बतौर विशिष्ट अतिथि डॉ शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय लखनऊ के कुलपति प्रो राणा कृष्णपाल सिंह ने कहा कि प्राचीन काल में गुरुकल शिक्षण संस्थान शिक्षा की स्वायत्तता का पूर्ण स्वरुप था। जहाँ शिक्षा का रूप सामानांतर था और कोई भेदभाव नहीं था। उन्होंने कहा कि प्राइवेट शिक्षण संस्थानों में बढ़ते शिक्षण शुल्क पर सरकार का अंकुश होना चाहिये जिससे गरीब तबके के छात्रों को आसानी से शिक्षा मिल सके।
इसी क्रम में संगोष्ठी में विशिष्ट अतिथिमहात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय चित्रकूट के कुलपति प्रो नरेश चन्द्र गौतम ने कहा कि शिक्षा के साथ दृष्टिकोण होना अतिआवश्यक है क्यों कि एक शिक्षा तभी रूप ले सकती है जब वह सही दृष्टिकोण से रूपांतरित की गई हो।उन्होंने कहा कि देश की नींव की गुणवत्ता को विश्वविद्यालयीय शिक्षा से जोड़कर सुधारा जा सकता है। जिन विद्वानों के पास ज्ञान, योग्यता और कर्मठता है और विश्वविद्यालय तक नहीं पहुंच पाते उसके लिए विश्वविद्यालय को स्वायत्तता दी जानी चाहिए।
स्वागत डॉ राजकुमार एवं धन्यवाद ज्ञापन आयोजन सचिव डॉ गिरिधर मिश्र ने किया। कार्यक्रम का संचालन जनसंचार विभाग के अध्यक्ष डॉ मनोज मिश्र ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत में अतिथियों को कुलपति ने अंगवस्त्रम एवं स्मृति चिन्ह प्रदान किया।संगोष्ठी के पूर्व मुख्य अतिथि एवं अन्य अतिथियों ने राजेंद्र सिंह रज्जू भईया भौतिक विज्ञान अध्ययन एवं शोध संस्थान में रज्जू भईया जीवन यात्रा पट्ट का अनावरण किया गया.
इस अवसर पर विधायक डॉ हरेंद्र प्रताप सिंह, पूर्व विधायक सुरेंद्र प्रताप सिंह, कुलसचिव सुजीत कुमार जायसवाल, वित्त अधिकारी एमके सिंह,परीक्षा नियंत्रक वी एन सिंह , कार्यक्रम अध्यक्ष प्रोफेसर बीबी तिवारी,डॉ राजीव प्रकाश सिंह, डॉ समर बहादुर सिंह, डॉ विजय सिंह, प्रोफेसर अजय द्विवेदी, प्रोफेसर अजय प्रताप सिंह, प्रोफ़ेसर बीडी शर्मा, प्रोफेसर मानस पांडे, प्रोफेसर वंदना राय, प्रोफेसर राम नारायण, डॉ प्रमोद यादव, डॉ दिग्विजय सिंह राठौर,डॉ अलोक सिंह, राकेश यादव, डॉ विजय तिवारी, रमेश यादव, डॉ अनुराग मिश्र समेत तमाम लोग मौजूद रहे।
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