Saturday, 5 October 2019

सात दिवसीय श्री राम कथा अमृत वर्षा का अंतिम दिन

हरि अनंत है और उनकी  कथा भी अनंत- आचार्य शांतनु 

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के महंत अवैद्यनाथ संगोष्ठी भवन में चल रही श्री राम कथा का  शनिवार को विराम हुआ. राम कथा में सातवें दिन श्रोतागण भावुक हो गए. श्रीराम कथा अमृत वर्षा में  आचार्य श्री शान्तनु महाराज ने कहा कि भगवान राम की कथा कभी खत्म  नहीं हो सकती। हरि अनंत है और उनकी  कथा भी अनंत है। एक एक चौपाई, दोहा, श्लोक, छंद, स्तुति यहाँ तक की कथा का एक एक शब्द पूर्ण है। राम की कथा सात  जन्मों में भी कोई पूर्ण नहीं कर सकता।उन्होंने कहा कि भगवान् की कथा सुनने से मन निर्मल हो जाता है और मन में दोषों के लिए कोई जगह नहीं बचती है.  आज शनिवार को केवट संवाद के कथा शुरू हुई । केवट  ने कहा कि प्रभु हम आपसे पैसा नहीं लेंगे क्योंकि हमारा आपका व्यवसाय एक है। हम नाव से गंगा पार कराते हैं आप भवसागर से पार कराते हैं। उन्होंने  कहा कि कथा का सूत्र है भगवान प्रतीक्षा से मिलते  है परीक्षा से नहीं। आज हम लोग चमत्कार का इन्तजार करते है। 

कुलपति प्रो डॉ राजाराम यादव ने आचार्य शांतनु जी महाराज को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। इसके साथ रामकथा में हारमोनियम पर अमन मिश्र, तबला पर शंकर दा, वायलिन पर सुरेश, बांसुरी पर सुनील, सह गायक अंकित पाठक, सर्वेश तिवारी एवं प्रदीप,सौरभ शास्त्री  रहे जिन्हें भी सम्मानित किया गया। संचालन जनसंचार विभाग के अध्यक्ष डॉ मनोज मिश्र ने  किया।
व्यास पूजा में कुलपति प्रो डॉ राजाराम यादव, कुलसचिव सुजीत कुमार जायसवाल,वित्त अधिकारी एमके सिंह,परीक्षा नियंत्रक बीएन सिंह, प्रो बी.बी तिवारी,प्रो के पी सिह,प्रो ओपी सिंह,प्रो ए के श्रीवास्तव, प्रो अजय प्रताप सिंह,प्रो अजय द्विवेद्वी,लखन सिंह, डॉ अनिल यादव, डॉ केएस तोमर,राकेश यादव, डॉ दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ पुनीत धवन, डॉ संजय श्रीवास्तव समेत तमाम लोग मौजूद रहें। 

माननीय कुलपति प्रोफेसर डॉ राजाराम यादव को मिलेगा प्रोफेसर एस भगवंतम राष्ट्रीय पुरस्कार


 वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ राजाराम यादव को एकॉस्टिक्स के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान एवं नेतृत्व के लिए प्रोफेसर एस भगवंतम राष्ट्रीय पुरस्कार दिया जाएगा। 
एकॉस्टिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया नई दिल्ली का यह पुरस्कार 17 अक्टूबर 2019 को कटक के रावेनशॉ विश्वविद्यालय में 47 वें  राष्ट्रीय एकास्टिक्स संगोष्ठी के अवसर पर प्रदान किया जाएगा। विदित है कि यह राष्ट्रीय पुरस्कार एकॉस्टिक्स के क्षेत्र में विश्व स्तरीय सर्वोत्तम शोध के लिए दिया जाता है।  प्रो डॉ राजाराम यादव को उनके उत्कृष्ट शोध कार्य हेतु इस पुरस्कार के लिए चुना गया है। प्रो यादव विगत 35  वर्षों से एकॉस्टिक  के क्षेत्र में सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक शोध  से संबद्ध रहे हैं। आपके डेढ़ सौ से अधिक शोधपत्र प्रकाशित हो चुके हैं। प्रो यादव एकॉस्ट्रिक्स के क्षेत्र में अपने शोध पत्र कनाडा, जर्मनी, ऑस्ट्रिया, चीन, बेल्जियम, जापान, इटली, सिंगापुर, नेपाल, फ्रांस, अमेरिका आदि देशों में हुए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में प्रस्तुत किया है। कुलपति प्रो डॉ राजाराम यादव ने  विश्वविद्यालय में दो अत्याधुनिक शोध केंद्र नैनो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केंद्र एवं  वैकल्पिक ऊर्जा अनुसन्धान केंद्र की  स्थापना भी की है।
कुलपति को मिल रहे राष्ट्रीय पुरस्कार पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव सुजीत कुमार जायसवाल, वित्त अधिकारी एमके सिंह, परीक्षा नियंत्रक बीएन सिंह, प्रो बी बी तिवारी, प्रो मानस पांडेय, प्रो अजय द्विवेदी, डॉ मनोज मिश्र, राकेश यादव, डॉ विजय कुमार सिंह, डॉ विजय प्रताप तिवारी,  डॉ पुनीत धवन ,डॉ दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ के एस तोमर, डॉ संजय श्रीवास्तव, श्याम श्रीवास्तव समेत शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने बधाई दी है।

Friday, 4 October 2019

त्रेता का भाई विपत्ति तो कलयुग का भाई संपत्ति बाटता है- आचार्य शान्तनु

रामकथा आधुनिक जीवन के लिए जरुरी - 
कुलपति इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रो0 रतन लाल हांगलु


विश्वविद्यालय स्थापना सप्ताह में चल रहे राम कथा में छठवें दिन आचार्य शांतनु जी महाराज ने भगवान राम के वन गमन के बड़ा मार्मिक ढंग से वर्णन किया। जिस अयोध्या में कौवा और चील राम राम जपते हो वहां कुसंग के प्रवेश करने पर सब रोने लगे। अयोध्या में एक साथ काम क्रोध और लोभ का प्रवेश हुआ। उन्होंने भगवान राम के भाइयों के प्रेम को रेखांकित करते हुए कहा कि कलयुग का भाई विपत्ति बटता था और कलयुग का भाई संपत्ति बाटता है।परिवार को नहीं तोड़ना चाहिए चाहे जितना भी संघर्ष करना पड़े परिवार को जोड़े रखना चाहिए। यह मानस सिखाता है।भाई राम के लिये चौदह वर्षों तक पत्नी से अलग रहकर वैराग्य  का आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया है।
रामकथा में पहुँचें  इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो रतनलाल हांगलु ने कहा कि रामकथा अध्यात्मिक जीवन के लिए ही नहीं आधुनिक जीवन के लिए भी महत्त्वपूर्ण हैं। भगवान राम हमारी आत्मा के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि आज सारी सुख सुविधाएँ है लेकिन मनुष्य की आत्मा सुखी नहीं है, आत्मा इस लिए सुखी नहीं है क्यों कि वह राम के आदर्शों से बहुत दूर है. क्योंकि वह धर्म से दूर है।आज समाज की विसंगतियों को दूर करने के लिए अध्यात्म का दर्शन कराना जरूरी है। उन्होंने कहा कि दुनिया के सत्तर देशों में रामकथा लोग सुन रहे है।
कुलपति प्रो डॉ राजाराम यादव ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो रतन लाल हांगलु  को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। कुलसचिव सुजीत कुमार जायसवाल,वित्त अधिकारी एमके सिंह ने  कुलसचिव प्रो.नरेन्द्र कुमार शुक्ला, वैज्ञानिक प्रो केपी सिंह,चीफ प्राक्टर प्रो रामसेवक दुबे आदि को स्मृति चिन्ह प्रदान किया। इस अवसर पर डॉ मनोज द्विवेदी, डॉ रजनीश पांडेय, डॉ संजय पांडेय, डॉ चितरंजन सिंह, प्रो बी.बी तिवारी,परीक्षा नियंत्रक बीएन सिंह, डॉ केएस तोमर, प्रो बीडी शर्मा , प्रो एके श्रीवास्तव, प्रो वंदना राय, प्रो अजय द्विवेदी, प्रो अजय प्रताप सिंह, डॉ सतेंद्र प्रताप सिंह, डॉ रवि प्रकाश,  एन एस एस समन्वयक राकेश यादव, डॉ संदीप सिंह, डॉ दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ जान्हवी श्रीवास्तव, डॉ अमरेंद्र सिंह, पूजा सक्सेना, डॉ विनय वर्मा, डॉ राजीव कुमार, डॉ सुशील कुमार सिंह  समेत तमाम लोग मौजूद रहे. 

पंडित सत्यप्रकाश मिश्र के गायन नें बांधा समा


 विश्वविद्यालय जौनपुर  महंत अवैद्यनाथ संगोष्ठी भवन में स्थापना सप्ताह के तहत सांस्कृतिक संध्या में अंतिम दिन गुरुवार को अयोध्या से आए शास्त्री गायन के महान हस्ताक्षर पंडित सत्यप्रकाश मिश्र की गजल और ठुमरी में समा बांधा।
प्रयागराज से आये प्रख्यात सितार  वादक प्रोफ़ेसर साहित्य कुमार नाहर और शोभित कुमार नाहर ने वैष्णव जन तो तेने कहिए जे पीर पराई जाने रे... भजन से शुरुआत की। इसके बाद राग वाचस्पति में स्वर और ताल की जुगलबंदी से पूरा सभागार झंकृत हो गया। इसी क्रम में मिर्जापुर की कजरी पर आधारित धुन को स्वर के माध्यम से प्रस्तुत किया। उनके साथ तबले पर संगत नंदकिशोर मिश्र ने की। महोबा से आए द्रुपद गायक पंडित जयनारायण शर्मा ने  हाय पिया कल रतिया पर ... ध्रुपद गायन पेश किया। उन्होंने जब अमीर खुसरो की प्रसिद्द छाप तिलक सब छीनी मोसे नैना मिलाइके..सुनाया तो दर्शक झूमने पर मजबूर हो गए। साथ में तबले पर संगत राजेश यादव ने की .संस्कृत संध्या के अंतिम दिन अयोध्या के सत्य प्रकाश मिश्र ने बंदिश से शुरुआत की।  उन्होंने ...सोचत काहे हे मनवा कौशिक कांगड़ा सुनाया, तो दर्शक भावुक हो गए। इसके बाद रंगी सारी गुलाबी चुनरिया रे... सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। अंत में जब उन्होंने किसी से उनकी मंजिल का पता पाया नहीं जाता।जहां है वह, फरिश्तों का साया नहीं जाता।। सुनाया तो तालियों की गड़गड़ाहट से सभागार गूंज उठा। उनके साथ तबले पर संगत लालजी मलिक ने की। इस अवसर पर सभी कलाकारों को कथावाचक आचार्य शांतनु जी महाराज , कुलपति प्रोफेसर डॉ राजाराम यादव, कुलसचिव सुजीत कुमार जायसवाल, वित्त अधिकारी एमके सिंह, परीक्षा नियंत्रक बीएन सिंह, प्रोफेसर अजय द्विवेदी ने स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ मनोज मिश्र ने किया।