Wednesday, 24 June 2020

गांव को सशक्त करना समय की मांग-कुलपति



रोवर्स रेंजर्स द्वारा वेबिनार का किया गया आयोजन


वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल के रोवर्स रेंजर्स द्वारा बदलते परिवेश में रोवर्स रेंजर्स  युवाओं की भूमिका एवं विश्वविद्यालय विषयक वेबिनार का आयोजन बुधवार को किया गया।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ राजाराम यादव ने कहा कि अगर हमारे देश के गांव आर्थिक, सामाजिक, शैक्षिक व चिकित्सकीय सुविधा से पूर्ण संपन्न हो जाए तो हमारा देश सशक्त हो जाएगा। उन्होंने कहा कि इस महामारी के दौर में महानगरों नौकरी करने को गए तमाम लोग गांव की तरफ लौटे क्योंकि उन्हें लगता है कि उनका जीवन गांव में सुरक्षित है।

उन्होंने कहा कि संसार में वही पूजा जाता है जिसमें समाज के प्रति सेवा भावना होती है। उन्होंने पन्नाधाय का उदाहरण देते हुए सेवा व समर्पण के भाव को समझाया. विशिष्ट वक्ता
प्रादेशिक संगठन आयुक्त राजेंद्र सिंह हंसपाल ने कहा कि आज के दौर में पर्यावरण संरक्षण युवाओं की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने प्लास्टिक का त्याग करने की अपील की।
प्रादेशिक प्रशिक्षण आयुक्त लखनऊ अरविंद कुमार श्रीवास्तव ने कहा  रोवर्स रेंजर्स से जुड़े हुए युवा सामाजिक चुनौतियों को स्वीकार करें।
स्वागत भाषण एवं विषय प्रवर्तन रोवर्स रेंजर्स के संयोजक डॉ जगदेव ने किया। संचालन डॉ अनुराग मिश्र तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ शफीउज्जमा ने किया। वेबीनार में तकनीकी सहयोग  डॉ नितेश जायसवाल, रामांशु, डॉ धीरेंद्र चौधरी एवं प्रभाकर सिंह द्वारा दिया गया।

Tuesday, 23 June 2020

राष्ट्रीय सेवा योजना की चुनौतियां एवं पूर्वांचल विश्वविद्यालय विषयक वेबिनार का हुआ आयोजन


गाँव - गाँव जाकर लोगों की समस्याओं का करे निदान 

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा मंगलवार को बदलते परिवेश में राष्ट्रीय सेवा योजना की चुनौतियां एवं पूर्वांचल विश्वविद्यालय विषयक वेबिनार का आयोजन किया गया.
वेबिनार में कुलपति प्रोफेसर डॉ राजाराम यादव ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक सेविकाओं, कार्यक्रम अधिकारियों ने अपने समर्पण से विश्वविद्यालय का मान बढ़ाया है।
उन्होंने कहा कि महामारी के इस दौर में विश्वविद्यालय परीक्षेत्र में स्वयंसेवक सेविकाओं ने एक लाख से अधिक मास्क, 79 हजार से अधिक लंच पैकेट एवं 81 हजार से अधिक साबुन और सेनेटाइजर वितरित किये।
उन्होंने कहा कि कि भारतीय संस्कृति में संक्रमण से बचाव का संदेश निहित है। हमें  उपभोक्तावादी संस्कृति को छोड़ना होगा।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थी गांव- गांव में जाकर खुशहाली के दीप जलाएं। एक- एक  गांव, परिवार, प्रत्येक सदस्य के पास जाना होगा और उनकी समस्याओं को दूर करने का प्रयास करना होगा। हम होंगे कामयाब एक दिन गीत  से स्वयंसेवक सेविकायें प्रेरणा लेकर आगे बढ़े।
क्षेत्रीय निदेशक, राष्ट्रीय सेवा योजना डॉ अशोक कुमार श्रोती ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयं सेवक सेविकाओं ने इस कठिन दौर में भी निरन्तर समाज में सेवा का काम किया है. इससे उनका मान बढ़ा है, सम्मान मिला है. विशेष कार्याधिकारी एवं राज्य संपर्क अधिकारी डॉ. अंशुमाली शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना से जुड़े विद्यार्थियों ने कोरोना काल में जो  कार्य किया है उससे प्रदेश में एक  अलग पहचान बनी है. 
स्वागत भाषण एवं विषय प्रवर्तन कार्यक्रम समन्वयक राष्ट्रीय सेवा योजना डॉ राकेश कुमार यादव ने किया।
नोडल अधिकारी डॉ अजय सिंह, डॉ उदयभान यादव,डॉ घनश्याम पटेल,डॉ अमित यादव ने भी अपने विचार व्यक्त किये।
धन्यवाद ज्ञापन किया डॉ. नितेश जयसवाल एवं   वेबिनार संचालन डॉ अनुराग मिश्र ने किया। टेक्निकल सपोर्ट टीम में डॉ. धीरेंद्र चौधरी, रामांशु, प्रभाकर सिंह शामिल रहे।

Thursday, 18 June 2020

पूर्वांचल विश्वविद्यालय के दो शिक्षकों को यू जी सी से मिली 10-10 लाख की शोध ग्रांट*



रसायन विज्ञान विभाग के डा.अजीत सिंह पानी से हाइड्रोजन गैस उत्पादन के उत्प्रेरकों पर करेगें शोध
भू एवं ग्रहीय विज्ञान विभाग के डा. नीरज अवस्थी सरस्वती नदी एवं सिंधु-हड़प्पा सभ्यता पर करेगें शोध

जौनपुर. वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय परिसर स्थित प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भइया) भौतिकीय विज्ञान अध्ययन एवं शोध संस्थान के रसायन विज्ञान विभाग के डा. अजीत सिंह एवं भू एवं ग्रहीय विज्ञान विभाग के   डा. नीरज अवस्थी को विश्विद्यालय अनुदान आयोग से बहुप्रतिष्ठित स्टार्ट - अप ग्रांट के अंतर्गत शोध हेतु 10-10 लाख रूपये का अनुदान मिला है । इस  प्रोजेक्ट की शोध की अवधि दो वषों की होगी ।

इसके अंतर्गत रसायन विज्ञान विभाग के डा.अजीत सिंह पानी से हाइड्रोजन गैस उत्पादन के उत्प्रेरकों पर शोध करेगें । उन्होंने बताया कि हाइड्रोजन स्वच्छ एवं नवीकरण ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है एवं विश्व के कई संस्थान पानी से हइड्रोजन उत्पादन की दिशा में काम कर रहे है । इसके पूर्व में डा. अजीत सिंह को  विज्ञान एवं प्रौद्योगोकी मंत्रालय की तरफ से 53 लाख का शोध ग्रांट मिला है ।
वहीं भू एवं ग्रहीय विज्ञान विभाग के डा. नीरज अवस्थी " यमुना नदी के पथ विस्थापन का सरस्वती नदी एवं सिंधु-हड़प्पा सभ्यता पर प्रभाव" विषय पर शोध करेगें । डा. अवस्थी ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत इस विषय  पर शोध किया जायेगा कि क्या वर्तमान यमुना नदी प्राचीन काल में कभी सरस्वती नदी ( जो कि हरियाणा-राजस्थान में बहती थी) की सहायक नदी थी एवं क्या यमुना नदी का अपने पूर्व पथ से भटकाव ही सिंधु-हड़प्पा सभ्यता के पतन का कारण बना ।
पिछले एक वर्ष में रज्जू भइया संस्थान के शिक्षकों को भारत सरकार के विश्वविद्यालय अनुदान आयोग तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगोकी मंत्रालय की तरफ से 4 शोध प्रोजेक्ट मिले हैं जो  80 लाख रूपये से अधिक है। इस दौरान संस्थान के शिक्षकों द्वारा 40 से अधिक शोध पत्र विश्व के बहुप्रतिष्ठित जर्नल्स में प्रकाशित जा चुके हैं । इस मौके पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डा. राजराम यादव ने सभी शिक्षकों को बधाई दी तथा यह उम्मीद जताई की भविष्य में रज्जू भइया संस्थान विज्ञान के क्षेत्र में पूर्वांचल विश्वविद्यालय को विश्व पटल पर स्थापित करेगा । रज्जू भइया सस्थान के निदेशक प्रो. देवराज सिंह एवं समस्त शिक्षकों ने  डा. अजीत सिंह तथा  डा. नीरज अवस्थी को बधाई दी ।

Monday, 15 June 2020

एडवांस फंक्शनल मैटेरियल पर तीन दिवसीय ऑनलाइन अंतर्राष्ट्रीय

कोविड से लड़ने में ग्राफीन मैटेरियल सहायक: प्रो अविनाश

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय स्थित रज्जू भैया संस्थान के नवीकरण ऊर्जा केंद्र द्वारा एडवांस फंक्शनल मैटेरियल  एवं आप्टोइलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन शनिवार को देर शाम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुआ।
प्रथम दिन के उद्घाटन सत्र में सीएसआइआर भोपाल के निदेशक डॉ अविनाश चंद्र श्रीवास्तव ने नैनो मैटेरियल तथा इससे संबंधित अन्य पदार्थों के बारे में विस्तृत रूप से चर्चा की। उन्होंने बताया कि कैसे ग्राफीन बेस्ड मैटेरियल कोरोना वायरस के डायग्नोस्टिक किट बनाने तथा पीपीपी की बनाने में सहायक हो सकता है। इससे महामारी से लड़ने में सहायता मिल सकती है।
फोटोवोल्टिक इंस्टीट्यूट, टेक्निकल यूनिवर्सिटी दरमस्तब, जर्मनी के निदेशक प्रोफ़ेसर माइकल सिलाबे ने कम लागत तथा उच्च क्षमता के सोलर सेल डिवाइसों के बारे में बताया। आईआईटी दिल्ली के प्रो. नीरज खरे ने स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन में नैनोकंपोजिट मटेरियल के उपयोग के बारे में चर्चा की। पुणे विश्वविद्यालय के प्रो विलासराव तभाने ने सेमी कंडक्टर फोटोनिक डिवाइसेज के बारे में विस्तार से चर्चा की। कहां की इस डिवाइसेज की उपयोगिता वर्तमान समय में महत्वपूर्ण है।

उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता कर रहे कुलपति डॉ राजाराम यादव ने कहा कि फंक्शनल मटेरियल तथा आप्टोइलेक्ट्रिक डिवाइसेज का प्रयोग दिन पर दिन मानव जीवन में बढ़ रहा है। उन्होंने वैज्ञानिक समुदाय से अपील की वह कोविड-19 से लड़ने में सहायक नैनोमटेरियल बेस्ट डिवाइसेज बनाने का प्रयास करें।

इस ऑनलाइन सम्मेलन में भारत तथा 16 अन्य देश के 800 से अधिक प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। इस मौके पर रज्जू भैया संस्थान के निदेशक प्रो देवराज सिंह ने अतिथियों, वैज्ञानिकों तथा प्रतिभागियों का स्वागत किया । आयोजन के संयोजक डॉ धीरेंद्र चौधरी ने कांफ्रेंस की रूपरेखा के बारे में बताया जबकि सह संयोजक डॉ काजल डे ने धन्यवाद ज्ञापन किया । डॉ नितेश जायसवाल ने संगोष्ठी का संचालन किया। इस मौके पर संस्थान के शिक्षक डॉ प्रमोद यादव, डॉ गिरिधर मिश्रा, डॉ पुनीत धवन, डॉ सुजीत कुमार, डॉ अजीत सिंह व अन्य शिक्षक उपस्थित रहे। 

पेरोस्काइट सोलर सेल स्वच्छ ऊर्जा के प्रमुख स्रोत: डॉ महड़ी
नैनो वायर स्वच्छ ऊर्जा केलिए महत्वपूर्ण : प्रो भट्टाचार्य 

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय स्थित रज्जू भैया संस्थान के नवीकरण ऊर्जा केंद्र द्वारा एडवांस फंक्शनल मैटेरियल  एवं आप्टोइलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज पर आयोजित  ई-संगोष्ठी  के तीसरे दिन देश-विदेश के विभिन्न वैज्ञानिकों और प्रोफेसरों ने स्वच्छ ऊर्जा, नवीकरण ऊर्जा तथा सोलर ऊर्जा नैनोमेटेरियल तथा फंक्शनल मटेरियल के ऊपर महत्वपूर्ण व्याख्यान दिए ।
एमआईटी, यूएसए के शोध वैज्ञानिक डॉ महाड़ी तवाकोली ने उच्च क्षमता के पेरोस्काइट सोलर सेल की दिशा में हो रहे शोध कार्यों के बारे में विस्तृत रूप से चर्चा की तथा बताया कि आने वाले समय में सोलर सेल स्वच्छ ऊर्जा की अधिकांश मांग को पूरा करेंगे।
आईसर, कोलकाता के प्रो स्यान भट्टाचार्य ने जिंक आयन बैटरी आधारित बैटरी के उपयोग से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन पर विस्तृत रूप से चर्चा की। उन्होंने बताया की हाइड्रोजन ऊर्जा के उत्पादन में बाईकैटलिस्ट नैनोवायर महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते है।
आईआईटी कानपुर के प्रो सुंदर कुमार अय्यर ने फ्लेक्सिबल ऑर्गेनिक सोलर सेल के बारे में विस्तृत रूप से चर्चा की साथ ही साथ उन्होंने नेशनल सेंटर फॉर फ्लेक्सिबल इलेक्ट्रॉनिक आईआईटी कानपुर में चल रहे शोध को भी लोगों के साथ साझा किया ।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो लोकेंद्र कुमार, दीन दयाल पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी के डॉ पंकज यादव तथा पोलैंड एकेडमी ऑफ साइंसेज के डॉ डेनियल प्रोकोविच ने सोलर सेल के विकास तक विभिन्न आयामों पर विस्तृत रूप से चर्चा की तथा कहा कि आने वाले समय में सोलर सेल स्वच्छ ऊर्जा के प्रमुख स्रोत होंगे ।
आईओपी भुवनेश्वर के प्रो टी सोम, शिव नादर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर शंकर शरण, जेएनयू दिल्ली के प्रो. केदार सिंह, गुरु घासीदास विश्वविद्यालय विलासपुर के प्रो. पी के बाजपेई मटेरियल साइंस के विभिन्न आयामो के बारे में विस्तृत रूप से चर्चा की।
 संगोष्ठी के समापन समारोह में  संयोजक डॉ धीरेंद्र चौधरी ने बताया कि इस ऑनलाइन सम्मेलन में भारत समेत विश्व के 16 अन्य देशों के वैज्ञानिक व शोध छात्रों ने भाग लिया तथा 48 विषय विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण विषय पर अपने व्याख्यान दिए। आयोजन सचिव डॉ सुजीत कुमार ने बताया कि सम्मेलन में कुल 128 प्रतिभागियों ने अपने शोध कार्य को ऑनलाइन प्रस्तुत भी किया। डॉ काजल डे व डॉ नितेश जायसवाल ने संगोष्ठी का सफल संचालन किया । इस मौके पर रज्जू भैया संस्थान के निदेशक प्रो देवराज सिंह तथा डॉ प्रमोद यादव, डॉ गिरिधर मिश्रा, डॉ पुनीत धवन, डॉ अजीत सिंह व अन्य शिक्षक उपस्थित रहे।