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Sunday, 22 January 2012

धनोपार्जन ही नहीं नैतिक मूल्यों पर ध्यान देने की जरूरत..



कुलाधिपति महामहिम श्री बी एल जोशी 


वीर बहादुर सिंह पूर्वाचल विश्वविद्यालय के पंचदश  दीक्षांत समारोह में शनिवार को बतौर कुलाधिपति अध्यक्षता  करते हुए महामहिम  राज्यपाल  श्री बी .एल .जोशी ने कहा कि आजादी के बाद से हमने उच्च शिक्षा के विस्तार पर तो ध्यान दिया ताकि जनसंख्या के अनुरूप समाज का हर व्यक्ति इसका लाभ उठा सके लेकिन अब हमें शैक्षिक गुणवत्ता पर बल देना होगा। गुणवत्ता न सिर्फ पठन-पाठन व शोध बल्कि चारित्रिक निर्माण में भी होनी चाहिए।श्री राज्यपाल ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के दौर में बाजार की भूमिका
 निर्णायक होती जा रही है। ऐसे में विश्वविद्यालयों में शिक्षित-प्रशिक्षित प्रतिभाएं धनोपार्जन को ही अपना उद्देश्य मान कर नैतिक मूल्यों एवं उद्देश्यों से दूर होती जा रहीं हैं। लिहाजा शिक्षक ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था को और गति प्रदान करने की दिशा में सक्रिय योगदान दें। 
मुख्य अतिथि श्री चंडी प्रसाद भट्ट 
मुख्य अतिथि प्रख्यात पर्यावरणविद,मैग्सेसे पुरस्कार प्राप्त, पद्मभूषण  श्री चण्डी प्रसाद भट्ट ने युवाओं का आह्वान किया कि वे न केवल शैक्षिक कार्यो में रत रहें बल्कि पर्यावरणीय चुनौतियों का भी डटकर मुकाबला करें। मौजूदा समय में पर्यावरण संबंधी अनेक समस्याएं मुंह बाये खड़ी हैं। इसका कारण विकास व निर्माण कार्य में पर्यावरण की अनदेखी है। धरती के प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध शोषण से जीवों के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। देश में इसके विनाशकारी प्रभाव दिखाई दे रहे हैं। उत्तराखण्ड व हिमाचल प्रदेश में पर्यावरण संव‌र्द्धन शिविरों के जरिये हमने व्यावहारिक संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया है।उन्होंने पर्यावरण और नदी बचाओ अभियान के तहत किए गए कार्यों का भी उल्लेख किया। कहा कि गीता में श्रीकृष्ण ने कहा कि हे अर्जुन मै स्थिर हूं, हिमालय हूं। महाकवि कालिदास     ने जिस हिमालय को पृथ्वी का मेरुदंड  कहा है उसकी बिगड़ती दशा गंभीर चिंता का विषय होनी चाहिए।
 स्थानीय परिस्थितियों वैश्विक तापवृद्धि के कारण हमारे हिमनद खिसक रहे हैं। अध्ययनों से पता चला कि 1962 से 2004 के बीच भागीरथी के 126 हिमनदों में से 11 फीसदी समाप्त हो गए। बैजनाथ से निकली अलकनंदा के 187 में से 13 फीसदी, गौरी गंगा के 60 हिमनदों में से 16 फीसदी नष्ट हो चुके हैं। यह हमारी नदियों और पर्यावरण पर गहरा प्रभाव डाल रहा है। हमने बनारस से गाजीपुर तक दौरा किया। गाजीपुर में कैथी गांव का अस्तित्व ही समाप्त हो चुका है। युवा नवीनतम ज्ञान, कौशल तथा अनुसंधान का इस्तेमाल कर पर्यावरण संरक्षण में बेहतर योगदान दे सकते हैं। विवि के शिक्षकों पर अपने क्षेत्र की प्राकृतिक परिवेश के विविध आयामों को समझने और समझाने की जिम्मेदारी है। अधिक प्राप्त करो और अधिक उपभोग करो की परिपाटी हामारी सामाजिक और आर्थिक संरचना के लिए घातक साबित हो रही है। पर्यावरणविद श्री   भट्ट ने युवाओं को पर्यावरण और नदियों के संरक्षण के लिए आगे आने का आह्वान किया। कहा कि युवा कोशिश करें कि प्रतिभा, कौशल और ऊर्जा का लाभ देश को मिले। उन्होंने कहा कि हमें विश्वविद्यालय जाने का अवसर नहीं मिला लेकिन आज के युवा अपने अवसर का सही इस्तेमाल करें। 
कुलपति प्रो सुन्दर लाल 
कुलपति प्रो. सुंदर लाल जी ने महामहिम जी और मुख्य अतिथि जी का स्वागत करते हुए विवि की प्रगति आख्या प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि विवि ने आन लाइन फार्म की व्यवस्था, मूल्यांकन सुधार, कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सेमीनार के साथ विश्वविद्यालय में लम्बे समय से एक ही पटल पर जमे कर्मचारियों का स्थानांतरण ,कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सेमीनार के साथ गरीबों  के लिए सम्मान सहित सहायता   बापू बाजार लगवाए हैं। स्वागत भाषण में कुलपति जी  ने विवि में सुधार को उठाये गये कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि मूल्यांकन में पारदर्शिता को सभी उत्तर पुस्तिकाओं की कोडिंग कराई गयी। नियमों के विपरीत आचरण करने पर 88 महाविद्यालयों, शिक्षकों व कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गयी। इससे पहले कार्य परिषद और विद्या परिषद के सदस्यों ने शोभायात्रा निकाली। शोभायात्रा की अगवानी कुलसचिव डा. बीएल आर्य ने की। इस दौरान परीक्षा नियंत्रक आरएस यादव समेत सभी सदस्य मौजूद थे.
 इससे पूर्व श्री राज्यपाल, मुख्य अतिथि  जी  व कुलपति जी   ने 31 मेधावियों को गोल्ड मेडल व 350 को पीएचडी की उपाधि प्रदान की। मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई।
बापू बाजार को सराहा 
कुलपति प्रो.सुंदरलाल जी  की पहल पर पूर्वाचल विश्वविद्यालय द्वारा शुरू किये गये बापू बाजार कार्यक्रम की श्री राज्यपाल बीएल जोशी व मुख्य अतिथि श्री चंडी प्रसाद भट्ट ने जोरदार सराहना की। उन्होंने कहा कि इस अभिनव पहल को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की जरूरत है। गौरतलब है कि बापू बाजार के तहत प्रत्येक माह के अन्तिम रविवार को सम्बद्ध कालेजों में कार्यक्रम का आयोजन कर गरीबों को 2 से 10 रुपये में वस्त्र व दैनिक उपयोगी मूल्यवान वस्तुएं प्रदान की जाती हैं।