Tuesday, 22 February 2022

हिंदी को अंग्रेजीनिष्ट होने से बचाना होगा : प्रो. आशीष सक्सेना

हिंदी के प्रति अनुभूति पैदा करने की जरूरत: प्रो. वशिष्ठ द्विवेदी 

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर  सात दिवसीय कार्यशाला का दूसरा दिन

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर एवं गुरु नानक कॉलेज स्वायत्तशासी चेन्नई के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को  सात दिवसीय ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन  किया गया। कार्यशाला के दूसरे दिन प्रथम तकनीकी सत्र में सामाजिक ‌विज्ञान में शिक्षण, शोध एवं रोजगार सृजन में हिंदी की उपादेयता विषय पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र के प्रो.‌ आशीष सक्सेना ने
हिंदी भाषा का महत्व समझाते हुए कहा कि हिंदी में शोध राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय दोनों ही स्तर पर होना चाहिए | उन्होंने बताया कि जिस प्रकार से हमारी हिन्दी भाषा अंग्रेजीनिष्ठ होती जा रही है उसे बदलना होगा और हमारी हिन्दी को संस्कृतनिष्ठ बनाना होगा।हिंदी के विकास के लिए हमें कई कदम उठाने पड़ेंगे जैसे विश्वविद्यालयों की पत्रिकाओं का लेखन हिंदी में हो और संचार माध्यम के रूप में भी हिंदी को बढ़ावा दिया जाए।
शिक्षण शोध एवं रोजगार सृजन में‌ क्षेत्रीय भाषाओं/ मातृभाषाओं की उपादेयता विषय पर काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रो. वशिष्ठ द्विवेदी ने कहा कि हिंदी के प्रति लोगों में ‌अनुभूति पैदा करनी होगी। इसके लिए उन्हें हिंदी के साहित्यकारों को पढ़ने चाहिए। कहानी, पटकथा, नाटक के क्षेत्र रोजगार के अच्छे अवसर हैं।
वशिष्ठ जी ने भाषा की सार्थक ध्वनि  की परिभाषा को समझाते हुए कहा कि मातृभाषा हमारे सोच को विस्तार देती है,सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है। उन्होंने रामदरश मिश्र का एक शेर सुनाया कि -’ जमीं गांव की साथ लेकर चला था,उसमें उगा शहर धीरे - धीरे..’| 
प्रथम दिवस के विशिष्ट अतिथि प्रो.अखिलेश कुमार पांडेय, स्नातकोत्तर महाविद्यालय प्रो राजेंद्र सिंह रज्जू भैया विश्वविद्यालय पट्टी (प्रयागराज), ने कहा कि व्यक्ति के व्यक्तित्व का निर्माण उसकी मातृभाषा से होता है| हमारे देश में कई भाषाएं बोली जाती हैं और यही हमारी मातृभाषा है हमें एक दूसरे से जोड़ते हैं|
प्रो. पांडेय ने कहा कि मातृभाषा से सुंदर संवाद किसी अन्य भाषाओं में नहीं हो सकता। इसमें व्यक्ति का वास्तविक भाव जुड़ा होता है।
कार्यशाला डॉ. मनोज कुमार पांडेय और डॉ. डाली के संयोजकत्व में आयोजित  है। संचालन डॉ मनोज पांडेय और धन्यवाद ज्ञापन डॉ डाली ने किया।
इस अवसर पर  प्रो. वंदना राय, प्रो.देवराज सिंह, डॉ. मनोज मिश्र, डॉ. रसिकेश, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ धीरेन्द्र चौधरी, गुरु नानक महाविद्यालय की डॉ. अनिता पाटील,  श्रीमती गुड़िया चौधरी, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा से रेखा वर्मा, डॉ. विजय पाटिल,  डॉ. मनोज कुमार आदि  ने  प्रतिभाग किया।

Monday, 21 February 2022

संस्कृति और भाषा का अद्भुत संगम है मातृभाषा : मोनिका एस. गर्ग

लोक संस्कृतियों का स्मरण करातीं हैं ऐसी कार्यशाला: कुलपति

डिजिटल दौर में मातृभाषा पर संकट - पद्मश्री अजिता श्रीवास्तव   
 अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर  सात दिवसीय कार्यशाला का आयोजन
जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर एवं गुरु नानक कॉलेज स्वायत्तशासी चेन्नई के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को  सात दिवसीय ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन  किया गया। उद्घाटन सत्र में अंतर्राष्ट्रीय  मातृभाषा दिवस के अवसर पर शिक्षण, शोध एवं रोजगार में मातृभाषा की उपादेयता विषय पर चर्चा हुई।
उद्घाटन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि  उच्च शिक्षा विभाग उत्तर प्रदेश की अपर मुख्य सचिव मोनिका एस.गर्ग ने कहा कि मातृभाषा में सभी भाषाओं और संस्कृतियों का अद्भुत संगम है। व्यक्ति जीवन के शुरुआती दौर में मौलिक मूल्य और विचारों को अपने माता-पिता से सीखता है वह अपने सभी संस्कार मातृभाषा में ही आत्मसात करता है। शिक्षक की जिम्मेदारी है कि वह बच्चों में नैतिक मूल्यों का विकास करें । इसी के साथ भाषाओं के विकास के कार्य को तेजी से बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि 1635 मातृभाषा है इन्हें कैसे विकसित किया जाए, इस पर शोध कैसे हो और रोजगार के अवसर कैसे मिले? इस पर आज गहन चर्चा की जरूरत है । उन्होंने कहा कि हमारे बहुत से ग्रंथ जो अमूल्य धरोहर हैं उसे संकलित कर शोध करना होगा ताकि देश को उसका लाभ मिल सके। इसी के लिए पूर्वांचल विश्वविद्यालय में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया गया है, ताकि पाठ्यक्रम की एकरूपता हो । 
अध्यक्षता करते हुए  कुलपति प्रो. निर्मला एस. मौर्य ने कहा कि संस्कृत भाषा देव भाषा है, रेशमी भाषा जनभाषा नहीं है । सात दिवसीय कार्यशाला में 10 विषय रखे गए हैं । ऐसी कार्यशाला लोक संस्कृतियों का स्मरण कराती हैं। रिपोर्टिंग, विज्ञापन, द्विभाषी रिपोर्टिंग पर डिप्लोमा कोर्स कराने की भी योजना है।बैंकिंग का साहित्य ऑनलाइन है इसके  अनुवाद में भी रोजगार के अच्छे अवसर है।

विशिष्ट अतिथि प्रख्यात लोक गायिका पद्मश्री अजिता श्रीवास्तव ने कहा कि भारत बहुभाषी देश है डिजिटल दौर में मातृभाषा पर संकट है। हम अपनी मातृभाषा में गर्व से बात करें। मातृभाषा के गीत सुपर हिट हो रहे हैं और व्यवसाय भी कर रहे हैं इसको बढ़ावा न देने से हमारी संस्कृति का लोप हो रहा है।

गुरु नानक कॉलेज चेन्नई की सलाहकार डॉ. मरलीन मौरिस मलयालम भाषा की है इसके बाद भी वह हिंदी समेत देश के कई भाषाओं को जानती हैं उन्होंने कहा कि मातृभाषा में जो भाव होता है वह अन्य भाषाओं में नहीं मिल सकता। मातृभाषा से जुड़े रहना  हर इंसान के लिए जरूरी है बहुभाषी होने से ही रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।वित्त अधिकारी संजय राय ने कहा कि दंतकथा कथाओं को कैसे मातृभाषा से जोड़ा जाए इसके लिए  प्रयास करना होगा. 
कार्यशाला डॉ. मनोज कुमार पांडेय और डॉ. डाली के संयोजकत्व में आयोजित  है। संचालन आइक्यूएसी सेल के समन्वयक प्रो.मानस पांडेय और धन्यवाद ज्ञापन जनसंचार विभाग के अध्यक्ष डॉ. मनोज मिश्र ने किया।
इस अवसर पर प्रो. बीबी तिवारी, प्रो. वंदना राय, प्रो.देवराज सिंह, प्रो.अजय द्विवेदी,प्रो. अशोक श्रीवास्तव, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर, गुरु नानक महाविद्यालय की डॉ. अनिता पाटील,  श्रीमती गुड़िया चौधरी, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा से रेखा वर्मा, डॉ. विजय पाटिल, द्वारका दास वैश्णव कॉलेज से डॉ. मनोज कुमार आदि  ने  भाग लिया एवं कार्यक्रम की सफलता के लिए शुभकामनाएं दी|

सात दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला- उद्घाटन सत्र



विद्यार्थियों से बनती है विश्वविद्यालय की छवि - कुलपति

कुलपति ने नेट की सफलता पर विद्यार्थियों  को दी बधाई 

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग के विद्यार्थी उज्जवल कुमार को यूजीसी नेट क्वालीफाई करने पर सोमवार को कुलपति प्रो निर्मला एस. मौर्य ने  बधाई दी । कुलपति प्रो. निर्मला एस. मौर्य ने कहा कि विश्वविद्यालय की छवि विद्यार्थियों की उपलब्धियों  से  बनती है। विश्वविद्यालय के सभी विद्यार्थी निरंतर अपने उद्देश्यों की पूर्ति करते रहे ऐसी मेरी कामना है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थी आज देश- विदेश के विभिन्न संस्थानों में अपनी प्रतिभा के बल पर स्थापित है. यह विश्वविद्यालय के लिए गौरव की बात है. 

विदित है कि जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग के विद्यार्थी शाकम्बरी  नंदन सोंथालिया एवं  उज्ज्वल कुमार  ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग(यूजीसी) की राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) के लिए सफलता पाई है।इस अवसर पर  विभाग के अध्यक्ष डॉ मनोज मिश्र, शिक्षक डॉ अवध बिहारी सिंह, डॉ सुनील कुमार, डॉ दिग्विजय सिंह राठौर, एवं पंकज सिंह उपस्थित रहे।