कार्यशाला में नई दिल्ली की विज्ञान संचारक एवं डॉक्युमेंट्री फ़िल्म निर्माता पूनम चौरसिया ने प्रतिभागियों से कहा कि पत्रकारिता के विद्यार्थी विज्ञान संचार को केंद्रित कर अपना कॅरियर इस फील्ड में बना सकते है।फ़िल्म निर्माण में विज्ञान विषय पर लेखन बहुत रोचक होना चाहिए।
अध्यक्षीय सम्बोधन में कुलपति प्रो सुंदर लाल ने कहा कि तकनीकी ने विज्ञान विषयों पर फ़िल्म निर्माण की प्रक्रिया को सरल बना दिया है।आज विश्व के बहुत सारे निर्माता इंटरनेट और सामजिक मीडिया के जरिये विज्ञान फिल्मों को प्रदर्शित कर रहे है।मंचों की कमी न होना वैज्ञानिक सोच को लेकर निर्मित की जा रही फिल्मों के लिए वरदान साबित हुआ है।
विषय प्रवर्तन करते हुए विभाग के वरिष्ठ शिक्षक एवं विज्ञान संचारक डॉ मनोज मिश्र ने कहा कि आज के समय विज्ञान डॉक्युमेंट्री फिल्मों के माध्यम से आम आदमी तक बेहतर तरीके से संवाद स्थापित हो रहा है।स्वास्थ्य विषयक जागरूकता के लिए डॉक्युमेंट्री फिल्मों के योगदान को नकारा नहीं जा सकता।आस पास ही बहुत सारे ऐसे विषय है जिन पर वैज्ञानिक नजरिये से काम करने की जरूरत है।
इस अवसर पर डॉ अविनाश पर्थिडेकर, डॉ राम नारायण,डॉ प्रदीप कुमार ,डॉ वी ड़ी शर्मा,डॉ राजेश शर्मा,डॉ विवेक पाण्डेय,डॉ सुनील कुमार,डॉ आशुतोष सिंह,डॉ रुश्दा आज़मी,पंकज सिंह समेत प्रतिभागीगण मौजूद रहे।
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