Tuesday, 25 September 2018
पीयू में दीनदयाल उपाध्याय की जयंती मनाई गई
संकाय भवन के कांफ्रेंस हॉल में गोष्ठी का आयोजन किया गया। दीनदयाल उपाध्याय शोध पीठ के अध्यक्ष प्रोफेसर मानस पांडे ने कहा की राष्ट्र को पंडित जी ने जीव के रूप में माना था। उनका मानना था कि राष्ट्र भी शरीर, मन, आत्मा और बुद्धि से ही चलता है। इसका समन्वय ही मानव एकात्मवाद कहलाता है। देश के विकास में पूंजीवाद और साम्यवाद की अवधारणा से हटकर पंडित दीनदयाल जी का दर्शन ही उपयुक्त है वंचितों को भी मुख्यधारा से जोड़ता है। मानव संसाधन विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर अविनाश पाथर्डीकर ने कहा कि सतत विकास की अवधारणा ही मानव एकात्मवाद का मूल मंत्र है। गोष्ठी संचालन प्रोफेसर अजय द्विवेदी ने किया। इस अवसर पर प्रोफेसर बीडी शर्मा, डॉ मनोज मिश्र, डॉ सुरजीत यादव, , डॉ दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ आशुतोष सिंह, डॉ अवध बिहारी सिंह, डॉ सुनील कुमार, डॉ मनोज पांडे नितिन चौहान समेत विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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