सुरक्षित एप्लीकेशन विकास पर छह दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ
पीयू में 90 से अधिक छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों एवं संकाय सदस्यों ने किया प्रतिभाग
जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में सोमवार को कुलपति प्रो. आर. के. सिंह के मार्गदर्शन में सुरक्षित एप्लीकेशन विकास विषय पर छह दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। कार्यशाला में 90 से अधिक छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों एवं संकाय सदस्यों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।कार्यशाला के प्रथम दिन डॉ. अनूप गिरिधर ने प्रतिभागियों को सुरक्षित एप्लीकेशन विकास के मूलभूत सिद्धांतों से सरल, व्यावहारिक एवं प्रभावी ढंग से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि वर्तमान डिजिटल युग में एप्लीकेशन विकास केवल उपयोगी और आकर्षक सॉफ्टवेयर बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उपयोगकर्ता, डेटा, सर्वर तथा संपूर्ण डिजिटल प्रणाली को साइबर हमलों और अनधिकृत पहुंच से सुरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक है।
डॉ. गिरिधर ने वर्चुअल मशीन (Virtual Machine) के माध्यम से सुरक्षित वातावरण में एप्लीकेशन विकसित करने की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि किसी भी एप्लीकेशन की संरचना तैयार करते समय सुरक्षा को प्रारंभिक स्तर से ही शामिल किया जाना चाहिए। यदि सुरक्षा को विकास प्रक्रिया के अंतिम चरण में जोड़ा जाता है, तो कमजोरियों और साइबर जोखिमों की संभावना बढ़ जाती है।
उन्होंने उपयोगकर्ता की पहचान की समुचित जांच, भूमिका आधारित अधिकार निर्धारण तथा सुरक्षित प्रमाणीकरण व्यवस्था के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि एप्लीकेशन में उपयोगकर्ता द्वारा दिए गए इनपुट की जांच और शुद्धिकरण आवश्यक है, ताकि एसक्यूएल इंजेक्शन, क्रॉस-साइट स्क्रिप्टिंग तथा अन्य सामान्य साइबर कमजोरियों से बचाव किया जा सके।
विशेषज्ञ ने संवेदनशील डेटा की सुरक्षा के लिए कूटलेखन, सुरक्षित संचार माध्यमों के उपयोग तथा डेटाबेस में केवल आवश्यक अधिकार प्रदान करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि किसी तकनीकी त्रुटि की स्थिति में उपयोगकर्ता को संवेदनशील तकनीकी जानकारी प्रदर्शित नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि ऐसी जानकारी का दुरुपयोग साइबर अपराधी कर सकते हैं।
डॉ. गिरिधर ने प्रतिभागियों को बाहरी पुस्तकालयों और सॉफ्टवेयर घटकों को नियमित रूप से अद्यतन रखने, कोड की सुरक्षा जांच करने तथा विकास, परीक्षण और परिनियोजन की संपूर्ण प्रक्रिया में सुरक्षा मानकों को शामिल करने की सलाह दी। उन्होंने गतिविधियों की निगरानी, सुरक्षा घटनाओं का अभिलेखन, नियमित सुरक्षा अद्यतन और समय-समय पर परीक्षण को सुरक्षित डिजिटल वातावरण के लिए आवश्यक बताया।
कार्यक्रम का शुभारंभ इंजीनियरिंग संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो. सौरभ पाल एवं कंप्यूटर साइंस विभागाध्यक्ष डॉ. विक्रांत भटेजा द्वारा डॉ. अनुप गिरिधर का स्वागत एवं अभिनंदन कर किया गया। कार्यशाला में उपस्थित छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों एवं संकाय सदस्यों ने डॉ. अनुप गिरिधर के सत्र को अत्यंत ज्ञानवर्धक, समसामयिक और प्रेरणादायक बताया। प्रतिभागियों ने कहा कि कार्यशाला से उन्हें साइबर सुरक्षा के व्यावहारिक पहलुओं तथा सुरक्षित एप्लीकेशन निर्माण की प्रक्रिया को समझने में विशेष सहायता मिली।
छह दिवसीय कार्यशाला के आगामी सत्रों में साइबर सुरक्षा, सुरक्षित कोडिंग, डेटा संरक्षण, एप्लीकेशन परीक्षण तथा डिजिटल सुरक्षा से संबंधित विभिन्न तकनीकी विषयों पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा।

