Saturday, 26 September 2026

सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं, अभ्यास ही असली कुंजी : प्रो. आर.के. सिंह

पीयू के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग में फ्रेशर्स पार्टी का आयोजन
जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग संकाय के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग में रविवार को आर्यभट्ट सभागार में नवागंतुक विद्यार्थियों के स्वागत में फ्रेशर्स पार्टी का आयोजन किया गया।  

 मुख्य अतिथि के रूप में कुलपति प्रोफेसर आरके सिंह ने  नवागंतुक विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए उन्हें परिश्रम, अनुशासन और निरंतर अभ्यास के माध्यम से जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की वास्तविक पहचान उसके भव्य भवनों, आधुनिक प्रयोगशालाओं, शिक्षकों अथवा कर्मचारियों की संख्या से नहीं, बल्कि वहां अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों की उपलब्धियों, उनके आचरण, ज्ञान और सामाजिक योगदान से होती है। विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा उसके विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और कृतित्व से निर्मित होती है। विद्यार्थी जब अपनी प्रतिभा, परिश्रम और नैतिक मूल्यों के बल पर जीवन में सफलता अर्जित करते हैं, तो उससे न केवल उनका परिवार और समाज गौरवान्वित होता है, बल्कि उनके शिक्षण संस्थान का नाम भी रोशन होता है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में प्रवेश लेना जीवन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन इसे अंतिम लक्ष्य नहीं समझना चाहिए। यह एक नई यात्रा की शुरुआत है, जहां विद्यार्थियों को अपने ज्ञान, कौशल और व्यक्तित्व को निरंतर विकसित करना है। इंजीनियरिंग जैसे व्यावहारिक एवं तकनीकी विषय में सफलता प्राप्त करने के लिए कक्षा में प्राप्त सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ प्रयोगशाला में अभ्यास, तकनीकी दक्षता और समस्याओं के समाधान की क्षमता विकसित करना आवश्यक है।

कुलपति ने विद्यार्थियों को सफलता का मंत्र देते हुए ‘पीपीपी मॉडल’ यानी ‘प्रैक्टिस, प्रैक्टिस और केवल प्रैक्टिस’ का सूत्र दिया। उन्होंने कहा कि निरंतर अभ्यास ही किसी व्यक्ति को अपने कार्य में दक्ष बनाता है। केवल ज्ञान प्राप्त कर लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस ज्ञान को व्यवहार में उतारना और बार-बार अभ्यास के माध्यम से उसमें निपुणता हासिल करना जरूरी है। अभ्यास से आत्मविश्वास बढ़ता है, गलतियों को सुधारने का अवसर मिलता है और कठिन से कठिन लक्ष्य को प्राप्त करने की क्षमता विकसित होती है।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपनी कमजोरियों को पहचानें, उनसे घबराने के बजाय उन्हें दूर करने का प्रयास करें। असफलता को सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा मानें और प्रत्येक चुनौती को स्वयं को बेहतर बनाने के अवसर के रूप में स्वीकार करें। नियमित अध्ययन, समय का सदुपयोग, अनुशासन और निरंतर प्रयास को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। तकनीकी शिक्षा के विद्यार्थियों को बदलती तकनीक और उद्योग जगत की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार करना चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विभागाध्यक्ष प्रो. रजनीश भास्कर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए अपने जीवन-संघर्ष से जुड़ा प्रेरक प्रसंग साझा किया। उन्होंने बताया कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है और संघर्ष ही व्यक्ति को अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ बनाता है। 
कार्यक्रम में डा. लक्ष्मी मौर्य एवं शिवांग सहित विभाग के शिक्षक डॉ. सत्यम उपाध्याय, डॉ. सौरभ कुमार, डॉ. जया शुक्ला, डॉ. अनुराग सिंह, डॉ. मनीष गुप्ता, डॉ. श्वेता सिंह, शरद चन्द्र और धर्मेन्द्र यादव प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।