जौनपुर: वीर बहादुर सिंह पूर्वाचल विश्वविद्यालय प्रशासन ने विवि परिसर व सम्बद्ध कॉलेजों में व्याप्त भ्रष्टाचार के भण्डाफोड़ के लिए स्टिंग आपरेशन चलाने का निर्णय लिया है। पूविवि देश का शायद पहला ऐसा विश्वविद्यालय बन गया है, जिसने बकायदा इस निर्णय को कार्य परिषद से मंजूरी दिलाते हुए अपने नियम कायदों में शामिल कर लिया है। किसी कार्य के बदले में अवैध वसूली की शिकायत मिलने पर कुलपति संबंधित के खिलाफ स्टिंग आपरेशन का आदेश देंगे। पकड़ में आने पर निलंबन सहित यथोचित कार्रवाइयां होंगी। गौरतलब है कि विश्वविद्यालय में डिग्री, माइग्रेशन, अंक पत्र सुधार कराने, कॉलेजों की मान्यता पत्रवली आगे बढ़ाने, फार्म जमा करने आदि में कर्मचारियों द्वारा अवैध वसूली करने की शिकायतें आम हो चुकी हैं। वहीं जौनपुर, आजमगढ़, गाजीपुर व मऊ के अधिकांश बीएड कालेजों में छात्रों से एडमीशन, हास्टल, कक्षा में उपस्थिति, प्रैक्टिकल, अंक पत्र, नकल कराने आदि मदों में अवैध वसूली तो पूछिए मत। शासन द्वारा 51 हजार रुपए बीएड की फीस निर्धारित है जबकि कॉलेजों में छात्रों से 75 हजार से एक लाख रुपए तक वसूल लिए जाते हैं। छात्र पीड़ित होते हुए भी शिकायत इसलिए नहीं करते थे कि कॉलेज प्रशासन द्वारा प्रैक्टिकल में अंक कम देने के साथ परीक्षा में सख्ती की धमकी दी जाती है। बीएड कालेजों में छात्रों से अवैध वसूली की तमाम शिकायतें मिलने को गंभीरता से लेते हुए कुलपति प्रो सुदरलाल ने अवैध वसूली में संलिप्त लोगों के भण्डाफोड़ के लिए स्टिंग आपरेशन चलाने का निर्णय लिया।ऐसे होगा स्टिंग आपरेशनविश्वविद्यालय या सम्बद्ध महाविद्यालयों में अवैध वसूली की शिकायत पर कुलपति स्टिंग आपरेशन की अनुमति देंगे। ज्यादा गंभीर मामला होने पर अपने स्तर से स्टिंग आपरेशन कराएंगे। अगर पीड़ित खुद संबंधित के खिलाफ स्टिंग आपरेशन करना चाहे तो कुलपति की अनुमति पर वह कर सकता है। आरोपी के खिलाफ साक्ष्य (विजुअल या ऑडिओ) मिलने पर संबंधित के खिलाफ यथोचित कार्रवाई होगी।
Sunday, 3 June 2012
Saturday, 2 June 2012
जनमत संग्रह का माध्यम भी है ब्लॉग : अरुणेन्द्र चन्द्र
जौनपुर : वीर बहादुर सिंह पूर्वाचल विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग के तत्वाधान में विश्वविद्यालय के ब्लॉग पूरबबानी के एक वर्ष पूरे होने के अवसर पर 2 जून को ब्लॉग और सामाजिकता विषयक गोष्ठी का आयोजन किया गया. इस मौके पर बतौर मुख्य वक्ता विधानसभा उत्तर प्रदेश के संपादक अरुणेन्द्र चन्द्र त्रिपाठी ने कहा कि आज ब्लॉग उपयोगी माध्यम के रूप में उभर कर सामने आया है. ब्लॉग के माध्यम से हम समाज से जुड़े मुद्दों को उठा कर जनमत संग्रह आसानी से कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने ब्लॉग की शुरुआत कर एक नई पहल की है. छात्र इससे सकारात्मक लाभ ले सकते हैं. संकायाध्यक्ष डा अजय प्रताप सिंह ने कहा कि इन्टरनेट ने सूचनाओं को प्राप्त करने के लिए बाधाओं को तोडा हैं. आज ब्लॉग के माध्यम से अपने विचार आप कही भी पंहुचा कर अपनी पहचान बना सकते हैं और धनार्जन भी कर सकते हैं.
प्राध्यापक डॉ. मनोज मिश्र ने कहा कि बीते एक साल के ही अन्दर विश्वविद्यालय के आधिकारिक ब्लॉग पूरब बानी ने अपार लोकप्रियता अर्जित की हैं. इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता हैं कि ब्लॉग पाठकों की संख्या दस हजार से अधिक हो चुकी हैं तथा ब्लॉगर डाट कॉम के अनुसार पूरब बानी ब्लॉग के पाठक भारत, अमेरिका समेत दुनिया भर में फैले हुए हैं. सामाजिक सरोकार निभाने में अंतर जाल आज सबकी आवश्यक जरूरत बन चुका है.
प्राध्यापक डॉ. अवध बिहारी सिंह ने कहा कि सामाजिक क्रांति लाने के कई देशों में ब्लॉग का सफल प्रयोग किया गया है. ब्लॉग के माध्यम से आम आदमी आज नागरिक पत्रकारिता कर रहा हैं जो कि लोकतंत्र के लिए सुखद है. कार्यक्रम का संचालन प्राध्यापक डा. दिग्विजय सिंह राठौर एवं धन्यवाद ज्ञापन डा. सुनील कुमार ने किया. इस अवसर पर डॉ रुस्दा हासमी, पंकज सिंह सहित विभाग के छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
Tuesday, 1 May 2012
कलाकार अपनी कला के माध्यम से भगवान से जुड़ता है - प्रो. सुंदरलाल
चौताल सम्राट वंशराज सिंह को कुलपति ने किया सम्मानित
जौनपुर.वीर बहादुर सिंह पूर्वाचल विश्वविद्यालय के रजत जयंती वर्ष के अंतर्गत गुमनामी के दौर में जी रहे लोक कलाकारों को सम्मानित करने की शुरुआत सोमवार को चौताल सम्राट वंशराज सिंह को कुलपति प्रो सुंदर लाल ने सम्मानित करके की . कुलपति प्रो सुन्दरलाल ने स्वयं श्री सिंह के पैत्रिक आवास जनपद के ग्राम पंचायत अर्धपुर, बक्शा जाकर लोक संगीत के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान के लिए विश्वविद्यालय की तरफ से सम्मान पत्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया .
श्री सिंह को सम्मानित करते हुए कुलपति प्रो सुंदरलाल ने कहा कि लोक संगीत में महारत हासिल करने के बाद भी जो लोक कलाकार आज गुमनामी के दौर में जी रहे हैं उनको सम्मानित करना विश्वविद्यालय की तरफ से नई
पहल हैं. वंशराज सिंह ने हमारी लोककला को वाद यंत्रों के माध्यम से जिस तरीके से लम्बे समय तक लोकप्रिय बनाये रखा उसको भुलाया नहीं जा सकता हैं.ऐसे अद्वितीय कलाकारों को आगे भी सम्मानित कर विश्वविद्यालय उनके साथ अपनी भी पहचान देगा. उन्होंने कहा कि हमारे समाज में लोककला का एक लम्बा इतिहास रहा हैं. मनोरंजन के साथ ही साथ हमें इनसे उर्जा भी मिलती रही हैं.
पहल हैं. वंशराज सिंह ने हमारी लोककला को वाद यंत्रों के माध्यम से जिस तरीके से लम्बे समय तक लोकप्रिय बनाये रखा उसको भुलाया नहीं जा सकता हैं.ऐसे अद्वितीय कलाकारों को आगे भी सम्मानित कर विश्वविद्यालय उनके साथ अपनी भी पहचान देगा. उन्होंने कहा कि हमारे समाज में लोककला का एक लम्बा इतिहास रहा हैं. मनोरंजन के साथ ही साथ हमें इनसे उर्जा भी मिलती रही हैं.
उन्होंने कहा कि कलाकार अपनी कला के माध्यम से भगवान से जुड़ता है.संगीत और कला की विधाओं में रमने के बाद हम अपने आप को भूल जाते हैं. उन्होंने कहा कि संकलन के अभाव में लुप्तप्राय हो चले आंचलिक लोकगीतों को विश्वविद्यालय इसी रजत जयंती वर्ष में स्थापित होने वाले अपने सामुदायिक रेडियो के जरिये लोकप्रिय बनाएगा .
Thursday, 26 April 2012
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