Monday, 7 December 2015

२७ वीं एथलेटिक प्रतियोगिता उद्घाटन अवसर


२७ वीं एथलेटिक प्रतियोगिता उद्घाटन अवसर






------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

कोरोमंडल इंटरनेशनल में पांच छात्र चयनित
विश्वविद्यालय के प्रबंध अध्ययन संकाय में आज कोरोमंडल इंटरनेशनल ने कैंपस सिलेक्शन किया। इस अवसर पर श्री शिवाजी सिंह, रीजनल मैनेजर, एच.आर. ने आज सर्वप्रथम छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि एग्री-बिजनैस के छात्रों की आज कै दौर मै काफी मांग है और पूर्वांञ्चल विश्वविद्यालय में संचालित एम.बी.ए. एग्री बिजनैस पाठ्यक्रम कार्पोरेट जगत को अच्छे छात्र उपलब्ध करा रहा है और कहा कि इस पाठ्यक्रम के माध्यम से छात्रों को वे सभी जानकारियां दी जाती है जिसकी एग्री-बिजनेस जगत में मांग है। उन्हौने छात्रों को संभोधित करते हुए कोरोमंडल इंटर्नेशनल कंपनी के बारे मे विस्तार से बताया उसके बाद दो चरणों में छात्रों के साक्षात्कार लिए । इस अवसर पर पूर्वाञ्चल विश्वविद्यालय के इंडस्ट्री-इंस्टीट्यूट इंटरफेस के समन्वयक और एच.आर.डी. विभाग के ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट समन्वयक डॉ. अविनाश पाथर्डीकर ने कहा कि विश्विद्यालय छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए समय-समय पर व्यक्तित्व विकास के कार्यक्रम आयोजित करता रहता है और कार्पोरेट जगत के समूहों को आमंत्रित कर कैंपस सिलेक्शन आयोजित करवाने हेतु सतत प्रयत्नशील है। उन्हौने इस अवसर पर कोरोमंडल इंटर्नेशनल से आए अतिथियों का स्वागत किया और आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी यह संस्था विश्विद्यालय के छात्रों को चयनित करती रहेगी। अंत में वरिष्ठ प्रवक्ता डॉ. सुशील सिंह ने आभार व्यक्त किया और कहा कि हमें पूरी आशा है कि चयनित पाचों छात्र संस्थान की अपेक्षाओं पर खरा उतरेंगे ।

Monday, 30 November 2015

शोध पत्र लेखन विषय पर कार्यशिविर

 वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कान्फ्रेंस हाल में शोध पत्र लेखन विषय पर कार्यशिविर का आयोजन विवेकानंद केन्द्रीय पुस्तकालय एवं सेज पब्लिकेशन के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय सोनीपत हरियाणा के प्रबंध शास्त्र के आचार्य प्रो. संकेत विज ने कहा कि एक शोधार्थी को पुस्तकालय ही सबकुछ दे सकता है। पुस्तकों से दोस्ती करना सीखिए जब विचारों का आवागमन तेज होगा तभी आप बेहतर शोध पत्र लेखन कर सकेंगे। हाल के वर्षों में पुस्तकालयों में बैठने वालों लोगों की कमी हो रही है। इसी कारण उत्कृष्ट शोध पत्र नहीं आ पा रहे है। उन्होंने यूजीसी समेत कई वेबसाइटों का उद्धरण देते हुए कहा कि आॅनलाइन रहते हुए आप पुस्तक एवं जर्नल्स को मुफ्त में डाउनलोड कर सकते है। वैश्विक स्तर पर कड़ी प्रतिस्पर्धा के चलते हमारा ज्ञान सदैव समतुल्य होना आवश्यक है। किसी भी शिक्षक एवं विद्यार्थी के लिए यह बहुत जरूरी है कि वह सदैव अपने ज्ञान को अपडेट करते रहे। प्रो. विज ने इण्डेक्स जर्नल्स, रैफ्रीड जर्नल्स, साइटेशन, वीबिलियोग्राफी, रेफेरेंसेज आदि बिंदुओं पर  उदाहरण सहित विस्तार से प्रकाश डाला।
डा. भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय लखनऊ के राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. रिपुसूदन सिंह ने कहा कि हमारे परम्परागत ज्ञान हमारे आदर्श है। उन्हीं को केन्द्रीकृत करके हम शोध शुरू करते है। शोध में समस्या को जानने के लिए हम सिद्धान्त का सहारा लेते है। जब हम सामान्य सिद्धान्त में आते है तो हमें व्याख्या, भविष्यवाणी एवं सुझाव तीनों को शामिल करना होता है। उन्होंने कहा कि शोध में रस्म अदायगी बंद होनी चाहिए। दुर्भाग्य का विषय है कि आज बहुत सारे शोध केवल एपीआई स्कोर बनाने के लिए हो रहे है। ज्ञान एवं समाज के विकास के लिए शोध बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि शोध के समय परिकल्पना बहुत प्रमुख होती है, हम क्या सोचते है, अन्य लोग क्या सोचते है और फिर इसी बुनियाद पर शोध प्रारम्भ होता है।
विशिष्ट अतिथि के रूप में सेज पब्लिकेशन इण्डिया के निकेत शर्मा ने देश व दुनिया में शोध पब्लिकेशन हाउस द्वारा चलाये जा रहे शोधग्रंथ व शोध पत्रिकाओं के पब्लिकेशन से जुड़ी बारिकियों के बारे में लोगों को परिचित कराया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रबंध अध्ययन संकाय के अध्यक्ष डा. एचसी पुरोहित ने कहा कि शोध पत्र लिखना एक महत्वपूर्ण कला है जिसमें शब्दों का चयन विषयवस्तु को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। शोध विषय का चयन सम्बन्धित विषय पर पूर्व में किये गये सभी शोधों के अध्ययन व संदर्भों के आधार पर तैयार किया जाता है और उसकी अभिव्यक्ति आम जनमानस को समझने वाली होनी चाहिए। तभी शोध पत्र अधिक सारगर्भित और सामाजिक प्रभाव डाल पाएंगे। यह कार्यशाला विश्वविद्यालय के शिक्षकों एवं शोध छात्रों के लिए लाभकारी है।


इसके पूर्व विषय विशेषज्ञ एवं अतिथियों द्वारा दीप प्रज्जवलन के साथ कार्यशिविर का शुभारम्भ हुआ। डा. अजय द्विवेदी,डा. अजय प्रताप सिंह, डा. प्रदीप कुमार, डा. बीडी शर्मा, डा. सुशील कुमार, डा. आलोक गुप्ता ने मंचासीन अतिथियों, विषय विशेषज्ञों को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया।
कार्यशिविर में आये हुए विषय विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों का स्वागत मानद पुस्तकालयाध्यक्ष प्रो. मानस पाण्डेय ने एवं संचालन डा. विद्युत मल्ल ने किया। आभार प्रदर्शन डा. अविनाश पाथर्डीकर नें  किया।
इस अवसर पर प्रो. एके श्रीवास्तव, डा. रामनारायण, डा. वंदना राय, डा. मनोज मिश्र, डा. आशुतोष सिंह, डा. सुरजीत यादव, डा. एसपी तिवारी, डा. दिग्विजय सिंह राठौर, डा. आलोक सिंह, डा. अवध बिहारी सिंह, डा. सुनील कुमार, डा. विवेक पाण्डेय, डा. रूश्दा आजमी, सत्यम उपाध्याय, ़ऋषि श्रीवास्तव, आलोक दास समेत विभिन्न संकायों के शिक्षक एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।

30.11.2015


‘भारतीय संविधान: लोकतंत्र और सफलता’ विषयक संगोष्ठी

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति मा. अरूण टण्डन ने कहा कि जो शिक्षा हमें अभिमानी बना दें, वैसी शिक्षा मत लीजिए। देष तभी समृद्ध और विकास करेगा, जब इस देश  की शिक्षा सभी वर्गों तक बराबर पहुंचे। इसे सभी तक बांटना होगा। न्यायमूर्ति श्री टण्डन रविवार को वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विष्वविद्यालय में आयोजित ‘भारतीय संविधान: लोकतंत्र और सफलता’ विषयक संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। यह समारोह भारत रत्न डा. भीम राव अम्बेडकर की 125वीं वर्षगांठ के अवसर पर विश्वविद्यालय  द्वारा मनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पं. मदन मोहन मालवीय जी का मानना था कि शिक्षा इंसान बनाने वाली होनी चाहिए। आज यह दुर्भाग्य से पैसा कमाने वाली बन गयी है। विद्यार्थियों से मुखातिब होते हुए उन्होंने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम के आदर्शों  को आज अपनाने की जरूरत है। देश  में भ्रष्टाचार सबसे बड़ी समस्या के रूप में उभर रहा है। इसके लिए हमें कलाम साहब के सिद्धांतों पर पहल करते हुए इसकी शु रूआत अपने घर से करनी होगी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपने घरों में अपने अभिभावकों से यह सवाल करना होगा कि घर में जो कीमती सामान और वाहन आ रहे है वह अपनी कमाई के है या गलत ढ़ग से की गयी कमाई के। इस पारदर्शिता से समाज में सुधार परिलक्षित होगा। उन्होंने कहा कि जब संविधान बना तभी षिक्षा को भी मौलिक अधिकारों में शामिल किया जाना चाहिए था।
विशि ष्ट अतिथि मा. कुलाधिपति/श्री राज्यपाल के विधिक सलाहकार श्री एसएस उपाध्याय ने कहा कि भारत का संविधान दुनिया में लोकप्रिय है। जिसे विष्व के अन्य देशों  ने भी माना है। उन्होंने कहा कि यह हमारे संविधान की खूबी है कि तमाम विविधताओं, भाषा, मजहब, पंथ होने के बाद भी इसमें सबको साथ लेकर चलने की क्षमता है। यही सफल लोकतंत्र की पहचान है। उन्होंने कहा कि देष के तीन स्तम्भ न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका हैं। नियम बनाने का अधिकार विधायिका के पास है फिर भी अंतिम रूप से सर्वोच्च न्यायालय के पास इसे उचित या अनुचित ठहराने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि प्राचीन भारत में हमारी स्मृतियों ने कानून का पालन कराया था। अत्रि स्मृति का उद्धरण देते हुए उन्होंने कहा कि समाज में करणीय कार्य को धर्म कहा गया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में नकारात्मकता का कोई स्थान नहीं है। हमारे यहां सहिष्णुता शु रू से रही है। आज हमारेे यहां अधिकारों की बात बहुत हो रही है लेकिन अपने कर्तव्यों की बात लोग भूल गये है। जबकि पहले हमारा समाज अधिकार नहीं, अपने कर्तव्य पर जोर देता था। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 51 को समझने की जरूरत है तभी संविधान की मूल भावना का पालन हो पाएगा। हमारा लोकतंत्र परिपक्व है। इसका उदाहरण एनजेसी (राष्ट्रीय न्यायालय आयोग) के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने देष की जनता से भी सुझाव मांगे थे। ऐसी प्रक्रिया हमारी लोकतांत्रिक मूल्यों को बल देती है।
विशि ष्ट  अतिथि वाराणसी मण्डल के आयुक्त एवं विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति श्री नितिन रमेष गोकर्ण ने कहा कि विष्व के समस्त धर्म भारत में है, हमारी सभ्यता एवं संस्कृति में भी प्राचीनता की बुनियाद है। 21 वर्ष से कम उम्र के लोगों की आबादी इस देष में 65 प्रतिषत है। ऐसे में आज हमें इन युवाओं के लिए रोल माॅडल तैयार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि एक अरब 30 करोड़ की आबादी वाले इस महान देष में संविधान का शा सन अपने आप में ही एक बड़ी उपलब्धि है। दुनिया में यही एक ऐसा देश  है जो अपनी आजादी के बाद से लेकर अब तक कभी भी शा सन सत्ता में सैनिक हस्तक्षेप से वंचित है। भारत के संविधान ने लोकतंत्र को सफलतम स्तर पर पहुंचाने का कार्य किया है। ग्राम पंचायतों में चल रहे चुनाव इस लोकतंत्र की सफलता को दर्षाते है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि अभी हमें भ्रष्टाचार के खात्मे, महिला सषक्तिकरण तथा कमजोर लोगों के लिए बहुत कुछ करने की जरूरत है।
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. पीयूष रंजन अग्रवाल ने कहा कि देश  को एकसूत्र में पिरोये रखने का कारण हमारा संविधान है। उन्होंने कहा कि संविधान में तीन स्तम्भ के बाद लोगों ने मीडिया को चौथे  स्तम्भ के रूप में स्थापित करने की जरूरत बतायी। आज सबकी निगरानी के लिए पांचवें स्तम्भ के रूप में सोश ल मीडिया आ गया है। सिविल सोसायटी ने आजादी की लड़ाई को आंदोलन में बदला था। आज सोश ल  मीडिया के माध्यम से इसी की पुनर्वापसी हो रही है। उन्होंने कहा कि आज देश  के नागरिकों की इच्छा बढ़ी है। इन अपेक्षाओं एवं मूल स्वरूप में समानता के लिए प्रयास करने की जरूरत है। इसके पूर्व मुख्य अतिथि, विषिष्ट अतिथिगण एवं विष्वविद्यालय के कुलपति ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम की शु रूआत की।

कार्यक्रम का संचालन कुलसचिव डा. बीके पाण्डेय एवं डा. एचसी पुरोहित ने किया। स्वागत प्रो. डीडी दूबे द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्रोफ़ेसर बी बी तिवारी , वित्त अधिकारी एमके सिंह, डा. लालजी त्रिपाठी, डा. राजीव प्रकाष सिंह, डा. यूपी सिंह, डा. सर्वानंद पाण्डेय, डा. विजय प्रताप तिवारी, डा. आलोक सिंह, डा. सूर्यप्रकाष सिंह मुन्ना, डा. विवेक पाण्डेय, डा. एके श्रीवास्तव, डा. रामनारायण, डा. मानस पाण्डेय, डा. अविनाष पाथर्डिकर, डा. अजय प्रताप सिंह, डा. मनोज मिश्र, डा. वंदना राय, डा. अजय द्विवेदी, डा. बीडी श र्मा, डा. सुरजीत यादव, डा. एसपी तिवारी, डा. आषुतोष सिंह, डा. दिग्विजय सिंह राठौर, सुषील कुमार, डा. आलोक सिंह, डा. अवध बिहारी सिंह, डा. सुनील कुमार, डा. रूष्दा आजमी, डा. केएस तोमर, रामजी सिंह, ष्याम त्रिपाठी, अशोक  सिंह, रजनीश  सिंह, डा. राजेश  जैन समेत विभिन्न संकायों के शि क्षक एवं विद्यार्थी मौजूद रहे। अंत में कार्यक्रम के संयोजक डा. रामनारायण ने सभी के प्रति आभार प्रकट किया।

---

 सगोष्ठी के पश्चात मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति श्री अरूण टण्डन, मंडलायुक्त वाराणसी श्री नितिन रमेश  गोकर्ण, श्री राज्यपाल के विधिक सलाहकार एसएस उपाध्याय एवं कुलपति प्रो. पीयूष रंजन अग्रवाल ने विश्वविद्यालय  के एकलव्य स्टेडियम में चल रही पूर्वी क्षेत्र अन्तरविश्वविद्यालयीय क्रिकेट (महिला) प्रतियोगिता के खिलाडि़यों का परिचय प्राप्त किया एवं उनका उत्साहवर्धन किया। इसके पश्चात विश्वविद्यालय के विवेकानन्द केन्द्रीय पुस्तकालय में भारत सरकार द्वारा प्रदत्त मूल संविधान की छाया प्रति का अवलोकन किया एवं पुस्तकालय के बारे में जानकारी प्राप्त की। अंत में माननीय अतिथिगण द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में आंवले के पौध का रोपण किया गया।

---

संगोष्ठी में मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति श्री अरूण टण्डन, मंडलायुक्त वाराणसी श्री नितिन रमेश  गोकर्ण, श्री राज्यपाल के विधिक सलाहकार एसएस उपाध्याय एवं कुलपति प्रो. पीयूष रंजन अग्रवाल ने 26 नवम्बर को विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित ‘भारतीय संविधान: लोकतंत्र और सफलता’ विषयक निबंध प्रतियोगिता के विजेता विद्यार्थियों प्रथम प्रीती मिश्रा, द्वितीय राहुल सोनी और तृतीय पूजा कुमारी तथा सांत्वना पुरस्कार प्राप्त विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया।







समाचार पत्रों से