Monday, 30 May 2022

हिंदी पत्रकारिता दिवस पर हिंदी पत्रकारिता की नवीन प्रवृत्तियां विषयक वेबिनार का आयोजन

 सकारात्मक खबरें पाठकों की होती हैं पहली पसंद: प्रो.प्रमोद कुमार

मीडिया का सामाजिक सरोकार जरूरी: प्रो.‌निर्मला एस. मौर्य

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस-अनुवाद, भारतीय भाषा,संस्कृति एवं कला प्रकोष्ठ  की ओर से हिंदी पत्रकारिता दिवस पर सोमवार को "हिंदी पत्रकारिता की नवीन प्रवृत्तियां" विषयक ऑनलाइन वेबिनार का आयोजन किया गया। 

इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि पाठ्यक्रम निदेशक एवं छात्र कल्याण अधिष्ठाता, भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी),नई दिल्ली के प्रो. प्रमोद कुमार ने कहा कि सकारात्मक और समाज में बदलाव से जुड़ी खबरें पाठकों द्वारा खूब पसंद की जा रही हैं। डिजिटल हो चुकी हिंदी पत्रकारिता ने सकारात्मक खबरों के माध्यम से पाठकों एवं दर्शकों का एक बड़ा वर्ग तैयार किया है। उन्होंने मीडिया में सकारात्मक खबरों की वकालत की। कहा कि पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने भी देश और समाज में बदलाव लाने वाली खबरों को प्रमुखता देने की बात कही थी।


अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. निर्मला एस. मौर्य ने कहा कि पत्रकारिता समाज हित के लिए होनी चाहिए। इसका सामाजिक सरोकार जरूरी है, तभी इसका लाभ देश को मिल सकेगा। पौराणिक और कलयुगी पत्रकारिता का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता से पहले की पत्रकारिता का रूप साहित्यिक था, बाद में यह विधा नई परिधि के रूप में बदली और बहुआयामी हो गई।  समय के साथ- साथ इसके प्रतिमान भी बदले। पत्रकारिता में सनसनी फैलाने का ट्रेंड चल रहा है इस पर विचार करने की जरूरत है। तकनीक के साथ-साथ समाचार पत्रों की डिजाइन और रूप सज्जा भी बदली है जो पाठकों को आकर्षित कर रही है।

वरिष्ठ पत्रकार हेमंत तिवारी ने कहा कि एक तरफ हिंदी पत्रकारिता का विस्तार हुआ है तो दूसरी तरफ उसकी भाषा में संक्रमण हुआ है। उन्होंने कहा कि आज भी अधिकतर चैनल हिंदी के ही हैं इनकी अपनी अलग-अलग भाषा हो गई है। सोशल मीडिया की भाषा पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि इसका कोई नियमन नहीं।

विशिष्ट  अतिथि उप निदेशक सूचना,राजभवन,उत्तराखंड डॉ नितिन उपाध्याय ने कहा कि  हिंदी पत्रकारिता को जनभाषा से अलग नहीं किया जा सकता है। अखबारों का क्षेत्रीयकरण पाठक को कई बड़ी खबरों से दूर ले जा रहा है। इसका कारण अधिक से अधिक संस्करण निकलना है। वेबिनार के संयोजक और जनसंचार विभाग के अध्यक्ष डॉ मनोज मिश्र ने अतिथियों का स्वागत और विषय प्रवर्तन किया।

संचालन डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर और धन्यवाद ज्ञापन डॉ सुनील कुमार ने किया।

इस अवसर पर प्रो.अविनाश पाथर्डीकर, प्रो. अजय द्विवेदी, डॉ. रसिकेश, डॉ राकेश यादव, डॉ. जगदेव, डॉ. जाह्नवी श्रीवास्तव, डॉ. अवध बिहारी सिंह, डॉ चंदन सिंह,अन्नू त्यागी, डॉ तरुणा गौर, रेनू तिवारी, विश्वप्रकाश श्रीवास्तव सहित  शिक्षक और विद्यार्थी शामिल थे।


Friday, 27 May 2022

एक दिवसीय वर्कशाप का आयोजन


वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के बौद्धिक संपदा अधिकार प्रकोष्ठ व पेटेंट डिजाइन एंड ट्रेडमार्क महानियंत्रक कार्यालय के सहयोग से एक दिवसीय वर्कशाप का आयोजन शुक्रवार को आर्यभट्ट सभागार में हुआ। इसमें नेशनल इंटेलेक्चुअल प्रापर्टी एवरनेस मिशन(एनआइपीएएम) की ओर से बौद्धिक संपदा अधिकार के संबंध में जागरूक किया गया।मुख्य वक्ता नई दिल्ली बौद्धिक संपदा कार्यालय के पेटेंट और डिजाइन के परीक्षक प्रशांत सिंह ने कहा कि आपीआर की विभिन्न विधाओं की जानकारी सभी को होनी चाहिए।

ट्रेड मार्क का मतलब टीएम ही नहीं होता जो अपंजीकृत है या आवेदन करने के बाद पेंडिग रहती है। वह उत्पाद टीएम का संकेत लगाते हैं। जो पंजीकृत होते हैं वह आर का संकेत लगाते हैं। इसी तरह उन्होंने पेटेंट और डिजाइन के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की और उसके कानूनी पहलुओं पर भी बताया।

उन्होंने कहा कि भौगोलिक संकेतांक पर सबसे पहला अधिकार स्थानीय लोगों का होता है। इसके लिए उन्होंने बनारसी साड़ी का उदाहरण दिया। इसके बाद प्रश्नोत्तरी सत्र चला। इसमें उन्होंने शिक्षकों और विद्यार्थियों के प्रश्नों का जवाब दिया। कुलपति प्रोफेसर निर्मला एस. मौर्य ने कहा कि अपने सृजन पर हमारा ही अधिकार होता है। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 301 में बौद्धिक संपदा का जिक्र है। संपदा दो प्रकार की होती है एक भौतिक संपदा दूसरा बौद्धिक संपदा। हर वृक्ष का आयुर्वेद में महत्व है। यह भौतिक संपदा की श्रेणी में आता है, हमें इन दोनों संपदा को संरक्षित करने की जरूरत है। कार्यक्रम का संचालन डा. सुजीत चौरसिया और आभार डा. सुनील कुमार ने किया।


Tuesday, 17 May 2022

लोकमंगल के पत्रकार थे देवर्षि नारदः डा. मनोज मिश्र

जनसंचार विभाग में मनाई गई देवर्षि नारद की जयंती

 वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग में मंगलवार को देवर्षि नारद की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर आदि पत्रकार नारद के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने देवर्षि नारद को सृष्टि का प्रथम संचारक कहा।

इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि विज्ञान  संकाय के अध्यक्ष प्रो. रामनारायण ने कहा कि देवर्षि नारद दुनिया के पहले संचारक थे। साथ ही उन्हें सृष्टि का पहला संवाददाता भी कहा जाता था जो अपना काम पूरे ईमानदारी के साथ संपादित करते थे।

जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष डा. मनोज मिश्र ने कहा कि देवर्षि नारद पत्रकारिता के प्रथम निडर पत्रकार थे। शिखर पुरुष एवं नीतियों को संबंधित व्यक्ति या समाज तक बेबाक रूप से पहुंचाते थे। उनकी पत्रकारिता में लोकमंगल निहित होता था। उनके लोकहित और लोकमंगल की पत्रकारिता के प्रमाण प्राचीन ग्रंथों में मिलते हैं।

विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी डा. सुनील कुमार ने कहा कि आज की पत्रकारिता में टेबिल रिपोर्टिंग का दौर चला है। महर्षि नारद हमेशा स्पाट रिपोर्टिंग करते थे। वह अपनी बात को बिंदास होकर प्रेषित करते थे।

इसके पूर्व विभागाध्यक्ष मनोज मिश्र ने मुख्य अतिथि को बुके देकर स्वागत किया। इस अवसर पर विभाग के शिक्षक डा. दिग्विजय सिंह राठौर, डा. अवध बिहारी सिंह ने भी विचार व्यक्त किए।