Saturday, 3 October 2026

जल सुरक्षा के लिए वैज्ञानिक सोच और सतत जल प्रबंधन जरूरी : प्रो. प्रफुल्ल सिंह


पूर्वांचल विश्वविद्यालय में ‘पृथ्वी, पर्यावरण एवं भविष्य’ विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के भू एवं ग्रहीय विज्ञान विभाग की ओर से ‘पृथ्वी, पर्यावरण एवं भविष्य’ विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने जल सुरक्षा, भूजल संरक्षण, मृदा एवं पर्यावरण तथा पृथ्वी के भू-वैज्ञानिक विकास के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।

कार्यक्रम के मुख्य विशेषज्ञ वक्ता दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय, गया के भूविज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. प्रफुल्ल कुमार सिंह ने जल संसाधनों की वैश्विक एवं भारतीय स्थिति पर चर्चा करते हुए कहा कि जल जीवन, खाद्य सुरक्षा और पारिस्थितिक संतुलन का आधार है। उन्होंने बताया कि विश्व की लगभग 18 प्रतिशत आबादी भारत में निवास करती है, जबकि वैश्विक जल संसाधनों में देश की हिस्सेदारी लगभग चार प्रतिशत है। बढ़ती आबादी, शहरीकरण, औद्योगीकरण, भूजल का अत्यधिक दोहन और जलवायु परिवर्तन जल संसाधनों पर दबाव बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विश्व में लगभग 2.3 अरब लोग जल संकट से प्रभावित क्षेत्रों में रह रहे हैं और वर्ष 2030 तक वैश्विक जल मांग उपलब्ध आपूर्ति से लगभग 40 प्रतिशत अधिक होने का अनुमान है।
प्रो. सिंह ने जल सुरक्षा के लिए वर्षाजल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और आधुनिक रिमोट सेंसिंग तकनीकों के उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भू-आकृति, भूमि उपयोग, जल निकासी, भूगर्भीय संरचना और वर्षा जैसे कारकों के समेकित अध्ययन से भूजल पुनर्भरण की संभावनाओं वाले क्षेत्रों की पहचान की जा सकती है। इससे जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण के लिए उपयुक्त स्थलों का वैज्ञानिक निर्धारण संभव है। उन्होंने विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों से जल और पर्यावरण संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान तथा नवाचार को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो. बी. पी. सिंह ने मृदा को पृथ्वी के जलवायु एवं पर्यावरणीय इतिहास का महत्वपूर्ण प्राकृतिक अभिलेख बताया। उन्होंने कहा कि मृदा के विभिन्न घटकों तथा ऑक्सीजन एवं कार्बन समस्थानिकों के अध्ययन से अतीत की जलवायु और पर्यावरणीय परिस्थितियों को समझा जा सकता है। उन्होंने भारतीय प्लेट के दक्षिणी गोलार्ध से उत्तरी दिशा में हुए भू-वैज्ञानिक संचलन तथा प्लेट विवर्तनिकी के संदर्भ में पृथ्वी के दीर्घकालिक विकास की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मृदा का निर्माण लंबी प्राकृतिक प्रक्रियाओं के माध्यम से होता है, इसलिए इसका संरक्षण और विवेकपूर्ण उपयोग सतत विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।

कार्यक्रम में कुलपति प्रो. आर.के. सिंह का संदेश अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. प्रमोद यादव ने पढ़कर सुनाया। विषय प्रवर्तन प्रो. प्रदीप कुमार ने किया तथा अतिथियों का स्वागत प्रो. मिथिलेश कुमार ने किया।

इस अवसर पर प्रो. देवराज सिंह, प्रो. प्रमोद कुमार, डॉ. मिथिलेश यादव, डॉ. शशिकांत यादव, डॉ. नितेश जायसवाल, डॉ. विवेक पाण्डेय सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन अंजू यादव ने किया तथा डॉ. नीरज अवस्थी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

Friday, 2 October 2026

सामूहिक प्रयास से पीयू नई ऊंचाइयों पर पंहुचेगा: कुलपति


पीयू का 39वां स्थापना दिवस समारोह हर्षोल्लास से मनाया गया

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर का 39वां स्थापना दिवस समारोह शुक्रवार को विश्वविद्यालय परिसर में गरिमापूर्ण एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महात्मा गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री एवं विश्वविद्यालय के संस्थापक वीर बहादुर सिंह जी की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।
कार्यक्रम में अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. प्रमोद कुमार यादव ने स्वागत करते हुए कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह का ऑनलाइन प्राप्त संदेश प्रस्तुत किया। कुलपति ने  संदेश में कहा कि विश्वविद्यालय की 39 वर्षों की विकास यात्रा सामूहिक परिश्रम, समर्पण एवं सहयोग का परिणाम है। सामूहिक प्रयासों से विश्वविद्यालय को विकास और उपलब्धियों की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा एवं सेवा तथा लाल बहादुर शास्त्री के सादगी, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध, नवाचार, अनुशासन और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को विश्वविद्यालय की प्राथमिकता बताया।
कुलपति ने कहा कि शिक्षक, कर्मचारी और विद्यार्थी अपने-अपने दायित्वों का ईमानदारी एवं समर्पण से निर्वहन करें, तो विश्वविद्यालय की उपलब्धियां और अधिक गौरवपूर्ण होंगी। उन्होंने विद्यार्थियों से अध्ययन के साथ खेल एवं शारीरिक गतिविधियों को जीवन का हिस्सा बनाने तथा ज्ञान, संस्कार, आत्मविश्वास और राष्ट्रसेवा की भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।
कुलसचिव डॉ. विनोद कुमार सिंह ने महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री के जीवन आदर्शों और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को स्मरण किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ आचार्य प्रो. मानस पांडेय ने विश्वविद्यालय की विकास यात्रा पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को अनुशासन, सेवा एवं राष्ट्रहित की भावना के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।
इस अवसर पर प्रशासनिक अधिकारी राज नारायण सिंह एवं उनकी टीम द्वारा रामधुन प्रस्तुत की गई। एनसीसी कैडेट्स ने साइकिल यात्रा निकालकर स्वच्छता, अनुशासन, स्वास्थ्य एवं राष्ट्रसेवा का संदेश दिया।
अंत में मुख्य कुलानुशासक प्रो. अजय प्रताप सिंह ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। समारोह में विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

Thursday, 1 October 2026

व्यावहारिक प्रशिक्षण से बढ़ेगा कौशल : प्रो. उमेश चंद्रा



महर्षि पराशर कृषि विज्ञान संस्थान पहुंचे निदेशक, बोले, शोध को नयी दिशा देने की जरुरत 

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर के महर्षि पराशर कृषि विज्ञान संस्थान में नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुमारगंज, अयोध्या के कीट विज्ञान विभाग के प्रोफेसर एवं निदेशक शोध प्रो. उमेश चंद्रा का गुरुवार को आगमन हुआ। संस्थान पहुंचने पर शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने उनका स्वागत किया।

संस्थान के भ्रमण के दौरान प्रो. उमेश चंद्रा ने शिक्षकों के साथ संवाद करते हुए यहां संचालित शैक्षणिक, शोध, प्रशिक्षण एवं कृषि संबंधी गतिविधियों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने विभिन्न योजनाओं, प्रयोगात्मक कार्यों तथा भविष्य की कार्ययोजनाओं पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि कृषि शिक्षा को केवल कक्षा तक सीमित न रखकर उसे प्रयोगशाला, खेत और बाजार की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ना समय की मांग है। विद्यार्थियों को आधुनिक कृषि तकनीकों के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव प्रदान करने से उनमें रोजगार एवं उद्यमिता की संभावनाएं बढ़ेंगी।

उन्होंने संस्थान के विद्यार्थियों से संवाद कर कृषि शिक्षा, शोध, कीट प्रबंधन, उत्पादन तकनीक तथा व्यावहारिक कृषि के विभिन्न पहलुओं पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने विद्यार्थियों को जिज्ञासा के साथ सीखने, प्रयोग करने और कृषि क्षेत्र में नवाचार के लिए प्रेरित किया।
प्रो. उमेश चंद्रा ने संस्थान में संचालित दो दिवसीय मशरूम उत्पादन तकनीक प्रशिक्षण कार्यक्रम का भी निरीक्षण किया। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से संवाद कर मशरूम उत्पादन की प्रक्रिया, प्रशिक्षण की उपयोगिता तथा इससे जुड़ी संभावनाओं की जानकारी ली। उन्होंने संस्थान में संचालित गतिविधियों को देखकर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि मशरूम उत्पादन का कार्यक्रम व्यवस्थित एवं उपयोगी ढंग से संचालित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के व्यावहारिक प्रशिक्षण विद्यार्थियों को स्वरोजगार और कृषि उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि निरंतर परिश्रम, नवाचार और टीमवर्क के माध्यम से संस्थान कृषि शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बना सकता है।
इस अवसर पर महर्षि पराशर कृषि विज्ञान संस्थान के समन्वयक प्रो. गिरधर मिश्र ने प्रो. उमेश चंद्रा का संस्थान के शिक्षकों से परिचय कराया तथा संस्थान में संचालित विभिन्न शैक्षणिक एवं कृषि गतिविधियों की जानकारी दी।
परिचय के क्रम में कीट विज्ञान विभाग के डॉ. सत्यम प्रजापति, उद्यान विज्ञान विभाग के डॉ. विपिन, सस्य विज्ञान विभाग के डॉ. हरिवंश सिंह, कृषि प्रसार विभाग के डॉ. प्रदीप कुमार यादव तथा पादप विज्ञान विभाग के डॉ. शुभम सिंह उपस्थित रहे। शिक्षकों ने अपने-अपने विभागों की शैक्षणिक, प्रयोगात्मक एवं शोध गतिविधियों से प्रो. उमेश चंद्रा को अवगत कराया।

प्रो. उमेश चंद्रा ने संस्थान की गतिविधियों की सराहना करते हुए शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को कृषि शिक्षा, शोध एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों के अनुरूप विद्यार्थियों को नई तकनीकों और नवाचारों से जोड़ना आवश्यक है।
कार्यक्रम के अंत में संस्थान के समस्त शिक्षकों ने प्रो. उमेश चंद्रा के प्रति आभार व्यक्त किया।

सेवा मेरा योगदान अभियान के चौथे दिन छात्रों ने चलाया स्वच्छता एवं पौधरोपण अभियान


डिप्लोमा मैकेनिकल इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों ने डिवाइडर की घास साफ कर रोपे गेंदे के पौधे, कक्षाओं का भी किया सौंदर्यीकरण
जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर में आयोजित ‘सेवा मेरा योगदान’ कार्यक्रम के चौथे दिन डिप्लोमा मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र-छात्राओं ने स्वच्छता, पौधरोपण एवं परिसर सौंदर्यीकरण अभियान में सक्रिय सहभागिता की।
कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय परिसर के डिवाइडरों पर उगी सूखी एवं अनावश्यक घास की सफाई की। इसके बाद वहां गेंदे के पौधे रोपे गए। विद्यार्थियों ने अपनी कक्षाओं की भी साफ-सफाई की तथा कक्षा-कक्षों की व्यवस्था और सौंदर्यीकरण में योगदान दिया।छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. प्रमोद कुमार यादव ने कहा कि छात्र-छात्राओं का उत्साह और सेवा भाव पूरे विश्वविद्यालय के लिए प्रेरणादायक है। यु
वाओं की सकारात्मक ऊर्जा परिसर को स्वच्छ, हरा-भरा और सुंदर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस प्रकार की गतिविधियों से विद्यार्थियों में अनुशासन, श्रमदान और टीम वर्क की भावना भी विकसित होती है।कार्यक्रम संयोजक प्रो. राजकुमार ने कहा कि स्वच्छता एवं पौधरोपण अभियान के माध्यम से विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सेवा के प्रति जागरूकता बढ़ाना कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य है। 
‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत छात्र जिस निष्ठा और उत्साह के साथ परिसर को स्वच्छ एवं सुंदर बनाने में योगदान दे रहे हैं, वह सराहनीय है। युवाओं की यही सहभागिता स्वच्छ एवं हरित परिसर के निर्माण का आधार बनेगी। वार्डन डॉ. नितेश जायसवाल ने बताया कि ‘सेवा मेरा योगदान’ कार्यक्रम के चतुर्थ दिवस पर डिप्लोमा मैकेनिकल इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों ने परिसर के डिवाइडर की घास साफ की, गेंदे के पौधे रोपे और अपनी कक्षाओं का सौंदर्यीकरण किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की यह सहभागिता सेवा, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनकी जिम्मेदारी को दर्शाती है।

भाषण प्रतियोगिता में अभिनव कीर्ति पांडेय प्रथम

मेरे सपनों का भारत” विषय पर भाषण प्रतियोगिता का आयोजन

जौनपुर। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के जनसेवा से राष्ट्रसेवा के 25 वर्षों के उपलक्ष्य में आयोजित “सेवा संकल्प अभियान” के अंतर्गत कुलपति प्रो. आर. के. सिंह जी के दिशा-निर्देशन में 1 अक्टूबर 2026 को वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर में विश्वविद्यालय स्तरीय “मेरे सपनों का भारत” विषय पर भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय परिसर सहित संबद्ध महाविद्यालयों के प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग करते हुए भारत के भविष्य, विकास, युवा शक्ति एवं राष्ट्र निर्माण से जुड़े अपने विचार प्रस्तुत किए।

 कार्यक्रम समन्वयक राष्ट्रीय सेवा योजना डॉ. शशिकांत यादव ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा एवं उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. प्रमोद कुमार यादव ने अतिथियों का स्वागत किया तथा “मेरे सपनों का भारत” विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्र के विकास में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और युवाओं के सपनों, संकल्पों एवं सकारात्मक सोच से ही विकसित भारत की मजबूत आधारशिला तैयार होगी।

विश्वविद्यालय स्तरीय प्रतियोगिता में वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय परिसर की अभिनव कीर्ति पांडेय ने प्रथम स्थान, पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय महिला महाविद्यालय, बलूची, केराकत, जौनपुर की राधा गिरी ने द्वितीय स्थान तथा डॉ. राम मनोहर लोहिया राजकीय महाविद्यालय, मुफ्तीगंज, जौनपुर के मनीष ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

इसी क्रम में गाजीपुर जनपद स्तरीय भाषण प्रतियोगिता में समता पी.जी. कॉलेज की जागृति बरनवाल ने प्रथम स्थान, समता पी.जी. कॉलेज की शुभांगी चौबे ने द्वितीय स्थान तथा वासुदेव यादव ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में डॉ. अनुराग यादव, डॉ. अनुराग मिश्रा, डॉ. उदयभान यादव, डॉ. सूर्योदय भट्टाचार्य एवं डॉ. शैलेंद्र चौधरी ने प्रतिभागियों के वक्तव्य, विषय-वस्तु, प्रस्तुतीकरण, भाषा एवं अभिव्यक्ति के आधार पर मूल्यांकन किया।
कार्यक्रम का मंच संचालन सत्यम त्रिपाठी ने किया।
कार्यक्रम में उच्च शिक्षा के नोडल अधिकारी एवं प्राचार्य प्रो. धर्मेंद्र द्विवेदी, डॉ. राम मनोहर लोहिया राजकीय महाविद्यालय, मुफ्तीगंज, जौनपुर के प्राचार्य प्रो. पीयूष वर्मा, समता पी.जी. कॉलेज के प्राचार्य सहित विभिन्न महाविद्यालयों के शिक्षक एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

इस अवसर पर डॉ. अंकित राय, डॉ. राहुल राय, डॉ. विपुल यादव, डॉ. सोहन यादव, डॉ. अनामिका शुक्ला, डॉ. सोमरू राम, डॉ श्वेता पांडेय, डॉ अजय मौर्य, डॉ विशाल यादव, श्री अजीत कुमार यादव, श्री आदित्य जायसवाल एवं श्री अविनाश कुमार राय सहित विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षक उपस्थित रहे।