Wednesday, 10 February 2016

‘‘गिरते मानवीय मूल्य: कारण एवं समाधान’’ विषयक व्याख्यान

 ब्राडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन के महासचिव एवं वरिष्ठ पत्रकार एन.के. सिंह ने रखे विचार
 विश्वविद्यालय के संगोष्ठी भवन में बुधवार को आयोजित 19वें दीक्षांत समारोह के पूर्व सामाजिक विज्ञान की ‘‘गिरते मानवीय मूल्य: कारण एवं समाधान’’ विषयक व्याख्यानमाला में बतौर मुख्य अतिथि ब्राडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन के महासचिव एवं वरिष्ठ पत्रकार एन.के. सिंह ने कहा कि आज हमारे समाज के प्रतिमान गलत हो गये है। टेलीविजन पर रिएल्टी शो में स्थान पाने वाले और फिल्मी दुनिया के कलाकारों को युवाओं के समक्ष प्रतिमान (आईकाॅन) के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। समाज के रीयल शो में गांव, देहात में छिपी प्रतिभाएं विपरीत परिस्थितियों में सफल हो रही है। इन्हें युवाओं के समक्ष प्रतिमान के रूप में स्थापित किया जाना चाहिए इसके लिए पुरानी पीढ़ी को आगे आना होगा।
श्री सिंह ने कहा कि कहा कि भारत की मीडिया सबसे अधिक शक्तिशाली है यह बिकती नहीं। देश में 272 चैनल, लगभग पौने दो लाख समाचार पत्र हैं। जो देश के आम आदमी की आवाज को मंच दे रहे है। इस पर मुट्ठी भर लोग वर्चस्व जमाने की कोशिश करते है मगर वो आज नाकामयाब हैं। मीडिया से जुड़े लोगों का न बिकने का कारण उनका मानवीय मूल्य है। यह मानवीय मूल्य मां की गोद से शुरू होता है। इसे किसी कानून से नहीं रोका जा सकता। 
उन्होंने कहा आज देश की शिक्षा पद्धति में जबर्दस्त विरोधाभास है, इसके चलते शिक्षा के मूल्यों का ह्रास हो रहा है। आज पाठ्यक्रम से लेकर सेलेक्शन तक मानवीय मूल्यों की उपेक्षा हो रही है जो की देशहित में नहीं है। उन्होंने युवाओं से भ्रष्टाचार की मुखालफत करने की सलाह दी। उनका मानना हैं कि भारत में सबसे अधिक युवा वर्ग ही है किसी भी बदलाव में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि दुनिया के उन नौ देशों में भारत भी एक है जिसकी जीडीपी बढ़ी है। मगर हमारा विकास का माॅडल ऐसा है जो भारतीय परिवेश के अनकूल नहीं है। देश में हमें पाश्चात्य माॅडल की नहीं, भारतीय परिवेश के मानवीय मूल्यों के माॅडल को अपनाना होगा।
उन्होंने कहा कि बाजार के दबाव में हमारे सोचने की ताकत को खत्म कर दिया है। आज हमारे देश के युवा इण्टरनेट, सोशल मीडिया, व्हाट्सएप के माध्यम से अपना मनोरंजन कर रहे है। उनके सोने से लेकर सुबह जागने तक बाजार ने अपने मनोरंजन का जाल बिछा रखा है ताकि युवा न उस मुद्दे पर सोचे और न उसका विरोध करें। इससे हमारे देश के आर्थिक स्थिति वास्तविक धरातल पर कमजोर होती जा रही है। गरीब और धनी के बीच दूरी बढ़ी है। आज एक प्रतिशत आदमी के पास देश की 70 प्रतिशत सम्पत्ति है यह हाल पूरे विश्व में भी है। दुनिया के 62 लोगों के पास जितनी सम्पत्ति है उतना 350 करोड़ लोगों के पास भी नहीं है। यह कौन सा विकास का माॅडल है? हमें अपने देश के आर्थिक माॅडल को बदलना होगा। समानता के आधार पर अपने विकास दर का वितरण करना होगा। 
उन्होंने महिला सशक्तिकरण का जिक्र करते हुए कहा कि आज संस्कार बदल रहे है। महानगरों में लीव इन रिलेशन आम बात हो गयी है। पाश्चात्य संस्कृति को जो हम अपना रहे है वह हमारी तासीर में नहीं है। उनका मानना है कि आज मानवीय मूल्य को पाने के लिए लोभ, माया, मोह, क्रोध से बाहर निकलना होगा। 
इसके पूर्व सामाजिक विज्ञान संकाय के अध्यक्ष डा. अजय प्रताप सिंह ने मुख्य अतिथि का विस्तृत परिचय दिया। मुख्य अतिथि को पुष्पगुच्छ देकर डा. एचसी पुरोहित, डा. दिग्विजय सिंह राठौर ने स्वागत किया। साथ ही डा. सुनील कुमार, डा. अवध बिहारी सिंह, डा. रूश्दा आजमी समेत विभाग के शिक्षकों ने स्मृति चिन्ह भेंट किया। इस अवसर पर प्रो. आरएस सिंह, प्रो. बी.बी. तिवारी, डा. बीडी शर्मा, डा. अविनाश पाथर्डीकर, डा. सुशील कुमार, डा. सुभाष वर्मा, डा. दयानंद उपाध्याय, सुधाकर शुक्ला, डा. अमरनाथ यादव, डा. रंजना यादव, डा. आलोक गुप्ता, पंकज सिंह, आलोक  आदि सहित सभी संकायों के विद्यार्थी उपस्थित रहे। धन्यवाद ज्ञापन डा. मनोज मिश्र ने किया। दीक्षांत पूर्व व्याख्यानमाला के संयोजक डा. अजय द्विवेदी ने संचालन किया।
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आॅप्टिकल फाइबर सेंसर्स पर व्याख्यान
विश्वविद्यालय के संगोष्ठी भवन में बुधवार को आयोजित 19वें दीक्षांत समारोह के पूर्व व्याख्यानमाला में बतौर मुख्य अतिथि प्रो. जगदीश सिंह ने आॅप्टिकल फाइबर सेंसर्स पर व्याख्यान देते हुए विभिन्न सेंसर्स की तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अलग-अलग सेंसर अलग-अलग प्रभावों के अध्ययन में लगे है।
श्री सिंह ने कहा कि कैसे लिब्स टेक्नोलाॅजी का उपयोग मंगल पर भेजे गये क्यूरिआसिटी रोवर पर हो रहा है। आॅप्टिकल सोसाइटी आॅफ अमेरिका के फेलो प्रो. सिंह ने बताया कि कैसे हम फाइबर सेंसर का इस्तेमाल कर बड़ी-बड़ी इमारतों, पुलों, बांधों की सुरक्षा की जानकारी उसके जीवनकाल तक हासिल करते रहेंगे। भवन के मामले में जब उसकी ताकत कम होने लगती है और भार बढ़ने लगता है तो आॅप्टिकल फाइबर सेंसर हमें सचेत कर देता है और इसके बाद इसकी सुरक्षा के बारे में हम सचेत हो जाते है। आर्द्रता को भी सेंस किए जाने वाले सेंसर, रासायनिक सेंसर की चर्चा किया। यह भी बताया कि इन सेंसर्स का उपयोग कैंसर जैसी बीमारियों की जानकारी में किया जाता है। शरीर के किसी भी अंग में जब एसिड फार्मेशन होने लगता है तो उस समय आॅप्टिकल फाइबर सेंसर पता करके यह बताता हैं कि इस स्थान पर एसिड फार्मेशन हो रही है जिससे कि कैंसरस की दिक्कत भविष्य में हो सकती है और इसका निवारण हम इसके प्रथम चरण में ही कर सकते है।
इस अवसर पर डीन प्रो. बीबी तिवारी, संयोजक प्रो. एके द्विवेदी, सुशील कुमार, डा. आलोक गुप्त, प्रवीण सिंह, शैलेश, सुधीर, नितांत, सौभाग्य, तुषार, वर्तिका, पूनम, रितेश वर्नवाल, प्रभात शुक्ल, अजय मौर्य, विशाल यादव, बीपी तिवारी, आनंद सिंह, जय सिंह, डा. अवध बिहारी सिंह, डा. सुनील कुमार, बृजभूषण राय, अंकित सेठ, निधि, राहुल यादव, स्नेहलता, शिवांगी मिश्र, दीपिका, नेहा आदि उपस्थित रहे।

Tuesday, 9 February 2016

घुटने का दर्द, मधुमेह और तनाव का इलाज देशज वनस्पतियों से सीडीआरआई के वैज्ञानिक ने अपने शोध का किया उल्लेख


 केन्द्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान के मुख्य वैज्ञानिक डा. राकेश मौर्या ने कहा कि तनाव, मधुमेह, हड्डी क्षीणता आदि रोगों का निदान प्राकृतिक वनस्पतियों से संभव है। आज समाज का हर तीसरा व्यक्ति इन बीमारियों से पीडि़त है।
वे आज वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में 19वें दीक्षांत समारोह के पूर्व व्याख्यानमाला के तहत संगोष्ठी भवन में शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि देश में आज बहुत से लोग हड्डी, मधुमेह और तनाव से पीडि़त है। बाजार में इसकी दवाएं विभिन्न कम्पनियों की आ रही है और लोग इस्तेमाल भी कर रहे है, इसका शरीर पर दुष्प्रभाव भी पड़ रहा है। जिसके कारण अन्य कई बीमारियां इजाद हो जा रही है। हम इन बीमारियों का निवारण प्राकृतिक पौधे और पदार्थ से मिली दवाओं से कर सकते है, जिसका दुष्प्रभाव शून्य है। इसे सीडीआरआई के वैज्ञानिकों ने अपनी खोज में साबित किया है।
उन्होंने कहा कि हमारी टीम ने आयुर्वेदिक, चरक संहिता, यूनानी सिस्टम, सिद्धा एवं चाइनीज पद्धतियों का अध्ययन करने के बाद अपने देश के 93 वनस्पतिकीय पौधों पर अध्ययन किया। उसमें से नौ महत्वपूर्ण पौधे चयनित किये गये। इन पौधों में उक्त बीमारियों को ठीक करने की क्षमता है। शीशम के पौधे से हड्डी के तमाम रोगों का इलाज तुलसी के पत्ती से तनाव का इलाज और विजयशाल के पौधे से मधुमेह को दूर करने की खोज मेरी टीम ने की है। देश के चार प्रमुख अस्पतालों के सहयोग से उक्त दवाओं की पुष्टि भी की गयी। इन अस्पतालों का भी मानना है इन दवाओं में इन रोगों के इलाज करने की क्षमता है।
डा. मौर्या ने कहा कि आज समाज फिर पुराने आयुर्वेदिक पद्धति की ओर लौट रहा है। उन्होंने कहा कि आज 30 वर्ष के बाद मनुष्य में आस्टोब्लास्ट की समस्या होती है। 30 से 50 की उम्र में हड्डी के क्षरण और बढ़ने की समस्या होती है। इस समस्या का निदान ढाक के पौधे से बनी दवा से किया जा रहा है। इससे मनुष्य शरीर में पैर, घुटने और अन्य दर्द में इस्तेमाल कर लाभ उठा सकता है। दूसरा महत्वपूर्ण रोग तनाव का है शरीर में किसी भी प्रकार का तनाव है वह तुलसी के पत्ते से दूर किया जा सकता है। ऐसे रोगी को प्रतिदिन 10 ग्राम हरी तुलसी के पत्ते का सेवन करना चाहिए। तीसरा सबसे प्रमुख रोग मधुमेह है, इसके लिए विजयशाल के पौधे से बनायी गयी गिलास में पानी रखकर पीने से इसे कम और दूर किया जा सकता है। यह प्रयोग हर आदमी आसानी से कर सकता है। हमारी टीम ने इन्हीं पौधों से इन तीनों प्रमुख रोगों के इलाज के लिए औषधि बनायी है। उनका मानना है कि रोग को ठीक करने के लिए इन पौधों की पहचान करके ही उपयोग करे, उन्होंने रामायण में घायल लक्ष्मण जी की मूच्र्छा को दूर करने के लिए हनुमान जी द्वारा लाये गये पहाड़ का जिक्र किया। कहा कि उस पर्वत में तमाम जड़ी बूटियां थी, मगर काम सिर्फ संजीवनी बूटी का ही था। इसलिए इसके प्रयोग में सावधानी की जरूरत है।
इसके पूर्व मुख्य अतिथि डा. राकेश मौर्या को पुष्पगुच्छ देकर प्रो. डीडी दूबे, डा. एके श्रीवास्तव ने स्वागत किया। परिचय, स्वागत एवं संचालन संयोजक डा. अजय द्विवेदी ने किया। इस अवसर पर डा. एच.सी. पुरोहित, डा. मनोज मिश्र, डा. अवध बिहारी सिंह, डा. सुनील कुमार, डा. आलोक गुप्ता, पंकज सिंह, सुशील कुमार, नृपेन्द्र सिंह, विनय वर्मा, झांसी मिश्रा, पूजा सक्सेना, डा. राजीव कुमार, धर्मेन्द्र कुमार, आलोक दास आदि सहित सभी संकायों के विद्यार्थी उपस्थित रहे। धन्यवाद ज्ञापन डा. बीडी शर्मा ने किया।



Saturday, 6 February 2016

‘‘सफलता के मूल मंत्र’’ विषयक व्याख्यान


जौनपुर। प्रमुख उद्यमी और समाजसेवी दीनानाथ झुनझुनवाला ने कहा कि जीवन में सफल होने के लिए सकारात्मक सोच का होना जरूरी है। बिना इसके कोई भी इंसान सफलता के उस लक्ष्य को पार करना तो दूर उसके करीब भी नहीं पहुंच सकता। उन्होंने कहा कि ये बातें कोरे सिद्धांत नहीं, बल्कि मेरे आजमाए हुए सिद्धांत हैं। उन्होंने ये बातें वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में 19वें दीक्षांत समारोह के पूर्व व्याख्यानमाला के तहत इंडस्ट्री इंस्टीच्यूट इंटरफेस प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित ‘‘सफलता के मूल मंत्र’’ विषय पर आयोजित व्याख्यान पर संगोष्ठी भवन में शनिवार को बतौर मुख्य अतिथि कही। उन्होंने चिंतामुक्त और स्वस्थ रहने का राज बताया। कहा कि हमेशा अपने आप को युवा अनुभव करना चाहिए। उदाहरण स्वरूप उन्होंने कहा, अगर कोई मुझसे पूछता है कि मैं कितने वर्ष का हूं तो मेरा उत्तर होता है कि मैं 83 साल का नौजवान हूं। इससे मेरे मन में एक अलग तरह का आत्मविश्वास झलकता है। उनका मानना है कि उपलब्धि क्रिया प्रधान होनी चाहिए, कृपा प्रधान नहीं।
उन्होंने कहा कि दिनचर्या का पालन ही आलस्य का दुश्मन होता है। आलस्य खत्म करने के लिए अपनी दिनचर्या तय करनी जरूरी होगी। उन्होंने कहा कि यह तभी संभव होगा, जब आप कर्म प्रधान बनोगे। उन्होंने धर्मपिता, धर्ममाता व धर्मपत्नी की परिभाषा को तार्किक रूप से समझाया। उन्होंने कहा कि निराशा उसी व्यक्ति के पास आती है, जो लक्ष्य प्राप्ति के लिए प्रयास नहीं करना चाहता। समस्या समाधान की जननी है। समस्या जहां से शुरू होती है, समाधान भी वहीं से चलना शुरू होता है। आज मानव का सारा जीवन श्रम पर आधारित है। उसे श्रम का ही अनुसरण करना चाहिए। आज हिन्दू प्रथा में जितने भी आश्रम बने हैं। सभी में श्रम जुड़ा हुआ है। इससे यह पता चलता है कि हर सफलता की नींव में श्रम का विशेष महत्व है। भाग्य को परिभाषित करते हुए उन्होंने कहा कि यह भी कर्मफल है। इसलिए हर किसी को पुरूषार्थी बनना चाहिए। उनका मानना है कि पुरूषार्थी वही है जो समय, शक्ति और सम्पदा का पूरा उपयोग करता है।
उन्होंने कहा कि कोई भी काम करने से पहले हमें दृढ़ निश्चयी होना चाहिए। अनिश्चितता और भय की स्थिति हमें असफलता का मार्ग दिखाती है। इस बात को उन्होंने सड़क पार करते समय कार से दबकर मरते हुए खरगोश का उदाहरण देकर समझाया। उनका मानना है कि किसी भी काम को करने से पहले मनुष्य को संशय की स्थिति में नहीं रहना चाहिए। इस पर उन्होंने गांधी, रैदास, गीता, रामायण और विवेकानन्द के विचारों को विस्तृत रूप से समझाया। उन्होंने कहा कि किसी भी सफल व्यवसाय के लिए अनुशासन महत्वपूर्ण होता है। कभी-कभी इसे न अपनाने पर समस्याएं गम्भीर रूप ले लेती हैं। उन्होंने कहा कि क्षमता से कम काम करने वाला भी कामचोर होता है। शक्ति के बोध की व्याख्या उन्होंने रामायण के किष्कंधा पाठ में जामवंत के संवाद को सुनाकर की। उन्होंने कहा कि अगर आपको ऊंचाईयों को छुना है तो अपने जीवन की कमजोरियों को छिपाने के बजाय उसे दूर करने की कोशिश करनी चाहिए।
प्रबंधन के छात्रों में रोजगार के अवसर के संबंध में उन्होंने कहा किताबी ज्ञान के साथ-साथ उन्हें अनुभव से भी जोड़ना जरूरी है। ज्ञान और कर्म के संयोग से ही आदमी सफल उद्यमी बन सकता है। यह बात हर क्षेत्र में शत-प्रतिशत लागू होती है। उन्होंने कहा कि प्रबन्धन एक ऐसी विद्या है जो 24 घण्टे आपको नियोजित ढंग से रहने की प्रेरणा देती है। यह सर्वव्यापी है, सर्वकालिक है, इसका उपयोग हर सफल व्यक्ति को करना चाहिए। इस संबंध में उन्होंने कुमार मंगलम, बिड़ला और रतन टाटा के संदर्भ सुनाएं। उन्होंने कहा कि जीवन में समय प्रबंधन जरूरी है। जो व्यक्ति ज्यादा व्यस्त रहता है, उसी के पास काम करने का समय भी होता है।
इसके पूर्व मुख्य अतिथि दीनानाथ झुनझुनवाला को पुष्पगुच्छ देकर डा. एच.सी. पुरोहित व डा. मुराद अली ने सम्मानित किया। साथ ही डा. विक्रम देव शर्मा ने स्मृति चिन्ह भेंट किया। इसके बाद मुख्य अतिथि का परिचय स्वागत व्याख्यान माला के संयोजक डा. अजय द्विवेदी ने किया। व्याख्यान माला का संचालन डा. एच.सी. पुरोहित ने किया। इस अवसर पर डा. अविनाश पार्थिडकर, आशुतोष सिंह, आलोक गुप्ता, डा. मनोज मिश्र, डा. दिग्विजय सिंह राठौर, डा. अवध बिहारी सिंह, डा. सुनील कुमार, डा. रूश्दा आजमी, डा. राजीव कुमार, धर्मेन्द्र कुमार, आलोक दास आदि सहित सभी संकायों के विद्यार्थी उपस्थित थे। धन्यवाद ज्ञापन डा. मुराद अली ने किया। 

Thursday, 4 February 2016

आॅपरेशन मैनेजमेंट एवं मेन्यूफैक्चरिंग विषयक व्याख्यान

विश्वविद्यालय में 13 फरवरी को आयोजित होने वाले 19वें दीक्षांत समारोह के पूर्व विश्वविद्यालय के समस्त संकायों में ख्यातिलब्ध विद्वानों के व्याख्यान आयोजित किये जायेंगे। इसी क्रम में गुरूवार को इंजीनियरिंग एवं तकनीकी संकाय द्वारा संगोष्ठी भवन में ‘‘आॅपरेशन मैनेजमेंट एवं मेन्यूफैक्चरिंग’’ विषयक व्याख्यान का आयोजन किया गया। व्याख्यान माला के मुख्य वक्ता आई.आई.टी. बीएचयू के प्रो. एस.पी. तिवारी ने शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए कार्य प्रणाली प्रबन्धन के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

 उन्होंने प्रबन्ध के महत्व तथा विभिन्न क्षेत्रों में इसकी उपयोगिता विक्रय कला, वित्त, विपणन, मानव संसाधन प्रबन्धन, प्रबन्ध सूचना तंत्र आदि पर ध्यान आकर्षित करते हुए वर्तमान परिदृश्य में इनकी भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने कार्य प्रणाली प्रबंधन के माध्यम से कास्टिंग, रोलिंग, फोल्डिंग, ड्राॅइंग, मशीनिंग इत्यादि को पावर प्वाइंट तकनीकी से उसके विविध रूप को विद्यार्थियों के समक्ष प्रस्तुत किया।


स्वागत एवं संचालन संयोजक डा. अजय द्विवेदी और धन्यवाद ज्ञापन डा. राजकुमार ने किया। इस अवसर पर प्रो. डी.डी. दूबे, प्रो. बीबी तिवारी, डा. एच.सी. पुरोहित, अविनाश पाथर्डीकर, डा. मनोज मिश्र, डा. अवध बिहारी सिंह, डा. दिग्विजय सिंह राठौर, डा. सुशील कुमार, डा. आलोक गुप्ता, डा. राजेश शर्मा, डा. एस.पी. तिवारी, पंकज कुमार सिंह सहित विद्यार्थी उपस्थित रहे।