सपना देख रहे है। इसी क्रम में अभियांत्रिकी के प्रो. ए. के. श्रीवास्तव ने प्रेरणा कोचिंग की विकास यात्रा पर प्रकाश डाला. प्राचार्य डॉ. रमेश मणि त्रिपाठी ने अपने महाविद्यालय में गरीब बच्चों के लिए किये जा रहे प्रयासों की चर्चा की। 
प्रेरणा कोचिंग के संयोजक डॉ. राजकुमार ने विद्यार्थियों द्वारा किये जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला एवं प्रगति से अवगत कराया। संचालन संतोष कुमार एवं  धन्यवाद ज्ञापन वित्त अधिकारी संजय राय ने किया.  इस अवसर पर प्रो. अविनाश पाथर्डीकर, प्रो. देवराज, डॉ. रजनीश भास्कर, डॉ प्रदीप कुमार, डॉक्टर संजीव गंगवार, डॉ. नूपुर तिवारी, डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ. जान्हवी श्रीवास्तव, सहायक कुलसचिव अमृत लाल, बबीता सिंह, अन्नू त्यागी, डॉ. श्रवण, डॉ. कृष्ण कुमार यादव, डॉ. मंगल यादव, लक्ष्मी प्रसाद मौर्य, विनय वर्मा, करुणा निराला,इन्द्रेश गंगवार समेत अन्य उपस्थित रहे.
सम्मानित होने वाले विद्यार्थी
आकाश वैभव, अमरजीत कुमार धीवर, विपिन कुमार, आयुष यादव, नदीम अहमद, रामानंद दुबे, अविनाश श्रीवास्तव, अक्षय कुमार मिश्रा, रवि विश्वकर्मा, आदर्श यादव, विकास कुमार, आकाश राजभर, विकास चौरसिया, अभिषेक तिवारी, अफजल अली, संदीप यादव।

Sunday, 24 April 2022

प्रतियोगिता से विद्यार्थियों में होता है नेतृत्व का विकास: डॉ. भास्कर

पंचायतों की भूमिका विषय पर छात्र संसद का आयोजन

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के  नवाचार केंद्र में  आज़ादी का अमृत महोत्सव के तहत रविवार  को लोकतंत्र के आधारभूत स्तंभ के रूप में पंचायतों की भूमिका विषय पर छात्र संसद का आयोजन किया गया । इसके अंतर्गत वाद विवाद प्रतियोगिता आयोजित करके , ‘राष्ट्रीय पंचायती  राज दिवस  ‘मनाया गया।
इस अवसर पर चीफ वार्डन डॉ रजनीश भास्कर ने कहा कि इस तरह की प्रतियोगिताएं समय समय पर महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में होते रहने चाहिए। इससे छात्रों में नेतृत्व क्षमता का विकास होता है।
प्रो. बी डी शर्मा ने कहा कि आज की यह युवा पीढ़ी ही आगे चलकर देश की बागडोर संभालेगी ,ऐसे में इस तरह के विषयों को समझना जानना अति आवश्यक है।
इस अवसर  भाषण प्रतियोगिता हुई जिसमें प्रथम पुरस्कार विजेता आदित्य, सेकंड द्वितीय पुरस्कार विजेता अंजली दुबे, आस्था थर्ड पुरस्कार विजेता निधि दुबे और सुंदरम दुबे रहे। कार्यक्रम  समन्वयक डॉ जाह्नवी श्रीवास्तव ने कहा कि विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर निर्मला एस. मौर्य की प्रेरणा से विश्वविद्यालय के शिक्षक और विद्यार्थी हर दिवस को गंभीरता के साथ मना रहे हैं। आयोजन सचिव डॉ विनय वर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया।  इस अवसर पर  डॉ पूजा सक्सेना, डॉ झाँसी मिश्रा ने बच्चों का हौसला अफजाई किया। डॉ जया शुक्ला ने आभार और संचालन छात्र संघ के नेता उदय सिंह ने किया धन्यवाद ज्ञापन प्रिंस त्रिपाठी ने किया। इस अवसर पर आलोक मौर्य, सनी, सरोज, सुमित सिंह, सूर्यकांत तिवारी,करण राजभर, ऋषभ,एवं तनु आदि छात्र उपस्थित रहे ।

Saturday, 23 April 2022

पुस्तकों में समाहित है ज्ञान परम्परा-प्रोफेसर मानस पांडेय

तथ्य परक ज्ञान के लिए  पुस्तक और पुस्तकालय ही महत्वपूर्ण-प्रो अविनाश 
                  
 वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के विवेकानंद केंद्रीय पुस्तकालय में   विश्व पुस्तक  दिवस के अवसर पर  पुस्तक की महत्ता पर गोष्ठी आयोजित  की गई ।
गोष्ठी में मानद पुस्तकालयाध्यक्ष प्रोफेसर मानस पांडेय ने  कहा कि 23 अप्रैल 1995 को पहली बार यूनेस्को द्वारा विश्व पुस्तक दिवस की शुरुआत की गई थी  इसी क्रम में वर्ष 2001 से भारत सरकार ने विश्व पुस्तक दिवस मनाने की शुरुआत की है ।उन्होंने कहा कि पुस्तकें व्यक्ति के ज्ञान के विकास में  बहुत बड़ी भूमिका का निर्वहन करती हैं । इसीलिये कहा गया है कि अकेलेपन से बचने के लिए पुस्तकों से दोस्ती करनी चाहिए । परम्परागत रूप से हमारा ज्ञान,कौशल,संस्कृति एवं सभ्यता के उच्चतम आदर्शों का चित्रण भी  पुस्तकों से ही होता है। विषय का संपूर्ण ज्ञान अर्जित करने के लिए पुस्तकों का अध्ययन बहुत ही आवश्यक है  ।
प्रबंध अध्ययन संकाय  के संकायाध्यक्ष  प्रो अविनाश पाथर्डिकर ने पुस्तकों के प्रति जिज्ञासा बनाये रखने के लिए विद्यार्थियों का आवाहन किया।  उन्होंने कहा कि इंटरनेट पर  सर्च इंजन से ज्ञान प्राप्त करने की प्रवृत्ति   उचित नहीं है। तथ्य परक ज्ञान के लिए आज भी पुस्तक और पुस्तकालय ही महत्वपूर्ण   है. उन्होंने कहा कि
 पुस्तकालयों में युवाओं की कम उपस्थिति चिंताजनक है  इसके लिए  हम सभी को युवाओं को प्रोत्साहित करना होगा।  
इस अवसर पर जन संचार विभाग के अध्यक्ष  डॉ मनोज मिश्र,केंद्रीय पुस्तकालय के  डॉ विद्युत् मल्ल, अवधेश प्रसाद,द्विजेन्द्र दत्त उपाध्याय,श्रुति राय,अवनीश पांडेय,प्रियंका सिंह,राजेश्वरी यादव,सुशील कुमार  एवं आशुतोष उपाध्याय उपस्थित रहे।