Saturday, 12 April 2025

पीयू में प्लेसमेंट ब्रोशर का विमोचन

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के केंद्रीय प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट प्रकोष्ठ द्वारा सत्र 2025 के लिए तैयार प्लेसमेंट ब्रोशर का विमोचन शुक्रवार को विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. वंदना सिंह द्वारा किया गया। इस अवसर पर कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय का यह ब्रोशर देशभर के प्रतिष्ठित कॉर्पोरेट हाउसों और कंपनियों तक पहुंचाया जाएगा, ताकि विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं को उच्चस्तरीय रोजगार के अवसर प्राप्त हो सकें।

प्रो. वंदना सिंह ने ब्रोशर की सराहना करते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता, नवाचार, अनुसंधान और विद्यार्थियों की प्रतिभा को उजागर करने वाला एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में छात्र-छात्राओं को तकनीकी दक्षता के साथ-साथ संचार कौशल और व्यावसायिक आचार संहिता की समझ होनी चाहिए। इस दिशा में विश्वविद्यालय का प्लेसमेंट प्रकोष्ठ निरंतर प्रयासरत है।

इस अवसर पर आईक्यूएसी के समन्वयक प्रो. गिरिधर मिश्र ने विश्वविद्यालय की गुणवत्ता उन्नयन और उद्योग जगत से बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। केंद्रीय ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट सेल के समन्वयक प्रो. अविनाश पाथर्डीकर ने ब्रोशर की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसमें विश्वविद्यालय के विभिन्न पाठ्यक्रमों, इंफ्रास्ट्रक्चर, उद्योगों से साझेदारी और विद्यार्थियों की योग्यता का समावेश किया गया है।कार्यक्रम में डॉ. नितेश जायसवाल एवं डॉ. विशाल यादव, उप समन्वयक भी उपस्थित रहे।

Wednesday, 9 April 2025

भारतीय ज्ञान परंपरा में समाहित है वैज्ञानिक दृष्टिकोणः प्रो. बीएल शर्मा

भारतीय ज्ञान परंपरा पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का हुआ आयोजन 

जौनपुर। भारतीय ज्ञान परंपरा एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण" विषयक एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन बुधवार को वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के इनक्यूबेशन सेंटर, फार्मेसी भवन में किया गया।

राष्ट्रीय संगोष्ठी के मुख्य अतिथि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर बीएल शर्मा ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा न केवल अध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध है, बल्कि उसमें वैज्ञानिक चिंतन और तर्क शीलता की गहराई भी समाहित है।

उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल ज्ञान का संचय नहीं, बल्कि व्यवहार में उतारने की प्रक्रिया है। इसमें प्रकृति, मानव और ब्रह्मांड के मध्य संतुलन की बात की गई है, जो आज के सतत विकास की अवधारणा से मेल खाती है।

उन्होंने कहा कि जीवन में विपत्ति से बचाव के पांच ही साधन है। मंत्र, मणि, औषधि, स्नान और दान। उन्होंने कहा कि श्रुति, स्मृति, सदाचार, आत्मा की आवाज  से धर्म बनता है। साथ ही कहा कि हमारी संस्कृति भाषण से नहीं आचरण से सिखाने की है। पश्चिम ने मशीन को महत्व दिया हमारे देश ने मानव को प्रमुख माना। उन्होंने सनातन से लेकर आयुर्वेद और धर्म की विस्तार से व्याख्या की।   

अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रोफेसर वंदना सिंह ने कहा कि जीवन में धर्म का आचरण करने से बहुत
से समस्याओं का समाधान खुद ही हो जाता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत की परिकल्पना को एक वृक्ष के उदाहरण से समझाते हुए कहा कि जब वृक्ष हरा भरा रहेगा तभी वह विकसित होगा और अच्छे फल देगा। उन्होंने कहा कि हम भारतीय ज्ञान परंपरा पर शोध के लिए नया ग्रुप बना रहे हैं। इस संबंध में एक एमओयू भी शीघ्र किया जाएगा।  बतौर मुख्य वक्ता बीएचयू के डॉ. एम. के सिंह चौहान ने कहा कि भारतीय परंपरा का मुख्य आधार संगीत रहा है। उन्होंने कहा कि मंत्रों के रिद्म, राग और उच्चारण का मानव के जीवन में अलग-अलग प्रभाव है। उन्होंने कहा कि बहुत से रोगों का निदान मेडिसिन से नहीं, थिरैपी और योग के माध्यम से संभव होता है। बीएचयू के आईएमएस प्रो. अजीत सिंह ने कहा कि भारत में बहुत से आधुनिक रोग, मस्कुलर पेन, बैक पेन, सरवाइकल पेन जैसी समस्या का समाधान योग, थिरैपी और मेडिटेशन से संभव है। इसमें खासतौर से खान-पान और लाइफस्टाइल को बदल कर ठीक किया जा सकता है। बीएचयू आईएमएस के डॉ. शुभम श्रीवास्तव ने आदमी की दिनचर्या, बैठने के पोस्चर, सूर्य की किरणों से लाभ को भारतीय परंपरा से जोड़ते हुए विस्तृत ढंग से प्रकाश डाला। कहा कि हमारे यहां प्रार्थना, सूर्य नमस्कार, योग शुरू से ही भारतीय परंपरा में था।

प्रबंध अध्ययन संकाय के प्रो. अविनाश पाथर्डीकर ने धर्म के मापनी विकास शोध पत्र को विस्तार से समझाया। कहा कि धर्मानुकूल आचरण करने वाला ही जीवन में सफल होता है।  

अतिथियों का स्वागत संगोष्ठी के समन्वयक प्रो. गिरिधर मिश्र एवं विषय प्रवर्तन प्रो मानस पांडे ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ धीरेन्द्र कुमार चौधरी ने किया।

इस अवसर पर प्रो. अजय प्रताप सिंह, प्रो देवराज,  प्रो प्रमोद यादव, प्रो मनोज मिश्र,  प्रो सौरभ पाल,  प्रो रजनीश भास्कर, प्रो. प्रदीप कुमार, डॉ. रसिकेश, डॉ. आशुतोष सिंह, डॉ. मनीष गुप्ता, डॉ. शचींद्र मिश्र, डॉ जाह्नवी श्रीवास्तव, डॉ. वनिता सिंह, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ. अनुराग मिश्र, डॉ. संजीव गंगवार, डॉ. नीतेश जायसवाल, आदि सभी विभाग के संकायाध्यक्ष और विभागाध्यक्ष उपस्थित थे।



Tuesday, 8 April 2025

इंजीनियरिंग संकाय के तीन छात्रों का डीआरडीओ में चयन

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर के इंजीनियरिंग संकाय के तीन प्रतिभाशाली छात्रों ने अपने उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन और तकनीकी कौशल के दम पर देश के प्रतिष्ठित रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) में इंटर्नशिप के लिए चयनित होकर विश्वविद्यालय का मान बढ़ाया है। इन छात्रों का चयन डीआरडीओ के देहरादून स्थित इंस्ट्रूमेंट्स रिसर्च एंड डेवलेपमेंट इस्टैब्लिशमेंट (IRDE) प्रकोष्ठ में आठ सप्ताह की ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण हेतु हुआ है।

चयनित छात्रों में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग विभाग के तृतीय वर्ष के छात्र अंशु शुक्ला, उज्ज्वल द्विवेदी और इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग के तृतीय वर्ष के छात्र रोशन कुमार सिंह शामिल हैं। इस इंटर्नशिप के दौरान छात्र अत्याधुनिक अनुसंधान प्रयोगशालाओं में प्रायोगिक प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे तथा रक्षा से जुड़ी परियोजनाओं पर प्रत्यक्ष रूप से कार्य करने का अनुभव भी प्राप्त करेंगे।

 छात्रों की इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय के लिए गर्व का विषय है और इससे अन्य छात्रों को भी प्रेरणा मिलेगी। संकायाध्यक्ष प्रो. सौरभ पाल, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष प्रो. रवि प्रकाश और कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष डॉ. विक्रांत भटेजा ने भी छात्रों की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

इस चयन से यह सिद्ध होता है कि पूर्वांचल विश्वविद्यालय के छात्र राष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी उत्कृष्टता की दिशा में सशक्त रूप से अग्रसर हैं।

Monday, 7 April 2025

दृष्टिकोण तय करता है जीवन की ऊँचाई: विकास पूरी

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के सेंट्रल ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल द्वारा  न "द विनिंग माइंडसेट" विषयक ऑनलाइन विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया. इसमें  मुख्य वक्ता अम्बिका स्टील्स लिमिटेड, नई दिल्ली के  सीएचआरओ विकास पुरी ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक मानसिकता के निर्माण के लिए लक्ष्य का होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया  कि जिस प्रकार वृक्ष का तना मजबूत होना आवश्यक है, ठीक उसी प्रकार हमारे व्यवहार का भी मजबूत होना ज़रूरी है। जीवन में आगे बढ़ने के लिए दो महत्वपूर्ण बिंदुओं उद्देश्य और विरासत पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।

श्री पुरी ने आपका दृष्टिकोण ही आपके जीवन की ऊँचाई तय करते है प्रसिद्ध कथन के माध्यम से छात्रों को प्रेरित किया. कहा कि यदि जीवन में आगे बढ़ना है तो बहानों को छोड़ना होगा, क्योंकि विजेता बहाने नहीं बनाते, वे रास्ते निकालते हैं। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि "विक्टिम माइंडसेट" को त्यागकर "विनर माइंडसेट" अपनाना आवश्यक है।

श्री पूरी के उद्बोधन के बाद छात्र छात्राओं ने अपने सवाल पूछे जिसमें  अपेक्षा सिंह, मेहर सिद्दीकी तथा स्वाति चौबे इत्यादि। श्री पूरी ने विस्तार से उनके सवालों के जवाब दिए। इस कार्यक्रम ने छात्रों को अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और एक विजेता मानसिकता अपनाने के लिए प्रेरित किया।इससे पहले कार्यक्रम में सभी का स्वागत सेंट्रल ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल के समन्वयक प्रो. अविनाश डी. पाथर्डीकर ने किया तथा कार्यक्रम का संचालन व धन्यवाद ज्ञापन सेंट्रल ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल के उप समन्वयक सुशील कुमार ने किया. इस मौके डा. मनोज त्रिपाठी, डा. विशाल यादव, श्याम त्रिपाठी व  विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के छात्र छात्राओं समेत  यश जायसवाल, अमन कुमार, रिंसु सिंह, आंचल विश्वकर्मा, कशिश शीकरी, कोमल सिंह आदि उपस्थित रहे ।