Thursday, 24 September 2026

आधुनिकता की तेज रफ्तार में शाश्वत मूल्यों को बचाए रखना जरूरी : प्रो. राकेश कुमार सिंह

दैनिक जागरण की विचार संगोष्ठी में भारतीय और पश्चिमी मूल्यबोध, धर्म, कर्तव्य, चरित्र और बदलते सामाजिक सरोकारों पर हुआ मंथन

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के संकाय भवन स्थित कॉन्फ्रेंस हाल में गुरुवार को दैनिक जागरण की ओर से ‘आधुनिकता के दौर में शाश्वत मूल्य’ विषय पर विचार संगोष्ठी आयोजित की गई। मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह ने कहा कि समय और तकनीक लगातार बदल रहे हैं, लेकिन मनुष्य को मनुष्य बनाए रखने वाले शाश्वत मूल्य कभी पुराने नहीं होते। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव के बीच ज्ञान और आधुनिकता के साथ विवेक, निष्ठा, जिम्मेदारी और संवेदनशीलता को मजबूत बनाए रखना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि एआइ लिख सकता है और कई कार्य कर सकता है, लेकिन सही और गलत का निर्णय मनुष्य को ही करना होगा। तकनीक का उपयोग सुविधा बढ़ाने के लिए हो, विवेक को कमजोर करने के लिए नहीं। इंटरनेट मीडिया पर किसी संदेश को प्रसारित करने से पहले उसकी सत्यता पर विचार करना चाहिए। डीपफेक और साइबर अपराध जैसी चुनौतियों के बीच डिजिटल माध्यमों का जिम्मेदारी से इस्तेमाल जरूरी है। आधुनिकता का अर्थ अपनी जड़ों और मूल्यों को छोड़ना नहीं, बल्कि नए साधनों का उपयोग मानवीय मूल्यों के साथ करना है।

कुलपति ने एकलव्य और गुरु द्रोणाचार्य के प्रसंग का उल्लेख करते हुए गुरु के प्रति समर्पण और त्याग को शाश्वत मूल्य बताया। कहा कि विश्वविद्यालय केवल भवन, उपकरण और सुविधाओं से नहीं बनता, बल्कि यहां की गतिविधियों और विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण से उसकी पहचान बनती है। बच्चों के लिए किया गया प्रत्येक सकारात्मक प्रयास सामूहिक प्रभाव पैदा करता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के लिए उनका मन 24 घंटे के बजाय चार घंटे और काम करने को कहता है, क्योंकि काम की सार्थकता समय की लंबाई से नहीं, बल्कि परिणाम से तय होती है।
उन्होंने निष्ठा, सच्ची सेवा और जिम्मेदारी को भविष्य निर्माण का आधार बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के संसाधनों का उपयोग विद्यार्थियों के विकास में होना चाहिए। स्टेडियम का उल्लेख करते हुए कहा कि खेल शारीरिक क्षमता के साथ अनुशासन, टीम भावना और संघर्ष की क्षमता विकसित करते हैं। परिसर को हरा-भरा रखने के लिए पौधे लगाने के साथ उनकी देखभाल भी जरूरी है। उन्होंने सच बोलने तथा गरीब और जरूरतमंद की मदद करने का साहस रखने का आह्वान किया।
मुख्य वक्ता नवाचार एवं इंक्यूबेशन केंद्र के कार्यकारी निदेशक प्रो. अविनाश पार्थीडेकर ने कहा कि भारतीय समाज की जीवन-पद्धति में पीढ़ियों से चले आ रहे मूल्य आज भी महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने मैकियावेली के विचारों के माध्यम से राजनीति कौशल, आचरण, निर्णय क्षमता और समय के सदुपयोग की चर्चा की। रामायण और महाभारत के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में व्यक्ति की पहचान उसके चरित्र और आचरण से होती है। उन्होंने चार्ल्स डार्विन के सिद्धांत, अर्थशास्त्र और पश्चिमी जीवन-दृष्टि के उदाहरणों से भारतीय और पश्चिमी मूल्यबोध के अंतर को समझाया तथा मनुस्मृति का उल्लेख करते हुए धर्म को आचरण और कर्तव्य से जोड़कर समझाया।
विषय प्रवर्तन करते हुए जनसंचार एवं पत्रकारिता के संकायाध्यक्ष प्रो. मनोज मिश्र ने गुरु-शिष्य परंपरा, एकलव्य और सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र के प्रसंगों के माध्यम से शाश्वत मूल्यों की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि मूल्य किसी एक काल, व्यक्ति या वर्ग तक सीमित नहीं होते, बल्कि पीढ़ियों को दिशा देते हैं। भारतीय परंपरा में धर्म का उद्देश्य विद्वेष पैदा करना नहीं, बल्कि मानवता, सद्भाव और नैतिक आचरण को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता को स्वीकार करते हुए अपनी सांस्कृतिक चेतना और नैतिक आधार को सुरक्षित रखना समाज की जिम्मेदारी है।
स्वागत भाषण में डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर ने कहा कि तकनीकी बदलाव के साथ जीवन की प्राथमिकताएं तेजी से बदल रही हैं, इसलिए आधुनिकता के दौर में शाश्वत मूल्यों पर विमर्श और अधिक प्रासंगिक हो गया है। शिक्षा और तकनीक तभी सार्थक हैं, जब वे व्यक्ति को बेहतर मनुष्य बनाने में सहायक हों। उन्होंने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। दैनिक जागरण के ब्यूरो प्रमुख सर्वेश कुमार मिश्र ने अतिथियों को बुके, स्मृति चिह्न एवं अंगवस्त्रम भेंट कर स्वागत किया। संचालन डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर ने किया।इस मौके पर व्यावहारिक मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्ष एवं मुख्य अनुशास्ता प्रो. अजय प्रताप सिंह, डॉ. अमरेंद्र कुमार सिंह, डॉ. चंदन सिंह, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. श्याम कन्हैया सिंह, डॉ. जाह्नवी श्रीवास्तव, डॉ. अन्नू त्यागी और लक्ष्मी मौर्य समेत विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी एवं अन्य लोग उपस्थित रहे।