Friday, 16 October 2026

ड्रोन तकनीक में नवाचार से खुलेंगे नए अवसर: कुलपति


सी-डैक, नोएडा के वैज्ञानिकों ने दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण
पाँच दिवसीय ड्रोन तकनीक कार्यशाला का समापन

 पूर्वांचल विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग में आयोजित पाँच दिवसीय ड्रोन तकनीक कार्यशाला का समापन समारोह शुक्रवार को संपन्न हुआ। कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों ने ड्रोन की असेंबलिंग, उसके विभिन्न घटकों की कार्यप्रणाली, उड़ान भरने तथा नियंत्रण की तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया।
 विद्यार्थियों के लगन से खुश होकर आए वैज्ञानिकों ने विश्वविद्यालय को एक ड्रोन उपहार में दिया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर. के. सिंह ने कहा कि ड्रोन तकनीक आज केवल तकनीकी प्रयोग का विषय नहीं है, बल्कि कृषि, आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवा, पर्यावरण संरक्षण एवं राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में देश की प्रगति का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को इस प्रकार के प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान का उपयोग नई परियोजनाएँ विकसित करने, अनुसंधान करने और समस्याओं के स्थानीय समाधान खोजने के लिए करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों को लगातार आगे बढ़ाएगा, ताकि विद्यार्थी अपने ही परिसर में आधुनिक तकनीक सीखने तथा विशेषज्ञों से सीधे संवाद करने का अवसर प्राप्त कर सकें। कुलपति ने सी-डैक, नोएडा के वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों के योगदान की सराहना की और कहा कि ऐसी कार्यशालाएँ विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तकनीकी आत्मविश्वास तथा नवाचार की भावना विकसित करती हैं।
पाँच दिनों तक चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विद्यार्थियों को व्याख्यान, प्रस्तुतियों, हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण तथा प्रायोगिक गतिविधियों के माध्यम से ड्रोन तकनीक के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई। 
कार्यशाला के अंतिम दिन सी-डैक, नोएडा की वैज्ञानिक डॉ. कल्पना जौहरी ने विद्यार्थियों को विभिन्न उपकरणों के मध्य संचार के नियमों तथा संचार स्थापित होने की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया। अन्य विशेषज्ञों में श्रीमती ईशा गुप्ता, श्रीमती किरण वालिया एवं श्री देवेश वर्मा ने प्रस्तुतियों और प्रायोगिक प्रदर्शनों के माध्यम से विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी विकास से अवगत कराया।
कार्यशाला में बताया गया कि वर्तमान समय में ड्रोन का उपयोग कृषि, फसल निगरानी, आपदा प्रबंधन, भौगोलिक सर्वेक्षण, पर्यावरण संरक्षण, औद्योगिक निरीक्षण, चिकित्सा सामग्री की आपूर्ति तथा रक्षा क्षेत्र सहित अनेक क्षेत्रों में किया जा रहा है। कार्यशाला के समापन पर एक घंटे की परीक्षा के परिणाम के आधार पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र एवं शील्ड प्रदान की गई। कार्यशाला का समन्वय डॉ. प्रवीण सिंह एवं डॉ. ज्योति सिंह ने किया, जबकि समापन समारोह का संचालन पूनम सोनकर ने किया। 
कार्यक्रम में प्रो. रवि प्रकाश,डॉ. अजय मौर्या, पी. सी. यादव, प्रीति शर्मा, डॉ. रितेश बरनवाल, तुषार श्रीवास्तव, डॉ. विशाल यादव, शैलेश प्रजापति, डॉ. संतोष त्रिपाठी, डॉ. पारुल त्रिवेदी, डॉ. जया शुक्ला, श्री अनुराग एवं श्री सुधीर सिंह उपस्थित रहे।