
प्रोफेसर अजय सिंह ने कहा कि आज नित-रोज बदलते और विकसित होते तकनीकि और विज्ञान के युग में यह संभव नहीं है कि हम जिस संस्था से करिअर प्रारंभ करें उसी संस्था में अंत तक टिके रहें आज तो व्यक्ति अपनी क्षमता खुद ही तय करता है और उसी के अनुरूप संस्थान व जिम्मेदारियों को बदलते रहतें हैं जो व्यक्ति अपने करिअर का समुचित प्रबंधन नहीं कर पाएगा उसको जीवन में अवसाद व कष्ट के दौर से गुजरना पड़ सकता है।
प्रबंध गुरु ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि व्यक्ति को ही नहीं बल्कि संस्थानों को भी अपने कर्मियों का समुचित करिअर प्रबंधन करना आज की आवश्यकता है अन्यथा उस संस्थान में कार्यरत कर्मियों की कार्यक्षमता व मनोबल पर उसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और संस्थान छोड़्कर जाने वाले योग्य-अनुभवी कर्मियों की संख्या बड़ने से संस्थान को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। प्रोफेसर सिंह ने करिअर प्रबंधन से संबंधित कई रोचक उदाहरण, प्रसंग तथा छोटी-छोटी फिल्मों को दृश्य-श्रव्य साधन के माध्यम से छात्रों के समक्ष प्रभावी एवं मनो-विनोद के साथ प्रस्तुत किया और उत्साही छात्रों के कई सवालों के जवाब भी उदाहरण के साथ स्पष्ट किए ।
कार्यक्रम के आरंभ में विभागाध्यक्ष डॉ. अविनाश पाथर्डीकर ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विभाग के कार्यक्रमों की संक्षिप्त रूप-रेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि एच.आर.डी. विभाग का उद्देश्य कुशल मानव संसाधन विकसित करना है और इसी दिशा में यह कार्यशाला अति महत्वपूर्ण कड़ी है। कार्यशाला की अध्यक्षता प्रबंध संकायाध्यक्ष डॉ. एच.सी. पुरोहित ने की और कहा कि प्रबंध संकाय में व्यक्तित्व विकास के कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित होते रहेंगे। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रशिकेश ने किया। संचालन श्री अभिनव व अनुपम ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए।
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