Wednesday, 20 September 2017

DAINIK JAGRAN


ग्राम विकास एवं मानव एकात्मवाद पर हुई प्रतियोगिताएं

विश्वविद्यालय में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्मशती वर्ष के अंतर्गत बुधवार को अंत्योदय, ग्राम विकास एवं मानव एकात्मवाद विषयपर विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। जिसमें परिसर पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।
फार्मेसी संस्थान में पोस्टर, संकाय भवन में परिचर्चा, कविता पाठ, प्रबंध अध्ययन संकाय में स्लोगन लेखन एवं  विश्वेश्वरैया हाल में निबंध लेखन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया । 
कार्यक्रम के सहसमन्वयक डॉ राजेश शर्मा ने बताया कि प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान पाने वाले प्रतिभागियों को पंडित दीनदयाल उपाध्याय  के जन्मदिवस पर 25 सितंबर को पुरस्कृत किया जाएगा। 
प्रतियोगिता की विभिन्न गतिविधियों में डॉ मानस पांडे, डॉ राम नारायण, डॉ मनोज मिश्र, डॉ अजय द्विवेदी,डॉ रजनीश भास्कर, डॉ दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ अवधबिहारी सिंह ,डॉ सुनील कुमार , डॉ जे पी लाल,धर्मेंद्र सिंह, आलोक दास, डॉ रुश्दा आज़मी   समेत तमाम शिक्षक मौजूद रहे।

 मानव श्रृंखला बना दिया स्वच्छता का संदेश

विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना प्रकोष्ठ द्वारा बुधवार को स्वच्छता अभियान के अंतर्गत परिसर इकाई के स्वयंसेवक सेविकाओं को कार्यक्रम समन्वयक राकेश कुमार यादव ने स्वच्छता शपथ दिलवाई।
कार्यक्रम समन्वयक राकेश कुमार यादव ने कहा कि स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क काम करता है अगर हम अपनी सोच में स्वच्छता को रखेंगे तो हमें सदैव सकारात्मक उर्जा मिलती रहेगी।उन्होंने कहा कि आज हमें प्रण करने की जरूरत है कि कोई ऐसा कोई कृत्य नहीं करेंगे जिससे समाज में गंदगी फैले।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक सेविकाओं  ने राष्ट्रीय सेवा योजना भवन परिसर में साफ-सफाई की।इसके पश्चात भारत सरकार द्वारा निर्धारित स्वच्छता शपथ ली। कार्यक्रम अधिकारियों के साथ विद्यार्थियों ने एनएसएस भवन से विश्वविद्यालय के मुख्य  द्वार तक मानव श्रृंखला बनाकर स्वच्छता का संदेश दिया।कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम अधिकारी विनय कुमार वर्मा ने किया । इस अवसर पर डॉक्टर मनोज मिश्र,डॉक्टर दिग्विजय सिंह राठौर, सुधीर सिंह, पूजा सक्सेना, रघुनंदन, ज्ञानेश पाराशरी, रामजी सिंह समेत  तमाम लोग मौजूद रहे।

Monday, 11 September 2017

तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन


विश्वविद्यालय में चल रही ग्रोथ ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इन द कैंपस ऑफ पूर्वांचल यूनिवर्सिटी विषयक तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का रविवार को समापन हुआ। समापन सत्र में देश के विभिन्न भागों से आये हुए  प्रतिभागियों को कुलपति प्रोफेसर डॉ. राजाराम यादव ने स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया।  इस अवसर पर उन्होंने कहा कि इस  राष्ट्रीय कार्यशाला ने  विश्वविद्यालय में विज्ञान एवं तकनीकी के पाठ्यक्रमों के विकास एवं स्थापना की दिशा में   बड़ी भूमिका का निर्वहन किया  है।  उन्होंने देश के विभिन्न भागों से आए हुए अतिथियों को  सहभागिता के लिए उनका  धन्यवाद ज्ञापित किया।

 रविवार को आयोजित  सत्र में निस्केयर सीएसआईआर नई दिल्ली के निदेशक डॉ मनोज कुमार पटैरिया ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी की जानकारी को आम जन तक ले जाने का प्रयास सतत चले रहने चाहिए। विज्ञान संचार के लिए  स्थानीय भाषा एवं स्थानीय लोंगो की उपयोगिता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि  वैज्ञानिक साक्षरता एवं न्यूनतम विज्ञान की जानकारी और समझ विकसित कर के ही हम विज्ञान प्रसार के लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं।उन्होंने कहा कि स्वच्छ पेय जल का सेवन हमें अस्सी प्रतिशत बीमारियों से बचाता है।हमारे परंपरागत ज्ञान में पेय जल को  सूती कपड़े से छान कर पीने की परम्परा रही है। महंगे वाटर प्यूरीफायर की जगह हम परम्परागत आजमाए गए  तरीकों को अपनाकर बहुत सारी बीमारियों से बच सकते हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की  दैनिक जीवन में अहम भूमिका है। विज्ञान संचार से लोगों के जीवन स्तर को बदला जा सकता है। 

 काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर राजेंद्र कुमार सिंह ने क्लीन एनर्जी मेटेरियल एंड डिवाइसेस   विषय पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आज उर्जा का संरक्षण करने की जरूरत है इसके साथ ही पर्यावरण को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन द्वारा शीघ्र ही  उर्जा के लिए  हमें नए स्रोत  प्राप्त होंगे।
  
राजस्थान विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ सी.एस. पति त्रिपाठी ने नैनो मैटेरियल  फॉर रिन्यूवल एनर्जी एंड वाटर प्यूरिफिकेशन पर व्याख्यान दिया।  उन्होंने कहा कि आने वाले समय में उर्जा व  जल का   संकट गहराने जा रहा है।  हम आर ओ  वाटर का प्रयोग करते हैं जो कि बहुत शुद्ध पानी है। लेकिन इस इस से पानी की बर्बादी बहुत होती है।  आज नैनो मैटेरियल के माध्यम से जल की बर्बादी के बिना जल का शुद्धिकरण किया जा सकता है। 
 शहडोल से आए डॉक्टर गिरधर माथंकर  ने कहा कि विश्वविद्यालय में विज्ञान और तकनीकी के विकास के लिए इको फ्रेंडली कैंपस बनाने की जरूरत है।  आईटी का इस्तेमाल करके यहां की कार्य संस्कृति  में सुधार लाया जा सकता है।  उन्होंने गोमूत्र एवं नीम के उपयोग के बारे में बताया। 

केंद्रीय विश्वविद्यालय सारनाथ के   डॉ. प्रवीण प्रकाश ने कहा कि प्राचीन एवं मध्यकालीन भारत में चित्रकला बहुत ही समृद्ध रही है।  आज भारतीय सांस्कृतिक धरोहर में सांस्कृतिक पाठ्यक्रम  शुरू करने की जरूरत है। इससे भारतीय संस्कृति , इतिहास व कला के बारे में सही ज्ञान प्राप्त होगा  और सुदृढ़ सांस्कृतिक दृष्टिकोण बनेगा। 

 पुणे के  प्रो वीए  तभाने एवं इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर केपी सिंह ने भी विषय पर अपने विचार रखे। 
अंतिम सत्र  में  डिप्लोमा इन फार्मेसी, एम फार्मा, होम्योपैथिक, गौ  विज्ञान व फाइन  आर्ट्स  विषयों के प्रारंभ करने पर चर्चा हुई।  जिसमें डॉ. मनोज पटैरिया , डॉ ए के श्रीवास्तव, प्रो  वीए  तभाने  , डॉ गिरधर माथंकर, डॉ वाई पी  कोहली, डॉ पुनीत सिंह  एवं डॉ अजय द्विवेदी ने विचार विमर्श किया। 

विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ पीसी  पातंजलि ने पहले सत्र की अध्यक्षता की एवं संचालन प्रो बीबी  तिवारी ने किया। 

 इस अवसर पर डॉ अरविंद कुमार तिवारी, डॉ युधिष्ठिर यादव,डॉ अलोक गुप्त,डॉ देवराज सिंह ,प्रियंका अवस्थी ,डॉ प्रमोद यादव,डॉ अनिल यादव ,डॉ गिरिधर मिश्र,डॉ धर्मेंद्र सिंह ,डॉ राजीव प्रकाश सिंह,डॉ. समर बहादुर सिंह, डॉ. विजय कुमार सिंह,डॉ ए के श्रीवास्तव, डॉ. देवराज सिंह, डॉ. अजय प्रताप सिंह,  डॉ राजकुमार सोनी, डॉ. संतोष कुमार सहित प्रतिभागी मौजूद रहे। 

Saturday, 9 September 2017

ग्रोथ ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी विषयक कार्यशाला--- दूसरा दिन


विश्वविद्यालय में आयोजित ग्रोथ ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी विषयक  कार्यशाला के दूसरे दिन विशेषज्ञों ने  परिचर्चा सत्र में अपनी बात रखी। एमएससी  के पाठ्यक्रम निर्माण एवं  आधारभूत संरचना के विकास पर चर्चा हुई। विश्वेसरैया  हाल में इंदिरा गांधी सेंटर फॉर एटानामिक  एनर्जी कला पक्कम  के प्रोफेसर पी पलानीचामी  ने अल्ट्रासाउंड की  प्रारंभिक जानकारी देते हुए उसके अनुप्रयोगों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के समय अल्ट्रासाउंड आधारित पीजो इलेक्ट्रिक  डिवाइस का उपयोग हो रहा है।  अल्ट्रासाउंड के द्वारा अनाज के आकार व गुणवत्ता की जांच की जा रही है। पदार्थों का परीक्षण अल्ट्रासाउंड के द्वारा बिना स्वरूप परिवर्तन के संभव हो पाया है।  उन्होंने कहा कि अब सब्जियों के उत्पादन में कीटनाशकों की जगह नीम से निर्मित जैविक  कीटनाशकों का प्रयोग हो रहा है।  इससे सब्जियों की गुणवत्ता में वृद्धि हुई है।  पर्यावरण की सुरक्षा के लिए प्राकृतिक उत्पादों का उपयोग बड़े पैमाने पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में कई वनस्पतियों में जैविक खेती  को बढ़ावा देने की क्षमता है। ओएनजीसी के पूर्व महाप्रबंधक डॉक्टर पी के मिश्रा ने कहा कि किसी देश के अधोपतन के लिए आइटम बम या महामारी का उतना योगदान नहीं होगा जितना   उस देश की शिक्षा व्यवस्था के विनष्ट हो जाने पर।  उन्होंने कहा कि उत्पादों के उपभोग के क्षेत्र में भारत एशिया का तीसरा तीसरा सबसे बड़ा देश है जो पेट्रोलियम का उत्पादन व शोध कर रहा है। आने वाले समय में इसका और भी विस्तार होगा। उन्होंने भारत में पेट्रोलियम कंपनियों पर भी अपनी बात रखी। 
विज्ञान भारती के प्रदेश अध्यक्ष वाई पी  कोहली ने कहा की परंपरागत ज्ञान- विज्ञान को विज्ञान व तकनीकी के नए शोध कार्यों से जोड़ा जाए। हमें आम आदमी के दहलीज तक हम विज्ञान का प्रकाश लेकर जाना  हैं।  उन्होंने जौनपुर क्षेत्र के मक्के व मूली के उत्पादों के संरक्षण एवं विक्रय को आर्थिक विकास से जोड़कर  अपनी बात रखी। 
 आईआईटी  खड़कपुर  के डॉक्टर मेहरवान ने बिना दर्द के इंजेक्शन तकनीक के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि नैनो तकनीकी की सहायता से त्रिआयामी प्रिंटिंग के जरिए मरीजों को दर्द मुक्त  तरीके से इंजेक्शन देना संभव हो सका है।  इस क्षेत्र में हम बड़े स्तर पर काम कर रहे हैं। इस अवसर पर डॉक्टर मनोज पटैरिया, डॉक्टर वी ए तभाने , डॉक्टर शबाना शेख, डॉक्टर लोकेंद्र कुमार, डॉक्टर गिरिधर  ,प्रोफेसर रंजना प्रकाश, प्रोफेसर रामकृपाल, डॉक्टर देवराज सिंह, डॉक्टर शिवाकांत शुक्ला आदि उपस्थित रहे
कार्यशाला के द्वितीय सत्र में एमएससी भौतिकी ,रसायन एवं गणित विषय के पाठ्यक्रमों पर चर्चा की गई। इसके साथ ही कंप्यूटर  एप्लीकेशन में पीजी डिप्लोमा एवं बीसीए पाठ्यक्रम तैयार करने पर मंथन हुआ। इस सत्र में  प्रोफ़ेसर राम कृपाल,प्रो बलिराम एवं डॉ सत्यदेव ने  अपने विचार रखे ।तकनीकी सत्र को सबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के   पूर्व कुलपति डॉ पीसी पातंजलि ने कहा कि  विज्ञान एवं तकनीकी को   धरातल पर लाये बगैर   विकास की बात बेमानी है। उन्होंने कहा  कि  क्षेत्र विशेष की भावना का   सम्मान करते हुए पाठ्यक्रम में हिंदी भाषी विद्यार्थियों का ध्यान रखा जाय। उन्होंने समय की मांग को देखते हुए और भी विश्वविद्यालयों की स्थापना पर बल दिया। सत्र की अध्यक्षता लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो आर पी सिंह ने की।  कार्यशाला के अध्यक्ष प्रो बीबी तिवारी ने धन्यवाद ज्ञापन किया।