Friday, 13 October 2017

विश्वविद्यालय पहुचें बच्चों ने देखा लैब, लाइब्रेरी














रंजाकला के नदियापारा  प्राइमरी और पूर्व माध्यमिक विद्यालय की छात्र- छात्राएं  शुक्रवार को  वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में  शैक्षिक भ्रमण कार्यक्रम के अंतर्गत पंहुचें। विश्वविद्यालय के संकाय भवन के माइक्रोबायोलॉजी लैब ,क्लास रूम और विवेकानंद केंद्रीय पुस्तकालय को करीब से देखा। पहली बार विश्वविद्यालय पहुचें बच्चों ने तमाम जानकारियां हासिल की। 
माइक्रोबायोलॉजी लैब में इन बच्चों को विभाग के शिक्षक डॉ एस पी तिवारी और ऋषि श्रीवास्तव ने जीवाणुओं के बारे में बताया। इसके साथ ही माइक्रोस्कोप के माध्यम से बैक्टीरियाँ को दिखाया भी। विभाग के विद्यार्थियों ने बच्चों को साफ़ सफाई के टिप्स भी दिए। खेलने के बाद और खाना खाने के पहले हाथ धोने की आदत को जीवन से जोड़ने की बात बताई।बच्चों ने तमाम सवाल भी किये। 
विवेकानंद केंद्रीय पुस्तकालय में डॉ  विद्युत मल्ल ने बच्चों को भारतीय संविधान की मूल प्रति को दिखाते हुए उसके बारे में बताया। इसके साथ ही पुस्तकों, पत्रिकाओं और कंप्यूटर प्रयोग को भी बताया। उन्होंने बच्चों से कहा कि अगर जीवन में बड़ा बनाना है तो किताबें ही बड़ा आदमी बनाएगी। किताबों से दोस्ती करिये और अपनी किताबें रोज पढ़िए। 
शैक्षिक भ्रमण में बच्चों के साथ राजेश कुमार यादव, कमलेश सिंह, सुषमा पाल, सुभाष यादव, मुन्तशिर हुसैन, सीमा यादव, आशा सिंह, आराधना पाल, मीरा यादव, ज्योति जायसवाल शिक्षक मौजूद थे।  

Sunday, 8 October 2017

राम कथा का समापन

 विश्वविद्यालय के संगोष्ठी भवन में 4 अक्टूबर से चल रही पांच दिवसीय श्री  राम कथा अमृत वर्षा का समापन शनिवार को हुआ। प्रख्यात कथा  वाचक श्री शांतनु जी महाराज ने कहा  कि   चमत्कार को नमस्कार मत करिए. पुरुषार्थ पर विश्वास करिए। भगवान राम ने कर्म किया और चमत्कार पर कभी विश्वास नहीं किया। परमात्मा होकर भी गंगा पार  होने के लिए कोई जुगत नहीं लगाया। उन्होंने इस हेतु केवट की सहायता मांगी। कथा में  उन्होंने गुरु महिमा कुसंग  दहेज की बढ़ती बिभीषिका  जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से अपनी बात रखी। राम जानकी विवाह, राज तिलक, वनवास का वर्णन किया।मां जानकी की विदाई का वर्णन सुन श्रोताओं के नयन सजल हो उठे ।   मां- बेटी, पिता- पुत्री के भावपूर्ण अनन्य संबंधों को विस्तार पूर्वक बताते हुए पारिवारिक पसंस्कार पर प्रकाश डाला । उन्होंने वनवास काल के अनुसुइया आश्रम के प्रसंग को बताते हुए कहा कि सती अनुसुइया ने जानकी  से कहा था कि तुम पतिव्रता  स्त्रियों के लिए आदर्श हो क्योंकि पति का साथ तुमने सुख व दुख दोनों में साथ दिया है।करवा चौथ के दिन महिलाओं को संदेश देते हुए कहा कि घर में शांति बनी रहे इसके लिए पति की बात माने।  कथा का समापन भगवान राम के वनवास प्रसंग से हुआ।
व्यासपीठ पूजन  प्रो आर एन त्रिपाठी, प्रो  दीनानाथ सिंह,प्रो बी एन सिंह, प्रोफेसर बी बी तिवारी, डॉ एस के सिंह, कुलसचिव संजीव सिंह, डॉ बृजेंद्र सिंह, अपर महाधिवक्ता अजीत कुमार सिंह ,डॉ एस पी सिंह, डॉ विजय कुमार सिंह, बिना सिंह ,डॉ माया सिंह ,आरएसएस  इलाहाबाद  के नितिन जी ने किया। 
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राजाराम यादव ने कहा कि राम कथा विश्व विद्यालय के विद्यार्थियों में नैतिक और सांस्कृतिक संचार के  लिए आयोजित की गई थी।  विद्यार्थियों ने इसमें अपनी  सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित कर इस कार्यक्रम को पूर्ण रूपेण सफल बनाया है। डॉ  दिनेश कुमार सिंह ने पांच दिवसीय राम कथा कासार संक्षेपण किया।  राम कथा वाचक श्री शांतनु जी महाराज द्वारा श्री राम कथा समिति के सदस्यों को माल्यार्पण कर सम्मानित किया गया । रामकथा के संयोजक शतरुद्र प्रताप सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया।कार्यक्रम का संचालन मीडिया प्रभारी डॉ. मनोज मिश्र ने किया।
इस अवसर पर डॉ अजय प्रताप सिंह ,राकेश कुमार यादव ,डॉ राम नारायण ,डॉ दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ अमरेंद्र सिंह ,डॉ अवध बिहारी सिंह, डॉ सुनील कुमार,  डॉ के एस तोमर, डॉ  संजय श्रीवास्तव, एम एम भट्ट, राघवेंद्र सिंह, अमलदार यादव, अशोक सिंह, रजनीश सिंह,मोहन पांडेय ,अनिल श्रीवास्तव ,धीरज श्रीवास्तव  समेत तमाम लोग मौजूद रहे।
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Saturday, 7 October 2017

पीयू में राम कथा का चौथा दिन



विश्वविद्यालय के संगोष्ठी भवन में शनिवार  को पांच दिवसीय राम कथा के चौथे दिन प्रवचन में देश के प्रख्यात राम कथा वाचक श्री शांतनु जी महाराज ने कहा कि सांसारिकता में  मानव  अहंकार के वशीभूत हो जाता है।  जब व्यक्ति बड़े पद पर आसीन होता है तो  उसका व्यक्तित्व असहज हो जाता है।व्यक्ति को सदैव सरल और सहज होना चाहिए।मानव  असहज है जबकि ईश्वर सहज है।
उन्होंने आज की शिक्षा पद्धति पर भी विस्तार से बात की। कहा कि आज शिक्षा के साथ - साथ  संस्कारों की आवश्यकता  है। संस्कारों को स्थापित करने के लिए हर घर में मर्यादापुर्षोत्तम राम के आदर्शों  को स्थापित करने की जरुरत है. विद्या मंदिर को शिक्षा के साथ -साथ अपने विद्यार्थियों को संस्कार देना समय की आवश्यकता है। भारत की पहचान यहां की संस्कृति से है।यहां के संस्कार युगों- युगों से चले आ रहे है।
उन्होंने कहा कि भगवान का धरती पर आने का उद्देश्य दुष्टों का नाश, सज्जनों की रक्षा और धर्म की स्थापना करना रहा।हमारे युग पुरुष भगवान कृष्ण और श्री राम ने यहीं किया।बाल काल का भाव पूर्ण वर्णन करते हुए श्री राम के गुरुकुल पर प्रकाश डाला। 
  व्यास पीठ का पूजन इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के माननीय न्यायमूर्ति श्री दिनेश कुमार सिंह, कुलपति प्रो डॉ राजा राम यादव, वित्त अधिकारी एम के सिंह, प्रो बी बी तिवारी, संयोजक डॉ अजय प्रताप सिंह, समन्वयक  शतरुद्र प्रताप सिंह, डॉ दिग्विजय सिंह राठौर, आर के जैन, सम्पूर्णानन्द पांडेय, डॉ रचना त्रिपाठी, डॉ अनामिका मिश्रा  ने किया।मिहरावां पीजी कॉलेज के प्रबंधक राजीव कुमार सिंह, प्राचार्य डॉ सत्येंद्र प्रताप सिंह , प्रधानाचार्य प्रमोद कुमार सिंह ने  कथा वाचक शांतनु जी को अंगवस्त्रम भेंट कर सम्मानित किया।
राम कथा वाचक श्री शांतनु जी महाराज का  प्रो ए के श्रीवास्तव,  डॉ सुशील कुमार,डॉ अवध बिहारी सिंह,डॉ सुधांशु शेखर यादव, डॉ के एस  तोमर, आशुतोष सिंह, आनंद सिंह, श्याम त्रिपाठी, अशोक सिंह, रजनीश सिंह, अरुण सिंह, मोहन पांडेय,राम जस मिश्रा ने माल्यार्पण कर स्वागत किया। संचालन विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ मनोज मिश्र ने किया।
इस अवसर पर कुलसचिव संजीव कुमार सिंह, डॉ वीरेंद्र विक्रम यादव, राकेश यादव, डॉ सुनील कुमार, डॉ सुरजीत यादव, संजय श्रीवास्तव समेत ग्रामीण क्षेत्र के लोग मौजूद रहे.

Friday, 6 October 2017

राम कथा का तीसरा दिन



अपने घर को ही तीर्थ बनाएं
 
 विश्वविद्यालय  के संगोष्ठी भवन में शुक्रवार  को पांच दिवसीय राम कथा के तीसरे दिन प्रवचन में देश  के प्रख्यात राम कथा वाचक श्री शांतनु जी महाराज ने कहा कि तीर्थ अध्यात्म के वर्कशॉप होते है।जब जीवन मे कुछ अच्छा न लगे तो तीर्थ यात्रा पर जाना चाहिए। तीर्थों पर कभी स्थाई निवास नहीं बनाना चाहिए। अगर तीर्थ पर  नहीं जा सकते तो अपने घर पर ही भजन कीर्तन करके घर को ही तीर्थ बनाये। जिससे परमात्मा वही आ जाये। दर दर भटकने से ईश्वर नहीं मिलता है।
उन्होंने मनु महाराज के श्रेष्ठ दाम्पत्य जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि परिवार का वातावरण ठीक होगा तो संतान भी सदगुणी पैदा होते है।
मनु की तपस्या से प्रसन्न होकर ईश्वर प्रकट हुए तो मनु ने ईश्वर से उनके जैसा पुत्र मांगा ।प्रभु ने इस मांग को पूरा किया और कहा जब आप अयोध्या के नरेश होंगे तो मैं आपका पुत्र बन कर पैदा होऊंगा।

प्रवचन के पूर्व व्यास पीठ का पूजन  कुलपति प्रो डॉ  राजा राम यादव,वित्त अधिकारी एम के सिंह, डॉ के एस तोमर, पूर्व प्रचारक एवं राम कथा समिति के समन्वयक शतरुद्र प्रताप एवं गुलाबी देवी महाविद्यालय की एन एस एस की छात्राओं ने किया।
प्रो डी डी दुबे, प्रो बी बी तिवारी, डॉ आलोक सिंह,डॉ एस पी सिंह, डॉ बी डी शर्मा, डॉ ए के श्रीवास्तव, डॉ ज्ञान प्रकाश सिंह, डॉ दिनेश कुमार सिंह, डॉ सुशील कुमार, अमलदार यादव, रमेश पाल, ओम प्रकाश जायसवाल,सुशील प्रजापति, श्याम त्रिपाठी, सुमन सिंह, धर्मशीला गुप्ता, संजय श्रीवास्तव , ज्ञानेश पाराशरी, जगदम्बा मिश्र आदि ने कथा वाचक शांतनु जी महाराज का माल्यार्पण कर स्वागत किया। संचालन मीडिया प्रभारी डॉ मनोज मिश्र ने किया।

इस अवसर पर डॉ प्रवीण प्रकाश  ,डॉ अजय द्विवेदी, डॉ अजय  प्रताप सिंह, डॉ राम नारायण , डॉ दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ अवध बिहारी सिंह, डॉ सुनील कुमार, अशोक सिंह, रजनीश सिंह, राघवेंद्र सिंह, अरुण सिंह समेत आस पास के ग्रामीण सहित तमाम लोग उपस्थित रहे ।