Sunday, 29 March 2026

भविष्य की जरूरत केवल डिग्री नहीं, विजन और कौशल से मिलेगी सफलता- प्रो. रुम्की बनर्जी

दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न, विशेषज्ञों ने रखे विचार
जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में “कॉर्पोरेट कार्यप्रणाली में उभरते मुद्दे एवं चुनौतियां” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन रविवार को आर्यभट्ट सभागार में हुआ। इस दौरान प्रबंधन, नेतृत्व, डिजिटल अर्थव्यवस्था और कौशल विकास जैसे समकालीन विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। विभिन्न तकनीकी सत्रों में शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत कर अकादमिक विमर्श को समृद्ध किया।
समापन सत्र में केके विश्वविद्यालय, नालंदा की प्रति कुलपति प्रो. रुम्की बनर्जी ने कहा कि आज का वैश्विक कॉर्पोरेट जगत ‘डिग्री-फर्स्ट’ से आगे बढ़कर ‘स्किल-फर्स्ट इकोनॉमी’ की ओर अग्रसर है, जहाँ व्यावहारिक कौशल और विजन को अधिक महत्व दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव के बावजूद जटिल समस्याओं के समाधान के लिए मानवीय संवेदना और रचनात्मक सोच अनिवार्य है।
बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ के प्रो. कुशेन्द्र मिश्रा ने कहा कि केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है, बल्कि उद्योग की मांग के अनुरूप कौशल विकास आवश्यक है। उन्होंने बेरोजगारी की समस्या को कौशल की कमी से जोड़ते हुए व्यावहारिक ज्ञान पर बल दिया।
“नेतृत्व एवं सुशासन” विषय पर आयोजित सत्र की अध्यक्षता पूर्व कुलपति प्रो. पी.सी. पतंजलि ने की। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्था की प्रगति उसके प्रभावी नेतृत्व और सुशासन पर निर्भर करती है। प्रो. एच.सी. पुरोहित ने विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में मजबूत नेतृत्व की भूमिका को रेखांकित किया। इस सत्र में बी.एल. आर्य विशिष्ट अतिथि रहे तथा प्रो. प्रदीप कुमार सह-अध्यक्ष के रूप में उपस्थित रहे।
दूसरे तकनीकी सत्र में “कार्य और बाजार का भविष्य: मानव संसाधन प्रबंधन, कृषि-व्यवसाय, ई-वाणिज्य एवं व्यावसायिक अर्थशास्त्र का समन्वय” विषय पर चर्चा हुई। सत्र की अध्यक्षता प्रो. अजय वाघ ने की। उन्होंने बदलते कार्यपरिवेश और मानव संसाधन प्रबंधन के बीच संतुलन की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं प्रो. अमित सिंह ने भारतीय ज्ञान परंपरा को कॉर्पोरेट चुनौतियों के समाधान का आधार बताया।
संगोष्ठी के अंतर्गत “डिग्री बनाम कौशल,प्रतिभा की दौड़ में कौन जीतेगा” विषय पर एक महत्वपूर्ण पैनल चर्चा भी आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता प्रो. वी.के. सिंह ने की। 
अंत में संयोजक प्रो. अविनाश पाथर्डीकर ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया एवं आयोजन सचिव डॉ. आशुतोष सिंह ने रिपोर्ट प्रस्तुत की. सत्रों का संचालन डॉ. रसिकेश एवं डॉ. सुशील कुमार ने किया. इस अवसर पर  प्रो. अजय द्विवेदी, प्रो. मुराद अली, प्रो. एस के सिन्हा, डॉ. अमित वत्स, डॉ. अन्नू त्यागी समेत विभिन्न भागों से आये प्रतिभागी उपस्थित रहे।

संगीत संध्या ‘उमंग’ में सुरों की छटा बिखरी, कलाकारों ने बांधा समां


जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में शनिवार की शाम “संगीत संध्या उमंग” का आयोजन अवेद्यनाथ संगोष्ठी भवन में अत्यंत भव्य एवं संगीतमय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में गायिका पल्लवी मुखर्जी की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। वहीं विश्वविद्यालय के वित्त अधिकारी आत्मप्रकाश धर द्विवेदी ने भी अपनी प्रस्तुति से खूब तालियां बटोरीं।
सांस्कृतिक संध्या के दौरान पल्लवी ने एक से बढ़कर एक गीतों और ग़ज़लों की श्रृंखला प्रस्तुत की, जिसमें “होश वालों को खबर क्या”, “आज जाने की जिद न करो”, “लग जा गले”, “अजी रूठ कर”, “मोह मोह के धागे” और समापन में “कबिरा” जैसे लोकप्रिय गीत शामिल रहे। 
इस अवसर पर संगतकारों के रूप में ऑर्गन पर  राहुल, ढोलक पर सुनील, तबला पर डॉ. अवधेश तथा ऑक्टोपैड पर आशुतोष एवं गिटार पर  सविक मुखर्जी ने अपनी सधी हुई संगत से कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए। कार्यक्रम के अंत में कुलपति प्रोफेसर वंदना सिंह एवं पूर्व कुलपति प्रोफेसर पी.सी. पतंजलि द्वारा कलाकारों को अंगवस्त्र व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन सांस्कृतिक संध्या की संयोजक डॉ. अन्नू त्यागी ने किया।
शिक्षकगण, छात्र-छात्राएं एवं अन्य गणमान्य लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और सभी ने इस सुरमयी संध्या का भरपूर आनंद लिया।

Saturday, 28 March 2026

पूर्वांचल विश्वविद्यालय में शांति और सौहार्द के लिए गूँजा 'वसुधैव कुटुंबकम'


5 मिनट के लिए सभी ने की सामूहिक प्रार्थना

​जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के परिसर में आज एक अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला, जब कुलपति प्रोफेसर वंदना सिंह की एक भावुक अपील पर पूरा विश्वविद्यालय परिवार एकजुट हो गया। वैश्विक अशांति और तनाव के दौर में मानवीय मूल्यों को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से, कुलपति के निर्देशानुसार विश्वविद्यालय के समस्त विभागों में शनिवार को 'शांति एवं सौहार्द' के लिए सामूहिक प्रार्थना और ध्यान का आयोजन किया गया। इस दौरान शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियां कुछ समय के लिए थम गईं और परिसर सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर नजर आया।
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कुलपति प्रोफेसर वंदना सिंह ने इस आयोजन के लिए जारी अपने विशेष संदेश में वर्तमान विश्व की परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया के विभिन्न हिस्सों में अशांति और असहिष्णुता का वातावरण है, तब भारतीय ज्ञान परंपरा का 'वसुधैव कुटुंबकम' का संदेश ही मानवता को सही दिशा दिखा सकता है। कुलपति ने इसे एक 'पुनीत कार्य' बताते हुए कहा कि शांति और भाईचारे के मूल्यों को सुदृढ़ करना हम सभी का नैतिक कर्तव्य है।

निर्धारित समय पर विश्वविद्यालय के विद्यार्थी, शिक्षक, अधिकारी और कर्मचारी अपने-अपने कार्यस्थलों पर एकत्र हुए। कुलपति की अपील का पालन करते हुए सभी ने 5 मिनट का सामूहिक प्रार्थना-ध्यान किया। कुलपति के संदेश को दोहराते हुए यह साझा किया गया कि यह प्रार्थना न केवल मन को शांति प्रदान करेगी, बल्कि विचारों में एकता और सकारात्मकता का संचार भी करेगी।विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों एवं विभागों में इस कार्यक्रम को लेकर विशेष उत्साह देखा गया।

मानव से मशीन तक: बदलती दुनिया में एआई बना नई प्रतिस्पर्धा का केंद्र- प्रो. योगेश उपाध्याय


डिजिटल परिवर्तन के दौर में नवाचार और समन्वय की आवश्यकता: प्रो. वंदना सिंह

विश्वविद्यालय में 'भारतीय कॉर्पोरेट कार्यप्रणाली में उभरते मुद्दे और चुनौतियां' विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन
दो दिवसीय आयोजन में देश भर से जुटे विद्वान

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में “कॉरपोरेट प्रणाली में उभरते मुद्दे एवं चुनौतियां” विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी की शुरुआत शनिवार को विश्वविद्यालय के अवैद्यनाथ संगोष्ठी भवन में हुई । इस संगोष्ठी में देशभर से आए शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं उद्योग विशेषज्ञों ने भाग लिया और समकालीन विषयों पर अपने विचार साझा किए।
उद्घाटन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि आईटीएम विश्वविद्यालय, ग्वालियर के कुलपति प्रो. योगेश उपाध्याय ने कहा कि  आज विश्व भारतीय प्रतिभा को सम्मान दे रहा है, परंतु साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता  के बढ़ते प्रभाव ने नई चुनौतियों को जन्म दिया है। भारतीय समाज में ईमानदारी और आपसी विश्वास की सुदृढ़ परंपरा रही, किंतु समय के साथ इसमें गिरावट आई है, जिस पर गंभीर आत्ममंथन आवश्यक है।
उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि पहले श्रम की आवश्यकता के लिए लोगों को विभिन्न देशों में भेजा गया, बाद में मशीनों ने मानव श्रम का स्थान लिया और अब बुद्धिमत्ता के स्तर पर भी प्रतिस्पर्धा तीव्र हो गई है। उनके अनुसार, यह प्रतिस्पर्धा केवल मनुष्य और मशीन के बीच नहीं, बल्कि एक नई “प्रजाति” के उभरने का संकेत है, जिसका प्रभाव भविष्य में जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में दिखाई देगा। कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता  के माध्यम से व्यक्तिगत स्तर पर रचनात्मकता और नवाचार को बल मिला है, जिससे लोग कम समय में अनेक नए विचार उत्पन्न कर पा रहे हैं। हालांकि, समूह स्तर पर इसके उपयोग से कार्यों में एकरूपता बढ़ रही है, जिससे मौलिकता और विविधता प्रभावित होने की आशंका भी है।
अध्यक्षीय संबोधन में विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने कहा कि आज का समय डिजिटल परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और बदलते कार्यबल की चुनौतियों से भरा है, जो नवाचार और उत्तरदायी नेतृत्व के नए अवसर भी देते हैं। उन्होंने संगठनात्मक उत्कृष्टता के लिए विभिन्न प्रबंधन क्षेत्रों के समन्वय पर बल दिया और कॉरपोरेट क्षेत्र को आर्थिक विकास के साथ सामाजिक परिवर्तन का भी प्रमुख माध्यम बताते हुए शिक्षा, उद्योग और नीति-निर्माताओं के बीच संवाद की आवश्यकता बताई।
विशिष्ट अतिथि निदेशक, प्रबंधन संस्थान, बीएचयू  प्रो. आशीष बाजपेई ने कहा कि भारतीय कॉरपोरेट सेक्टर अच्छा काम कर रहा है, लेकिन आज विश्वसनीयता का ह्रास चिंता का विषय है। उन्होंने कहा  कि धर्म से दूरी के कारण कॉरपोरेट और उपभोक्ता के बीच विश्वास कम हुआ है। ऐसे में कॉरपोरेट नेतृत्व की सोच सकारात्मक और नैतिक होना जरूरी है।
इसी क्रम में अतिथि प्रो. एस. रामनाथन, पूर्व डीन प्रबंधन, अन्नामलाई विश्वविद्यालय, चेन्नई ने कहा कि लाभ ही व्यवसाय का एकमात्र उद्देश्य नहीं होना चाहिए। प्रत्येक संगठन चाहे वह गाँव की छोटी सहकारी समिति हो या बड़ी कंपनी को अपने वित्त का कुशल प्रबंधन करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट फाइनेंस, व्यावसायिक अर्थशास्त्र एवं नीतियों में सरकार और व्यवसाय के समन्वय की भूमिका महत्वपूर्ण है। संगोष्ठी में प्लेनरी व्याख्यान आयोजित हुए जिसमें आईआईआईटी, प्रयागराज   प्रो. रंजीत  सिंह ने कहानी के माध्यम से स्पष्ट किया कि कृतिम बुधिमत्ता स्वयं ज्ञानी नहीं है, बल्कि यह मानव द्वारा दिए गए डेटा पर निर्भर करता है। तकनीकी सत्रों में देश के विभिन्न भागों से आये हुए प्रतिभागियों ने शोध पत्र प्रस्तुत किया.
स्वागत एवं विषय प्रवर्तन संयोजक प्रो. अविनाश डी. पाथर्डीकर ने किया। कार्यक्रम का संचालन आयोजन सचिव डॉ. आशुतोष के. सिंह ने किया।
इस अवसर पर पूर्व कुलपति प्रोफेसर पीसी पतंजलि, प्रो. अजय द्विवेदी, प्रो. मुराद अली, प्रो. अजय प्रताप सिंह, प्रो. मनोज मिश्र, प्रो. एच सी पुरोहित, प्रो. एस के सिन्हा, प्रो. अजय वाघ, प्रो. अमित सिंह, प्रो. रुम्की बनर्जी, प्रो. खुशेन्द्र मिश्र, प्रो. संदीप सिंह, प्रो. रजनीश भास्कर, प्रो. प्रदीप कुमार,  डॉ. बीएल आर्य, डॉ. सुशील कुमार, डॉ. रसिकेश, डॉ. अन्नू त्यागी  समेत अन्य प्रतिभागी उपस्थित रहे.