अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. पीयूष रंजन अग्रवाल ने कहा कि आज समाज तीव्र गति से परिवर्तन की ओर उन्मुख है। उन्होंने ग्रामीण समाज का जिक्र करते हुए कहा कि आज लोग अपनी परम्परा व संस्कृति को भूलते जा रहे है। संयुक्त परिवार की परिकल्पना अब सिमट रही है। ऐसे में हम शिक्षकों की जिम्मेदारी बहुत बढ़ जाती है। हम गुरूजनों को भविष्य के सुखमय समाज की नींव डालने के लिए तत्पर होना होगा। आज इस देश की ताकत लोकतंत्र और सूचना प्रौद्योगिकी ने समाज को बहुत गहरे हद तक प्रभावित किया है। हर नागरिक आज मुख्य धारा में रहना चाहता है। अध्यापक और शिष्य दोनों को बराबर से शिक्षित होने का अवसर मिला है। युवाओं में कुछ कर दिखाने की ललक बढ़ी है। हम समाज और देश को क्या और बेहतर दे सकते है, इस दिशा में हमें सोचना होगा। उन्होंने अवकाश प्राप्त कर रहे शिक्षकों से कहा कि हम आशावान है कि आप अपने ज्ञान और शोध से समाज के मूल चरित्र को बरकरार रखेंगे। आप समाज और देश को अपने अनुभव और असीम ज्ञान से अभिसिंचित कर सकते है।
Tuesday, 8 September 2015
शिक्षक सम्मान समारोह
अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. पीयूष रंजन अग्रवाल ने कहा कि आज समाज तीव्र गति से परिवर्तन की ओर उन्मुख है। उन्होंने ग्रामीण समाज का जिक्र करते हुए कहा कि आज लोग अपनी परम्परा व संस्कृति को भूलते जा रहे है। संयुक्त परिवार की परिकल्पना अब सिमट रही है। ऐसे में हम शिक्षकों की जिम्मेदारी बहुत बढ़ जाती है। हम गुरूजनों को भविष्य के सुखमय समाज की नींव डालने के लिए तत्पर होना होगा। आज इस देश की ताकत लोकतंत्र और सूचना प्रौद्योगिकी ने समाज को बहुत गहरे हद तक प्रभावित किया है। हर नागरिक आज मुख्य धारा में रहना चाहता है। अध्यापक और शिष्य दोनों को बराबर से शिक्षित होने का अवसर मिला है। युवाओं में कुछ कर दिखाने की ललक बढ़ी है। हम समाज और देश को क्या और बेहतर दे सकते है, इस दिशा में हमें सोचना होगा। उन्होंने अवकाश प्राप्त कर रहे शिक्षकों से कहा कि हम आशावान है कि आप अपने ज्ञान और शोध से समाज के मूल चरित्र को बरकरार रखेंगे। आप समाज और देश को अपने अनुभव और असीम ज्ञान से अभिसिंचित कर सकते है।
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