Sunday, 26 September 2021

पीयू के अब तक घोषित परीक्षा रिजल्ट में औसतन 95 फीसदी छात्र उत्तीर्ण : कुलपति

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय  ने  परीक्षा में उत्तीर्ण होने वाले छात्रों को बधाई दी तथा अनुत्तीर्ण छात्रों को निराश न होने के लिए कहा और  सूचित किया कि विश्वविद्यालय शीघ्र ही उन सभी विद्यार्थियों के लिए एक मौका देने जा रहा है जो विद्यार्थी  श्रेणीसुधार करना चाहते हैं अथवा बैक पेपर देना चाहते हैं. उन्हें यह मौका सभी प्रश्न पत्रों के लिए दिया जाएगा। विश्वविद्यालय का एक ही ध्येय है कि सभी विद्यार्थी समय पर अपनी परीक्षाओं का फार्म भरते हुए अच्छे अंको से उत्तीर्ण हों और वह किसी भी प्रकार के भ्रम की स्थिति में ना रहें। उनका एक ही उद्देश्य होना चाहिए कि वह समय के अनुसार परीक्षा फार्म भरते हुए परीक्षाएं दें और जीवन में आगे बढ़ने का एक लक्ष्य निर्धारित करें. लगातार यह देखने में आ रहा है कि अनेकों बार परीक्षा की वेबसाइट खोलने के बावजूद विद्यार्थी  समय पर परीक्षा फॉर्म नहीं भरते हैं और लगातार महाविद्यालयों की शह पर विश्वविद्यालय के चक्कर लगाते रहते हैं जबकि उनकी समस्याओं का निदान महाविद्यालयों का उत्तरदायित्व है।

कुछ विद्यार्थियों के परीक्षाफार्म गलत भरने से परीक्षाफल में त्रुटि के निस्तारण के लिए हुई अधीनस्थों संग बैठक छात्र हितों को ध्यान में रखकर किया गया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी परीक्षा परिणामों को लेकर किसी के बहकावे में ना आवें। कुछ विद्यार्थी अपने रोल नंबर और प्रश्नपत्र चयन का भी ध्यान नहीं देते कि फार्म में क्या भरा गया है? इसकी वजह से परीक्षाफल का सॉफ्टवेयर मिस मैच करता है और परीक्षाफल आईएनसी (अपूर्ण) दर्शाता  है। उन्होंने छात्रों को भविष्य में ऐसी गलती न करने की हिदायत दी है। विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के परीक्षाफल को लेकर गंभीर हैं।
उन्होंने कहा कि छात्रों से वार्ता के दौरान छात्रों के मांगपत्र पर कार्रवाई कर रिजल्ट का पुनर्परीक्षण किया जा रहा है। उनकी जायज मांगे मान ली गई है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में इस वर्ष नई कोडिंग डिकोडिंग व्यवस्था लागू करने के कारण परीक्षाफल पूर्णतया पारदर्शी हुआ है । परिसर के कुछ सहयोगी भ्रम की स्थिति पैदा करने के लिए समाचारपत्रों में गलत सूचनाएं देकर गुमराह कर रहे हैं।

Saturday, 25 September 2021

ओज़ोन परत क्षरण पर्यावरण के लिए चिंताजनक: प्रो. बलराम पाणि

विश्व पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय परिसर स्थित रज्जू भइया संस्थान के आर्यभट्ट सभागार में ओज़ोन परत क्षरण एवं इसके प्रभाव पर व्याख्यान हुआ। 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो बलराम पाणि ने कहा कि ओज़ोन परत वातावरण के समताप मंडल में एक महत्वपूर्ण परत है। यह ओज़ोन परत पर्यावरण को हानिकारक पराबैंगनी किरणों से सुरक्षित रखता है। विभिन्न हानिकारक रसायन इस परत को क्षति पहुँचा रहे है। मुख्य रूप से क्लोरोफ्लोरो कार्बन, क्लोरीन इस परत का क्षरण कर रहे है। इस रसायनों का मुख्य स्रोत एसी, फ्रिज और अन्य उपकरणों में प्रयोग होने वाले शीतलक की मुख्य भूमिका है। प्रो. पाणि ने कहा कि बढ़ता तापमान ग्लोबल वार्मिंग बहुत बड़ी चुनौती है, इसके कारण से पर्यावरण शरणार्थी की समस्या पैदा हो रही है।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव महेन्द्र कुमार ने कहा ओज़ोन परत को क्षरण से बचना बहुत आवश्यक है। प्रो बी बी तिवारी ने कहा कि ओज़ोन परत क्षरण का मानव स्वास्थ्य पर बुरा पड़ रहा है। इस अवसर पर अतिथियों का स्वागत कार्यक्रम संयोजक प्रो. देवराज सिंह ने किया। कार्यक्रम का संचालन आयोजन सचिव डॉ नितेश जायसवाल ने किया | धन्यवाद ज्ञापन डॉ नीरज अवस्थी ने किया । इस अवसर पर डॉ प्रमोद कुमार यादव, डॉ मिथिलेश यादव, डॉ आशीष वर्मा, डॉ गिरिधर मिश्र, डॉ पुनीत धवन, दिनेश कुमार वर्मा, डॉ धीरेन्द्र चौधरी, सौरभ कुमार, दीपक मौर्य  व बड़ी संख्या में छात्र छात्राएं उपस्थिति रहे।

राजनीति के केंद्र बिंदु में मानव हो : प्रो. त्रिलोचन शर्मा


राजनीति में पंडित जी के विचार आज भी प्रासंगिक : कुलपति

पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के जन्मदिवस पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोध पीठ, वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय ने "पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के राजनीतिक चिंतन: एक विमर्श" विषय पर एक ई- संगोष्ठी का आयोजन किया। 
कार्यक्रम में एकात्म मानव दर्शन शोध संस्थान एवं विकास प्रतिष्ठान, नई दिल्ली के सह समन्वयक प्रोफेसर (डॉ) त्रिलोचन शर्मा ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी का एकात्म मानव दर्शन "मिनिमम गवर्मेंट- मैक्सिमम गवर्नेंस" की भावना के अनुरूप है। व्यवस्था वही अच्छी होती है जो कम से कम शासन करे। राज्य सत्ता को धर्म सत्ता के अनुकूल होना चाहिए। पंडित जी के विचार में धर्म पंथ नहीं है, धर्म का अर्थ सदाचार से है। पंडित जी भारतीय राजनीति पर प्रकाश डालते हुए कहते हैं कि भारत की राजनीति पश्चिम की राजनीति से अलग है क्योंकि भारत की संस्कृति पश्चिम की संस्कृति से मेल नहीं खाती है राजनीति के केंद्र बिंदु में सदैव मनुष्य का निर्माण होना चाहिए और राजनीतिक व्यक्ति को मर्यादा अनुकूल आचरण करना चाहिए। राजनीति में कुशल लोगों के प्रवेश को रोकना चाहिए और राजनीतिक व्यक्ति को प्रजानुरागी की जगह प्रजानुभागी सोच रखना चाहिए, जिससे कि जनता का अधिक से अधिक राजनीतिकरण करके एक विवेक सम्मत व्यवस्था विकसित किया जा सके, जो भारतीय संस्कृति के अनुरूप चल सके।
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफ़ेसर निर्मला एस. मौर्य ने कहा कि वर्तमान राजनीति के दौर में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के राजनीतिक विचार अत्यंत प्रासंगिक हैं। भारतीय राजनीति में जो भी राजनीतिक दल हैं ,उन्हें पंडित जी के विचारों को आत्मसात करते हुए राष्ट्र की एकता एवं अखंडता के प्रश्न पर एकजुट होकर काम करना चाहिए वैचारिक भिन्नता के साथ-साथ राष्ट्र की मजबूती के लिए सबको एकजुट होकर काम करना चाहिए। कुलपति ने अपने उद्बोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के धारा 370 हटाए जाने के साहसिक निर्णय की सराहना करते हुए यह कहा कि इस निर्णय से संपूर्ण अखंड भारत एक झंडे के नीचे एकजुट हुआ है और राष्ट्र मजबूत हुआ है। 
कुलपति ने दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ के द्वारा समय-समय पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के विचारों के प्रचार प्रसार हेतु आयोजित किए जाने वाले कान्फ्रेंस, सेमिनार ,सिंपोजियम आदि की सराहना करते हुए इसे आगे इसी प्रकार जारी रखने हेतु प्रेरित किया । 
 इसके पूर्व दीनदयाल उपाध्याय शोध पीठ के अध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक प्रोफेसर मानस पांडेय ने शोध पीठ द्वारा अब तक किए गए कार्यों पर प्रकाश डालते हुए संगोष्ठी में जुड़े विद्वत समाज का स्वागत एवं विषय प्रवर्तन किया।अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रोफेसर अजय द्विवेदी ने लोगों का आभार व्यक्त किया तथा कार्यक्रम का संचालन पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोध पीठ के सदस्य डॉ अनुराग मिश्र ने किया । तकनीकी सहयोग शोध छात्र नितिन चौहान ने दिया। संगोष्ठी प्रारंभ होने के पूर्व संकाय भवन में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण का कार्यक्रम संपन्न हुआ और पंडित दीनदयाल जी के विचारों को आत्मसात् करने का संकल्प लिया।
संगोष्ठी में सहभाग करने वालों में  प्रो. अशोक श्रीवास्तव, प्रो. अविनाश पार्थीडकर, प्रो. अजय प्रताप सिंह, प्रो. मनोज मिश्र, प्रो. बीडी शर्मा, प्रो. देवराज सिंह, डॉ विवेक पांडेय, डॉ वनिता सिंह सहित वरिष्ठ आचार्यगण उपस्थित रहे।

Thursday, 23 September 2021

दिनकर ने महाभारत को नए दृष्टिकोण से किया चित्रित - कुलपति प्रो निर्मला मौर्य

राष्ट्र कवि दिनकर की जयंती पर कार्यक्रम का हुआ आयोजन 

जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति सभागार में अनुवाद और उत्कृष्टता केंद्र जनसंचार विभाग, भारतीय भाषा संस्कृति एवं कला प्रकोष्ठ एवं सांस्कृतिक परिषद द्वारा राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती पर नमन राष्ट्रकवि विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर  निर्मला एस मौर्य ने कहा कि राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर स्वतंत्रता के पूर्व क्रांतिकारी कवि थे और स्वतंत्रता के बाद राष्ट्रकवि बने। उन्होंने कहा कि अपनी प्रतिष्ठित रचना रश्मिरथी में  दिनकर जी ने महाभारत की पूरी घटना को युगबोध के साथ जोड़ा और एक नए  दृष्टिकोण से चित्रित किया.
उन्होंने कहा कि कविता कवि की मानस पुत्री होती है। दिनकर जी ने अपनी कविता के माध्यम से बड़े सरल शब्दों में विविध संदेश दिए हैं जो कि आज भी प्रासंगिक हैं। जयंती के अवसर पर रामधारी सिंह दिनकर को नमन करते हुए उन्होंने उनकी कविताओं का भी पाठ किया। रश्मिरथी की कविता जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है,हरि ने भीषण हुँकार किया, अपना स्वरूप विस्तार किया............. को बड़े मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया।
कुलसचिव महेंद्र कुमार ने कहा कि जन-जन में राष्ट्र भावना को जागृत करने में दिनकर जी के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता।
कार्यक्रम का संचालन संयोजक एवं  जनसंचार विभाग के अध्यक्ष  डॉ मनोज मिश्र एवं धन्यवाद ज्ञापन आयोजन सचिव डॉ रसिकेश ने किया। इस अवसर पर प्रो मानस पांडे, प्रो अविनाश पाथर्डीकर, प्रो राजेश शर्मा, प्रो वंदना राय, प्रो देवराज, प्रो राम नारायण, डॉ राजकुमार, डॉ प्रमोद यादव, सहायक कुलसचिव बबीता, डॉ गिरधर मिश्र डॉ एसपी तिवारी, डॉ श्याम कन्हैया सिंह, डॉ के एस तोमर, डॉ दिग्विजय सिंह राठौर डॉ अवध बिहारी सिंह, डॉ चंदन सिंह, डॉ पुनीत धवन,लक्ष्मी प्रसाद मौर्य, डॉ पीके कौशिक,रजनीश सिंह,अशोक सिंह,धीरज श्रीवास्तव समेत विश्वविद्यालय के शिक्षक कर्मचारी उपस्थित रहे।