Sunday, 20 February 2022
धरती को बचाना सबसे बड़ी चुनौती:प्रो. निर्मला एस. मौर्य
भोजन-ग्रह-स्वास्थ्य विषय पर वेबिनार का हुआ आयोजन
वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय,जौनपुर राष्ट्रीय सेवा योजना एवं विगन आउटरीच इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में'भोजन-ग्रह-स्वास्थ्य'विषय पर वेबिनार का आयोजन हुआ। बतौर मुख्य अतिथि कुलपति प्रोफेसर निर्मला एस. मौर्य ने कहा कि वर्तमान समय में धरती को बचाना सबसे बड़ी चुनौती है।मनुष्य ने अपनी लालच में प्रकृति का संतुलन बिगाड़ दिया है।आज भोजन का हमारे स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। पौधरोपण करके हम धरती को बचा सकते हैं। हमारे विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा एक छात्र एक पेड़ योजना पर्यावरण को बचाने का अच्छा प्रयास है।कुलपति ने हिन्दी साहित्य में प्रकृतिवाद, प्रगतिवाद, वर्ग संघर्ष का विस्तार से वर्णन किया।
वेबिनार के मुख्यवक्ता विगन आउटरीच इंडिया के समन्वयक अभिषेक दुबे ने विस्तार से मांसाहारी भोजन, औद्योगिक प्रदूषण तथा विभिन्न जानवरों का भोजन करने से हमारे ग्रह, स्वास्थ्य और पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ता है बताया और पौध आधारित भोजन के महत्व को बताया।पौध आधारित भोजन से जानवरों पर क्रूरता बचेगी।हम शाकाहारी भोजन को अपनाकर प्रकृति को भी बचा सकते हैं और विभिन्न बीमारियों से बच सकते हैं।विभिन्न महान हस्तियों को बताया जो वेगन हैं।विशिष्ट वक्ता डॉ साक्षी उपाध्याय ने पूर्ण रूप से पौध आधारित भोजन की महत्ता के बारे में बताया।
संचालन कार्यक्रम समन्वयक डॉ राकेश कुमार यादव ने किया।वेबिनार में शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ विजय कुमार सिंह, डॉ अखिलेश चंद्र, संयोजक- रोवर्स रेंजर्स डॉ जगदेव,डॉ दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ गोपाल सिंह यादव, डॉ ओम प्रकाश चौधरी,डॉ लाल साहब यादव,डॉ अरविंद कुमार यादव, डॉ संतोष कुमार पांडेय, डॉ अखिलेश तिवारी, डॉ यदुवंश कुमार, डॉ सुनीता गुप्ता, डॉ रामचंद्र यादव, डॉ योगेंद्र प्रताप सिंह, डॉ संजय कुमार यादव, डॉ राकेश सिंह, डॉ तेज प्रताप यादव, डॉ सूबेदार यादव आदि उपस्थित थे।
Saturday, 19 February 2022
शिक्षक विद्यार्थियों से निरंतर संवाद बनाए रखें: डॉ. पंकज एल. जानी
विभागाध्यक्ष शैक्षणिक कार्यों का प्रपत्र तैयार कर कार्रवाई कराएं: कुलपति
जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति सभागार में शनिवार को माननीय कुलाधिपति के विशेष कार्य अधिकारी डॉ. पंकज एल.जानी ने शनिवार को समीक्षा बैठक ली।
इस अवसर पर डॉ. एल. जानी ने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों के साथ संवाद निरंतर बनाए रहें। विद्यार्थी ठोकर खाता है, गिरता है तभी तैयार होता है। ऐसे में उसके भविष्य निर्माण की पूरी जिम्मेदारी शिक्षक पर ही होती है। शिक्षक हमेशा असाधारण होता है इस मनोदशा के साथ उसे काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि 1983 में मैं शिक्षक था तो अपने बनाए नोट्स विद्यार्थियों में बांट देता था। इसका मतलब शिक्षक को अपनी स्टडी मैटेरियल भी तैयार रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी विश्वविद्यालय मिलकर पाठ्यक्रम बनाएं, साथ ही टीम भावना के साथ मल्टी डिस्पलीनरी कार्य करें। यहीं हमारी राष्ट्रीय शिक्षा नीति की मंशा भी है।
विश्वविद्यालय के नैक मूल्यांकन के संबंध में उन्होंने कहा कि नैक के हर बिंदु पर विश्वविद्यालय अपनी तैयारी करता है। इसके लिए थोड़ा और भी अतिरिक्त प्रयास विश्वविद्यालय को करना चाहिए। विश्वविद्यालय की समस्त गतिविधियां और जानकारियों के साथ सभी प्रपत्र विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर होने चाहिए ताकि किसी भी बाहरी व्यक्ति को कोई भी जानकारी ऑनलाइन आसानी से उपलब्ध हो सके।
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर निर्मला एस. मौर्य ने कुलाधिपति के विशेष कार्य अधिकारी का स्वागत करते हुए कहा कि राजभवन के दिशा निर्देशों के अनुरूप विश्वविद्यालय पूरी तैयारी कर रहा है। विभागाध्यक्ष शैक्षणिक कार्यों का प्रपत्र तैयार कर उसकी कार्रवाई पूरी करें ताकि विद्यार्थियों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े और विश्वविद्यालय को समस्त सुविधाएं मिल सकें। समारोह का संचालन आइक्यूएसी सेल के समन्वयक प्रोफ़ेसर मानस पांडेय और धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव महेंद्र कुमार ने किया। इस अवसर पर वित्त अधिकारी संजय राय प्रो.बीबी तिवारी, प्रो.वंदना राय, प्रो. एके श्रीवास्तव, प्रो.देवराज सिंह, प्रो. अजय प्रताप सिंह, प्रो. राजेश शर्मा, डॉ. संदीप सिंह, डॉ. मनोज मिश्र, डॉ. रसिकेस, डॉ. प्रमोद कुमार, डॉक्टर सौरभ पाल डॉ. संजीव गंगवार, डॉ रजनीश भास्कर, डॉ. मुराद अली, डॉ. आशुतोष सिंह, डॉ. जाह्नवी श्रीवास्तव, सहायक कुलसचिव, डॉ. पी.के.कौशिक समेत समस्त अधीक्षक उपस्थित थे।
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