Wednesday, 23 April 2025

पीयू में पहलगाम आतंकी हमले में मृतकों को दी गई श्रद्धांजलि


वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय  में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के मृतकों  को श्रद्धांजलि अर्पित की गई. सरस्वती सदन में कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने शोक सभा का आयोजन किया। दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई. इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारियों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने इस हमले की कड़ी निंदा की।

कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने कहा कि इस घटना से पूरे देशवासियों को गहरा दुःख हुआ है. इस घटना की जितनी निंदा की जाए कम ह। इस अवसर पर कुलसचिव महेंद्र कुमार, परीक्षा नियंत्रक विनोद कुमार सिंह, डीआर अमृत लाल, अजीत प्रताप सिंह, बबिता सिंह, प्रो. मानस पाण्डेय, प्रो. अविनाश पाथर्डीकर, प्रो. राकेश यादव, कर्मचारी संघ के अध्यक्ष नन्द किशोर सिंह, महामंत्री रमेश यादव समेत अन्य उपस्थित रहे.

इसी क्रम में विश्वविद्यालय के  राष्ट्रीय सेवा योजना के द्वारा भी श्रद्धांजलि सभा कार्यक्रम किया गया . इसके साथ ही  संकाय भवन से विश्वविद्यालय गेट तक शांति मार्च निकला गया. शांति मार्च में शिक्षक और विद्यार्थी शामिल हुए और घटना की निंदा की.  कार्यक्रम का संयोजन  डॉ.शशिकांत यादव ने किया। शांति मार्च में प्रो. राजेश शर्मा, प्रो. राम नारायण, डॉ. एस पी तिवारी, डॉ. मनीष गुप्ता, डॉ सुनील कुमार, डॉ. अवधेश मौर्य, डॉ. नितेश जायसवाल, प्रो. प्रमोद कुमार यादव, डॉ. प्रमोद यादव, डॉ. अश्वनी कुमार यादव एवं बड़ी संख्या में छात्र छात्राएं शामिल हुई.

Tuesday, 22 April 2025

पृथ्वी की रक्षा करना हमारा नैतिक कर्तव्य – प्रो. ध्रुवसेन सिंह


नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की ओर बढ़ना होगा- प्रो. वंदना सिंह

विश्व पृथ्वी दिवस 2025 के अवसर " हमारी शक्ति,  हमारा ग्रह "  विषयक  ऑनलाइन राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित


वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर, उत्तर प्रदेश के अंतर्विषयक ऊर्जा एवं जल शोध संस्थान, भू एवं ग्रहीय विज्ञान विभाग  एवं लोक दायित्व, आज़मगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में विश्व पृथ्वी दिवस 2025 के अवसर " हमारी शक्ति,  हमारा ग्रह "  विषयक  ऑनलाइन राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया.

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ के भू विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. ध्रुवसेन सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति प्रकृति की रक्षा का संदेश देती है. सभी ग्रहों में पृथ्वी पर ही जीवन है. इस ग्रह को मानव के क्रियाकलापों से ही सबसे बड़ा खतरा है. पृथ्वी के अलावा कोई ऐसा ग्रह नहीं है जो हमारे घर की तरह हो इसकी रक्षा करना हमारा नैतिक कर्तव्य है.

उन्होंने कहा कि हम पानी बना नहीं सकते तो निरंतर प्रदूषित करने का अधिकार नहीं है. भारत में नदियों को माँ का दर्जा दिया गया. इसके किनारे सभ्यता और संस्कृति का विकास हुआ है. उन्होंने जल, वायु और स्थल मंडल को प्रदूषण मुक्त रखने के सुझाव दिए. उन्होंने कहा कि प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त ऊर्जा के प्रयोग को बढ़ाना होगा. यह जीवाश्म ईंधन की तुलना में एक बेहतर विकल्प है और प्रदूषण से मुक्ति दिलाएगी.

अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने कहा कि हम न केवल अपने विचारों में बदलाव लाएं, बल्कि अपने कार्यों, शोध और नवाचारों में भी बदलाव लाएं ताकि हम पृथ्वी को एक संवेदनशील, स्वच्छ और सतत दिशा में आगे बढ़ा सकें. उन्होंने कहा कि हम एक ऐसी दुनिया का निर्माण कर सकते हैं जो न केवल आज के लिए बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सुरक्षित और टिकाऊ है. उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों जैसे सौर, पवन, और जल विद्युत की ओर तेजी से बढ़ना होगा.

वक्ता लोक दायित्व, आजमगढ़ के  संयोजक पवन कुमार सिंह ने कहा कि धरती का बुखार बढ़ रहा है. धरती को पौधों की हरी चुनरी से ढकना होगा और उसके माथे पर पानी की पट्टी लगानी होगी. उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में सूर्य की उपयोगिता की बेहतर समझ थी उसे देव कहा गया. आज सूर्य की इस ऊर्जा के प्रयोग को बढ़ा कर पृथ्वी को सुरक्षित रख सकते है. इससे कोई प्रदूषण नहीं होता है.

डीएएडी,  प्राईम फेलो कोलोन विश्वविद्यालय, जर्मनी के डॉ. आशीष कुलकर्णी ने कहा कि

हमारे पूर्वजों ने वैज्ञानिक दृष्टि से प्रकृति को देखा और उसके संरक्षण के सन्देश भी दिए. उन्होंने उच्च दक्षता के सोलर सेल बनाये जाने पर व्याख्यान दिया. कहा कि आने वाले समय में सौर ऊर्जा भविष्य है.

अंतर्विषयक जल एवं ऊर्जा अनुसंधान केन्द्र शोध के  संयोजक प्रो. गिरिधर मिश्र ने अतिथियों का स्वागत एवं विषय प्रवर्तन किया.

वेबिनार का संयोजन डॉ. शशिकांत यादव, संचालन डॉ. धीरेन्द्र चौधरी एवं धन्यवाद् ज्ञापन डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर ने किया. इस अवसर पर प्रो. मानस पाण्डेय, प्रो. राम नारायण, प्रो. देव राज, डॉ.श्याम कन्हैया सिंह, डॉ. जान्हवी श्रीवास्तव, डॉ. पुनीत धवन, डॉ. जगदेव, डॉ. सुनील कुमार,  डॉ. अन्नू त्यागी, डॉ. मनोज पाण्डेय, डॉ नितेश जायसवाल समेत अन्य ने प्रतिभाग किया.  

Friday, 18 April 2025

ट्रंप की टैरिफ नीति का असर पड़ेगा पूरी दुनिया पर - प्रो पुरोहित

ट्रंप की टैरिफ नीति का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पर कार्यशाला आयोजित

जौनपुर।वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के व्यावसायिक अर्थशास्त्र विभाग द्वारा शुक्रवार को "ट्रंप की टैरिफ नीति का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव" विषय पर एक दिवसीय ऑनलाइन वर्कशॉप का आयोजन किया गया। कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. एच. सी. पुरोहित संकाय अध्यक्ष प्रबंध अध्ययन संकाय , दून विश्वविद्यालय देहरादून नेट्रंप की टैरिफ नीति का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पर विस्तार से चर्चा की।

एमबीए बिजनेस इकोनॉमिक्स एवं बीकॉम ऑनर्स के विद्यार्थियों के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए प्रोफेसर पुरोहित ने कहा की ट्रंप की  टैरिफ नीति सिर्फ व्यापार संतुलन  करने से संबंधित नहीं है, यह विश्व की दो बड़ी आर्थिक महाशक्तियों के वर्चस्व से संबंधित है और इसका प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में अमेरिका और चीन का योगदान 43 प्रतिशत से अधिक है, परंतु इसका सबसे अधिक प्रभाव चीन वियतनाम, मेक्सिको, कंबोडिया और बांग्लादेश जैसे देश पर पड़ने वाला है । इस नीति से अमेरिका चीन की सामरिक शक्ति पर अंकुश लगाने और दुनिया में उसके दबदबे  को कमजोर करना चाहता है लेकिन दो आर्थिक शक्तियों के बीच वर्चस्व की इस जंग का असर विश्व में विभिन्न देशों के बीच सप्लाई चैन को बड़े पैमाने पर प्रभावित करेगा ।

ट्रंप के इस कदम से वैश्विक स्तर पर मंदी की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है । भारत पर भी इसका असर देखने को मिलेगा क्योंकि भारत में विनिर्माण क्षेत्र के अधिकांश उत्पाद चीन से आयात किए जाते हैं इससे स्पष्ट है कि चीन से आयात होने उपकरण महंगे होने पर यहां निर्मित हो रही वस्तुओं के दाम बढ़ सकते हैं । हालांकि चीन डंपिंग नीति के तहत भारत सहित अन्य देशों के साथ व्यापार बढ़ा सकता है परंतु डंपिंग नीति के सहारे अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में कई तरह की चुनौतियाँ होंगीl

उन्होंने कहा कि इस नीति का हल आर्थिक विश्लेषण से अधिक राजनीतिक फलक पर ढूंढना होगा और इसमें विश्व व्यापार संगठन को  महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगीl

इस अवसर पर प्रोफेसर मानस पांडे विभागाध्यक्ष, व्यावसायिक अर्थशास्त्र विभाग ने विषय प्रवर्तन एवं मुख्य वक्ता का स्वागत करते हुए आज के परिप्रेक्ष्य में विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला । कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ आशुतोष कुमार सिंह ने किया। 

इस अवसर पर विभाग के समस्त शिक्षक डॉ राकेश उपाध्याय डॉ निशा पांडे, डॉ अंजनी, डॉ सुशील सिंह, सुश्री दीपांजलि, श्री हर्ष, श्री प्रिंस एवम् विद्यार्थी उपस्थित रहे ।


Wednesday, 16 April 2025

जल बचाने की मुहिम में जन भागीदारी जरूरी: प्रो. एम.पी. सिंह


पीयू में जल संचयन- जन भागीदारी के अंतर्गत विशेष व्याख्यान का हुआ आयोजन

जौनपुर. वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग द्वारा जल संचयन- जन भागीदारी के अंतर्गत विशेष व्याख्यान  का आयोजन किया गया. विशेष व्याख्यान में बतौर मुख्य वक्ता  इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रयागराज के  बायोटेक्नोलॉजी विभाग के प्रो. एम.पी सिंह ने जल के महत्व को रेखांकित किया. उन्होंने  कहा कि जल बचाने की मुहिम में जन भागीदारी जरूरी है. जल को बचाने की जिम्मेदारी हर व्यक्ति की है.

उन्होंने कहा कि प्रतिवर्ष पहले की तुलना में कम वर्षा हो रही है ऐसी स्थिति में हमें कृत्रिम पुनर्भरण संरचनाओं के निर्माण हेतु कार्य करने की जरूरत है.  वर्षा ऋतु में आने वाले जल के संरक्षण और उनके सतत प्रबंधन के साथ-साथ भूगर्भ जल का कम से कम दोहन करना होगा.

प्रो. सिंह ने बताया कि भारत  मे प्रति व्यक्ति जल की उपलब्धता 1513 क्यूबिक मीटर संकट को दर्शाता है. जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाला समय बहुत ही भयावह होगा, आपदाओं का सामना करना पड़ेगा, नदियों का जलस्तर भी  घटेगा. इससे कृषि और पेयजल प्रभावित होगा इसलिए हमें निरंतर जल संचयन एवं वृक्षारोपण करने की जरूरत है. इन प्रयासों से हम भविष्य की समस्याओं से निजात पा सकेंगे.

इस अवसर पर प्रो.रामनारायण ने कहा कि वर्षा जल संरक्षण से भूजल स्तर को बढ़ाने के उपायों को सुझाया. कहा कि जल स्रोतों के संरक्षण से प्रकृति का संरक्षण होगा.

इस अवसर  पर जल संचयन- जन भागीदारी के नोडल अधिकारी, पर्यावरण विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. विवेक कुमार पाण्डेय द्वारा अतिथियों का स्वागत करते हुए विषय प्रवर्तन किया गया. इस अवसर पर  विज्ञान संकाय के  डॉ. एस.पी. तिवारी, डॉ. दीपक कुमार समेत अन्य उपस्थित रहे. धन्यवाद ज्ञापन छात्रा वर्षा यादव एवं कार्यक्रम का संचालन अंकिता यादव ने किया.